
चौहान विला,,
अभी-अभी मिस्टर कपूर पूरी तरह से ध्वनि के ऊपर झुके ही थे कि तभी बाथरूम का दरवाजा खुला और आदर्श सामने ही खड़ा था। ध्वनि की हालत देखकर आदर्श का चेहरा काला पड़ चुका था। उसके हाथों की मुट्ठियां पूरी तरह से कस चुकी थी। दूसरी तरफ मिस्टर कपूर ने जब आदर्श को देखा, तो उसके चेहरे पर इविल स्माइल आ गई। वो उसकी तरफ देखते हुए बोला, "हेलो मिस्टर Chauhan, आइए, स्वागत है आपका बाथरूम में। वैसे ये लड़की बहुत कमाल की है, दिखने में भी बहुत खूबसूरत है।
आप चाहे तो मेरे साथ आप भी इसके मजे ले सकते हैं।" मिस्टर कपूर की बात सुनकर आदर्श की आंखें पूरी तरह से लाल हो चुकी थी। वहीं इस से अनजान कि इस वक्त आदर्श के अंदर क्या चल रहा है, मिस्टर कपूर आगे की तरफ आए और आदर्श की तरफ देखते हुए बोले, "वैसे भी हम दोनों तो रिलेटिव्स बनने वाले हैं ना, तो क्यों ना उससे पहले साथ में मजा लिया जाए।" इतना कहते हुए उसने ध्वनि की तरफ देखा। वही ध्वनि, जिसकी आंखों में नमी थी और उसकी ऊपर की शर्ट फट चुकी थी। वो खुद को छुपाते हुए आदर्श की तरफ देख रही थी।
इस वक्त उसकी आंखों में आदर्श को देखकर रह रहकर नमी उभर रही थी। उसका दिल बुरी तरीके से टूट चुका था। जैसे उसने स्ट्रगल करना अब बंद कर दिया था। अब वो किसी तरह से अपनी जगह से धीमे से लड़खड़ाते हुए खड़ी हुई। जैसे ही वो अपने पांव पर खड़ी हुई, उसके पैर में इतनी तेज दर्द हुआ कि एक पल के लिए उसकी चीख वहां पर गूंज गई। उस चीज को सुनकर आदर्श का गुस्सा और भी ज्यादा बढ़ गया। क्योंकि जब एक मिस्टर कपूर ने उसे जमीन पर पटका था, तो उसका पैर पूरी तरह से मुड़ गया था। एंकल से ही पता चल रहा था किस हद तक उसका पैर ट्विस्ट हुआ था। क्योंकि उसकी पूरी एंकल नीली पड़ चुकी थी। वो किसी तरह चलते हुए आदर्श के पास आई और अगले ही पल, उस की बाहों में गिर पड़ी। जैसे ही वो गिरने को हुई, आदर्श ने तुरंत उसे संभाल लिया।
ध्वनि कुछ भी नहीं बोल रही थी, बस उसकी आंखों में देख रही थी। आदर्श की भी लाल आंखें उस पर टिकी हुई थी। वही मिस्टर कपूर उसकी तरफ देखते हुए बोले, "अरे! मिस्टर चौहान, आप ये मत कह दीजिए कि आपको अपने नौकरों के साथ हमदर्दी है। नौकर तो होते ही हम बड़े लोगों को खुश करने के लिए है। तो प्लीज, आप इन चीजों से ना....।" अभी वो बोल ही रहा था कि तभी वहां पर एक जोरदार चीख की आवाज गूंज गई।
ये चीख की आवाज मिस्टर कपूर की थी, क्योंकि आदर्श ने अपनी बैक में से गन निकाल कर मिस्टर कपूर के पैर में गोली चला दी थी। जिससे मिस्टर कपूर का पैर पूरी तरह से जख्मी हो गया था। वही ध्वनि तो अपनी जगह पर खड़ी-खड़ी सुन्न रह गई थी। वो हैरानी से आदर्श की तरफ देख रही थी, जो उसे ही देख रहा था। उसने अब अपना कोट निकाला और ध्वनि के ऊपर देते हुए बोला, "गो टू इन माय रूम।" जैसे ही आदर्श ने ये बात कही, ध्वनि कुछ आगे से कहने को हुई कि तभी आदर्श की सर्द आवाज उसके कानों में पड़ी,"I said go to my room."
