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Nafrat

चौधरी villa,

इस वक्त घर में तैयारी चल रही थी। आज आदर्श घर पर आने वाला था। वही मालिनी जी, जो कि उसकी मॉम थी, वह इस वक्त पूरी तरह से घर को डेकोरेट करवा रही थी। क्योंकि उन्होंने प्रोग्राम बनाया था कि रात को आदर्श की इंगेजमेंट होने वाली थी। इस वक्त मालिनी जी का चेहरा पूरी तरह से दमक रहा था। जो चमक उनके चेहरे पर इस वक्त बनी हुई थी, वह शायद ही कभी बनी होगी। एक बेटा तो उन्होंने खो दिया था, लेकिन अब अपने दूसरे बेटे की खुशी में वह फूले नहीं समा रही थी। इस वक्त उनकी आंखें नम हो रही थी, क्योंकि आज ही आदर्श आने वाला था।

अभी वह घर की डेकोरेशन करवा ही रही थी कि तभी पीछे से आवाज आई, जो कि इस घर की एक हेड मेड की थी।

वो head मेड मालिनी जी के आगे आकर सिर झुकाते हुए बोली, "मैडम, सारी तैयारियां हो चुकी है। बस थोड़ा बहुत basement का काम बचा है, क्योंकि basement में कोई जाता रहता नहीं है ना।" जैसे ही उसने बेसमेंट की बात सुनी, एक पल के लिए मालिनी जी के चेहरे पर अजीब से एक्सप्रेशन आ गए। वह गहरी आवाज में बोली, "वहां पर जाने की जरूरत भी नहीं है, समझी। जितना हो गया, ठीक है। फूलों से सारा कर कर दिया ना, कोई जगह रह तो नहीं गई।" इतना कहते हुए मालिनी ने सामने खड़ी हैड मेड जूलिया की तरफ देखा।

जूलिया उसकी तरफ सिर झुकाते हुए बोली, "जी मेम साहेब।" इस वक्त जूलिया ने जिस तरह से सिर मालिनी के आगे झुका रखा था, ऐसा लग रहा था, जैसे किसी मजबूरी में आकर मालिनी जी के आगे सिर झुका रही हो। अब वह सीधी हुई और मालिनी जी की तरफ देखते हुए बोली, "थैंक यू मैडम, अब मुझे चलना चाहिए। बिकॉज मेरा होस्टेड जाना बहुत जरूरी है।" उसकी बात सुनकर मालिनी जी ने सिर हिलाया और जूलिया वहां से चली गई।

अभी जूलिया वहां से निकली ही थी कि तभी एक गाड़ी की आवाज बाहर से सुनाई दी। उसी के साथ 20 से 30 गाड़ियों के काफिले उस गाड़ी के पीछे चल रहे थे।

जैसे ही गाड़ियों का काफिला दरवाजे के आकार आकार रुका, मालिनी जी का चेहरा पूरी तरह से खिल गया। तभी उसे दरवाजे पर से कब कुछ कदमों की आवाज सुनाई दी।।उनकी नजर सामने खड़े आदर्श पर गई। अगले ही पल मालिनी जी की आंखों में नमी उतर आई। वह तेजी से भागते हुए आदर्श के पास जाकर उसके गले लग गई। लेकिन जैसे ही गले लगते ही उसने पीछे की तरफ देखा, तो उसकी आंखें हैरत से फैल गई। अब उसने आदर्श की तरफ देखा, जो उसे ही एक्सप्रेशन लेस चेहरे से देख रहा था।

अब मालिनी जी उसकी तरफ देखते हुए बोली, "यह लड़की यहां पर क्या कर रही है?" उसके इतना कहते ही पीछे से ध्वनि बाहर की तरफ आई। ध्वनि को देखकर मालिनी जी का खून खौल उठा। तभी आदर्श उसकी तरफ देखते हुए बोला, "क्यों, आपको उससे क्या प्रॉब्लम है?" "मुझे इससे प्रॉब्लम नहीं होगी, तो क्या होगा। इसकी वजह से तुम्हारे भाई की डेथ हुई है, जानते हो तुम।"

तभी आदर्श मालिनी जी की बात बीच में काटते हुए बोला, "उसकी डेथ इसकी वजह से नहीं हुई है।" तभी मालिनी जी उसकी तरफ देखते हुए दांत पीसकर बोली, "वह उसे 5 साल से प्यार करता था, लेकिन इस लड़की ने उसे अपनी उंगलियों पर नचाया और उसके पास जाने से इनकार कर दिया। इसीलिए उसने सुसाइड किया था।" तभी आदर्श उसकी बात बीच में काटते हुए बोला, "उसने सुसाइड नहीं किया, उसका एक्सीडेंट हुआ था।" तभी मालिनी जी फिर से चिल्लाते हुए बोली, "उसका एक्सीडेंट नहीं हुआ था, उसने खुद सुसाइड किया था।" उसकी बात पर आदर्श ने अब गहरी सांस ली और बोला, "आपको जो लगता है, मैं आपकी सोच बदल नहीं सकता हूं मोम, लेकिन एक्सीडेंट में ध्वनि का कोई हाथ नहीं था।" वही ध्वनि तो बस आदर्श की तरफ ही देखे जा रही थी। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि आदर्श उसकी साइड ले रहा था।

