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विधवा की आंखें

मथुरा,

एक भव्य मंदिर में,,

एक लड़का, जिसने इस वक्त व्हाइट कलर की धोती पहनी हुई थी और ऊपर से गले में भी वाइट कलर का ही कपड़ा उसने लिया हुआ था। फिर भी उस लड़की की बॉडी हद से ज्यादा अट्रैक्टिव लग रही थी। उसका वह उभरा हुआ सीना, जोकि हद से ज्यादा अट्रैक्टिव था और किसी बॉडीबिल्डर को भी मात दे रहा था। उस लड़के की गर्दन के पीछे एक ड्रैगन का निशान बना हुआ था, जो पूरे उसके शोल्डर तक कवर किया हुआ था। वह ड्रैगन इतना खतरनाक लग रहा था कि कोई भी उसे देखे, तो एक पल के लिए उसकी रूह तक डर जाए। उस ड्रैगन का निशान पूरी तरह से उसके शोल्डर के दोनों तरफ फैला हुआ था।

इस वक्त वह लड़का सामने शिव पार्वती जी की महा आरती में आरती कर रहा था। वही साथ ही में पंडित जी अपना मंत्र उच्चारण करते हुए उस लड़के का साथ दे रहे थे। तभी उस लड़के के कानों में किसी औरत की आवाज पड़ी, "प्रत्यक्ष बेटा, आरती तो तुमने कर ली। अब जरा हमें यह बताओ कि क्या तुम शाम की आरती में सम्मिलित होंगे या नहीं।" जैसे ही उस औरत की आवाज प्रत्यक्ष के कानों में पड़ी, तभी प्रत्यक्ष ने अपनी आंखें खोली, जोकि पूरी तरह से बंद थी। उसकी आंखें, जो बिल्कुल काली थी, उसने अब पलट कर पीछे की तरफ देखा। अब उसका चेहरा सबके सामने था। उसके माथे पर बिखरे हुए बाल, वह काली आंखें, गोरा सा रंग और ऊपर से चेहरे पर छाई लाली,

शार्प जो लाइन, तीखी नाक, उसे और भी ज्यादा अट्रैक्टिव बना रही थी। हल्की-हल्की बियर्ड, कुल मिलाकर प्रत्यक्ष बहुत ज्यादा हैंडसम था। गांव की पूरी लड़कियां प्रत्यक्ष को देखने के लिए इस मंदिर में सम्मिलित थी। सबकी नज़रें एक पल के लिए प्रत्यक्ष पर ठहरी गई थी। प्रत्यक्ष इस वक्त सामने खड़ी औरत, जो कि उसकी चाची थी, उनकी तरफ देखते हुए बोला, "मुझे आपको बताने की जरूरत नहीं है चाची, आप सब जानती हैं।" प्रत्यक्ष की आवाज सुनकर चाची के चेहरे पर तिरछी मुस्कुराहट आ गई। वह पुजारी जी की तरफ देखते हुए बोली, "तो रात की भी तैयारी कर लीजिए। भोजनालय हमारी तरफ से अब का भी और शाम का भी और एक बात याद रखिएगा, पंडित जी दान दक्षिणा में कोई कमी ना आने पाए। हमारा प्रत्यक्ष पूरे 5 साल बाद बाहर से आ रहा है, तो राठौर खानदान की परंपरा है।

दान दक्षिणा में कोई कमी नहीं आती है।" इतना कहकर कमला चाची जी ने उनकी तरफ एक थैली उछाली और अगले ही पल पंडित जी ने वह थैली जल्दी से कैच कर ली। वह मुस्कुराते हुए हाथ जोड़कर बोला, "बिल्कुल माई बाप, आपने कह दिया, तो इसमें पीछे हटने का तो अब कोई सवाल बनता ही नहीं है। और आप फिक्र मत कीजिए, रात को भोजनालय में अलग-अलग प्रकार के पकवान बनाए जाएंगे।" इतना कहते हुए उस पंडित ने पीछे की तरफ एक और पुजारी खड़ा था, उसकी तरफ देखा, तो उस पंडित के चेहरे पर तिरछी मुस्कुराहट आ गई और उसने हां में सिर हिला दिया।

