
भव्य मंदिर में,
प्रत्यक्ष की गाडी मंदिर के बैक साइड आकर रुकी. इस वक्त प्रत्यक्ष के हाथ में फोन था और फोन में ही वह इस वक्त अपनी कोई काम की वीडियो वगैरा Check कर रहा था, जोकि मार्केटिंग को लेकर थी. उसका ध्यान और फॉक्स पूरी तरह से मार्केटिंग की तरफ लगा हुआ था. जैसे ही उसकी गाडी रुकी, वह गाडी से बाहर निकल कर अब मंदिर की तरफ जाने को हुआ कि तभी उसकी नजर साइड में बैठे हुए भिखारी पर गई, जोकि मंदिर के आगे तो बैठते ही थे. लेकिन आज पीछे भी बैठे हुए थे. आज मंदिर किसी मेले की तरह सजा हुआ था. हर तरफ रौनक लगी हुई थी.
जिस वजह से मंदिर के आगे बैठे हुए भिखारी को धक्के मार के वहां से निकाल दिया गया था. अब भिखारी मंदिर के पीछे की तरफ आकर बैठ चुके थे. प्रत्यक्ष ने जब उन्हें देखा, तो उनमें से एक भिखारी का बच्चा जल्दी से प्रत्यक्ष की तरफ आया और उसके आगे हाथ फैलाते हुए बोला, साहब, बहुत भूख लगी है, कुछ खाने को दो ना. बहुत मेहरबानी है. आज मंदिर का लंगर लगने वाला था, लेकिन पंडित जी ने हमें बाहर निकाल दिया. हम तो सोच रहे थे कि हमें भरपेट खाना मिलेगा. लेकिन हमें तो लगता है कि हमें खाना नसीब ही नहीं होगा. कृपा करके पाँच रुपए दे दीजिए, कुछ खा लेंगे हम।
उस बच्चे की बात पर कुछ देर प्रत्यक्ष उसकी तरफ देखता रहा. लेकिन उसने कुछ कहा नहीं और अब वह सीधा अंदर की तरफ चला गया. जब प्रत्यक्ष वहां से चला गया, तो उस बच्चे का चेहरा पूरी तरह से मायूसी से भर गया. एक पल के लिए प्रत्यक्ष जिस तरह से वहां पर खडा था, उस बच्चे को लगा था कि शायद प्रत्यक्ष उसकी हेल्प करें. लेकिन हेल्प करना तो दूर, प्रत्यक्ष ने एक शब्द तक नहीं कहा था. वही प्रत्यक्ष अब अंदर की तरफ आया. उसका चेहरा इस वक्त एक्सप्रेशन लैस था. कुछ ही देर में वह मंदिर के अंदर की तरफ आया, तो उसकी नजर पुजारी पर गई, जो कि इस वक्त वहां की सामग्री की तैयारी कर रहा था. उसके साथ में ही कमला चाची खडी थी.
कमला चाची की नजर जैसे ही प्रत्यक्ष पर गई, तो उनके चेहरे की मुस्कुराहट बडी हो गई. वह प्रत्यक्ष की तरफ जाकर उसका हाथ पकडते हुए बोली, तुम आ गए बेटा, जल्दी आओ, बस आरती शुरू होने वाली है. तुम्हारे हाथों से ही आरती की शुरुआत करवानी थी. लेकिन तुम तो लेट हो गए. लेकिन कोई बात नहीं, अभी फिलहाल तैयारी चल रही है। उसकी बात पर प्रत्यक्ष ने कुछ नहीं कहा, बस पंडित जी की तरफ देखा, जो कि वहां पर फूल लगा रहे थे.