उसकी बात सुनकर ध्वनि ने अपना सिर नीचे की तरफ झुका लिया था। अब वो वहां से चलकर जाने को हुई, लेकिन उसके पैरों में इतनी जान ही नहीं थी कि वो थोड़ा सा भी चल पाए। अपने दो कदम ही आगे बढ़ाए थे कि तभी उसका पैर एक बार फिर से लड़खड़ा गया। इससे पहले वो गिरती, तभी आदर्श ने उसकी कमर में हाथ डालकर उसे संभाल लिया। दूसरी तरफ मिस्टर कपूर चिल्लाते हुए बोले, "ये तुम ठीक नहीं कर रहे हो, मिस्टर चौहान? अपनी इस नौकर के लिए तुमने मुझे, मुझे शूट किया। मैं तो तुम्हारे लिए अपनी बेटी का रिश्ता लेकर आया था। लेकिन तुम, तुम तो इस बेगैरत....।" अभी वो बोल ही रहा था कि आदर्श ने अब गन उसके ऊपर पॉइंट की। जैसे ही उसके ऊपर गन पॉइंट हुई, एक पल के लिए मिस्टर कपूर की आंखें बड़ी हो गई।
मिस्टर कपूर की सांस ही उनके हलक में अटक चुकी थी। वही ध्वनि का दिल भी जोरों से धक धक कर रहा था। वो अब आदर्श की तरफ देखते हुए बोली, "मत कीजिए प्लीज, अगर आंटी को पता चल गया, तो वो इस सब का जिम्मेदार मुझे ठहराएंगे। प्लीज, मिस्टर चौहान।" अभी वो बोल ही रही थी कि तभी आदर्श ने उसके बालों को मुट्ठी में भरा और उसकी आंखों में देखते हुए बोला, "इसकी हिम्मत कैसे हुई तुम्हें छूने की भी? हाउ टू टॉक यू लाइक that, तुम्हें हर तरह से छूने का हक सिर्फ मुझे है और इसने तुम्हें छूकर अपनी मौत को दस्तक दी है।"
उसकी बात सुनकर ध्वनि ने उसका चेहरा हाथों में पकड़ा और धीमी सी आवाज में बोली, "प्लीज, आज मेरी बात सुन लीजिए। मैं नहीं चाहती कि किसी की मौत का इल्जाम आप पर आए, आपको मेरी कसम।" उसकी बात पर आदर्श की आंखें और भी ज्यादा लाल हो गई। आज पहली बार ध्वनि ने उसे कुछ ऐसा कहा था, जिसे सुनकर आदर्श एक टक उसे देखे ही जा रहा था। उसका गुस्सा इतना बढ़ गया था कि शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा था। उसने अब ध्वनि के बालों को मुट्ठी में भरा और अगले ही पल उसके होठों को कैप्चर कर लिया। वहीं दूसरी तरफ मिस्टर कपूर, जोकि जमीन पर पड़े हुए थे, उसने अपने जबड़े पूरी तरह से कस लिए थे। वो किसी तरह से अपनी जगह से उठा। हालांकि उससे उठा नहीं जा रहा था। पैर में गोली लगे होने की वजह से बाथरूम में खून खून हो गया था।
लेकिन अब मिस्टर कपूर किसी तरह से उठे और लड़खड़ाती हुई टांग से बाहर की तरफ जाने को हुए, तभी वहां पर मालिनी जी की आवाज आई। वो चिल्लाते हुए बोली, "ये क्या हरकत है आदर्श, और मिस्टर कपूर...? मिस्टर कपूर की ये हालत....।" अभी वो बोल ही रही थी कि तभी मिस्टर कपूर चिल्ला कर बोले, "अपने बेटे को संभालिए, मिस मालिनी, जोकि एक नौकरानी के पीछे पागल हुए जा रहा है। अब मैं अपनी बेटी की इंगेजमेंट यहां पर कभी भी नहीं करूंगा। इस लड़के ने इस लड़की की खातिर मेरे पैर में गोली मार दी। वो भी इसलिए, क्योंकि मैं इस लड़की से टॉयलेट पेपर मांग रहा था। मैंने तो उस लड़की से कोई फालतू बात भी नहीं की।
