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Cruel reyansh

गुलेरिया फार्महाउस,

अभी-अभी रेयांश, जो कि कब से आराध्या की ass पर spank पर spank किए जा रहा था, उसने आराध्या की ass crack पर फिंगर रख अपनी फिंगर उसकी ass में पुश कर दी थी। वही आराध्या, जोकि रेयांश के इरादे भांप चुकी थी। जैसे ही रेयांश ने उसकी ass में अपने अंगूठे को पुश किया, वह चिल्ला उठी। वह दर्द से तड़पते हुए बोली, "नो रेयांश।" वही रेयांश, जिसने एक हाथ से उसकी कमर को पकड़ा हुआ था और अब उसने उसकी कमर पर अपना हाथ पूरी तरह से गोल घुमाते हुए उसे और भी ज्यादा तेजी से पकड़ लिया था। क्योंकि उसने अपने हाथों से आराध्या को निकलने नहीं दिया था। वही आराध्या लगातार उसके हाथों में झटपटा रही थी, क्योंकि रेयांश का अंगूठा इस वक्त उसकी ass में था।

वही आराध्या चिल्लाते हुए बोली, "नहीं डैडी, its hurting." लेकिन रेयांश ने अब अपना अंगूठा और भी ज्यादा अंदर की तरफ धकेल दिया। आराध्या को ऐसा लग रहा था, जैसे उसकी ass पूरी तरह से छिल रही हो। वो लगभग से चिल्लाते हुए बोली, "stop it reyansh, मै मर जाऊंगी....aaaahhhhhhh...."

उसकी बात सुनकर रेयांश के चेहरे पर devil smile आ गई। अब उसने अपना अंगूठा बाहर की तरफ निकाला और अगले ही पल अपना dick अपने हाथों में पकड़ते हुए आराध्या की ass line के बीच सेट करते हुए हल्का-हल्का ऊपर नीचे रगड़ने लगा। जिससे आराध्या के रोंगटे खड़े होने लगे। उसका दिल जोरो जोरो से धक-धक करने लगा।

इस वक्त रेयांश उसे किसी डेविल से कम नहीं लग रहा था। जिस तरह से बिहेव रेयांश उसके साथ कर रहा था। इसी तरह रेयांश उसकी ass में अपनी dick पूरी तरह से दबाते हुए ऊपर नीचे कर रहा था। उसे बहुत मजा आ रहा था ऐसी हरकतें आराध्या के साथ करने में। वही आराध्य अब कांपने लगी थी।

उसे कांपता हुआ देखकर रेयांश ने अब अपना dick पीछे की तरफ किया। जिससे आराध्या ने थोड़ी राहत की सांस ली। अगले ही पल रेयांश ने जो किया, उसे महसूस कर आराध्या की सांस हलक में अटक गई। क्योंकि रेयांश ने अपना dick सीधे उसकी ass क्रैक पर रख दिया था। आराध्या की बॉडी शिवर तो कर ही रही थी, साथ ही साथ उसके पसीने भी छूटने लगे थे। इससे पहले रेयांश अपना डिक उसकी ass में थ्रस्ट करता, तभी उस सन्नाटे को तोड़ते हुए रेयांश के कानों में उसके फोन की रिंगटोन सुनाई दी। रिंगटोन के साथ फोन वाइब्रेट हो रहा था और बेड रेस्ट पर पड़ा हुआ था और लगातार बज रहा था। लेकिन रेयांश का ध्यान एक टक आराध्या पर था। अब एक बार फिर से वह अपना dick पूरी तरह से उसकी ass पर घूमा रहा था।

जिससे आराध्या की सांसे गहरी चल रही थी। वही फोन बज कर बंद हो चुका था, लेकिन रेयांश फोन नहीं उठा रहा था। वह तो इस वक्त आराध्या के साथ बिजी था। पर दोबारा से फोन एक बार फिर से बजने लगा, तो इस बार रेयांश के चेहरे पर इरिटेशन भरे भाव आ गए। कुछ सोचते हुए उसने फोन की तरफ देखा और आराध्या की कमर को छोड़ा। जैसे ही रेयांश ने उसकी कमर को छोड़ा, आराध्या हड़बड़ाते हुए सीधी होकर बैठी और अगले ही पल bed की रेस्ट से जा लगी। उसे यूं हड़बड़ाते हुए देखा रेयांश की मुस्कुराहट और भी ज्यादा गहरी हो गई थी। वही एक पल के लिए आराध्या तो बस उसकी तरफ देखती ही रह गई। क्योंकि रेयांश को इस तरह से मुस्कुराते उसने कभी भी नहीं देखा था।

उसकी मुस्कुराहट इस वक्त बेहद दिलकश थी। आराध्या की नजर तो उसके चेहरे पर ठहर सी गई थी। वहीं रेयांश अब अपनी जगह से सीधा खड़ा हुआ और अपने कदम उसने फोन की तरफ बढ़ा दिए। फोन पर इस वक्त दादी का कॉल आ रहा था। दादी का कॉल को देखकर एक पल के लिए रेयांश की आईब्रो ऊपर की तरफ उठ गई थी। उसने अब फोन ऑन किया और लाउडस्पीकर पर लगा दिया। लाउडस्पीकर पर लगाकर अगले ही पल वह पूरी तरह से बेड पर झुका और आराध्या की टांग पकड़कर उसने सीधे अपनी तरफ खींच लिया।