वहीं दूसरी तरफ,
प्राची इस वक्त बदहवास सी सडक पर दौड रही थी. उसकी हालत इतनी ज्यादा खराब हो रही थी कि सांस लेने में भी उसे तकलीफ होने लगी थी. क्योंकि पीछे राघव बुरी तरह से दौड रहा था. ऊपर से प्राची के कपडे भी फट चुके थे. जिस वजह से उसकी हालत और भी खराब हो रही थी. उसने अपने दुपट्टे को पूरी तरह से घुमा कर अपने ऊपर ओढ रखा था. भागते- भागते उसकी सांस इतनी ज्यादा फूल गई थी कि उसके पैर जवाब दे गए थे. लेकिन फिर भी वह भागे ही जा रही थी. दूसरी तरफ राघव लगातार उसके पीछे भाग रहा था.
वह गुस्से में चिल्लाते हुए बोला, रुक कुत्तियां, तेरी हिम्मत कैसे हुई कि तूने मुझे मारा. तुझे मैं बताता हूं. अभी मेरे हाथ आजा, आज मैं तुझे नोच डालूंगा। इतना कहकर वह लगातार प्राची के पीछे भागे जा रहा था. गांव की टूटी फूटी सडके होने की वजह से वहां पर काफी हद तक जंगल था, जिस वजह से ना तो वहां पर कोई इंसान दिख रहा था. ना ही कोई इंसान के नाम पर पंछी भी पर मार रहा था.
मंदिर बस पंद्रह मिनट की दूरी पर रह गया था. गांव से मंदिर काफी हद तक दूर था. पैदल जाते समय भी आधा घंटा लग जाता था. इस वक्त वह पिछले पंद्रह- 20 मिनट से दौड रही थी और दौडते दौडते उसे ऐसा लग रहा था, जैसे उसके दिल की धडकन बाहर की तरफ ही आ जाएगी. आंखों से आंसू तेजी से बह रहे थे. तभी उसके पैर में एक पत्थर फंसा और वह जोर से जमीन पर जाकर गिरी. जैसे ही वह पत्थर से अटक कर नीचे जमीन पर गिरी, उसके घुटने छिल गए. एक पल के लिए उसकी चीख निकल गई. पीछे भागते हुए आ रहे राघव के चेहरे पर डेविल स्माइल आ गई. जैसे ही उसने प्राची को नीचे जमीन पर गिरते देखा, वह थोडी देर के लिए खडा होते हुए हांफ कर बोला, अच्छा हुआ तेरे साथ कुत्तियां, तू इसी लायक है. तूने जो मदहोशियत लगाई है ना, आज इस जंगल में ही मैं तेरे साथ मंगल मनाऊंगा. तू देख तेरा हाल क्या बनता है। इतना कहते हुए वह धीरे- धीरे अब प्राची की तरफ बढने लगा, हालांकि वह काफी हद तक प्राची से दूर खडा था.
दूसरी तरफ प्राची, जोकि जमीन पर गिरी थी, उसकी आंखों से अब आंसू बहने लगे थे. वह बुरी तरह से रोने लगी थी. अभी कुछ देर पहले ही एक सडक पर गाडी जा रही थी, जिससे वह आगे जाकर हेल्प मांग रही थी. लेकिन उस इंसान ने उसकी कोई हेल्प नहीं की. यह गाडी प्रत्यक्ष की थी. प्राची उसके पीछे भी भागी थी, लेकिन गाडी में बैठे हुए प्रत्यक्ष ने कानों में हेडफोंस लगा रखे थे. जिस वजह से उसे कुछ सुनाई नहीं दिया. वह फोन में ही ध्यान दे रहा था. उसने एक पल के लिए प्राची को देखा भी था, लेकिन न जाने उसके दिमाग में ऐसा क्या आया कि उसने एक बार भी गाडी नहीं रोकी.
