
चौधरी विला,
अभी-अभी ध्वनि बाथरूम में गई थी। बाथरूम में वह टॉयलेट पेपर लगाने गई थी, लेकिन जब उसने देखा कि टॉयलेट पेपर लगा हुआ है, तो एक पल के लिए उसके चेहरे पर अजीब से एक्सप्रेशन आ गए। वह खुद में ही बड़बड़ाई, "टॉयलेट पेपर तो लगा हुआ है।" लेकिन अगले ही पल, उसकी आंखें बड़ी हो गई और एक पल के लिए दिल धक सा रह गया, क्योंकि पीछे से ही मिस्टर कपूर ने ध्वनि को हग कर लिया था। अब ध्वनि लगभग से उससे छूटने की कोशिश करते हुए बोली, "यह आप क्या कर रहे हैं, sir?"
तभी mister कपूर उसकी गर्दन में अपना चेहरा छुपाते हुए बोले, "अब मान भी जा, कितने नखरे करेगी तू, एक रात के तुझे बहुत पैसे दूंगा। मालामाल हो जाएगी। जितने यह लोग तुझे देते हैं ना, उससे कहीं ज्यादा दूंगा। तू अपना मुंह तो खोल, एक रात की बात है।" इतना कहते हुए लगभग से मिस्टर कपूर अपनी नाक उसकी गर्दन में घुसाते हुए सूंघने लगे। उसकी इस तरह से की गई हरकत से एक पल के लिए ध्वनि के रोंगटे खड़े हो गए। उसकी आंखों में आंसू आ गए थे। वह लगभग से मिस्टर कपूर से छूटने की कोशिश कर रही थी, लेकिन मिस्टर कपूर ने उसे पीछे से बेहद ग्रिप बनाकर जोर से पकड़ा हुआ था।
अगले ही पल, वह चिल्लाने को हुई, लेकिन उसकी आवाज बाहर तक नहीं जा रही थी। बिकॉज बाहर पार्टी चल रही थी और पार्टी में काफी हद तक म्यूजिक चलने की वजह से आवाज बाहर नहीं जा रही थी। वही मिस्टर कपूर ने अब उसे अपनी तरफ पलटा और लगभग से उसके होठों को चूमने की कोशिश करने लगा। जिस वजह से ध्वनि ने अब अपना हाथ किसी तरह से उससे छुड़ाते हुए अपना हाथ उसके मुंह पर रख दिया और पीछे की तरफ धकेलने की कोशिश करने लगी। मिस्टर कपूर लगातार उसके मुंह पर अपने होंठ रखने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन ध्वनि भी उसके मुंह को पूरी तरह से पीछे की तरफ धकेलने की कोशिश कर रही थी। अगले ही पल ध्वनि का दूसरा हाथ मिस्टर कपूर के हाथ से छूट गया, क्योंकि मिस्टर कपूर ने अपना हाथ उसकी हिप पर रख दिया था।
जैसे ही मिस्टर कपूर ने अपना हाथ ध्वनि की हिप पर रखा और अपने लोअर पार्ट की तरफ पुश किया, ध्वनि ने एक जोरदार थप्पड़ मिस्टर कपूर के गाल पर जड़ दिया। जिससे एक पल के लिए मिस्टर कपूर पीछे की तरफ हो गए। अगले ही पल, उनका चेहरा गुस्से से कांपने लगा। वह उसकी तरफ देखते हुए दांत पीसकर बोले, "बहुत हाथ चलते हैं ना तेरे कुत्तिया, मैंने तो सोचा था कि तू आराम से हाथ में आ जाएगी। लेकिन नहीं, तुझे तो अपनी बेइज्जती करवानी है।" इतना कहते हुए मिस्टर कपूर ने अपना हाथ आगे की तरफ बढ़ाकर ध्वनि के बालों को मुट्ठी में भर लिया।
अगले ही पल, उसके कंधों पर से उसकी ड्रेस को बुरी तरीके से फाड़ दिया। जिस वजह से उसकी ब्रा की स्ट्रिप्स ऊपर से दिखने लगी। एक पल के लिए ध्वनि की चीख वहीं पर निकल गई। वह रोते हुए मिस्टर कपूर की तरफ देखकर बोली, "मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है, जो तुम मेरे पीछे पड़े हो और क्यों कर रहे हो ऐसा?" उसकी बात पर मिस्टर कपूर के चेहरे पर डेविल स्माइल आ गई। अब वह उसकी तरफ दांत पीसकर बोले, "थप्पड़ मारा है ना, अब उस थप्पड़ का बदला तो मैं तुझसे लूंगा। पहले तो मैं तुझे काम के लिए कीमत देने वाला था, अब मैं उस काम के लिए कीमत भी नहीं दूंगा और तेरे साथ जबरदस्ती भी करूंगा। तू देख, मैं तेरा क्या हाल बनाता हूं।" इतना कहते हुए वह लगभग से ध्वनि को खींचते हुए बाथरूम में ले जाने लगा। इस वक्त वह बाथरूम के कॉरिडोर में खड़े थे। अब वह लगभग से उसे खींचते हुए जेंट्स वॉशरूम की तरफ लेकर जा रहा था।
