
Guleria house,
आराध्या इस वक्त रेयांश के सामने लेटी हुई थी और उसके बदन पर उसका gawn तो था, लेकिन उसकी पैंटी रेयांश ने उतार दी थी। उसकी पुसी के अंदर एक डिवाइस उसने खुद इंजेक्ट कर रखा था, जिसका रिमोट रेयांश के पास था। उसने उसे ऑन कर रखा था और वह बहुत तेजी से वाइब्रेट हो रहा था। जिस वजह से अभी कुछ देर पहले आराध्या का pee बीच में ही निकल गया था। दूसरी तरफ रेयांश ने अपने हाथ की उंगलियों से उसकी pussy को सहला ही रहा था। तभी दरवाजा नॉक हुआ और दरवाजे पर से दादी की आवाज आई। "रेयांश, आराध्या कहां है, बेटा? कब से उसे ढूंढ रही हूं, मिल नहीं रही है क्या वह तेरे साथ है?"
इतना कहते हुए दादी की आवाज में घबराहट साफ थी, क्योंकि वह इतना तो समझ चुकी थी कि आराध्या पूरी तरह से नशे में है। वही आराध्या, जिसकी हालत खराब हो रखी थी, उसके चेहरे पर अब हल्की सी परेशानी झलकने लगी। भले ही वह नशे में थी, लेकिन उसे दादी की आवाज साफ सुनाई दे रही थी।
वहीं दूसरी तरफ बाहर खड़ी दादी, जो कि दरवाजे के आगे खड़ी थी। एकदम से उसने अपना हाथ हैंडल पर रखा और अंदर की तरफ खोलते हुए चली आई और सामने का नजारा देखकर दामिनी जी की आंखें बड़ी हो गई। वह चिल्लाते हुए बोली, "ध्रुविका, यह क्या हरकत है?" वही ध्रुविका, जोकि रेयांश के साथ वाले कमरे में थी। वह अपने बॉयफ्रेंड अनूप के साथ लिप किस कर रही थी। उनकी किस इतनी ज्यादा इंटेंस थी। अब जब दादी ने यह चीज देखी, तो ध्रुविका का रंग पूरी तरह से उड़ गया। उसने अब दादी की तरफ देखते हुए कहा,
"वह! वह दादी! वह!" इतना कहते हुए ध्रुविका की नजरे पूरी तरह से झुक गई थी। उसकी आंखों में आंसू आ गए थे। वही अनूप, जो कि अपना चेहरा झुकाए खड़ा था, ध्रुविका को रोते हुए देखकर उसने अब दामिनी जी की तरफ देखा और हाथ जोड़ते हुए बोला, "हमें माफ कर दीजिए दादी, मानते हैं हम बच्चे हैं। लेकिन हम एक दूसरे से प्यार करते हैं।" उसकी बात पर दामिनी जी, जो गुस्से से अनूप को और ध्रुविका को देख रही थी, उनका चेहरा पूरी तरह से एक्सप्रेशन लेस हो गया। अब वह धीमे कदमों से चलते हुए ध्रुविका और अनूप के पास आई। वहीं ध्रुविका का दिल जोरो जोरो से धड़क रहा था। उसकी आंखों से आंसू अब तेज होने लगे थे। तभी अनूप उसके कंधे पर हाथ रखते हुए बोला, "शांत रहो।" उसकी बात पर ध्रुविका ने अपने आंसू साफ किए और सामने दादी की तरफ देखते हुए बोली, "दादी, मेरी बात तो।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी दादी उसके पास आई। अगले ही पल वह ध्रुविका का पर हाथ उठाने लगी कि तभी ध्रुविका ने अपनी आंखें कसकर बंद कर ली।
ऐसे ही 5 मिनट बीत गए, लेकिन उसके गाल पर किसी भी तमाचे या किसी भी चीज का कोई असर नहीं हुआ। तो उसने अपनी आंखें खोलकर दामिनी जी की तरफ देखा। दामिनी जी मुस्कुराते हुए उसके गाल पर हाथ रखते हुए बोली, "कोई बात नहीं बेटा, होता है। अगर तुम उससे प्यार करती हो, तो एक बात याद रखना, किसी को धोखा मत देना। तुम्हारी मॉम चाहे माने ना माने, लेकिन मुझे इस चीज से कोई आपत्ति नहीं है। पर एक बात याद रखना, अगर इस रिश्ते की शुरुआत की है, तो इसे अंत तक लेकर जाना, समझी ना।" इतना कहते हुए उसने ध्रुविका के सिर पर हाथ फेरा, तो ध्रुविका के चेहरे पर मुस्कुराहट खिल गई। वही अनूप के चेहरे पर भी मुस्कुराहट आ गई। वह जल्दी से दामिनी जी के पैर छूते हुए बोला, "मैं जल्द ही अपने घर वालों को यहां पर भेजूंगा दादी, आप फिक्र मत कीजिए।"
उसकी बात पर दामिनी जी ने हां में सिर हिला दिया। अब अनूप वहां से चला गया। वहीं दादी अब ध्रुविका की तरफ देखते हुए उसके गाल पर हाथ रख कर बोली, "तूने कहीं आराध्य को देखा है? नीचे पार्टी में हंगामा हो गया। आराध्या ने ड्रिंक कर ली थी, तो रेयांश उसे लेकर ऊपर की तरफ आया था। क्या तूने उन दोनों को देखा है?" तभी ध्रुविका दादी की तरफ देखते हुए बोली, "नहीं दादी, मैंने उन्हें नहीं देखा। शायद रेयांश के कमरे में हो।" तभी दादी अपने सिर पर हाथ रखते हुए बोली, "हां, मुझे भी यही लग रहा है। मैं गलती से रेयांश का रूम समझ कर यहां पर आ गई थी।
