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Bohat dard ho raha

चौहान विला,

इस वक्त आदर्श ध्वनि की गर्दन पर देख रहा था, जहां पर कुछ देर पहले मिस्टर कपूर ने स्क्रेच किया था। स्क्रैच के निशान ध्वनि की गर्दन पर इस कदर थे कि उसकी गर्दन लाल हुई पड़ी थी। ये चीज देखकर आदर्श के जबड़े कसने लगे थे। फिलहाल के लिए उसने खुद को कंट्रोल किया और अपने होंठ ध्वनि को गर्दन पर रख दिए। जैसे ही आदर्श के होंठ ध्वनि को अपनी गर्दन पर महसूस हुए, एक पल के लिए ध्वनि जैसे अपनी जगह पर फ्रिज हो गई। आज तक उसने आदर्श का ऐसा रूप कभी नहीं देखा था, जो आज वो देख रही थी। उसका dil धक-धक करने लगा था और सांस गहरी होने लगी थी।

लेकिन अगले ही पल, उसकी आंखों में नमी भी उतर आई थी। वो नमी कब उसकी आंखों से निकलते हुए उसके गालों पर आकर आदर्श के माथे को छू गई, उसे भी पता नहीं चला। क्योंकि इतना दर्द उसने सह लिया था कि अब उसमें कुछ बचा ही नहीं था। आज कितनी ही देर बाद उसने आंसू बहाया था। जैसे ही उसका आंसू आदर्श के माथे को छुआ, आदर्श को तो पहले ही गुस्सा चढ़ा हुआ था, लेकिन अब उसका चेहरा सर्द हो गया। वो ध्वनि की तरफ देखते हुए बोला, "don't you dare अगर तुम्हारी आंखों से एक भी कतरा आंसू अब निकला तो,

I will fuck you right here right now very brutally."

आदर्श की बात सुनकर एक पल के लिए ध्वनि उसकी तरफ देखते ही रह गई। उसे समझ में नहीं आया कि आदर्श ने उसे धमकी दी है या फिर उसकी फिक्र जताई है। एक तरफ उसके आंसू पोंछ रहा था, तो दूसरी तरफ उसे दर्द देने की भी बात कर रहा था। वो आदर्श की आंखों में देख रही थी, जहां पर इस वक्त गुस्से की आग जल रही थी। मिस्टर कपूर का छुआ हुआ आदर्श को हर बढ़ते बोल के साथ ध्वनि के बदन पर साफ महसूस हो रहा था। उसे ऐसा लग रहा था, जैसे मिस्टर कपूर को बहुत आसान सजा दे दी। ये आदर्श की सबसे बड़ी भूल थी। ये सोचते हुए उसे खुद पर भी गुस्सा आ रहा था। इसीलिए वो अब ध्वनि के ऊपर से उठा। ये चीज देखकर ध्वनि भी हैरान थी।

आदर्श बालकनी में आया और अगले ही पल उसने अपना फोन निकाल कर अपने असिस्टेंट को कॉल लगाया। दूसरी तरफ से फोन पिक होते ही आदर्श सर्द आवाज में बोला, "मिस्टर कपूर की लाश बेसमेंट में लेकर चलो, बिकॉज़ उसने जो हरकत की है, उसकी लाश की वो हालत होनी चाहिए कि उसकी रूह तक कांप उठे। दोबारा जन्म लेने में भी उसे डर लगने लगे।" इतना कहते हुए आदर्श का चेहरा गुस्से से कांपने लगा। आदर्श ने अब फोन पॉकेट में डाला और अंदर की तरफ आया। जहां ध्वनि अभी अभी अपनी जगह पर उठकर बैठी थी।

उसने जैसे ही आदर्श को देखा, तो उसकी नज़रें पूरी तरह से झुक गई। इस वक्त वो क्या फील कर रही थी, वही जानती थी। आदर्श बस एक्सप्रेशन लेस चेहरे से उसे देख रहा था। वो उसके पास आकर खड़ा हुआ और कुछ देर उसकी तरफ देखता रहा। लेकिन ना आदर्श कुछ बोल रहा था और ना ही ध्वनि। ऐसे ही 5 मिनट बीत गए, लेकिन अब ध्वनि के धीरे-धीरे सिसकने की आवाज आने लगी, जो कि आदर्श को भी साफ सुनाई दे रही थी। सिसकते हुए ही वो अब अपनी जगह से खड़ी हुई और अगले ही पल आदर्श के गले लग गई। वो रोते हुए बोली, "कोई इंसान इतना गंदा कैसे हो सकता है, आदर्श जी?"

