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बेचैनिया

चौहान विला,

आदर्श इस वक्त ध्वनि के होठों को चूम रहा था। उन दोनों पर शॉवर का पानी गिर रहा था। आदर्श जिस तरह से उसके होठों को चूम रहा था, वो बेहद पैशनेट था। साथ ही साथ अब उसके हाथ ध्वनि के बदन पर घूमने लगे थे। तकरीबन 5 10 मिनट तक ध्वनि को चूमने के बाद आदर्श ने अपना चेहरा पीछे की तरफ किया। वो ध्वनि की आंखों में देखते हुए बोला, "अगर दोबारा ऐसी बात की ना, आई स्वीयर, दोबारा ऐसी बात करने के लायक नहीं छोडूंगा।" उसकी बात सुनकर एक पल के लिए ध्वनि की आंखों में आंसू उतर आए। वो रोते हुए बोली, "अगर मैं मर भी जाऊं, आपको कौन सा फर्क पड़ता है।"

उसकी बात सुनकर आदर्श का चेहरा और भी सख्त होने लगा था। उसने अब उसके बालों को और भी कसकर मुट्ठी में भरा और एक्सप्रेशन लेस होकर बोला, "अपने शब्द अपने तक सीमित रखो, नहीं तो मैं तुम्हारा मुंह तोड़ दूंगा।" उसकी बात पर ध्वनि व्यंग्य से हंसी और बोली, "इसमें गलत क्या है मिस्टर चौहान, सही तो कहा है। आपको कहां कुछ फर्क पड़ता है, चाहे मैं.....।" इससे आगे वो कुछ बोलती कि तभी जोरदार थप्पड़ की आवाज उस बाथरूम में गूंज गई। ये थप्पड़ आदर्श ने ध्वनि के गाल पर जड़ा था।

आदर्श ने जिस तरह से उसे थप्पड़ मारा था, ध्वनि का चेहरा दूसरी तरफ लुढ़क गया था। अगले ही पल, वो दर्द भरा मुस्कुराई और बोली, "बस यही तो करना आता है आपको, कितना चुप कराएंगे, अब आप ये बताइए। अगर इतना ही चुप करना चाहते हैं, तो गला क्यों नहीं घोंट देते मेरा, एक ही बार में सारा किस्सा खत्म। ना कुछ बोलूंगी, ना आपको तंग करूंगी।" उसकी बात पर अब आदर्श लगभग से अपना आपा खोते हुए चिल्ला कर बोला, "जस्ट शट अप! अब तुमने एक सिंगल वर्ड भी कहा ना, आई स्वीयर, मै तुम्हारी वो हालत करुंगा कि 2 दिन तक bed से उठ नहीं पाओगी तुम।" तभी ध्वनि भी उसकी बात बीच में काटते हुए बोली, "अब तो आदत हो गई है आपकी इन बातों की और तानों की। जो मर्जी कर लीजिए, लेकिन आज मेरे सवाल नहीं रुकने वाले।

क्यों आपने मिस्टर कपूर को मारा, मुझे यह बात बताइए? और आपको क्या फर्क पड़ता है कि वो मेरे साथ क्या कर रहा था क्या नहीं। और उस दिन आपने प्रतीक के सामने वो सब क्यों कहा था कि मैं आपकी वाइफ हूं। आपको क्या ही फर्क पड़ता है कि मैं आपकी वाइफ हूं या नहीं हूं। आप चाहे तो अभी मुझे तलाक दे दें। मैं यहां से जा सकती हूं और आपकी मोम भी मुझे पसंद नहीं करती है। तो क्यों मेरे पीछे पड़े हैं आप, छोड़ दीजिए मिस्टर चौहान, मेरा पीछा छोड़ दीजिए।"

तभी आदर्श उसकी आंखों में देखते हुए बोला, "मेरी छोड़ो अपनी बताओ, क्यों मेरी बाहों में पिघलने लगी हो। एक टाइम पर मुझसे नफरत करती थी, तुम्हारी आंखों में दिखाई देता है कि अब तुम मुझसे नफरत नहीं करती।" आदर्श की बात सुनकर ध्वनि की आंखें हैरत से फैल गई। उसे नहीं पता था कि आदर्श उसे इस हद तक नोटिस कर रहा था। वो अपनी लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली, "ऐसा कुछ भी नहीं है। मैं आज भी आपसे नफरत करती हूं।" इतना कहते हुए उसने अपना चेहरा दूसरी तरफ घूमा लिया। इस वक्त वो पूरी तरह से naked थी। जैसे ही उसने आदर्श की तरफ पीठ की, आदर्श की नजर उसकी पीठ पर लगे हुए नाखूनों पर गई, जो कि मिस्टर कपूर के थे। वो चीज देखकर आदर्श के हाथों की मुट्ठियां कस गई।