वही मालिनी जी अब दांत पीसकर बोली, "लगता है तुम भूल गए हो कि इसी लड़की ने तुम पर गोली दागी थी और तुम्हारा सीना छलनी किया था।" मालिनी जी की बात पर आदर्श एक बार फिर से गहरी सांस लेते हुए बोला, "मॉम, मैं कुछ नहीं भूला हूं। फिलहाल के लिए प्लीज आप मुझे अकेला छोड़ सकते हैं, मुझे रेस्ट चाहिए।" तभी मालिनी जी दांत पीसकर ध्वनि की तरफ आए और अगले ही पल उसका हाथ पकड़ते हुए बोली, "तुम रेस्ट कर सकते हो। लेकिन यह लड़की इस घर में कदम नहीं रख सकती है। मुझे नफरत है इस लड़की से।" इतना कह कर लगभग से हाथ पकड़ कर खींच कर आगे की तरफ ले जाने को हुई कि तभी आदर्श ने पीछे से ध्वनि का हाथ पकड़ लिया।

आदर्श को ध्वनि का हाथ पकड़ते हुए देख कर मालिनी जी ने पीछे की तरफ देखते हुए बोली, "उसका हाथ छोड़ो।" तभी आदर्श मालिनी जी की तरफ देखते हुए बोला, "सॉरी मॉम, लेकिन यह इस घर में ही रहेगी।" तभी मालिनी जी उसकी तरफ देखते हुए बोली, "पागल हो गए हो तुम, यह लड़की यहां पर नहीं रुकेगी। इसकी वजह से मैंने अपना एक बेटा खो दिया और दूसरे बेटे की जान जाते-जाते रह गई। अभी भी तुम कह रहे हो कि यह हमारे घर पर रहेगी। बिल्कुल नहीं, मैं इस डायन को अपने घर में नहीं रहने दूंगी।"

मालिनी जी के कहे हुए शब्दों को सुनकर ध्वनि की आंखों में नमी उतर आई थी। वह कुछ बोल भी नहीं पा रही थी, क्योंकि आदर्श ने पहले ही उससे कहा था कि वह उसके घर जाकर कुछ नहीं बोलेगी। जिस वजह से उसने अपना मुंह पूरी तरह से बंद कर रखा था। वह चाह कर भी कुछ बोल नहीं सकती थी, क्योंकि आदर्श ने उसे धमकी ही ऐसी दी थी। उसने कहा था कि अगर ध्वनि एक पल के लिए भी वहां पर कुछ बोलेगी, तो वह सीधा उसके घर पर पहुंच जाएगा और उसकी मां की वह हालत करेगा। यह सोचकर ही ध्वनि को उस पर गुस्सा आ रहा था। लेकिन अब जिस तरह से आदर्श उसका पक्ष ले रहा था, उसे हैरानगी भी हो रही थी। लेकिन मालिनी जी की बात पर रोना भी आ रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें।

इस वक्त वह दोनों मां बेटे में उलझ चुकी थी। वही आदर्श अब ध्वनि का हाथ कसकर पकड़ते हुए बोला, "हाथ छोड़िए मां उसका।" तभी मालिनी जी गुस्से से कांपते हुए बोली, "इस डायन ने ऐसा क्या कर रखा है कि मेरे दोनों बेटों को निगलना चाहती है। बता कुत्तियां, क्या चाहती है तू?" इतना कहते हुए वह उसके पास आई और अगले ही पल उसके बालों को मुट्ठी में भरते हुए बोली, "चाहती क्या है तू, काले जादू करती है ना तू?" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी आदर्श बीच में चिल्लाते हुए वाला, "स्टॉप इट मॉम,

आप ध्वनि के साथ ऐसा ट्रीट नहीं कर सकते हैं।" उसकी बात पर मालिनी जी ने अब उसके बाल छोड़े और लगभग से उनकी आंखों में नमी उतर आई थी। वह अब आदर्श की तरफ देखते हुए बोली, "लगता है यह लड़की तुझे बहुत कुछ दे रही है, इसीलिए तेरी जुबान इतनी खुल गई है।" मालिनी जी की बात पर आदर्श ने कुछ नहीं कहा। लेकिन अब मालिनी जी सख्त होते हुए बोली, "ठीक है, अगर यह लड़की यहां पर रहेगी, तो तुझे मेरी एक शर्त माननी पड़ेगी।" उसकी बात सुनकर आदर्श की आईब्रो ऊपर की तरफ उठ गई। लेकिन अगले ही पल जो मालिनी जी ने कहा, उसे सुनकर ध्वनि का दिल धक सा रह गया।

उसकी आंखों से आंसू तेजी से बहने लगे। दूसरी तरफ आदर्श के चेहरे पर इस वक्त कोई भाव नहीं थे। वह पूरी तरह से एक्सप्रेशन लैस था। लेकिन उसने अभी तक कुछ कहा भी नहीं था। मालिनी जी ने अभी-अभी आदर्श के आगे शाम को मिस्टर कपूर की बेटी जिया कपूर से इंगेजमेंट करने को कहा था। जिसे सुनकर आदर्श चुपचाप उनके चेहरे की तरफ देख रहा था। लेकिन ध्वनि, उसका दिल तो जैसे चकनाचूर हो चुका था।

To be continue....

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