इतना कहते हुए वो फूट-फूट कर रोने लगी। आज पहली बार आदर्श को अपना दिल जलता हुआ महसूस हो रहा था। ध्वनि के आंसू उसे अंदर तक जला रहे थे। रोते हुए तो उसने ध्वनि को बहुत बार देखा था, लेकिन तब उसे इतना फर्क नहीं पड़ा था। पर आज, आज से ऐसा लग रहा था, जैसे उसने मिस्टर कपूर को इस तरह से मार कर बहुत बड़ी गलती कर दी। इसीलिए उसके जबड़े पूरी तरह से कसने लगे थे।

वही ध्वनि इस चीज से बिल्कुल ही अनजान थी। वो लगातार आदर्श के कंधे पर सिर रख कर रो रही थी। वही आदर्श उसके सिर पर हाथ रखते हुए उसे सहला रहा था। अगले ही पल, उसने ध्वनि को गोद में उठाया और उसे बाथरूम में ले गया। इस वक्त ध्वनि की हालत बहुत ज्यादा खराब हो चुकी थी। रो-रोकर उसका पूरा चेहरा लाल पड़ चुका था। आदर्श ने उसे लाकर शावर के नीचे खड़ा किया और उसका चेहरा पकड़ कर अपने चेहरे से लगा लिया। इस वक्त आदर्श ने अपनी आंखें बंद कर रखी थी और वो ध्वनि के माथे से अपना माथा लगा कर खड़ा था। धीरे-धीरे कर आदर्श के हाथ उसके चेहरे से फिसलते हुए इसके कपड़ों पर आने लगे। कुछ ही सेकंड में, उसके कपड़े नीचे जमीन पर पड़े हुए थे। आदर्श उसके कपड़े उतार कर पीछे की तरफ हुआ कि तभी ध्वनि ने उसका हाथ पकड़ते हुए ना में सिर हिला दिया कि इस वक्त वो हद से ज्यादा दर्द में थी। वो ना में सिर हिलाते हुए बोली, "प्लीज, मुझे अकेला मत छोड़ो।"

इतना कहते हुए उसकी आंखों में उसका दर्द साफ दिखाई दे रहा था। आदर्श चुपचाप उसकी आंखों में देख रहा था। अगले ही पल, उसने ध्वनि के चेहरे को अपने हाथों में भरा। कभी उसके गालों को चूमता, कभी उसके नाक को छूता। अब उसके होठों पर आकर उसने अपने होंठ रोक लिए। दोनों के होंठ आपस में जुड़े हुए थे, लेकिन वो किस नहीं कर रहा था। ध्वनि की आंखें पूरी तरह से बंद थी और उसके हाथ आदर्श की कमर पर थे। आदर्श अपने कपड़ों में ही खड़ा हुआ था।

आदर्श अब गहरी आवाज में बोला, "दर्द हो रहा है।" जैसे ही आदर्श ने ये बात कहीं, ध्वनि की आंखें खुल गई। अब वो रोते हुए बोली, "बहुत ज्यादा, इतना अपने बदन पर उसकी गंदगी महसूस हो रही है। ऐसा लग रहा है, किसी ने मेरे बदन को छलनी कर दिया। दिल कर रहा है कि अपनी जान ले लूं।" उसकी इस बात पर आदर्श ने उसके बालों को मुट्ठी में कस लिया और उसका चेहरा ऊपर की तरफ उठाते हुए बोला, "दोबारा कभी ऐसी बात मत करना, नहीं तो मैं खुद तुम्हारी जान ले लूंगा।" इतना कहते हुए आदर्श ने उसके होठों को अपने होठों में भर लिया और उसे चूमने लगा।

To be continue...

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