वहीं दूसरी तरफ,

प्रत्यक्ष, जोकि आरती कर चुका था, अब उसने अपने कदम बाहर की तरफ बढ़ाए ही थे कि तभी उसकी नजर साइड में खड़ी हुई लड़कियों की तरफ गई, जो उसकी तरफ देख रही थी। लेकिन उसने अगले ही पल अपनी नज़रें घुमा ली। जैसे ही उसने अपनी नजर घुमाई, लड़कियां अपने दिल पर हाथ रखते हुए बोली, "क्या बात है यार, इसकी एक नजर ही काफी है हमें बोतल में डालने के लिए। यार, मेरी और देख तो ले।" तभी दूसरी लड़की बोली, "तेरी तरफ देखेगा, कभी भी नहीं।" इतना कहते हुए वह उसकी तरफ मुंह बनाते हुए देख रही थी। लेकिन अगले ही पल, उसके दिमाग पर की बत्ती जली और उसकी तरफ देखते हुए बोली, "क्या रे तूने प्राची को साथ में नहीं बुलाया।" उसकी बात पर वह लड़की सुकन्या मुंह बनाते हुए बोली, "तेरा दिमाग खराब है क्या,

उसकी मम्मी आने देगी उसे यहां पर।" तभी पहली लड़की, जो कि उसे प्राची के बारे में पूछ रही थी, जिसका नाम रुखसाना था। वह अब मायूसी भरा मुंह बनाते हुए बोली, "पता नहीं उस लड़की ने इस डायन का क्या बिगाड़ रखा है कि यह डायन उस लड़की के छोड़ती ही नहीं।" तभी सुकन्या भी उदास होते हुए बोली, "अरे यार, क्यों बार-बार मुझे ऐसी बातें करके बेचैन कर देती है। एक तो बेचारी का पहले ही पति मर चुका है और दूसरी बात, अगर वह यहां पर आ जाती, तो हो सकता है कि उसकी मम्मी उसे जीने ही ना देती। इसीलिए मैंने भी उसे नहीं कहा।" उसकी बात पर रुखसाना मुंह बनाते हुए बोली, "तुझे ना सच में अकल ही नहीं है। एक बार उससे पूछ तो लेती, क्या पता छुपाते छुपाते वह पहुंच जाती यहां पर।"

उसकी बात पर सुकन्या की आंखों में चमक आ गई। वह अब खिलखिलाते हुए बोली, "क्यों ना हम रात को प्राची को यहां ले आए। *वैसे भी वह बेचारी कहां ही, उस कुतीया के कारण कहीं जा पाती है।* सुकन्या की बात पर रुखसाना बोली, "हां हां, यही करते हैं हम।" इतना कहते हुए वह अब उसकी तरफ कंधा मारते हुए बोली, "चल चल, यहां से वह तो गए।" इतना कहते हुए उसने गाड़ी की तरफ देखा, जहां पर अभी-अभी प्रत्यक्ष गाड़ी में बैठा ही था। अगले ही पल, उसकी गाड़ी तेजी से वहां से निकल गई।

तभी सुकन्या उसकी तरफ देखते हुए बोली, "हाय यार, लेकिन कितना हैंडसम था।" उसकी बात पर रुखसाना बोली, "और हैंडसम था ना, तो लड़की भी वैसी ही ढूंढेगा। चल चल, मुंह उठा कर उसकी तरफ देखना बंद कर दे। वह तुझे देखने नहीं वाला, ना वह तुझे भाव देने वाला है।' इतना कहकर वह उसे लेकर वहां से चली गई।

दूसरी तरफ प्रत्यक्ष की गाड़ी इस वक्त तेजी से गांव के बीच में से होते हुए जा रही थी। उसकी गाड़ी की स्पीड काफी ज्यादा तेज थी और ऊपर से रास्ता बहुत ज्यादा मिट्टी वाला था। जिस वजह से वहां पर काफी ज्यादा धूल उड़ रही थी। अगले ही पल प्रत्यक्ष ने गाड़ी का मिरर पूरी तरह से ऊपर की तरफ कर लिया था, क्योंकि वह नहीं चाहता था कि बाहर की धूल अंदर की तरफ आए। लेकिन उसकी गहरी काली आंखें अभी भी बाहर की तरफ थी। वहीं दूसरी तरफ एक लड़की, जिसने व्हाइट कलर का सूट पहना हुआ था और इस वक्त उसने अपने चेहरे को पूरी तरह से चुनरी से ढक रखा था, क्योंकि सड़क पर काफी ज्यादा मिट्टी उड़ रही थी। पास में से कभी कोई चीज निकल रही थी, कभी कोई चीज निकल रही थी। यह सड़क अभी बननी बाकी थी। वह लड़की अपने सिर पर दो मटके रखे हुए धीमे-धीमे चल रही थी कि तभी उसके गांव की गली आ गई, तो वह अपनी गली की तरफ मुड़ने के लिए सड़क पार कर ही रही थी। तभी एक कार इतनी तेजी से उसकी तरफ आई। अगले ही पल, वह अभी सड़क के बीचों बीच पहुंची ही थी कि गाड़ी ने ब्रेक लगा दिए। उस गाड़ी को इतनी तेजी से अपनी तरफ बढ़ता हुआ देखकर उस लड़की के हाथों में पकड़े हुए मटके, जो कि उसने सिर पर रखे हुए थे, वह एकदम से छूट गए। अब उसके मटके जमीन पर पड़े हुए थे और पानी उन मटको से बाहर की तरफ बह रहा था।