वहीं दूसरी तरफ,
बाहर पार्टी में अभी भी आदर्श की नजर ध्वनि को ढूंढ रही थी। इस वक्त साढ़े 10 बज चुके थे और अभी तक ध्वनि उसे कहीं भी दिखाई नहीं दे रही थी। ध्वनि को अपने पास ना देखकर आदर्श का गुस्सा बढ़ने लगा था। जिस वजह से उसकी नसें भी तनने लगी थी और जबड़े कसने लगे थे। तभी मालिनी जी आदर्श के पास आई और उसके कंधे पर हाथ रखते हुए बोली, "क्या हुआ बेटा, तू इस तरह से एक साइड पर क्यों खड़ा है? चल, अभी जिया और तेरी इंगेजमेंट है और तू यहां पर खड़ा है।" उसकी बात पर आदर्श ने मालिनी जी का हाथ नीचे की तरफ किया। वह उनकी आंखों में देखते हुए बोला, "ध्वनि कहां है मां?" जैसे ही आदर्श ने ध्वनि का जिक्र किया, एक पल के लिए मालिनी जी का दिल जैसे धड़कने से इनकार करने लगा। उनके माथे पर पसीने की बूंदे छाने लगी।
लेकिन अगले ही पल, वह खुद को संभालते हुए धीमे से बोली, "यही कही होगी, आ जाएगी अभी।" इतना कहते हुए मालिनी जी ने आदर्श का हाथ पकड़ा। लेकिन आदर्श लगभग से अपना हाथ छुड़ाते हुए बोला, "मैं आपसे कुछ पूछ रहा हूं, मोम, ध्वनि कहां पर है?" उसकी बात पर मालिनी जी दांत पीसकर बोली, "तेरा दिमाग खराब हो गया क्या? यहां पर तेरी इंगेजमेंट चल रही है और तुझे उस लड़की की पड़ी हुई है। वह लड़की तो हमारा पूरा खानदान तबाह करने पर लगी हुई है। पता नहीं कैसी कलमुंही को उठाकर तुम फिर से घर ले आए। अरे! वह लड़की तो लड़की कहलाने लायक नहीं है। लेकिन फिर भी मैंने तुम्हारे कहने पर उसे यहां पर रखा। पर अब तुम अपनी बातें से मुकर रहे हो, आदर्श।
हमने तुम्हारे आगे पहले ही शर्त रखी थी। अगर तुम जिया से शादी करोगे, तभी वह लड़की यहां पर रहेगी।" तभी आदर्श एक्सप्रेशन लेस होकर बोला, "मैंने किसी को कोई वादा नहीं किया, मॉम।" उसकी बात सुनकर मालिनी जी की आंखें बड़ी हो गई। अगले ही पल, वह गुस्से से आदर्श की तरफ देखते हुए बोली, "मतलब तुम्हारा हमारी बातों के लिए कोई मतलब नहीं है। अगर हम कहेंगे, वह तुम बात बिल्कुल भी नहीं मानोगे। अब यही औकात रह गई है क्या हमारी इस घर में कि हमारा अपना बेटा ही हमारी बात नहीं मानता।"
आदर्श ने मालिनी जी की बात सुनी, लेकिन पूरी तरह से मालिनी जी को इग्नोर करते हुए बोला, "मुझे ध्वनि चाहिए किसी भी कीमत पर, मॉम।" तभी मालिनी जी दांत पीसकर बोली, "अब उस लड़की को मैं यहां पर बिल्कुल नहीं रहने दूंगी, आदर्श।" मालिनी जी की बात पर आदर्श ने गहरी सांस ली और उसकी तरफ देखते हुए बोला, "fine मॉम, अगर आप ध्वनि को यहां पर नहीं रखना चाहते, तो मैं भी यहां पर नहीं रहूंगा। मेरा यहां पर कोई काम नहीं है। मैं तो सिर्फ आपके कहने पर..।" अभी वह बोल ही रहा था कि तभी मालिनी जी उसकी तरफ देखते हुए बोली, "बस यही सुनना रह गया था मेरा तुम्हारे मुंह से कि अब तुम उस लड़की के लिए मुझे छोड़ोगे, अपनी मां को। जिसने तुम्हें पाल-पॉसकर बड़ा किया।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी आदर्श मालिनी जी को देखते हुए बोला, "प्लीज मॉम!