प्राची ने जब दोबारा से हिम्मत की और राघव की तरफ देखा, तो उसकी रूह कांप गई. क्योंकि राघव काफी हद तक उसके करीब आ चुका था. इसलिए उसने हिम्मत की और दोबारा से अपने पैरों पर खडे होते हुए लडखडाते हुए भागने लगी. किसी तरह से मंदिर तक पहुंचना था. तभी उसकी जान राघव से बच सकती थी. लेकिन मंदिर पहुंचने में भी उसे दस मिनट लगने वाले थे. लेकिन प्राची की हालत ऐसी हो गई थी कि वह दो कदम भी जैसे भाग नहीं पा रही थी. वह चिल्लाते हुए बोली, कोई मदद करो मेरी। इतना कहते हुए वह फूटकर रो पडी. लेकिन राघव को उसकी हरकत पर हंसी आ रही थी. वह हंसते हुए बोला, क्या बचकानी हरकतें लगा रखी है? तुझे लगता है कि यहां उजाड और वीरान जगह मैं तुझे कोई बचाने आएगा.
वह भी तेरे जैसी लडकी को, जिसे सारा गांव मनहूस मानता है। इतना कहते हुए वह जोर- जोरों से हंसने लगा. उसकी हंसी किसी राक्षस से कम नहीं लग रही थी. प्राची रोते हुए बोली, तुम्हें मेरे साथ ऐसा करके क्या मिल जाएगा। तभी राघव दांत पीसते हुए बोला, जो तुमने हरकत की है ना, यह तो अभी कुछ भी नहीं. आज तेरी हालत जो होगी ना, उस पर तुझे खुद पछतावा होगा कि तूने मेरे ऊपर हाथ उठाया है।
इतना कहते हुए अब वह और भी करीब पहुंच चुका था. वही प्राची अब जमीन पर से हिल भी नहीं पा रही थी. अब तक राघव पूरी तरह से उसके पास आ चुका था. अगले ही पल उसने उसकी चुनरी, जो कि उसने अपने ऊपर लपेट रखी थी, वह एक झटके से खींच कर साइड पर फेंक दी. अगले ही पल प्राची जोरों से चिल्लाई, नहीईई.
अब एक बार फिर से वह फटे कपडों में राघव के सामने थी. वही राघव उसे अपनी डेविल नजरों से देखते हुए बोला, अभी से चिल्लाने लगी. अभी तो मेरा माल तेरे अंदर जाएगा, तब तेरा क्या बनेगा। इतना कहते हुए वह फिर से पागलों की तरह हंसने लगा. अब वो अपनी पैंट का बटन खोलने लगा. जैसे ही उसने पैंट का बटन खोला, प्राची का दिल डर के मारे कांप उठा. इस वक्त उसकी रूह उसके बदन से निकलने को हो रही थी. वही राघव ने अब अपनी पैंट की जिप खोली. अगले ही पल, अब वह प्राची पर झुकने ही वाला था कि तभी प्राची का हाथ किसी चीज पर पडा. अगले ही पल, उसने वह उठकर राघव के सिर में दे मारा. अभी राघव पूरी तरह से उसके ऊपर झुका भी नहीं था, जिस वजह से वह पत्थर सीधा राघव के सिर में लग गया और राघव का सिर बुरी तरह से फट गया.
एक पल के लिए राघव की आंखों के सामने धुंधलापन छा गया, जिससे राघव गिरने को हुआ. उसी वक्त प्राची को वहां से भागने का मौका मिल गया. अब वह अपनी जगह से खडी हुई और तेजी से वहां से दौड पडी. वहीं राघव चिल्लाते हुआ बोला, साली कुत्तिया, तूने फिर से वही हरकत की. अब तो तू देख, तुझे तिल तिल कर मारूंगा. आज मैं तेरी जान ही ले लूंगा, हरामजादी.
तुझे अपनी मौत पर पछतावा होगा कि तूने किससे पंगा ले लिया है। इतना कह कर अब राघव उठने को हुआ, लेकिन उससे उठा ही नहीं जा रहा था. क्योंकि उसके सिर से लगभग से काफी हद तक खून बहने लग गया था. इतना ज्यादा सिर फटने की वजह से उसे दो पल के लिए होश नहीं आ रहा था. वही प्राची अब लगभग से तेजी से भाग रही थी. उसकी सांसे तो पहले ही नॉर्मल नहीं हुई थी. अब जैसे उसकी सांसों से ज्यादा मंदिर पहुंचना जरूरी हो गया था.