उन मटको को यूं देखकर उस लड़की की आंखों में आंसू उतर आए। उन मटकों को देखकर उस लड़की को अपने दिल में दर्द महसूस हो रहा था। ना जाने वह कितनी ही दूर से जाकर पानी के मटके भर कर लाई थी। अब मटके पूरी तरह से जमीन पर बिखरे पड़े थे। वह पूरी तरह से चकनाचूर हो चुके थे। तभी गाड़ी में से ड्राइवर बाहर की तरफ निकला और गुस्से में चिल्लाते हुए बोला, "अंधी हो क्या, चलना नहीं आता? बेवकूफ लड़की, उठ यहां से, सड़क के बीचो-बीच आकर खड़ी हो गई। कितना नुकसान होने वाला था हमारा, अभी मर मरा जाती तो।"

उसकी बात पर उस लड़की ने अपनी मासूम आंखों से अपनी नजरे उठाकर उस ड्राइवर की तरफ देखा। अभी भी उसकी आंखों में आंसू आ रहे थे। वह ड्राइवर की तरफ देखते हुए बोली, "लेकिन साहब, गलती हमारी नहीं थी।" उसने इतना ही कहा था कि तभी ड्राइवर उसकी तरफ दांत पीसकर बोला, "नहीं मेरी गलती थी, मैं बीच में आकर खड़ा हो गया था सड़क के।

तू किनारे किनारे चल रही थी, हम बीच में आकर खड़े हुए थे। हमारी गाड़ी जानबूझकर तुझे ठोकने के लिए..।" अभी वह बोल ही रहा था कि तभी पीछे से गाड़ी का दरवाजा खुला और प्रत्यक्ष बाहर की तरफ आया। अभी भी उस लड़की ने अपने चेहरे को पूरी तरह से ढक रखा था। उसका चेहरा दिख नहीं रहा था। अगर दिख रहा था, तो उसकी वह मासूम आंखें।

तभी ड्राइवर उसकी तरफ देखते हुए बोला, "जानती भी है किसकी गाड़ी के आगे जाकर गिरी है तू, प्रत्यक्ष राठौर, पूरे मथुरा का राजकुमार है वह और तू उनकी गाड़ी के आगे आकर गिर गई। शर्म नहीं आती तुझे, उठ यहां से। किसी और की गाड़ी के नीचे आकर मरना, समझी।" इतना कहकर ड्राइवर लगभग से उसके ऊपर झुका और उसका हाथ पकड़ते उसे सीधा खड़ा कर दिया। जिस प्राची पूरी तरह से उसके सामने खड़ी हो चुकी थी। लेकिन उसने एक पल के लिए भी अपने हाथ में पकड़ा हुआ पल्लू नहीं छोड़ा था, जो उसने अपने मुंह पर रख रखा था।

उसके वह लंबे बाल कमर से भी नीचे आ रहे थे। वह हद से ज्यादा खूबसूरत थी। वह ड्राइवर की तरफ देखते हुए बोली, "देखिए, मेरी बात सुनिए, हमारी गलती नहीं है। हमारे मटके...।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी पीछे से एक सर्द आवाज ड्राइवर के कानों में पड़ी। उस आवाज को सुनकर ड्राइवर के हाथ पैर ठंडे पड़ गए। उसने अब पलट कर प्रत्यक्ष की तरफ देखा और बोला, "माफ कीजिएगा, यह लड़कियां ऐसा ही काम करती है। जानबूझकर अमीर लड़कों को फसाने के लिए ऐसी हरकतें करती हैं।" वह बोल ही रहा था कि तभी Prachi उससे बोली,