ध्वनि की ऐसी हालत देखकर आदर्श को अपनी मॉम पर हद से ज्यादा गुस्सा आ रहा था। अब वो उसके पास आकर उसके कान के पास झुक कर अपनी गर्म सांस छोड़ते हुए बोला, "जितनी नफरत करनी है, करो। लेकिन मैं तुम्हें छोड़ने वाला बिल्कुल भी नहीं हूं। ये बात हमेशा याद रखना। तुम मेरे चुंगल से कभी नहीं छूट पाओगी, बिकॉज़...।"

इतना कहकर आदर्श चुप हो गया। इसके आगे वो कुछ नहीं बोला। वहीं ध्वनि ने जब ये बात सुनी, तो उसकी आंखें बड़ी हो गई। अब वो पलट कर आदर्श की आंखों में देखने लगी। आदर्श भी उसकी आंखों में देख रहा था। दोनों इतने करीब थे कि दोनों की नाक आपस में टच हो रही थी और सांस भी एक दूसरे को आपस में महसूस हो रही थी। ध्वनि का दिल जोरो जोरो से धड़कने लगा था। उसकी धड़कनों की आवाज आदर्श भी साफ़ सुन सकता था। लेकिन वो चुपचाप उसकी आंखों में देख रहा था। कुछ देर खामोश रहने के बाद आदर्श बाहर की तरफ जाने को हुआ कि तभी ध्वनि उसका हाथ पकड़ते हुए बोली, "अपनी बात तो पूरी करके जाइए, मिस्टर चौहान, ऐसे बीच में अधूरी बात को छोड़ना किसी और की बेचैनी भी बन सकता है।"

उसकी बात सुनकर आदर्श, जोकि जाने के लिए पलटा ही था, उसके होठों के कोने मुड़ गए। अब वो उसकी तरफ देखते हुए बोला, "बेचैन करना ही तो मेरी फितरत है और उसे बेचैनी को मैं तुम्हारी क्यों ठंडा करूं। जितना तड़पना है, तड़पो, मैं सिर्फ तुम्हें तड़पाने के लिए हूं।" इतना कहते हुए आदर्श की नजरे उस पर बेहद गहरी थी। वही ध्वनि अब खामोश हो गई। आदर्श ने अब उसका हाथ छुड़ाया और बाहर की तरफ आ गया। इस वक्त आदर्श की सांस गहरी चल रही थी। देखते ही देखते वो वार्डरोब में आया और अगले ही पल, वार्डरोब का दरवाजा बंद करके दरवाजे के साथ लगकर खड़ा हो गया। अब उसके जबड़े और भी ज्यादा कस गए थे। उसे खुद पर गुस्सा आ रहा था कि वो ध्वनि के साथ क्या बात कर रहा था। इतना कहते हुए उसने अपने दिल पर हाथ रखा, जो अभी भी तेज धड़क रहा था। आज पहली बार उसे इस तरह के जज्बात महसूस हुए थे या कह सकते हैं कि पहले भी महसूस हुए थे, लेकिन उसने उन जज्बातों को कभी समझने की कोशिश ही नहीं की।

पर अब उसे ध्वनि के जैसे रोने से, कुछ कहने से फर्क पड़ने लगा था। ये बात वो रेजिस्ट नहीं कर सकता था।

वहीं दूसरी तरफ,

मालिनी जी का कैमरा,

मालिनी जी इस वक्त अपने कमरे में बैठी हुई किसी से फोन पर बात कर रही थी। ये कोई और नहीं, मालिनी जी की बेटी रुबीना थी। रुबीना से बात करते हुए मालिनी दांत पीसकर बोली, "वो कुत्तिया फिर से आ चुकी है और अब क्या करना है, ये तुम ही डिसाइड करोगी, क्योंकि मैं उसे अब घर से बाहर नहीं निकाल सकती। आदर्श उसके फेवर में खड़ा है। उस बेवकूफ को इतना नहीं समझ आ रहा है कि इस लड़की ने उसे मारने की कोशिश की है। अगर हम उसे ना बचाते, तो आज वो दुनिया में जिंदा ना होता।"

