
गुलेरिया हाउस,
रेयांश इस वक्त आराध्या के ऊपर झुका हुआ था और उसने आराध्या को कसकर पकड़ कर उसे बेड में धंसाया हुआ था। जिस कदर वो उसके होठों पर हावी हो रहा था, आराध्या को अपने होठों में हद से ज्यादा दर्द महसूस हो रहा था। रेयांश पूरे प्रेशर के साथ किस कर रहा था, जिस वजह से आराध्या उसके नीचे से हिल तक नहीं पा रही थी। लेकिन फिलहाल के लिए वो रेयांश के नीचे से जैसे हिलना ही नहीं चाहती थी। वो चुपचाप रेयांश की किस को फील कर रही थी, जिसमें हद से ज्यादा गुस्सा था। वो भी इसलिए कि आराध्या उससे कुछ तो छुपा रही थी, जो रेयांश समझ चुका था।
अब उसने आराध्या के होठों को अपने होठों में लिया और अगले ही पल उसके होंठ पर बाइट कर लिया। जिससे आराध्या का पूरा शरीर एक पल के लिए जैसे कांप उठा। उसके हाथ ब्लैंकेट पर पूरी तरह से कस गए। उसके मुंह से आवाज तो निकली, लेकिन वो भी रेयांश के होठों में दबकर रह गई। क्योंकि रेयांश ने उसकी आवाज बाहर तक नहीं निकलने दी थी। अब वो उसके होठों को और भी ज्यादा पैशनेट होकर अपने होठों में लेकर शक किए जा रहा था। साथ ही साथ उसने अब अपने हाथ आराध्या के हाथ में उलझा लिए थे। आराध्या के दोनों हाथ ऊपर बिस्तर पर लगा दिए थे। वही आराध्या की भी उंगलियों के नाखून रेयांश की हथेली के पीछे अच्छे से धंस रहे थे। लेकिन रेयांश को इस चीज से कुछ फर्क नहीं पड़ रहा था।
वो लगातार आराध्या को खाए जा रहा था। तकरीबन 15 20 मिनट ऐसे ही निकल गए और अब रेयांश ने अपना चेहरा पीछे की तरफ किया, तो आराध्या का साइड से होंठ फट चुका था। रेयांश ने आराध्या को तब तक नहीं छोड़ा, जब तक के वहां से खून निकलना बंद नहीं हो गया था। लेकिन उसका कट आराध्या के होंठ पर साफ दिखाई दे रहा था। वही रेयांश उसे बेहद गहरी नजरों से देख रहा था। अब वो उसके ऊपर से उठा और उसे देखते हुए बोला, "पनिशमेंट इस पेंडिंग, लिटिल प्रिंसेस, now वेक अप, जल्दी रेडी हो जाओ, नीचे पार्टी में जाना है।"
जैसे ही रेयांश ने ये बात कही, आराध्या के चेहरे पर भाव बदलने लगे। अगले ही पल, वो अपना चेहरा सख्त करते हुए बोली, "मुझे पार्टी में नहीं जाना।" जैसे ही उसने ये बात कही, रेयांश के चेहरा पूरी तरह से एक्सप्रेशन लेस हो गया। अब वो उसकी आंखों में देखते हुए बोला, "are you sure little princess you can't come to द पार्टी."