"देखिए ड्राइवर बाबू, हम ऐसी लड़की नहीं है।" जैसे ही प्राची ने यह बात कही, प्रत्यक्ष की नजरे उसकी तरफ उठ गई। प्रत्यक्ष की आंखें प्राची की आंखों पर ठहर गई, जो हद से ज्यादा खूबसूरत थी। लेकिन उसका चेहरा अभी दिखाई नहीं दे रहा था। उसकी वह सफेद चुनरी, जिसमें से हल्के-हल्के हिलते हुए होंठ, जो बिल्कुल मामूली से दिख रहे थे। प्रत्यक्ष की नजरे एक पल के लिए उन पर ठहर गई थी। लेकिन वह चुपचाप प्राची की तरफ देख रहा था। दूसरी तरफ ड्राइवर उसकी तरफ घूमते हुए देखने लगा। लेकिन उसने अब कुछ नहीं कहा। वही प्राची अब अपना सिर झुकाते हुए बोली, "साहब, हम जान बुझ कर गाड़ी के आगे नहीं आए थे। हम ऐसी खटिया हरकत क्यों करेंगे। और रही बात उन लड़कियों की, देखिए हमें नहीं पता कि वह लड़कियां कैसी होती है, जो अमीर खानदान के लोगों को फसाना जानती हैं। हम तो बस इतना जानते हैं कि साहब हम तो विधवा हैं और विधवा कभी ऐसी नहीं होती कि जो अमीर खानदान के लोगों को पसंद करे। माफ कर दीजिएगा, हमारी वजह से आपको अगर दिक्कत हुई हो तो।" इतना कहते हुए प्राची ने अब अपने मटकों की तरफ देखा।

फिर वह अपने गांव की तरफ मुड़ने ही वाले थी कि तभी प्रत्यक्ष की आवाज प्राची के कानों में पड़ी।।प्रत्यक्ष की आवाज सुनकर एक पल के लिए प्राची के कदम वहीं पर रुक गए। प्रत्यक्ष ने अब अपने कदम उसकी तरफ बढ़ाए कि तभी प्राची उसकी तरफ पलटी और उसकी तरफ देखते हुए बोली, "देखिए साहब।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी प्रत्यक्ष उसकी बात बीच में काटते हुए बोला, "तुम्हारे मटकों का कितना नुकसान हुआ है? कितने पैसे हुए तुम्हारे मटकों के?"

तभी प्राची ने अपनी नज़रें प्रत्यक्ष की तरफ उठाई। जैसे ही उसकी नजरें प्रत्यक्ष की नजरों से टकराई, एक पल के लिए दोनों की नजरे आपस में मिली। लेकिन अगले ही पल प्राची ने अपनी नज़रें प्रत्यक्ष से हटाते हुए आंखों को नीचे कर लिया और धीमे से बोली, "मुझे कुछ नहीं चाहिए साहब, आप जा सकते हैं। शुक्रिया पूछने के लिए।" इतना कहकर वह अब जल्दी से वहां से निकल गई थी। लेकिन प्रत्यक्ष की नजरे अभी भी उस पर ठहरी हुई थी। ना वह कुछ बोल रहा था, ना वह कुछ कह रहा था। बस उसे गहरी नजरों से देख रहा था।

ड्राइवर अभिषेक झुककर प्रत्यक्ष के सामने खड़ा हुआ था। इस वक्त ड्राइवर को प्राची पर हद से ज्यादा गुस्सा आ रहा था। उसे लग रहा था कि प्राची उसे नीचा दिखाने के लिए ऐसे कर रही थी। इसीलिए वह दांत पीसते हुए बोला, "तुझे तो मैं बाद में देख लूंगा। इसी गांव की है ना तू।" वही प्रत्यक्ष ने अब उसे देखा और बोला, "चलो, जल्दी से राजमहल जाना है।"

इतना कहकर प्रत्यक्ष अब गाड़ी में बैठा और उसकी गाड़ी एक बार फिर से वहां से निकल चुकी थी। लेकिन पीछे बैठा प्रत्यक्ष, उसकी आंखों के सामने प्राची की आंखें घूमने लगी थी। भले ही उसने प्राची का चेहरा नहीं देखा था। लेकिन उसकी आंखें प्रत्यक्ष को बहुत कुछ कह गई थी।

एक पल के लिए वह खुद में ही बड़बड़ाया,, उस विधवा की आंखें .....

To be continue.....

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