वहीं दूसरी तरफ मंदिर में भव्य आरती शुरू हो गई थी. अब आरती कुछ ही देर में खत्म होने की कगार पर भी थी. आरती के बाद ही बाहर संतों में लंगर बंटने वाला था. दूसरी तरफ बाहर बैठी हुई कौशल्या जी, जो कि अपने पति सुरजन जी के साथ बैठी हुई थी, वह मुंह बनाते हुए बोली, अगर आए थे, तो साथ में लिफाफा नहीं ला सकते थे क्या? अगर लिफाफा ले आते, तो क्या तुम्हारी जेब फट जाती. आज लंगर बंटने वाला है, तो कुछ ना कुछ इकट्ठा करके साथ ले जाते। उसकी बात सुनकर सुरजन जी मुंह बनाते हुए बोली, तेरा दिमाग खराब है क्या, हम यहां पर भगवान के दर्शन करने आए हैं कि लंगर खाने आए हैं. कहा जाता है कि ऐसे लंगर नहीं खाना चाहिए. जब तक हम दान पेटी में दस बीस रुपये ना डाल दे,
हमारा कोई हक नहीं है. वैसे भी लंगर पर हक बेचारे भिखारी का होता है, जो अपने लिए कमा नहीं सकते हैं. जिनके हाथ पैर नहीं है. हमारे हाथ पैर सलामत है, हम तो खुद कमा कर खा सकते हैं, ना कि ऐसे लंगर। अभी वह बोल ही रही थी कि तभी कौशल्या जी दांत पीसकर बोली, यह अपनी बकवास मेरे सामने तो मत ही करना, समझे ना तुम. तुम और तुम्हारी वह बेटी, जो तुमने विधवा घर में रख रखी है. मेरा बस चलता, तो अब तक उसे धक्के मार के बाहर निकाल देती. कुत्तिया कहीं की, हमारी छाती पर मूंग दल रही है.
मेरा तो दिल करता है कि मैं उसका सिर फोड दूं लेकिन क्या करूं, तुम बीच में आ जाते हो. तुम्हारा भी किसी टाइम दिल करता है कि सिर फोड दूं। इतना कहते हुए कौशल्या उसे घूर- घूर कर देख रही थी. वही सुरजन को अब बुरा लग रहा था कि कौशल्या प्राची से इस हद तक नफरत करती थी. वह जानता तो था ही कि कौशल्या शुरू से प्राची को पसंद नहीं करती थी, जब उसका बेटा नील जिंदा था. उसके जाने के बाद तो कौशल्या प्राची से और भी ज्यादा नफरत करने लगी थी.
वह अब गहरी आवाज में बोले, तू जिससे नफरत कर रही है ना, एक दिन तू उसी से प्यार करेगी. तू उस लडकी को पहचान नहीं पाई है कभी। उसकी बात पर कौशल्या जी चीखते हुए बोली, तो जाओ अपनी बेटी को लेकर, अपने कहीं दूसरे घर ले जाओ. हमारे घर से काला साया दूर हो. कुत्तियां, मेरा बेटा खा गई पहले। अभी वह बोल ही रही थी कि तभी वहां पर लंगर की घोषणा हो चुकी थी. जिस वजह से कौशल्या जी का चेहरा पूरी तरह से खिल गया.
दूसरी तरफ,
प्रत्यक्ष ने अपने फोन से अपने पर्सनल असिस्टेंट को कुछ मैसेज किया. अब उसने अपने कदम लंगर हॉल की तरफ बढा दिए थे, जहां पर अभी कुछ देर बाद लंगर लगने लगा था. उसके बाद घाट पर पूजा होने वाली थी. घाट में उतरकर प्रत्यक्ष को पानी में स्नान करना था. इसीलिए अब पहले वह लंगर हाल के पास आया. जैसे ही वह एंटर हुआ, तो वहां पर सभी लोग अंदर की तरफ बैठने लगे. प्रत्यक्ष यह चीज देख रहा था कि तभी कमला चाची उसकी तरफ आते हुए बोली, क्या हुआ बेटा, तुम यहां पर खडे क्या कर रहे हो? जाओ, जाकर घाट के स्नान की तैयारी करो। कमला चाची की बात पर प्रत्यक्ष ने कोई जवाब नहीं दिया. वह बस वहीं पर खडा रहा कि तभी वहां पर दूसरे दरवाजे से भिखारियों की एंट्री हुई. भिखारियों को वहां देखकर कमला चाची का चेहरा काला पड गया. उसने अब पीछे की तरफ खडे पंडित की तरफ देखा, जिसका चेहरा पूरी तरह से पीला पड चुका था.
