
अगले दिन,
एक लड़की अस्पताल के बेड पर लेटी हुई थी, जोकि पूरी तरह से बेजान थी। उसके चेहरे पर एक भी भाव नहीं था और इस वक्त उसके पास एक शख्स खड़ा था, जिसकी गहरी नजरे उस लड़की के चेहरे पर टिकी हुई थी। यह लड़की कोई और नहीं, बल्कि सांवरी थी। जिसका चेहरा पूरी तरह से पीला पड़ चुका था। सांवरी इस वक्त पूरी तरह से बेहोशी में थी। सारी रात एक पल के लिए भी उसने आंख नहीं खोली थी। उसके सामने खड़ा हुआ शख्स कोई और नहीं, रणवीर था। जो उसे कल रात अभय की गाड़ी से उठाकर यहां पर लेकर आया था।
तकरीबन 15 मिनट बाद सांवरी ने अपनी हल्की-हल्की आंखें खोली, तो सामने रणवीर को देखकर उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं आया। भले ही रणवीर उसके सामने खड़ा था, लेकिन उसका चेहरा अभी भी एक्सप्रेशन लेस था। इस हद तक अब उसे अंदर तक चोट पहुंची थी कि उसकी आंखों में सारे ख्वाब और भाव ही मर गए थे। वहीं रणवीर उसकी तरफ देखते हुए बोला, "कैसी हो अब तुम?" उसकी बात पर सांवरी ने कोई जवाब नहीं दिया, बस चुपचाप सीलिंग की तरफ देखती रही। तभी रणवीर एक बार फिर से बोला, "तुम्हें पता है, हम कहां पर हैं।" उसकी बात पर सांवरी ने कोई जवाब नहीं दिया। लेकिन अगले ही पल जो रणवीर ने कहा, उसे सुनकर सांवरी की आंखें बड़ी हो गई।
"हम इंडिया से बाहर आ चुके हैं। इस वक्त हम रसिया में है।" जैसे ही रणवीर ने यह बात सांवरी को कहीं, सांवरी के होश पूरी तरह से उड़ गए। वह अपनी बड़ी-बड़ी आंखों से रणवीर की तरफ देखने लगी। उस की खांसी छूट गई। वह उसकी तरफ देखते हुए बोली, "लेकिन हम यहां पर कैसे पहुंचे? और मुझे इतना दर्द क्यों हो रहा है?" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी रणवीर उसके कंधे पर हाथ रखते हुए बोला, "पहले तुम लेटी रहो, तुम्हारी तबीयत बिल्कुल ठीक नहीं है। दूसरी बात, हम यहां पर आए हैं, बिकॉज आप..।" इतना कहकर वह चुप हो गया। लेकिन सांवरी उसे अब शक भरी नजरों से देख रही थी कि रणवीर कुछ बोलेगा। लेकिन रणवीर ने कुछ नहीं कहा। सांवरी उसकी तरफ देखते हुए बोली, "बोलो ना कि तुम मुझे यहां पर क्यों लेकर आए हो? यहां पर मैं किसी को जानती भी नहीं हूं और मैं यहां पर रहूंगी कैसे?
