
चौधरी विला,
अभी-अभी मालिनी जी ने जो बात आदर्श से कही थी, उसे सुनकर आदर्श का चेहरा पूरी तरह से एक्सप्रेशन लेस हो गया था। लेकिन वही ध्वनि की हालत खराब हो गई थी। उसकी आंखों से आंसू तेजी से बहने लगे थे। पता नहीं क्यों, उसे अपने दिल में हद से ज्यादा दर्द महसूस हो रहा था। भले ही आदर्श ने उस चीज का जवाब नहीं दिया था, पर आदर्श का खामोश रहना ध्वनि के दिल को चीर रहा था। इस वक्त उसका दिल कर रहा था कि वह आदर्श का कॉलर पकड़कर उससे पूछे कि वह कोई तो जवाब दे कि आखिर वह चाहता क्या है। वही मालिनी जी आदर्श की तरफ गहरी नजरों से देखते हुए बोली, "मुझे लगता है तुम्हें सुनाई नहीं दिया आदर्श, मैंने कुछ कहा है तुमसे। अगर इस लड़की को तुम्हारे साथ रहना है, तो तुम्हें मेरी मर्जी से चलना होगा।
अगर तुम इस लड़की को घर पर लेकर आए हो, तो सिर्फ एक नौकरानी की हैसियत से रखना। इस लड़की से कोई उम्मीद मत रखना और ना ही मैं इस लड़की को कभी इस घर में स्वीकार करूंगी, यह बात याद रखना।" इतना कहकर मालिनी जी ने तिरछी नजरों से ध्वनि की तरफ देखा और वहां से चली गई। वहीं आदर्श अब अपने कदम आगे की तरफ बढ़ाने को हुआ कि तभी ध्वनि ने उसका हाथ पकड़ लिया। जैसे ही ध्वनि ने आदर्श का हाथ पकड़ा, एक पल के लिए आदर्श के कदम वहीं पर थम गए। आज पहली बार था, जब ध्वनि ने खुद से उसका हाथ पकड़ा था।
एक पल के लिए मानो आदर्श को आज अलग ही एहसासों ने घेर लिया था। लेकिन अगले ही पल उसने अपना चेहरा सख्त करते हुए ध्वनि की तरफ देखा। आदर्श की शांत ठंडी निगाहें खुद पर पाकर एक पल के लिए ध्वनि की सांस गहरी होने लगी। वह अपनी नजरें झुकाते हुए बोली, "मुझे तो बता दीजिए, क्या वह आप इंगेजमेंट..?" इतना कहकर वह चुप हो गई। लेकिन आदर्श को उसके चेहरे पर बेचैनी साफ दिखाई दे रही थी। उस बेचैनी को देखकर आदर्श के चेहरे पर तिरछी मुस्कुराहट आ गई। वह अब उसकी तरफ पलटा और लगभग से उसके चेहरे पर झुकते हुए बोला, "क्यों, तुम क्यों जानना चाहती हो कि मैं शाम को इंगेजमेंट करूंगा या नहीं?" इतना कहते हुए आदर्श उसके चेहरे की तरफ देख रहा था। वही ध्वनि अपनी नजर चुराते हुए बोली, "मैं तो बस ऐसे ही..।" उसने इतना ही कहा था कि आदर्श ने उसकी कमर पर हाथ रखा और अगले ही पल उसे अपनी तरफ सटाते हुए बोला,
"लेकिन मैं सीरियस हूं।" उसकी सीरियस वाली बात सुनकर एक पल के लिए ध्वनि का दिल धड़क उठा। उसने अपनी नजरे उठाकर आदर्श की आंखों में देखा, तो उसकी सांसे जैसे गहरी होने लगी। खुद ब खुद उसके हाथ आदर्श के कंधों पर आ गए थे। उसकी वह बढ़ती धड़कने आदर्श को साफ सुनाई दे रही थी। दोनों की नजरे आपस में टकराई हुई थी। आदर्श की नजरें बेहद गहरी थी, जिन्हें महसूस कर ध्वनि का दिल और भी तेजी से धक धक कर रहा था।
तभी आदर्श उसके चेहरे को गहरी नजरों से देखते हुए बोला, "कहीं तुम्हें मुझसे प्यार तो नहीं हो गया?" आदर्श की बात पर ध्वनि, जो कि उसके चेहरे में कहीं खोई हुई थी, वह अनजाने में ही हां में सिर हिलाते हुए बोली, "खुद से भी ज्यादा।" जैसे ही उसने यह बात कही, एक पल के लिए आदर्श का दिल भी धड़क उठा। उसे ऐसा लगा, जैसे ध्वनि के मुंह से उसने कुछ गलत सुन लिया हो। वह एक बार फिर से अपना कान उसके करीब लाते हुए बोला, "क्या कहा तुमने?" जैसे ही आदर्श की आवाज दोबारा से ध्वनि के कानों में पड़ी, अगले ही पल ध्वनि होश में आई। वह उसकी तरफ देखते हुए बोली, "कुछ, कुछ नहीं, मैं तो बस ऐसे ही बोल रही थी।" इतना कहकर वह आदर्श की पकड़ से छूटने लगी। लेकिन आदर्श ने अपनी पकड़ उसकी कमर पर कस दी।
