
मंदिर में,
अभी- अभी प्रत्यक्ष ने प्राची की मांग और गले में मंगलसूत्र पहनाया था. और तभी पीछे से कमला चाची के चिल्लाने की आवाज प्रत्यक्ष के कानों में पडी थी जो की चिल्लाकर एक ही बात बोल रही थी यह क्या हरकत है प्रत्यक्ष. तुमने ऐसे कैसे इस लडकी की मांग भर दी ऐसे ही किसी राह चलती लडकी की मांग भर दोगे क्या तुम हम इस शादी को नहीं मानते हैं. जैसे ही कमला चाची ने यह बात कही प्रत्यक्ष ने पलट कर उनकी तरफ देखा तो एक पल के लिए कमला चाची चुप हो गई क्योंकि प्रत्यक्ष की नजरे इस वक्त कमला चाची पर बेहद गहरी थी जो कि उनको चुप करने के लिए काफी थी.
कमला चाची अब उसके पास आई और धीमे से उसके कंधे पर हाथ रखकर बोली बेटा हमारी बात समझने की कोशिश करो हम राठौर खानदान से हैं हमारी बहू ऐसी नहीं हो सकती, ऐसे ही तुम शादी नहीं कर सकते यह लडकी इस गांव के लिए बहुत मनहूस है. तभी प्रत्यक्ष कमला चाची की बात को बीच में काटते हुए, आप Kiss की बात कर रही हैं वह अब मेरी पत्नी है तो जरा संभल कर बात कीजिएगा जैसे ही प्रत्यक्ष ने यह बात कही कमला चाची की आंखें बडी हो गई वह प्रत्यक्ष की तरफ देखते हुए बोली लेकिन हम इसे अपनी बहू कभी नहीं मानेगी, इतना कहते हुए वह प्राची को सर्द नजरों से देख रही थी.
वहां पर खडी भीड में सब लोग प्राची को ही देख रहे थे कई लोग उसे घिन भरी नजरों से देख रहे थे तो कई लोग उसके लिए खुश भी हो रहे थे जिनमें प्राची की दोस्त सुकन्या भी थी. सुकन्या की आंखों में इस वक्त नमी तैर रही थी वह जानती थी कि प्राची ने Kiss हद तक दर्द सहा है और आज प्रत्यक्ष की शादी प्राची के साथ देखकर एक पल के लिए उसके दिल को सुकून मिल गया था. तभी कौशल्या उसका हाथ पकडते हुए बोली करमजली उसको किसी और के साथ देखकर खुश हो रही है तू तभी सुकन्या कौशल्या की तरफ देखकर बोली तो आपने कौन सा सुख दे दिया उन्हें अगर वह किसी के साथ सुखी बस रही है तो इसमें गलत ही क्या है उसकी बात सुनकर कौशल्या की आंखें बडी हो गई कौशल्या दांत पीसकर बोली तो रुक जरा तेरी मां को जाकर बताती हूं जब तेरी मां तेरे कान खींचेगी ना तब जाकर तुझे पता चलेगा, लेकिन तुझे पहले इस मनोज को ठिकाने लगा दो इसकी जो दो पल की खुशियां है ना मैंने उजड कर ना रख दी तो मेरा नाम भी कौशल्या नहीं शादी करके आई तो मेरे बेटे को खो गई करमजाली,
क्या बिगाडा था मेरे बेटे ने इस करमजाली का, और अब मेरे दूसरे बेटे को खाने चली है इसको तो मैं बताती हूं जो सपने यह बडे- बडे महलों का देख रही है ना अभी इसके तो खाक में मिल जाएंगे, इतना कहते हुए कौशल्या जी ने अपने कदम प्राची की तरफ ही बढा दिए थे. अभी कुछ देर पहले ही उन्होंने प्रत्यक्ष से मुंह की खाई थी लेकिन अभी भी वह चैन से बैठने को तैयार नहीं थी.