और मेरे शरीर में यह दर्द क्यों?" उसकी बात पर रणबीर ने गहरी सांस ली और उसकी तरफ देखते हुए बोला, "तुम्हारा एक्सीडेंट हुआ था।" सांवरी को याद आया कि जब वह गाड़ी में थे, तो उसकी हल्की सी आंखें खुली थी। जिससे उसने गाड़ी के सामने की तरफ देखा था और तभी उनका एक्सीडेंट हो गया था। उसे याद करते हुए उसने अपना सिर पकड़ लिया, क्योंकि इस वक्त उसके सिर में भी हद से ज्यादा दर्द महसूस हो रहा था। अब वह उसकी तरफ देखते हुए बोली, "और वह ठाकुर साहब, उनका क्या हुआ?" जैसे ही उसके मुंह से ठाकुर साहब निकला, अगले ही पल रणवीर ने उसकी गर्दन पकड़ ली और उसके चेहरे पर झुकते हुए दांत पीसकर बोला,
"एक बात याद रखना, तुम्हें यहां सिर्फ मैं अपने लिए लाया हूं। रही बात अभय ठाकुर की, तो आई डोंट केयर अबाउट हिम कि वह जिंदा रहे या मर जाए।" उसकी बात पर एक पल के लिए सांवरी उसकी तरफ देखते ही रह गई। उसे तो समझ ही नहीं आया कि रणबीर ने आखिर उसे ऐसा रिएक्शन क्यों दिया। वह तो बस एक टक रणवीर की तरफ देखे ही जा रही थी। वहीं दूसरी तरफ,
इंडिया में,
Hospital में,
अभय इस वक्त बेड पर लेटा हुआ था और उसकी आंखें पूरी तरह से बंद थी। सिर पर पट्टी की गई थी। डॉक्टर अभी भी उसका इलाज कर रहे थे, क्योंकि उसकी कंडीशन कुछ खास ठीक नहीं थी। लेकिन फिर भी इतनी क्रिटिकल नहीं थी। उसकी सांसे काफी नॉर्मल चल रही थी। लेकिन फिर भी उसकी आंखें नहीं खुली थी रात की। तभी निर्मला जी अंदर की तरफ आई और डॉक्टर की तरफ देखते हुए बोली, "इसे होश कब तक आ जाएगा?" डॉक्टर उसकी तरफ देखते हुए बोले, "कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसा लग रहा है, जैसे इनके सिर पर काफी हद तक चोट लगी है। लेकिन सांस फिर भी नॉर्मल चल रही है। खतरे से बाहर हैं, पर चोट गहरी है। जिस वजह से अभी तक होश नहीं आया है।" उसकी बात पर निर्मला जी की आंखों में आंसू आ गए। वह उस डॉक्टर की तरफ देखते हुए बोली, "डॉक्टर साहब, इनके साथ मेरी बहू भी थी, क्या वह भी हॉस्पिटल आई थी?" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी डॉक्टर उसकी तरफ देखते हो बोले, "यह अकेले ही थे, जब इस अस्पताल में आए थे। उनके साथ और कोई भी नहीं था।"
डॉक्टर की बात सुनकर निर्मला जी की सांस रुकने लगी। वह अभय की तरफ देखते हुए बोली, "मुझे किसी तरह से सांवरी को ढूंढना होगा। अगर अभय को पता चल गया, वह तो हमारी जान ले लेगा कि सांवरी गई कहां पर।" इतना कहते हुए निर्मला जी के चेहरे पर परेशानी झलक रही थी। वह इतना तो जानती थी कि अगर अभय उठ गया और उसने सांवरी के बारे में पूछ लिया और उसे सांवरी का नहीं पता चला, तो हो सकता है कि पूरा घर सिर पर उठा ले। लेकिन तभी अभय की आंखें हल्की-हल्की खुलने लगी। जैसे ही अभय की आंखें खुली, तो निर्मला जी को देखकर उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था। उसने डॉक्टर की तरफ देखा, तब भी उसके दिमाग में कोई भाव नहीं था। लेकिन जब उसके सिर में दर्द हुआ, तो एक पल के लिए उसकी आह निकल गई।
वह लगभग से चिल्लाते हुए बोला, "मादरचोद! मेरे सिर में चोट कैसे लग गई?" जैसे ही उसने ऐसा कहा, डॉक्टर एक पल के लिए उसकी तरफ देखते हुए बोले, "देखिए मिस्टर ठाकुर, आप यहां पर अस्पताल में बैठे है।।आप यहां पर ऐसी बात नहीं कर सकते।" अभी डॉक्टर ने इतना ही कहा था कि तभी अभय अपनी जगह से उठा और अपने हाथों से कनोला निकाल कर बोला, "कौन है बे तू और मुझे तू बताएगा कि मुझे तुझसे कैसे बात करनी है, कैसे नहीं। जानता नहीं है क्या तू मुझे, साले haraamii लड़की को उठा कर ले जाऊं क्या तेरी।" इतना बोलते हुए अभय उसकी तरफ आ चुका था। वही डॉक्टर अपनी बड़ी-बड़ी आंखों से अभय की तरफ देख रहा था। वहीं दूसरी तरफ निर्मला जी भी हैरानी से अभय की तरफ देख रही थी। अभी तक अभय ने सांवरी का जिक्र क्यों नहीं किया था।