ये लड़की मुझे फसाने के लिए चिल्ला चिल्ला कर कह रही थी कि इसने मेरी इज्जत लूटने की कोशिश की। खुद अपने कपड़े फाड़े और नाम मेरा लगा रही है। आखिर मेरी उससे क्या दुश्मनी है, जो मैं ऐसी हरकत करूंगा।" जैसे ही मिस्टर कपूर ने ये बात कही, आदर्श ने उसके माथे को बीचो-बीच शूट कर दिया। अब मिस्टर कपूर नीचे जमीन पर किसी बेजान लाश की तरह पड़े हुए थे। वही मालिनी जी का दिल तो धक सा रह गया था। वो अपनी बड़ी-बड़ी आंखों से अपने सामने पड़ी मिस्टर कपूर की लाश को देख रही थी। दूसरी तरफ आदर्श अभी भी ध्वनि को किस किए जा रहा था। उसे तो जैसे मालिनी जी से कोई मतलब ही नहीं था कि मालिनी जी इस वक्त उसके सामने खड़ी हुई थी।
ध्वनि को किस करने के बाद आदर्श पीछे की तरफ हुआ। फिर मालिनी जी की तरफ देखते हुए बोला, "अपना ये कचरा साफ कर दीजिएगा, मॉम, एंड लेट मी टेल यू मुझे उस लड़की से इंगेजमेंट करनी भी नहीं है।" उसकी बात पर मालिनी जी चिल्लाते हुए बोली, "ये क्या कह रहे हो तुम, आदर्श, पागल तो नहीं हो गए हो। तुमने मिस्टर कपूर की जान क्यों ली?" तभी आदर्श ने ध्वनि की कमर से हाथ हटाया और बिल्कुल मालिनी जी के पास आकर खड़ा हो गया। वो उनकी आंखों में देखकर धीमे से बोला, "जिसे उसने छूने की कोशिश की है ना मॉम, वो मेरी वाइफ है।"
जैसे ही आदर्श के मुंह से वाइफ नाम मालिनी जी ने सुना, मालिनी जी की मुट्ठियां कस गई और एक पल के लिए उनके चेहरे का रंग पूरी तरह से उड़ चुका था। वो हैरानी से आदर्श की तरफ देख रही थी। वो चिल्लाते हुए बोली, "तुमने इस लड़की से शादी कर ली?" उसकी बात पर आदर्श ने हां में सिर हिलाते हुए बोला, "आज की नहीं की है मॉम, पिछले 5 साल से की है।
पर मैं आपको आखरी बार समझा रहा हूं, प्लीज, मेरी वाइफ को डिसरिस्पेक्ट करना बंद कीजिए। अनलेस मै भूल जाऊंगा कि आप मेरी मॉम है।" इतना कह कर उसने अब ध्वनि की तरफ देखा, जो अपना सिर झुकाए खड़ी थी। उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे। अभी-अभी जो आदर्श ने मालिनी जी से जो कहा, वो ध्वनि ने नहीं सुना था। वही आदर्श ध्वनि के पास आया और अगले ही पल उसने ध्वनि को गोद में उठाया। वहीं ध्वनि भी बस उसकी तरफ देखते ही रह गई।
देखते ही देखते आदर्श उसे लेकर वहां से निकल चुका था। अब मालिनी जी का गुस्सा और भी ज्यादा बढ़ चुका था। उसकी लाल आंखें सामने पड़ी डेड बॉडी, जो कि मिस्टर कपूर की थी, अब वो लगभग से उस डेड बॉडी को लात मारते हुए बोली, "तुम मेरे घर की बहू कभी नहीं बन सकती, तुम्हारी औकात नहीं है मेरे घर की बहू बनने की। कोई बात नहीं, लेकिन जल्द ही तुम इस घर से बाहर ना निकल गई, तो मैं भी श्रीमती मालिनी चौहान नहीं। और अब देखो, मैं तुम्हारा हस्र क्या करती हूं।" इतना