रेयांश ने जिस तरीके से उससे पूछा था, एक पल के लिए आराध्या का दिल जोरो जोरो से धक-धक करने लगा था। क्योंकि रेयांश के पूछने का तरीका बिल्कुल भी नॉर्मल नहीं लग रहा था। इस वक्त रेयांश की सर्द नजरे आराध्या पर टिकी हुई थी, जो कुछ कहने से पहले सोच रही थी। तभी दरवाजा एकदम से खुला और दामिनी जी अंदर की तरफ आई। "वो पार्टी में नहीं जाएगी। ये पार्टी तुम्हारी इंगेजमेंट के लिए है और उसका वहां पर जाने का कोई मन नहीं है।" इतना कहते हुए दामिनी जी अंदर की तरफ आई। उसने आराध्या की तरफ सख्त नजरों से देखा।
जैसे ही दामिनी जी ने ये बात कही, रेयांश के चेहरे पर इविल स्माइल आ गई। अब वो सारी बात समझ चुका था कि आखिर माजरा क्या है। उसने एक नजर दामिनी जी की तरफ देखा और दूसरे ही पल, उसने आराध्या को देखा, जो अभी भी बेड पर लेटी हुई थी। पर अब उसकी आंखों से एक कतरा आंसू उसके गालों पर बह गया। वही रेयांश बिना दामिनी जी की तरफ देखे अगले ही पल आराध्या की तरफ आया। जैसे ही वो आराध्या की तरफ आया, एक पल के लिए आराध्या के चेहरे पर सवालिया एक्सप्रेशन आ गए। दूसरे ही पल, नीचे की तरफ झुका और आराध्या को अपने कंधे पर टांगते हुए उसने दामिनी जी की तरफ देखा। जिनकी आंखें ये चीज देखकर फटी की फटी रह गई थी। वही आराध्या, जोकि रेयांश के कंधे पर लटकी हुई थी, उसकी भी आंखें हैरत से फैल गई थी और धड़कने पूरी तरह से ड्रॉप हो गई थी।
अगले ही पल, वो चिल्लाते हुए बोली, "रेयांश, ये तुम क्या कर रहे हो? मुझे नीचे उतारो।" लेकिन रेयांश ने उसकी एक भी बात नहीं सुनी और अपने कदम बाहर की तरफ बढ़ा दिए। तभी दामिनी जी चिल्ला कर बोली, "रेयांश, तुम ऐसा नहीं कर सकते। हमारी इज्जत की धज्जियां उड़ जाएगी।" लेकिन रेयांश तो जैसे दामिनी जी की बात सुन ही नहीं रहा था। वही दामिनी जी उसके पीछे-पीछे आई। लेकिन तब तक रेयांश सीढ़ियों तक पहुंच चुका था। जैसे ही रेयांश ने पहली सीढ़ी पर कदम रखा, सब की नजरे उस पर टिक गई। अर्चना की भी नजरें उस पर टिक गई। एक पल के लिए अर्चना के हाथों की मुट्ठियां कस गई। वहां पर सभी लोग, सुमन से लेकर सब लोग रेयांश को देख रहे थे। सुमन के चेहरे पर तो इस वक्त इविल स्माइल आ चुकी थी, जैसे वो तो चाहती ही यही थी।
रेयांश नीचे की तरफ आया कि तभी अर्चना उसके पास तेजी से चलते हुए आई और उसके कंधे पर हाथ रखते हुए बोली, "तुम क्या कर रहे हो, रेयांश? ये तो तुम्हारी बेटी है ना।" जैसे ही उसने ये बात कही, रेयांश ने उसका हाथ लगभग से झटकते हुए उसे अपनी सर्द दर्द नजरों से देखा, तो एक पल के लिए अर्चना ने अपना सलाइवा घटक लिया। वहां पर खड़े हर एक शख्स के चेहरे पर अजीब से एक्सप्रेशन आ गए थे। वो आपस में खुसर पुसर करने लगे थे। दूसरी तरफ अर्चना के पिता जी, वो हैरानी से रेयांश को देख रही थी। रेयांश अब पूरे लोगों को देखते हुए बोला, "पार्टी ओवर, आप लोग सब घर पर जा सकते हैं। आपको शो देखना था, आपने देख लिया। now गेट लॉस्ट।"