वही ध्वनि लगभग से झटपटाते बोली, "छोड़िए ना मिस्टर चौहान, यहां बहुत सारे लोग हैं। अगर किसी ने देख लिया, तो बवाल हो जाएगा। आंटी तो मुझसे पहले ही नाराज है। इस बार उन्हें कुछ पता चला, तो वह मुझे इस घर से निकाल ही देगी।" तभी आदर्श एक आईब्रो उपर की तरफ उठाते हुए बोला, "तो क्या तुम इस घर में रहना चाहती हो परमानेंट?" आदर्श की बात सुनकर ध्वनि एक पल के लिए निशब्द रह गई। वह जल्दी से उसके सीने पर हाथ रखकर एकदम से उसे दूर धकेलते हुए बोली, "ऐसा कुछ भी नहीं है। प्लीज, आप जाकर आराम कीजिए और मुझे भी थोड़ी देर के लिए आराम करने दीजिए।"
ध्वनि की बात सुनकर आदर्श खामोशी से ध्वनि के चेहरे की तरफ देखता रहा। फिर गहरी आवाज में बोला, "रात को 11:00 बजे मेरे रूम में पहुंच जाना, मुझे दोबारा कहने की जरूरत ना पड़े। अगर 1 मिनट भी ऊपर हुआ, तो आई स्वेर वह हालत करुंगा कि चलने लायक नहीं रहोगी।" आदर्श की बात सुनकर एक पल के लिए ध्वनि के रोंगटे खड़े हो गए। उसने अपनी नज़रें झुकते हुए हां में सिर हिला दिया। वही आदर्श उसकी तरफ देखकर तिरछी मुस्कुराहट के साथ बोला, "good girl...
अब मेरी बात मानो और जाओ अपने कमरे में।" तभी सर्वेंट वहां पर आई और आदर्श के सामने सिर झुकाते हुए बोली, "मैं अभी इनको रूम दिख रही हूं, मालिक।" इतना कहकर उसने ध्वनि का सूटकेस पकड़ा। वह उसे वहां से ले जा रही थी कि तभी ध्वनि के दिमाग में एक बात आई। अगले ही पल, उस की आंखें बड़ी हो गई। वह आदर्श की तरफ पलट कर बोली, "लेकिन रात को तो पार्टी है और मैं पार्टी में इनवाइटेड नहीं हूं। अगर मैं पार्टी में अपने कमरे से निकल कर आपके कमरे तक आऊंगी, तो हो सकता है...।" उसकी बात पूरी होती, उससे पहले ही आदर्श सर्द आवाज में बोला, "आई डोंट केयर fucking anyone.
मुझे किसी भी हालत में रात को तुम अपने कमरे में चाहिए हो। जानती हो ना, क्यों चाहिए हो। बिकॉज़ आई नीड fucking सेक्स।" जैसे ही उसने सेक्स का नाम लिया, एक पल के लिए ध्वनि को शर्मिंदगी महसूस होने लगी। क्योंकि पास ही में सर्वेंट खड़ी थी और उसने अपना चेहरा पूरी तरह से झुकाया हुआ था। भले ही सर्वेंट को उसकी बात साफ सुनाई दी थी, लेकिन उसने पूरी तरह से आदर्श की बात इग्नोर कर दी थी। जैसे उसने कुछ सुना ही ना हो। वही ध्वनि की आंखों में नमी उतर आई थी।
दूसरी तरफ मालिनी जी, जोकि फर्स्ट फ्लोर से यह सब कुछ देख रही थी, उनके हाथों की मुट्ठियां कसी हुई थी। ध्वनि को आदर्श के पास आता हुआ देखकर उनका चेहरा गुस्से से कांप रहा था। उनका दिल कर रहा था कि वह अभी ध्वनि को बालों से पकड़े और उसे घर से बाहर निकाल दे। लेकिन ध्वनि को इस तरह से निकालना मालिनी जी के लिए बहुत बड़ी मुसीबत बन सकता था। इसीलिए उन्होंने एक बात सोच ली थी कि किसी तरह से भी चाहे उन्हें आदर्श से छुपा कर ही क्यों ना धानी को इस घर से बाहर निकालना पड़े, वह तब भी निकालेंगे। इस वक्त उनके चेहरे पर अजीब से एक्सप्रेशन थे, जोकि बता रहे थे कि ध्वनि के लिए उनके दिमाग में बहुत कुछ चल रहा था। अगले ही पल, उनके चेहरे पर डेविल स्माइल आ गई और वह अपने फोन से किसी से बात करने लगी।