यह सोच सोच कर निर्मला जी को अजीब लग रहा था। वह डॉक्टर की तरफ देख रही थी कि तभी डॉक्टर निर्मला जी की तरफ देखते हुए बोले, "यह आपका बेटा हमसे कैसे बात कर रहा है?" अभी वह बोल ही रहा था कि तभी अभय उसके पास आकर उसे कॉलर से पकड़ते हुए बोला, "चल बे, तू मुझे बताएगा। फिर से तू वही हरकत कर रहा है। अभी एक पंच तेरे मुंह पर जड़ दूंगा। मुझे बता रहा है।" इतना कहकर उसने लगभग से डॉक्टर को धक्का दिया और वहां से निकल गया। उसको जाते हुए देखकर निर्मला जी और भी ज्यादा हैरान हो गई। अब वह डॉक्टर की तरफ देखते हुए बोली, "डॉक्टर, इन्होंने अपनी पत्नी के बारे में क्यों नहीं पूछा? उनकी पत्नी सांवरी भी कल उनके साथ आई थी और उनके बारे तो कोई बात ही नहीं की उसने।"
वही डॉक्टर के चेहरे पर भी अजीब एक्सप्रेशन आ गए। निर्मला जी की बात सुनकर डॉक्टर ने गहरी सांस ली और बोले, "उनकी एक रिपोर्ट है, जो अभी कुछ देर में आने वाली है। पहले वह देखनी होगी। तब जाकर पता चलेगा कि आखिर इनका बिहेवियर ऐसा क्यों है।" इतना कहते हुए वह अब वहां से जाने लगे कि तभी निर्मला जी रोकते हुए बोली, "देखिए डॉक्टर, मेरा यह जानना बहुत जरूरी है।" तभी डॉक्टर पीछे की तरफ पलटते हुए बोले, "देखिए, हमें अपना काम करने दीजिए। ECG रिपोर्ट आएगी, तभी जाकर पता चलेगा। आपको वेट करना चाहिए।"
वही निर्मला जी अब सामने ही 3 सीटर कुर्सी पर जाकर बैठ गई। तकरीबन एक घंटा ऐसे ही बीत गया। तभी निर्मला जी के पास एक नर्स आई। वह उनकी तरफ देखते हुए बोली, "आपको डॉक्टर बुला रहे हैं।" जैसे ही नर्स ने यह बात कही, निर्मला जी जल्दी से अपनी जगह से उठी और डॉक्टर के केबिन में चली गई। अब डॉक्टर उनकी तरफ देखते हुए बोले, "बैठिए।" जैसे ही डॉक्टर ने यह बात कही, निर्मला जी उनके सामने आकर बैठ गई। डॉक्टर अब एक रिपोर्ट, जोकि उनके सामने ही पड़ी हुई थी, उसे देखकर अब गहरी सांस लेते हुए बोले, "देखिए, आपके बेटे की याददाश्त जा चुकी है, जो कि पिछले 3 साल की है। अब उन्हें यह नहीं याद कि उनकी शायद शादी हुई है। यह सिर्फ एक रिपोर्ट से इतना है कि वह पिछले 3 साल की याददाश्त खो चुके हैं। लेकिन उनकी शादी को कितना समय हुआ है, क्या मैं आपसे पूछ सकता हूं?" तभी निर्मला जी, जो हैरानी से डॉक्टर की तरफ देख रही थी, वह अपनी लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली, "एक साल।" जैसे ही उसने यह बात कही, तो डॉक्टर मायूस होते हुए बोली, "हमें इस चीज की बहुत ज्यादा तकलीफ है। लेकिन वह इस वक्त सब कुछ भूल चुके हैं। उन्हें यह चीज याद ही नहीं है कि उनकी कोई बीवी भी है।" इतना कहकर डॉक्टर ने अब रिपोर्ट्स की तरफ देखा और बोला, "उनकी हालत अभी क्रिटिकल है। उन्हें अंडर ऑब्जर्वेशन रखना बहुत जरूरी है। मैं आपके आगे रिक्वेस्ट करता हूं कि आप अपने बेटे को यहां पर वापस लेकर आए।" इतना कहकर डॉक्टर अब वहां से उठे और चले गए। वहीं निर्मला जी तो बस अपनी जगह पर जमी रह गई।
To be continue...





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