वही प्रत्यक्ष अब प्राची के आगे आकर खडा हुआ और कमला चाची की तरफ देखते हुए बोला मुझे किसी से कोई फर्क नहीं पडता कि किसी को मेरी पत्नी से कोई दिक्कत है. तो,
प्रत्यक्ष अब गांव वालों की तरफ देखते हुए बोला अगर किसी को इतनी ही दिक्कत है मेरी पत्नी से तो वह ये गांव छोडकर जा सकता है. कल तक मुझे वह शख्स इस गांव में दिखाई नहीं देना चाहिए जिसे मेरी पत्नी से कोई दिक्कत है. वरना मैं खुद उस शख्स को इस गांव से धक्के मार कर बाहर निकलवाऊंगा, वही प्राची तो बस है प्रत्यक्ष की तरफ एक टक देखे जा रही थी उसने अभी तक कोई रिएक्शन नहीं दिया था उसकी आंखों में लगातार आंसू बहे जा रहे थे और अब प्रत्यक्ष ने उसकी तरफ देखा प्रत्यक्ष की नजरे खुद पर पाकर एक पल के लिए प्राची की धडकनों ने शोर करना शुरू कर दिया था वही प्रत्यक्ष ने अब उसकी चुनरी को पकडा और उसकी लगभग उस पर से लपेटते हुए अगले ही पल प्राची को अपनी गोद में उठा लिया और उसे लेकर वहां से जाने को हुआ कि तभी कमला चाची उसके सामने आकर खडे होते हुए बोली खबरदार प्रत्यक्ष अगर तुम इस कलमोही को अपने घर में लेकर गए तो,
तुम्हें कुछ पता भी है इसका पहला पति कैसे मारा था. यह कुत्तिया खा गई अपने पति को पहले दिन ही एक घंटे में ही इसने अपने पति को खा लिया अभी भी क्या तुम इसे अपने साथ लेकर जाओगे कमला चाची की बात सुनकर प्रत्यक्ष का चेहरा पूरी तरह से एक्सप्रेशन लैस था मानो कमला चाची की बात उसके sir के ऊपर से ही चली गई हो ना उसे कोई फर्क पडा था और ना ही उसने कोई कमला चाची को जवाब दिया था.
जब कुछ देर प्रत्यक्ष ने कोई जवाब नहीं दिया तो कमला चाची उसकी तरफ देखते हुए बोली तुम कुछ जवाब भी दोगे कि नहीं, कमला चाची की बात पर अब प्रत्यक्ष ने कोई जवाब नहीं दिया और चुपचाप कमला चाची को क्रॉस करते हुए बाहर की तरफ चला गया कमला चाची तो बस प्रत्यक्ष को देखते ही रह गई एक पल के लिए कमला चाची ने अपना हाथ अपने सिर पर रख लिया था और अब वह खुद में ही बडबडे क्या होगा हमारे घर का यह कलमुहि तो हमारे घर को खा जाएगी पर मैं भी इसे टिकने नहीं दूंगी इतना कहते हुए कमला चाची का चेहरा पूरी तरह से सख्त पड गया था.