कहते हुए मालिनी जी का चेहरा डेविल वाइब दे रहा था। उनका गुस्सा अब सातवें आसमान पर पहुंच चुका था। देखते ही देखते मालिनी जी बाहर की तरफ आई, जहां पर अभी भी पार्टी चल रही थी। अब मालिनी जी को उस पार्टी को देखकर और भी ज्यादा गुस्सा आ रहा था। उनका दिल कर रहा था कि वो कहीं पर जाकर छुप जाए। लेकिन उन्होंने किसी तरह खुद को कंट्रोल किया और उस पार्टी को कंटिन्यू होने दिया, क्योंकि वो किसी कंट्रोवर्सी का हिस्सा नहीं बनना चाहती थी।
अगर वो पार्टी स्टॉप कर देती, तो हो सकता था कि वो किसी बड़ी कंट्रोवर्सी का हिस्सा बन जाती। वो नहीं चाहती थी कि लोग चौहान के बारे में कोई बात करें।
वहीं दूसरी तरफ आदर्श ध्वनि को उठाकर अपने रूम में लेकर आया। अगले ही पल, उसने बड़े आराम से ध्वनि को बेड पर लेटाया। वही ध्वनि बस आदर्श के चेहरे की तरफ देख रही थी, जोकि पूरी तरह से एक्सप्रेशन लेस था। लेकिन उसकी आंखों में जो तूफान था, वो ध्वनि को साफ दिखाई दे रहा था। आदर्श के जबड़े अभी भी कसे हुए थे। उसने अब ध्वनि के पैर की तरफ देखा, जिसकी एंकल पूरी तरह से नीली पड़ चुकी थी और सूज भी चुकी थी। उस एंकल को देखकर अब आदर्श को और भी ज्यादा गुस्सा आने लगा था। उसने अब अपनी गर्दन से टाई ढीली करके बेड पर फेंकी और देखते ही देखते वार्डरोब की तरफ बढ़ गया। ध्वनि बस चुपचाप उसे देखे जा रही थी।
इस वक्त वही जानती थी कि उसे कैसा फील हो रहा था। जिस तरह से मिस्टर कपूर ने उसको छुआ था, अभी तक उसके रोंगटे खड़े हो रहे थे। आदर्श अब मेडिकल बॉक्स अंदर से लेकर आया और देखते ही देखते ध्वनि के पास आकर उसने उसके पैर के ऊपर ऑइंटमेंट लगाकर बैंडेज करनी शुरू कर दी। ये चीज देखकर ध्वनि भी एक पल के लिए हैरान थी। वो अब धीमी सी आवाज में बोली, "मै, मै, मैं ठीक हूं, मिस्टर चौहान।"
इतना कहते हुए उसकी आवाज बुरी तरीके से कांप रही थी, जो कि आदर्श भी महसूस कर सकता था। अब आदर्श उसके बिल्कुल करीब आया और उसने अगले ही पल ध्वनि को बेड पर धक्का दिया। ये चीज देखकर ध्वनि भी हैरान थी। अभी-अभी आदर्श उसके पैरों पर मरहम लगा रहा था और अब आदर्श ने जिस तरह से उसे धक्का दिया था, एक पल के लिए ध्वनि को अपने दिल में तड़प महसूस हो रही थी। वही आदर्श उसके चेहरे पर झुका, तो दोनों की नाक आपस में टच होने लगी। आदर्श अब उसके होठों के पास आते हुए बोला, "उसने तुम्हें कहां-कहां टच किया है?" जैसे ही आदर्श ने ये बात कही, ध्वनि की आंखें बड़ी हो गई। दूसरी तरफ आदर्श की नजर ध्वनि की गर्दन पर गई, जहां पर मिस्टर कपूर के स्क्रैचेज के निशान थे। उन स्क्रैचेज को देखकर आदर्श का खून जल उठा। अब उसने अपने तपते होंठ ध्वनि की गर्दन पर रख दिए, जिससे एक पल के लिए ध्वनि की सांसे रुक सी गई।
To be continue...
Follow for daily updates 👆 👆 👆





Write a comment ...