ऐसे ही सारा दिन बीत गया। आदर्श अपने कमरे में ही रहा और ना ही वह कमरे से बाहर आया। इस वक्त उसने हाथ में मोबाइल पकड़ा हुआ था और मोबाइल में ध्वनि की फोटो लगी हुई थी, जो वह एक टक देखे जा रहा था। ऐसे उसे फोन में देखने में दिक्कत आ रही थी कि तभी उसने अपने मैनेजर को फोन किया। मैनेजर ने एक कॉल पर ही आदर्श का फोन उठाया। दूसरी तरफ आदर्श ने कुछ कहा और मैनेजर ने जी boss कहा और अगले ही पल आदर्श ने फोन काट दिया।
इस वक्त आदर्श ने हाथ में वाइन का गिलास पकड़ा हुआ था और उसकी गहरी नजरें ध्वनि के चेहरे से लेकर उसके क्लीवेज तक जा रही थी।
शाम के 7 बजे,
पार्टी की तैयारी खत्म हो गई थी और अब धीरे-धीरे कर मेहमान भी आने लगे थे। वहीं दूसरी तरफ ध्वनि अपने कमरे में शांति से बेड पर बैठी हुई एक बुक रीड कर रही थी। तभी उसके रूम का दरवाजा खुला और मालिनी जी अंदर की तरफ आई। मालिनी जी को अपने कमरे में देखकर एक पल के लिए ध्वनि की आंखें हैरत से फैल गई। मालिनी जी एक्सप्रेशन लैस होकर ध्वनि की तरफ देख रही थी, जो कि अपनी जगह पर खड़ी हो चुकी थी।
मालिनी जी को अपने कमरे में देखकर ध्वनि को एक अलग ही घबराहट और बेचैनी महसूस होने लगी थी। मालिनी जी अब धीरे से चलते हुए ध्वनि के पास आई और उसकी तरफ देखते हुए बोली, "मेरे बेटे की इंगेजमेंट है, तो ओबवियस सी बात है कि यहां पर सब सर्वेंट काम कर रहे हैं। तो तुम यहां पर क्या कर रही हो। जाओ, जाकर काम करो अपना। सर्वेंट हो, तो सर्वेंट की तरह ही यहां पर काम करो। महारानी नहीं हो यहां की, जो कमरे में बैठकर आराम से बुक पढ़ रही हो। जाओ, जाकर सफाई वगैरह में सर्विस का साथ दो और जूस ड्रिंक वगैरा सर्वे करना, समझी तुम।"
मालिनी जी का इतना रूखापन देख कर ध्वनि की आंखों में नमी छा गई। लेकिन वह कर भी क्या सकती थी। मालिनी जी को जवाब भी नहीं दे सकती थी। इसलिए उसने हां में सिर हिला दिया। ध्वनि ऐसी लड़की थी, जो अपने से बड़ों को तो जवाब बिल्कुल भी नहीं देती थी। इसीलिए उसने अब सिर झुकाया और वहां से जाने को हुई, तभी मालिनी जी ने उसके बालों से उसे पकड़ लिया और अपनी तरफ घूमाते हुए दांत पीसकर बोली, "और ज्यादा चू चपड़ की ना मेरे बेटे के सामने, तो तेरा मुंह तोड़ के रख दूंगी।"
जिस तरह से मालिनी जी ने ध्वनि के बालों को पकड़ा हुआ था, ध्वनि को अपने बालों में दर्द हो रहा था। उसकी आंखों से अब आंसू बहने लगे थे। उसके आंसुओं को देखकर मालिनी जी दांत पीसकर बोली, "बस हो गई शुरू, ड्रामा देखो, जितना मर्जी करवा लो इनसे, चल।" इतना कहकर मालिनी जी ने जोर से ध्वनि को धक्का दिया। जिससे ध्वनि के कदम लड़खड़ा गए। एक पल के लिए वह गिरने को हुई, लेकिन आगे टेबल पड़ा था। जिस वजह से उसका घटना टेबल से लगा और उसका घुटना बुरी तरह से छिल गया। लेकिन मालिनी जी को इस चीज से कोई भी फर्क नहीं पड़ा। वह बड़ा एटीट्यूड दिखाकर ध्वनि को वहां से चली गई। लेकिन ध्वनि को अपने घुटने में बेहिसाब दर्द हो रहा था। वह अपना घुटना पकड़ते हुए लगभग से वहीं पर बैठ गई। अब दर्द से उसकी जान निकलने लगी थी।
To be continue...





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