वही प्रत्यक्ष प्राची को लेकर अपनी गाडी में बैठने को हुआ के तभी प्राची उसकी गोद में झटपटाते हुए बोली कृपया कर मुझे नीचे उतार दीजिए हम ऐसे आपके साथ नहीं जा सकते गांव वाले हमारे बारे में अभी वह बोल ही रही थी कि तभी प्रत्यक्ष उसकी तरफ देखते हुए गहरी आवाज में बोल गांव वाले जो मर्जी कहें लेकिन अब तुम मेरी पत्नी हो राठौर खानदान की बहू हो तुम कीप क्वाइट, जैसे ही प्रत्यक्ष ने कीप क्वाइट कहा प्राची उसे सवालिया नजरों से देखने लगी क्योंकि उसे समझ में नहीं आया था कि अभी- अभी प्रत्यक्ष ने उससे क्या कहा लेकिन प्रत्यक्ष को समझ आ चुका था कि प्राची को इंग्लिश समझ में नहीं आती इसीलिए वह अब प्राची की तरफ देखकर बोल चुपचाप गाडी में बैठो और अब मुझे कोई बहस नहीं चाहिए इतना कहकर उसने गाडी में प्राची को बिठाया और खुद भी उसके साथ बैठ गया उसने अब ड्राइवर की तरफ देखा तो ड्राइवर ने अपनी गाडी स्टार्ट कर दी थी,
कुछ ही देर में वह दोनों वहां से निकल चुके थे और मंदिर अब शांत हो चुका था. लोग अपने- अपने कामों में व्यस्त हो चुके थे कौशल्या जी जो की प्रत्यक्ष के बीच जाकर प्राची का हाथ पकड कर वहां से ले जाने वाली थी उनके तो होश ही उड गए थे जब प्रत्यक्ष ने कमला चाची को भी नहीं बख्शा इसीलिए वह अब चुपचाप राघव की तरफ देख रही थी जो इस वक्त sir पकडे बैठा हुआ था उसका sir प्राची ने बुरी तरीके से फोड दिया था. कौशल्या जी अब उसके पास आई और लगभग से उसके गाल पर थप्पड जडते हुए बोली तुझसे एक लडकी नहीं संभाली गई. इतना ही अपनी आग ठंडी करनी थी. तो ठीक से करता,
उसे घर से भागने ही क्यों दिया तूने, कौशल्या जी की बात पर राघव अपने sir को और भी कसकर पकडते हुए बोला क्या करती है मां पहले ही उसने सिर फोड दिया और अब तू मुंह तोडने पर लगी हुई है. क्या करता मैं उसने मेरे ऊपर हमला कर दिया था तभी कौशल्या जी दांत पीसकर बोली तू तो नालायक है ही लाइक मैं तो कहती तेरा गला घोट कर मर ही देता मुझे, मेरे माथे का कलंक पता नहीं कब Kiss घडी में मैंने तुझे जन्मा था.
हट परे मुझे घर जाने दे तभी राघव कौशल्या जी की तरफ देखते हुए बोला लेकिन मां मेरे सिर की पट्टी तो कर दे, तभी कौशल्या जी उसकी तरफ देखकर मुंह बनाते हुए बोली अभी तू देख तेरा होता है क्या तू घर पहुंच अभी वह बोल ही रही थी कि तभी दो बॉडीगार्ड्स बिल्कुल राघव के पास आए और उन्होंने राघव को बांहो से पकड लिया राघव हैरानी से उन बॉडीगार्ड की तरफ देख रहा था और कौशल्या जी भी उन बॉडीगार्ड की तरफ देखते हुए बोली यह क्या कर रहे हो तुम लोग और मेरे बेटे को कहां लेकर जा रहे हो अभी वह बोल ही रही थी कि तभी बॉडीगार्ड लगभग से कौशल्या जी को धक्का देते हुए बोले पीछे हटो बडे साहब का आर्डर है इतना कहते हुए वह लगभग से राघव को घसीटते हुए वहां से ले गए, वही कौशल्या पीछे चिल्लाती रह गई लेकिन किसी ने उसकी एक बात नहीं सुनी,
बडे साहब का मतलब तो कौशल्या बहुत अच्छी तरह से समझ चुकी थी यानी कि यह सब प्रत्यक्ष ने ही करवाया था और अब कौशल्या अपने बेटे को कैसे छुडाएगी यह बात सोच सोच कर उसका दिमाग खराब हो चुका था तभी पीछे से सृजन की आवाज आई और कर ले अपनी मनमानियां अगर ठीक से उस फूल सी बच्ची से तू पेश आती ना तो आज तेरा यह हंसना होता तभी कौशल्या सर्जन जी की तरफ देखकर चिल्लाते हुए बोली तुम चुप रहो तुम्हारी ही सिर पर चढाई हुई थी वह मुंह काला कर लिया उसने अपना किसी और के साथ देख लो तुम्हारे ही दिए हुए संस्कार हैं तभी सर्जन व्यंग्य से हंसा और बोला तुमसे और मैं उम्मीद भी क्या कर सकता हूं.