इतना कहकर वो आराध्या को लगभग से बाहर ले गया। दूसरी तरफ दामिनी जी, जो ऊपर ग्रिल पर खड़ी थी, उनका चेहरा अब गुस्से से कांपने लगा था। उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि रेयांश कुछ ऐसा करेगा। वही रेयांश आराध्या को अपनी गाड़ी के पास लेकर आया, जो अभी भी उसके कंधे पर लटकी हुई थी। वो लगभग रेयांश से छूटने की कोशिश कर रही थी, लेकिन रेयांश उसे छोड़ ही नहीं रहा था। अब उसने आराध्या को गाड़ी की बैक सीट पर फेंका और दूसरे ही पल उसने ड्राइवर की तरफ देखा, तो ड्राइवर ने हां में सिर हिला दिया।
अब उनकी गाड़ी वहां से निकल चुकी थी। वही आराध्या झटपटाते हुए बोली, "आप ऐसा नहीं कर सकते, मिस्टर गुलेरिया, अगर दादी को कुछ हो गया तो आप क्या करेंगे? आपको नहीं लगता कि आप उनके साथ गलत कर रहे हैं।" इसके आगे वो कुछ बोलती कि रेयांश ने उसके हाथों को कसकर पकड़ा और अगले ही पल घुमाते हुए उसकी पीठ से लगा दिया। जिससे एक पल के लिए आराध्या की आह निकल गई। वो तड़प उठी थी, क्योंकि रेयांश ने उसकी बाहों को जिस कदर मरोड़ कर पीछे की तरफ लगाया था, वो काफी ज्यादा दर्दनाक था। अगले ही पल, रेयांश ने अब उसका चेहरा पकड़ा और अपने चेहरे के करीब लाते हुए बोला,
"बहुत शौक है ना लोगों की बातें करने का, लिटिल प्रिंसेस।" उसकी बात सुनकर आराध्या अपना चेहरा पीछे की तरफ खींचते हुए बोली, "मैंने किसी की बात नहीं मानी और आपकी आज इंगेजमेंट थी। आपने सब कुछ स्पॉइल कर दिया दिस इस नॉट फेयर, मिस्टर गुलेरिया।" जैसे ही उसने ये बात कही, रेयांश उसके बालों को मुट्ठी में भरते हुए उसके चेहरे पर झुक कर बोला, "क्या कहा तुमने, क्या तुम चाहती हो कि मैं उस लड़की से इंगेजमेंट करूं।" रेयांश की बात सुनकर एक पल के लिए आराध्या पूरी तरह से चुप हो गई थी। ये चीज देखकर रेयांश के चेहरे पर इविल स्माइल आ गई। अब उसने अपना चेहरा टेढ़ा किया और उसके होठों की तरफ देखते हुए बोला, "बाय द वे बेबी, मै उससे इंगेजमेंट करने भी नहीं वाला था।
मैं तो कुछ और अनाउंस करने वाला था, लेकिन तुमने वो सब कुछ स्पाइल कर दिया। अब तुम्हें पनिशमेंट तो मिलेगी ना, पनिशमेंट के लिए रेडी हो जाओ।" उसकी बात सुनकर आराध्या के रोंगटे खड़े हो रहे थे। अभी पहले ही उसका शरीर बहुत दर्द कर रहा था, क्योंकि रेयांश ने बहुत बुरी तरह से उसके साथ इंटिमेसी की थी। अभी वो इस चीज के लिए रेडी नहीं थी। लेकिन रेयांश के इरादे उसे बिल्कुल भी ठीक नहीं लग रहे थे। वो बहुत अच्छी तरह से रेयांश की बातें समझ रही थी। वही रेयांश का तो कंट्रोल ही खुद पर से छूटता जा रहा था। इस वक्त वो अपनी मदहोशी भरी नजरों से आराध्या को देख रहा था। उसका दिल कर रहा था कि वही पर आराध्या के साथ शुरू हो जाए। लेकिन फिलहाल के लिए उसने आराध्या के बालों को छोड़ा और उसे लगभग से अपनी गोद में खींचते हुए बैठा लिया। जिससे आराध्या के पैर पूरी तरह से उसकी कमर पर लिपट गए।