कमला चाची के दांत इस वक्त पीस चुके थे. तभी पंडित जी उन भिखारियों की तरफ देखते हुए बोले, तुम लोग यहां पर कैसे आए? तुम लोगों को अंदर आने की इजाजत किसने दी? निकलो यहां से। अभी वह पंडित बोल ही रहा था कि तभी प्रत्यक्ष की सर्द आवाज पंडित के कानों में पडी. वह गुस्से में पंडित की तरफ देखते हुए बोला, मैंने उनको इजाजत दी, तुम्हें कोई दिक्कत है क्या? इनको मैंने ही अंदर बुलाया है। जैसे ही प्रत्यक्ष ने यह बात कही, उस भीड में से वही बच्चा निकल कर बाहर की तरफ आया. वह उसके आगे हाथ जोडते हुए बोला, thnku साहब, हमारी मदद करने के लिए. हमें बहुत भूख लगी थी, पर यह हमें खाना ही नहीं खाने दे रहे थे।
उस बच्चे की बात पर प्रत्यक्ष ने उसके सिर पर हल्का सा हाथ रखा और फीका सा मुस्कुराते हुए बोला, जाओ, जाकर खाना खाओ। यह सुनकर उस बच्चे का चेहरा पूरी तरह से खिल उठा. दूसरी तरफ जो पंडित खडा था, उसका चेहरा अब पूरी तरह से मुरझा गया था. तभी प्रत्यक्ष उसकी तरफ देखते हुए बोला, तुम्हें तुम्हारे स्थान से निकाला जाता है और तुम्हारे स्थान पर अब कोई और पंडित आएगा. जिसे पैसों की नहीं, लोगों की सेवा से मतलब होगा। जैसे ही प्रत्यक्ष ने यह बात कही, उस पंडित के चेहरे का रंग उड गया. वह उसके आगे हाथ जोडते हुए बोला, माफ कीजिएगा मालिक, लेकिन. अभी वह बोल ही रहा था कि तभी कमला चाची बीच में चिल्ला कर बोली, लेकिन क्या, तेरी हिम्मत कैसे हुई इन लोगों को बाहर निकालने की? चल, अब निकल यहां से। इतना कहते हुए कमला चाची ने दूसरे बॉडीगार्ड को घूर कर देखा. जिन्होंने हां में सिर हिला दिया. वही पंडित तो बस कमला चाची की तरफ देखता ही रह गया. उसे तो समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर ऑर्डर तो कमला चाची ने ही दिए थे.
कुछ ही देर में लंगर शुरू हो गया और सभी ने लंगर खाकर अपना पेट भरा. अब यमुना घाट की पूजा होने वाली थी. जहां पर प्रत्यक्ष इस वक्त यमुना घाट के किनारे खडा था. इस वक्त उसने धोती पहनी हुई थी और ऊपर से उसने सफेद रंग का कपडा भी ले रखा था. इस वक्त वह पानी के बीच में खडा था. तभी उसके पैरों में किसी का शरीर तैरता हुआ आया. उस शरीर को देखकर प्रत्यक्ष की आंखें बडी हो गई. वही कमला चाची, जो पीछे खडी थी, वह भी हैरानी से उस शव को देख रही थी, जो पानी में
बह कर प्रत्यक्ष के पास आया था.
To be continue.





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