जिस तरह से उसने आराध्या को अपनी तरफ खींचा था, एक पल के लिए आराध्या तो जैसे सांस लेना ही भूल गई थी। वहीं रेयांश अब पूरी तरह से उसके ऊपर चढ़ चुका था। जैसे ही रेयांश उसके ऊपर चढ़ा, उसका dick आराध्या की pussy से टकरा गया। एक पल के लिए आराध्या की सिसकी निकल गई। वहीं दूसरी तरफ फोन पर दादी की चिल्लाते हुए आवाज आई, "रेयांश, जल्दी घर पहुंचे। अर्चना अपने पिताजी मिस्टर खन्ना के साथ यहां पर आई हुई है और वह तुमसे बहुत इंपॉर्टेंट बात करना चाहती हैं। जल्दी घर आओ।" जैसे ही दामिनी जी ने यह बात कही, रेयांश के जबड़े पूरी तरह से कस गए।

अब वह पूरी तरह से आराध्या के ऊपर से हटा। वह दामिनी जी को आगे से जवाब देते हुए बोला, "आई एम कमिंग, दादी।" रेयांश सीधा खड़ा हुआ और देखते ही देखते वार्डरोब में चला गया। वहीं आराध्या तो बस हैरानी से रेयांश की तरफ ही देख रही थी। लेकिन उसे भी अब दादी की चिंता होने लगी थी कि आखिर हुआ क्या है। और यह अर्चना खन्ना है कौन? यह सोचते हुए वह अब अपनी जगह से खड़ी हुई और देखते ही देखते उसने भी अपने कपड़े वार्डरोब से निकाले और पहनना शुरू कर दिए।

तकरीबन आधे घंटे बाद,

रेयांश और आराध्या इस वक्त गुलेरिया हाउस के हाल में खड़े थे। वही सामने ही मिस्टर खन्ना और अर्चना भी बैठी हुई थी। रेयांश अपनी गहरी नजरों से सामने अर्चना को देख रहा था, जो कि उसे देखकर तिरछी मुस्कुराहट के साथ बोली, "तुमने तो मेरे साथ इंगेजमेंट की ही नहीं, रेयांश,सीअब इंगेजमेंट तुम नहीं करोगे, तो मैं तो कुछ ना कुछ करूंगी ही ना। इसीलिए पापा को कहकर मैंने आज शाम की इंगेजमेंट रखवाली है। अब तुम बताओ, तुम तैयार होना इस चीज के लिए।" अर्चना की बात सुनकर एक पल के लिए आराध्या का दिल धक सा रह गया। वह तो बस हैरानी से रेयांश की तरफ देखे जा रही थी। ऐसा लग रहा था, जैसे उसके पैरों तले से जमीन ही किसी ने खींच ली हो।

वही मिस्टर खन्ना दामिनी जी की तरफ देखते हुए बोले, "बोलिए ना मिसेज दामिनी गुलेरिया, आप कुछ बोल क्यों नहीं रही है और ना ही आपका पोता कोई जवाब दे रहा है?" उसकी बात पर दामिनी जी हल्का सा मुस्कुराते हुए बोली, "अरे बैठिए तो सही खन्ना साहब, अभी रेयांश जवाब देगा ना अपनी बात का। अब इसमें मै क्या बोल सकती हूं। इंगेजमेंट तो उसकी है ना।" तभी रेयांश मिस्टर खन्ना की तरफ देखते हुए बोला, "इसमें मुझसे पूछने वाली बात ही कौन सी थी। जब इंगेजमेंट आज नहीं तो कल होनी ही थी, तो आप क्यों बार-बार मुझसे पूछ रहे हैं। आपको जब रखनी है, रख लीजिए। आई डोंट केयर अबाउट एनीथिंग।"

रेयांश का बस इतना कहना था कि आराध्या की बस जान निकलनी बाकी रह गई थी। बाकी उसमें कुछ नहीं बचा था। इस वक्त उसके पैर जैसे उसका साथ ही नहीं दे रहे थे। सांस जैसे लेना ही उसके लिए दुश्वार हो गया था। अगले ही पल, उसे जोरों से चक्कर आने लगी और एक पल के लिए उसके पैर लड़खड़ा गए। जैसे ही उसके पैर लड़खड़ाए, एक पल के लिए रेयांश की आंखें बड़ी हो गई। वह उसकी तरफ बढ़ने को हुआ कि तभी आराध्या खुद को संभालते हुए उसकी तरफ हाथ दिखाकर रोकते हुए बोली, "मैं खुद को संभाल सकती हूं, मिस्टर रेयांश गुलेरिया।" जैसे ही उसने यह बात कही, वहां पर खड़ी दामिनी जी हैरानी से आराध्या की तरफ देखने लगी। वही रेयांश भी एक्सप्रेशन लैस होकर सामने खड़ी आराध्या की तरफ देख रहा था। उसके चेहरे पर इस वक्त कोई भाव नहीं था।

वही आराध्या गहरी गहरी सांस भरते हुए अब ऊपर की तरफ चली गई। उसे इस वक्त सांस लेने में बहुत ज्यादा दिक्कत हो रही थी। देखते ही देखते वह अब अपने कमरे में आई और अपना दरवाजा पूरी तरह से लॉक कर फूट फूट कर रोने लगी। जितनी वह स्ट्रांग बन रही थी आज, रेयांश ने उसे उतनी ही बुरी तरह से तोड़ दिया था। एक तो कल रात जिस तरह से किसी और के साथ में इंटीमेट हुई थी, उस चीज को लेकर उसकी जान निकल रही थी। दूसरी बात, रेयांश ने जो हरकत की थी, शायद वह रेयांश पर भरोसा भी ना कर पाती। इसीलिए वह अपने होठों पर हाथ रख फूट कर रोते हुए वहीं जमीन पर गिर पड़ी और नीचे जमीन पर लेटते हुए ही चीखते हुए बोली, "क्यों...

रेयांश क्यों, how could you...?"

To be continue....

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