इस वक्त आराध्या ने नाइटी पहनी हुई थी, जिस वजह से उसकी गोरी टांगें साफ दिखाई दे रही थी। उसकी नाइटी, जो काफी हद तक ऊपर हो चुकी थी और उसने नाइटी के नीचे से वाइट कलर की पैंटी पहनी हुई थी। ऊपर की नाइटी पूरी तरह से क्रीम कलर की थी। उसमें से उसके क्लीवेज साफ दिखाई दे रहे थे। रेयांश ने अब अपना हाथ उसकी थाई पर रखा और धीरे-धीरे सहलाने लगा। जिससे आराध्या की सांस उसके गले में अटकने लगी। वो धीमे से लड़खड़ाती हुए आवाज में बोली, "मिस्टर गुलेरिया, ये आप ठीक नहीं कर रहे हैं। प्लीज, मुझे आपके करीब नहीं आना।" वो बोले जा रही थी, लेकिन रेयांश तो जैसे उसकी बात सुन ही नहीं रहा था। उसकी नज़रें अब आराध्या की गर्दन पर थी। धीरे से उसने अपने होंठ उसकी गर्दन पर रखे और धीमे-धीमे कर चूमने लगा। जैसे-जैसे वो उसकी गर्दन को चूम रहा था, वैसे-वैसे आराध्या की सांसों ने भारी होना शुरू कर दिया था। अब रेयांश ने उसकी पैंटी के पास अपना हाथ ले जाते हुए उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी pussy को सहलाना शुरु किया। जिससे आराध्या की हालत और भी खराब होने लगी। वो लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली, "मेरी बात सुनिए।" लेकिन रेयांश ने उसकी बात नहीं सुनी। वो जितना कुछ बोलने की कुछ कोशिश कर रही थी, रेयांश अपनी उंगली उतना ही उसकी पेंटी के ऊपर से ही pussy में लगा हुआ था।
लेकिन अगले ही पल उसने जो किया, उसे महसूस कर एक पल के लिए आराध्या की चीख उस कार में गूंज गई।
वहीं दूसरी तरफ,
ध्रुविका इस वक्त खिड़की के पास खड़ी थी। इस वक्त उसकी आंखों में आंसू थे। उसकी आंखों के सामने अपूर्व का चेहरा घूम रहा था। उसने अपने फोन की तरफ देखा, जहां बार-बार अपूर्व का फोन आ रहा था। लेकिन वो अपूर्व का फोन उठा नहीं रही थी। इस वक्त उसका जितना दिल टूट रहा था, वही जानती थी कि वो क्या फील कर रही थी। अब तक तो अपूर्व तक भी ये न्यूज़ पहुंच चुकी होगी। ये बात तो वो बहुत अच्छी तरीके से जानती थी। उसने अपनी आंखें बंद की और उसके आंसुओं का कतरा उसके गाल पर लुढ़क गया। वो धीमे से बोली, "मुझे माफ करना, अपूर्व, हम आपसे अपना प्यार का वादा किया हुआ निभा नहीं पाए।" इतना कहते हुए उसका गला भर आया था।
फोन बज कर बंद हो चुका था, लेकिन ध्रुविका ने फोन नहीं उठाया। इस वक्त वो जिस तरह से बालकनी में खड़ी थी, ठंडी हवा चल रही थी। शाम का मौसम था और बादल भी आसमान में सिमटने लगे थे। इस वक्त ध्रुविका बहुत प्यारी लग रही थी। उसने ब्लू कलर की साड़ी पहनी हुई थी और हाथों में भरकर चूड़ियां, मांग में सिंदूर, हल्की सी न्यूड लिपस्टिक लगाई हुई थी। जिसमें वो बहुत ज्यादा खूबसूरत लग रही थी। गले में मंगलसूत्र भी पहन रखा था, जो कि उसने ऐसे ही नहीं पहन लिया था। उसे पहनने के लिए भी उसे धमकी मिली थी। ध्रुविका ने अपने दोनों हाथ रेलिंग पर रखे हुए थे कि तभी उसे अपनी कमर पर दो हाथ महसूस हुए। जिसे महसूस कर ध्रुविका की धड़कनें जैसे रुक गई और उसकी सांसे एक पल के लिए थम सी गई थी।
To be continue...
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