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Naya jaal

चौहान विला,

आदर्श का कमरा,

आदर्श अभी-अभी ध्वनि के आगे आकर खड़ा हुआ था और उसने अपना हाथ ध्वनि के आगे रख दिया था, ताकि वो वार्डरोब के अंदर ना जा सके। उसे अभी-अभी ध्वनि का यूं व्यंग्य से हंसना जैसे पसंद नहीं आया था। वो अब गहरी आवाज में बोला, "तुम्हारे हंसने की वजह बताओ।" उसकी बात सुनकर ध्वनि ने कुछ देर उसके चेहरे की तरफ देखा, जैसे कुछ पढ़ना चाह रही हो। वही आदर्श भी उसे ही देख रहा था। दोनों की नजरे आपस में मिली हुई थी।

कुछ देर एक दूसरे की आंखों में देखते रहने के बाद ध्वनि ने गहरी सांस ली और बोली, "रहने दीजिए, आप में इतनी हिम्मत नहीं है कि आप अपनी सच्चाई सुन सके।" जैसे ही ध्वनि ने ये बात कही, एक पल के लिए आदर्श के हाथों की मुट्ठियां कस गई। वो अब अपनी पकड़ वार्डरोब के दरवाजे पर कसते हुए बोला, "अगर मैं कहूं कि मैं सुनना चाहता हूं, तो क्या तुम बताओगी।"

तभी ध्वनि उसकी आंखों में देखते हुए बोली, "यही कि मत कीजिए परवाह करने का नाटक, जानती हूं कि आपको मेरे जीने मरने से कोई नहीं फर्क पड़ता। क्योंकि अगर आपको फर्क पड़ता.....।" इतना कहकर वो चुप हो गई। लेकिन उसकी आंखों में आई हुई नमी बहुत कुछ बयां कर रही थी, जो कि आदर्श भी उसकी आंखों में देख सकता था। वो चुपचाप उसकी आंखों में देख रहा था। उसका चेहरा पूरी तरह से एक्सप्रेशन लेस था। कोई भाव नहीं, कोई दर्द नहीं, कोई तकलीफ नहीं। तभी ध्वनि अपनी आंखों में आए हुए आंसुओं को साफ करते हुए बोली, "अगर आपको फर्क पड़ता ना, तो आंसू की एक बूंद भी मेरी आंखों से गिरते नहीं देख पाते आप। लेकिन आपको इन चीजों से कोई लेना-देना नहीं है। आपको तो सिर्फ ये फर्क पड़ता है कि

कि मेरी pussy में आपका पेनिस जाएगा कैसे, कितनी टाइटनेस है, आगे से डालो या पीछे से।" उसकी बात सुनकर आदर्श का गुस्सा बढ़ने लगा। अब तो जैसे उसकी हद ही खत्म हो गई, जैसे ही उसने ध्वनि के अगले लफ्ज सुने। ध्वनि भी आगे अपनी बात बढ़ाते हुए बोली, "तभी तो हमेशा मेरी फाड़ने पर तुले रहते हैं। आपको बहुत मजा आता है rape करने में। हमेशा जबरदस्ती ही तो की है आपने, शुरू से लेकर अब तक। इसमें चाहे मेरी मर्जी हो या ना हो।" जैसे ही ध्वनि ने ये बात कही, आदर्श ने उसके बालों को मुट्ठी में भरा, जिससे ध्वनि का चेहरा दर्द से तड़प उठा। उसे अपने बालों में बहुत ज्यादा दर्द महसूस हो रहा था, क्योंकि आदर्श ने बहुत कसकर उसके बालों को पकड़ा था। अब आदर्श लगभग से चिल्लाते हुए बोला, "हां नहीं पड़ता फर्क और रही बात फाड़ने की, वो तुम्हें हमेशा फाडूंगा।

और तुम मुझे रोक नहीं सकती।" उसकी बात सुनकर ध्वनि को अपने दिल में एक अलग ही टीस उठते हुए महसूस हो रही थी। एक बार फिर से उसकी आंखों में नमी उतर आई थी। अभी कुछ देर पहले कहीं ना कहीं उसके दिल में उम्मीद जागी थी कि शायद आदर्श को भी उससे प्यार होने लगा है। लेकिन अब वो उम्मीद चकनाचूर होती हुई नजर आ रही थी। ऊपर से आदर्श ने उसके बालों को इतनी कसकर पकड़ा था कि उसे हद से ज्यादा दर्द हो रहा था। लेकिन अब वो अपने होठों को अंदर की तरफ दबाते हुए उस दर्द को दबाने की कोशिश करने लगी। वही आदर्श अब उसे दीवार के साथ लगाते हुए उसके चेहरे पर झुका और बोला, "इस जिस्म पर हमेशा मेरा हक रहेगा, समझी ना तुम। इसे कैसे यूज करना है, कैसे नहीं, ये मुझ पर है और तुम मुझे कभी रोक नहीं पाओगी।"

इस वक्त ध्वनि ने अपने बदन पर टॉवल लपेट रखा था। इस वक्त उसकी सांसे बेहद गहरी चल रही थी, क्योंकि आदर्श उसके बेहद पास खड़ा था। जिस वजह से उसकी बॉडी हल्की-हल्की शिवर भी कर रही थी। उसकी सांसों को गहरा चलता हुआ देखकर एक पल के लिए आदर्श की नजरे उस पर और भी ज्यादा गहरी हो चुकी थी। लेकिन उसे अपने दिल में एक अलग सी तकलीफ भी उठ रही थी। क्योंकि जिस तरह से आदर्श ने अभी-अभी उसे ये बात कही थी कि वो जिस तरह से मर्जी यूज कर सकता है। उसे ऐसा लग रहा था, जैसे कि वो एक चीज हो आदर्श के लिए। जबकि आदर्श भी अब बदलने लगा था। बहुत सी बातें थी, जो आदर्श में चेंज होने लगी थी, जो कि आदर्श को खुद को भी पता नहीं चला था।