प्लीज मॉम, स्टॉप थिस नॉनसेंस।" उसकी बात पर मालिनी जी रोते हुए बोली, "जा ढूंढ ले जाकर उसे ही, और हां, जा चला जा जहां पर जाना है।" इतना कहकर वह रोते हुए अब अपने कमरे में चली गई। वहीं आदर्श अपनी आई रोल करते हुए एक बार फिर से ध्वनि को देखने लगा।
वहीं दूसरी तरफ बाथरूम में,
मिस्टर कपूर ने लगभग से ध्वनि को बालों से खींचते हुए लाकर जमीन पर फेंका। जिससे एक पल के लिए ध्वनि की चीख निकल गई। ध्वनि के नीचे जमीन पर गिरे होने की वजह से उसकी कमर में चोट लग गई थी। उसका चिल्लाना इतना ज्यादा था कि एक पल के लिए मिस्टर कपूर के चेहरे पर इविल स्माइल आ गई।
अब वह अपना कोट उतारते हुए ध्वनि के पास गया और उसके गालों पर जोरदार थप्पड़ जड़ते हुए बोला, "ऐसे ही तूने मेरे गाल पर थप्पड़ जड़ा था ना, अब तू देख तेरा क्या हश्र करता हूं मैं।" इतना कहकर उसने अब अपनी पैंट के बक्कल को खोला। जैसे ही उसने पैंट के बक्कल को खोला, ध्वनि की आंखें हरत से फैल गई । उसकी पूरी बॉडी डर से कांपने लगी। वह मिस्टर कपूर की तरफ देखते हुए बोली, "देखिए, मैं कोई ऐसी वैसी लड़की नहीं हूं।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी मिस्टर कपूर पूरी तरह से उसके पास आए और अपनी पैंट में से बेल्ट निकालते हुए
उसकी तरफ देखते हुए बोले, "तू कैसी लड़की है,अभी साबित हो जाएगा। तुझे पैसे देकर मनाने की कोशिश की थी, लेकिन तूने, तूने तो मुझ पर थप्पड़ जड़ दिया। अब उस थप्पड़ का जवाब तो मैं तुझे देकर रहूंगा।" इतना कहकर उसने उस बेल्ट को बक्कल समेत ध्वनि पर बरसाना शुरू कर दिया। जिससे ध्वनि वहीं जमीन पर लेटे-लेटे झटपटाने लगी। इस वक्त जिस तरह से मिस्टर कपूर उस पर बक्कल बरसा रहे थे, उसकी पीठ पर निशान बनने लगे थे। वह बक्कल ध्वनि के शरीर में गड़ता जा रहा था। साथ में वहां से खून भी बहने लगा था। लेकिन मिस्टर कपूर को ध्वनि पर जरा सा भी तरस नहीं आ रहा था। वह लगातार उस पर बेल्ट पर बेल्ट बरसा रहे थे।
वही ध्वनि बुरी तरह से झटपटा रही थी। जब ध्वनि अधमरी हो गई, तो मिस्टर कपूर, जोकि ध्वनि को मारते-मारते खुद थक गए थे, अब उन्होंने बेल्ट फेंकी। फिर उसे देखते हुए अब बिल्कुल उसके पास आए। अगले ही पल, उसने ध्वनि की यूनिफार्म का गला पकड़ा और उसे फाड़ने ही वाला था कि तभी धड़ाम से दरवाजा खुला। आदर्श सामने मिस्टर कपूर और ध्वनि को देख रहा था। ध्वनि की ऐसी हालत देखकर आदर्श का चेहरा गुस्से से कांपने लगा। उसकी आंखें हद से ज्यादा लाल हो गई। वही मिस्टर कपूर, जो कि उसके ऊपर झुकने ही वाले थे, जैसे ही उसने आदर्श को देखा, उसके चेहरे पर इविल स्माइल और भी लंबी हो गई।
To be continue...





Write a comment ...