इतना कहते हुए मालिनी जी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंचा हुआ था। तभी रुबीना, जो कि इस वक्त ब्लैक कलर की ड्रेस में बार में बैठी हुई थी, वो इस वक्त कनाडा में थी और बार में एंजॉय करने आई हुई थी। अपनी मॉम की बात सुनकर रुबीना के चेहरे पर अजीब से एक्सप्रेशन आ चुके थे। वो अब चिल्लाते हुए बोली, "ना मॉम! आप जानती है ना, मुझे वो लड़की फूटी आंख नहीं भाती। आपने उसे घर में घुसने कैसे दिया?" तभी मालिनी जी आगे से जवाब देते हुए बोली, "मैंने घुसने नहीं दिया, तुम्हारा भाई उसे लेकर आया है। अब मैं उसे घर से कैसे बाहर निकालू, मुझे खुद ही समझ में नहीं आ रहा। कुछ भी करो रुबीना, तुम घर पर आओ।" इतना कहते हुए मालिनी जी ने फोन काट दिया। ये चीज देखकर रुबीना ने अपने हाथ फोन पर कसती है। अगले ही पल, वो फोन जमीन पर दे मारा। इस वक्त रुबीना गुस्से से कांप रही थी। वो अब दांत पीसते हुए बोली, "ना,

अब मैं दोबारा उस लड़की के सिम्टम्स भाई के अंदर नहीं झेल सकती। पहले तो वो लड़की घर में रहने नहीं आई थी, तब भी भाई उसके लिए सनकी से कम नहीं थे। लेकिन अब तो हद हो गई, भाई उसे घर तक ले आए। अब मुझे घर जाना होगा।" इतना कहते हुए वो अपनी जगह से उठी। उसने अपना फोन, जो अभी-अभी जमीन पर पटका था, लेकिन उस फोन को अभी तक कुछ नहीं हुआ था। उसने उस फोन को उठाया और दोबारा से किसी को कॉल करने लगी। वहीं दूसरी तरफ मालिनी जी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंचा हुआ था।

वो जानती थी कि मिस्टर कपूर का किया हुआ अब उस पर भारी पड़ेगा। भले ही उसने कुछ नहीं करवाया था। वो बस चाहती थी कि ध्वनि मेड बनकर काम करें। लेकिन ये चीज भी अब उस पर हद से ज्यादा भारी पड़ने वाली थी। अब देखना ये था कि आदर्श का गुस्सा किस तरह से मालिनी जी के ऊपर निकलने वाला था। इस वक्त मालिनी जी के चेहरे पर पसीने की बूंदे छाई हुई थी। वो किसी तरह से उसके गुस्से से बचना चाहती थी। इसीलिए कुछ सोचते हुए उनके चेहरे पर बड़ी सी मुस्कुराहट आ गई। वो बाहर की तरफ आई और उस मेड की तरफ देखते हुए बोली, "आज किसी ने खाना नहीं खाया है, तो खाना टेबल पर लगाओ और सबको बुलाओ खाना खाने के लिए।" उसकी बात पर मेड ने हां में सिर हिला दिया।

वहीं दूसरी तरफ ध्वनि इस वक्त बाथरूम में थी। अब वो 15- 20 मिनट में शॉवर लेकर बाहर की तरफ आई। इस वक्त उसने बाथरॉब पहना हुआ था। दूसरी तरफ आदर्श, जिसने कपड़े चेंज कर लिए थे, वो अब सामने सोफे पर बैठा सिगरेट पी रहा था। लेकिन जैसे ही ध्वनि बाथरूम से बाहर आई, उसकी नज़रें ध्वनि पर गई।

ध्वनि को देखकर एक बार फिर से उसका चेहरा एक्सप्रेशन लेस हो गया। ये चीज देखकर एक पल के लिए ध्वनि को अपने दिल में तकलीफ हुई। लेकिन अगले ही पल, वो व्यंग्य से हंसी और वार्डरोब की तरफ बढ़ गई। उसका व्यंग्य से हंसना आदर्श की नजरों में भी आ गया था। अब वो अपनी जगह से खड़ा हुआ और देखते-देखते उसके पास आया। जब वो वार्डरोब के अंदर जाने को हुई, उसके आगे हाथ रख कर बोला, "तुम्हारे हंसने की वजह?"

उसकी बात पर ध्वनि व्यंग्य से हंसते हुए बोली, "आपको फर्क पड़ता है?" जैसे ही उसने ये बात कही, आदर्श का चेहरा एक बार फिर से सख्त हो गया।

To be continue...

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