इतना कह कर सर्जन वहां से चला गया उसे तो राघव के जाने से जैसे फर्क ही नहीं पडा था वही कौशल्या अब अपना माथा पीटते हुए रह गई दूसरी तरफ,
प्रत्यक्ष और प्राची जो की गाडी में थे इस वक्त प्रत्यक्ष के हाथ में फोन था और वह अपने फोन पर कुछ कर रहा था वही प्राची अपने हाथों में हाथ उलझाए अपना सिर नीचे करके बैठी हुई थी उसे प्रत्यक्ष से इस वक्त बहुत डर महसूस हो रहा था वह नहीं जानती कि प्रत्यक्ष कैसा इंसान है कैसा नहीं क्योंकि इतना तो वह समझ चुकी थी कि जितने भी उसे इंसान मिले थे, उनमें से कोई भी ठीक नहीं निकला था कौशल्या से लेकर राघव तक और सहेलियां में जितनी भी सहेलियों की माएं थी वह उससे नफरत ही करती थी उससे ही उसकी इंसानियत पर से विश्वास उठ गया था और अब वह प्रत्यक्ष के बारे में कुछ सोच नहीं पा रही थी.
दूसरी तरफ प्रत्यक्ष का भी ध्यान अभी तक प्राची पर नहीं था वह बस जब से गाडी में बैठा था वह फोन पर ही लगा हुआ था कि तभी उसके हाथ में पकडा हुआ फोन रिंग करने लगा फोन के रिंग करते ही प्राची ने अब प्रत्यक्ष की तरफ देखा प्रत्यक्ष ने अगले ही पल बीप की आवाज के साथ फोन उठाया, दूसरी तरफ से प्रत्यक्ष के पर्सनल असिस्टेंट, सोनू की आवाज आई, सोनू अब लडखडाई हुई आवाज में बोला sir हमने उस लडके को पकड लिया है. जैसे ही सोनू ने यह बात कही प्रत्यक्ष के चेहरे पर इविल स्माइल आ गई और वह गहरी आवाज में बोला उसे घर के गोदाम में लेकर जाओ आज उस पर जो कहर बरसेगा, उसे कोई भी नहीं बचा पाएगा बहुत शौक है ना उसे अपनी मर्दानगी दिखाने का तो आज उसकी मर्दानगी ही खत्म कर देते हैं इतना कहते हुए प्रत्यक्ष का चेहरा सख्त हो गया था वही प्राची हैरानगी से प्रत्यक्ष की तरफ देख रही थी प्रत्यक्ष की बातों से प्राची को अब और भी डर लगने लगा था वह अब थोडा सा दूसरी तरफ खिसक गई.
क्योंकि प्रत्यक्ष के इरादे उसे नेक तो बिल्कुल भी नहीं लग रहे थे. वही प्रत्यक्ष ने अपनी बात कह कर फोन काटा और अब उसकी जाकर नजरे प्राची पर गए जिसके माथे पर पसीने की बूंदे उभर रही थी प्रत्यक्ष को लगा शायद प्राची को इस वक्त गर्मी लग रही है इसीलिए उसने हाथ आगे बढाकर ऐसी ऑन करने लगा के तभी प्राची डरते हुए पीछे की तरफ होकर बोली नहीं नहीं मैं ठीक हूं बस,
उसकी बात पर प्रत्यक्ष ने अब उसे गहरी नजरों से देखा और बोला तुम्हारे माथे पर पसीने की बूंदे आ रही हैं तुम्हें गर्मी लग रही है क्या उसकी बात पर प्राची ने sir झुका कर ना में हिला दिया, उसने अपना sir झुकाया ही था कि तभी प्रत्यक्ष ने उसका हाथ पकडा और अगले ही पल उसे अपनी गोद में खींच लिया जैसे ही प्रत्यक्ष ने उसे अपनी गोद में बिठाया एक पल के लिए प्राची पूरी तरह से कांप उठी, वह नजर उठाकर प्रत्यक्ष की तरफ देख
भी नहीं पा रहीथी.
To be continue.





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