फिलहाल के लिए वो ध्वनि की आंखों में देख रहा था, जहां पर हल्की सी नमी छाई हुई थी। अब ध्वनि उसके सीने पर हाथ रखते हुए बोली, "जानती हूं, सिर्फ जिस्म से ही आपको मतलब है। इसलिए बोल रही हूं, मुझसे ज्यादा सवाल जवाब मत कीजिएगा। आप अपना आपा खो बैठेंगे। तो प्लीज, फिलहाल के लिए मुझे तैयार होकर नीचे जाने दीजिए। नहीं तो आपकी मॉम मुझे छोड़ेंगे नहीं।" उसकी बात सुनकर आदर्श ने कुछ देर उसकी तरफ देखते हुए अपना हाथ नीचे की तरफ किया।

फिर वहां से चला गया। लेकिन इस वक्त आदर्श के दिमाग में बहुत कुछ चल रहा था।

वहीं दूसरी तरफ,

हाल में मालिनी जी इधर-उधर चक्कर लगा रही थी। उन्हें आदर्श और ध्वनि का इंतजार था कि वो कब नीचे आएंगे। इस वक्त उन्होंने खाना टेबल पर परोस दिया था। उनके चेहरे से देखकर ऐसा साफ पता चल रहा था कि कुछ ना कुछ तो उनके दिमाग में जरूर चल रहा था। लेकिन क्या, ये तो अब वक्त ही बताने वाला था। इस वक्त वो ध्वनि और आदर्श का नीचे वेट कर रही थी। तभी उनका इंतजार खत्म करते हुए ध्वनि सीढ़ियों से उतरते हुए नीचे आई। लेकिन अभी तक आदर्श उसके साथ नहीं था।

ये चीज देखकर मालिनी जी की आंखों में एक अलग ही चमक आ गई। वो अब जल्दी से ध्वनि के पास आई और ध्वनि का हाथ कसकर पकड़ते हुए बोली, "चलो बहू, मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।" जैसे ही मालिनी जी ने ध्वनि को बहू कहा, एक पल के लिए ध्वनि के दिल की धड़कन स्किप हो गई। वो हैरानी से सामने खड़ी मालिनी जी की तरफ देख रही थी। जिन्होंने इस वक्त ध्वनि का हाथ पकड़ा हुआ था और उसे लगभग से खींच रही थी। ध्वनि अब उनकी तरफ देखते हुए बोली, "आंटी, मेरी बात....।" अभी वो बोल ही रही थी कि तभी मालिनी जी उसकी बात बीच में काटते हुए बोली, "अरे बेटा, मुझे आंटी मत कहो। मुझे अपनी मां समझो। जब तुम मेरी बहू हुई, तो मैं तुम्हारी मॉम नहीं हुई। अब मुझे तुम मॉम कह कर बुलाओगी।" उसकी बात सुनकर एक पल के लिए ध्वनि मालिनी जी की तरफ देखते ही रह गई।

मालिनी जी अब उसे लेकर डाइनिंग टेबल पर आई। फिर लगभग उसे डाइनिंग टेबल पर बिठाते हुए बोली, "बैठो ना बेटा, खाना खाओ।" मालिनी जी का उसे यूं प्यार से बोलना, उसे बहुत अजीब लग रहा था। वही मालिनी जी की नजरे बार-बार दरवाजे पर जा रही थी। जैसे वो किसी खास इंसान का इंतजार कर रही हो।

वही ध्वनि इस वक्त टेबल पर बैठ चुकी थी। वो भी हैरानी से मालिनी जी की तरफ ही देख रही थी। उसे मालिनी जी का बदला हुआ बर्ताव समझ में नहीं आ रहा था। अभी वो सोच ही रही थी कि तभी दरवाजे से किसी के कदमों की आवाज उन दोनों के कानों में पड़ी। अगले ही पल,मालिनी जी के चेहरे पर इविल स्माइल उतर आई।

वो अब गहरी आवाज में बोली, "तो मेरा इंतजार खत्म हुआ।" अगले ही पल उन्होंने पलट कर देखा, तो एक लड़का, जो कि दरवाजे पर खड़ा था, उसे लड़के को देखकर मालिनी जी की डेविल स्माइल और भी लंबी हो गई। वही ध्वनि भी उस लड़के को सवालिया नजरों से देख रही थी। मालिनी जी अब गहरी आवाज में बोली, "रोहन तुम आ गए।" वही जो लड़का दरवाजे पर खड़ा था, उसकी गहरी नजर अब ध्वनि पर थी। उसने मालिनी जी की तरफ तो देखा ही नहीं। एक पल के लिए जैसे वो ध्वनि को देखकर सब कुछ ही भूल गया था। वो लड़का दिखने में काफी ज्यादा हैंडसम था। उसकी वो grey eyes ध्वनि पर ठहर चुकी थी। वही ध्वनि तो बस उस लड़के को देखे जा रही थी। उसे तो कुछ पता ही नहीं था कि वो लड़का कौन था। लेकिन अगले ही पल उस लड़के के चेहरे पर इविल स्माइल उतर आई, जब एक चिल्लाती हुई आवाज वहां पर गूंजी।

ये आवाज आदर्श की थी। आदर्श चिल्लाते हुए बोला, "मॉम, ये यहां पर क्या कर रहा है और इसकी हिम्मत कैसे हुई यहां पर आने की?" इस बात को सुनते ही रोहन के चेहरे पर डेविल स्माइल आ गई।

To be continue....

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