मै रेयांश के कमरे में जाकर देखती हूं।" इतना कहकर वह बाहर की तरफ निकली और अगले ही पल रेयांश के कमरे की और चल दी। वहीं दूसरी तरफ रेयांश, जिसने आराध्या को अपने कंधे पर उठा रखा था। वह अपने कमरे की बुक्शेल्फ की तरफ आया और अगले ही पल उसने बुक्शेल्फ में से एक बुक निकाली और उसकी बुक्शेल्फ पुरी की पूरी खुल गई। जिससे दूसरी तरफ का रूम पूरी तरह से विजिबल होने लगा। उस रूम को देखकर आराध्या की आंखें बड़ी हो गई। वह अपना चेहरा पीछे की तरफ घूमाते हुए बोली, "यहां पर एक और कमरा है, डैडी।" उसकी आवाज पूरी तरह से लड़खड़ा रही थी। तभी रेयांश ने उसकी हिप पर जोर से spank किया। जिससे आराध्या पूरी तरह से शांत हो गई, क्योंकि उसका स्पंक ही इस चीज का जवाब था।
रेयांश जैसे ही उस कमरे के अंदर गया, अगले ही पल बुक्शेल्फ पूरी तरह से बंद हो गया। बुक सेल्फ के बंद होते ही दामिनी जी अंदर की तरफ आई और कमरे में किसी को ना देखकर अब उसके चेहरे पर परेशानी झलकने लगी। उसने अब फोन की तरफ देखा और अगले ही पल उसने रेयांश के फोन पर फोन मिला दिया। दूसरे ही पल रेयांश, जो कि कमरे के अंदर आया था, उसने अब आराध्या को पर बेड पर पटका, जिससे आराध्या की आह निकल गई। वह रेयांश की तरफ पाउट बनाते हुए बोली, "धीरे डैडी, आईटी'एस हर्टिंग।" उसकी बात पर रेयांश की आई ब्रो ऊपर की तरफ उठ गई। तभी उसके पॉकेट में रखा हुआ फोन वाइब्रेट करने लगा।
फोन को वाइब्रेट होता देखकर रेयांश ने अपने पॉकेट में से फोन निकाला और देखा, तो दामिनी जी का कॉल था। दामिनी जी का कॉल उसने एक्सप्रेशन लेस होकर उठाया और सीधा बालकनी में चला गया। क्योंकि वह जानता था कि यहां पर आराध्या बिल्कुल भी चुप नहीं रहने वाली। नशा उसके पूरी तरह से सिर पर चढ़ चुका था। जैसे ही रेयांश ने फोन उठाया, दामिनी जी हड़बड़ाते हुए बोली, "रेयांश आराध्या कहां है बेटा, तू उसे उठा कर लेकर आया था?" तभी रेयांश गहरी आवाज में बोला, "मेरे साथ है।"
तभी दामिनी जी घबराते हुए बोली, "लेकिन तू है कहां पर, बेटा?" तभी रेयांश गहरी आवाज में बोला, "ऑफिस में हूं, दादी।" तभी दामिनी जी आगे से बोली, "लेकिन बेटा, तू उसे ऑफिस क्यों लेकर गया है?" रेयांश दामिनी जी से सख्त आवाज में बोला, "उसे पनिशमेंट देनी बहुत जरूरी है।" उसकी बात पर दामिनी जी के चेहरे पर परेशानी झलकने लगी। वह घबराई हुई आवाज में बोली, "देख बेटा, वह अभी बच्ची है। उस पर सख्ती मत करना।" दामिनी जी के मुंह से बच्ची शब्द सुनकर उसने तिरछी नजरों से आराध्या को देखा, जो अब बेड पर से उठ चुकी थी। वह व्यंग्य से हंसते हुए मन में बोला, "बच्ची, और यह किस तरफ से लग रही है। फिक्र मत कीजिए दादी, पनिशमेंट तो आज उसे मिलेगी ही और आगे से वह याद रखेगी कि उसे यह काम कभी नहीं करना है।" दामिनी जी का चेहरा और भी परेशानी से भर गया।
एक तरफ रेयांश दादी से बात कर रहा था। दूसरी तरफ अंदर आराध्या ने अब अपने गाउन की जिप खोलनी शुरू की। उस गाउन की जिप नहीं खुल रही थी। उसे अब गाउन में हद से ज्यादा गर्मी लगनी शुरू हो गई थी। वह इरिटेट होते हुए बोली, "यह पता नहीं क्या गंदा सा मैंने पहन लिया है। मुझे तकलीफ दे रहा।" अचानक ही उसे गुस्सा आया और उसने अपने आगे का गला पकड़ा और एक ही झटके से फाड़ कर आगे से पूरी तरह से नीचे की तरफ खींच दिया। जिससे वह गाउन आगे से पूरी तरह से फट गया। उसकी वाइट ब्रा पूरी तरह से विजिबल थी और उसमें से उसके 32 इंच के बूब्स, जो कि ना ज्यादा बड़े थे और ना ही ज्यादा छोटे थे। 18 साल की एज के अकॉर्डिंग उसकी शेप बहुत ज्यादा सेक्सी थी।

पैंटी तो पहले ही उसके बदन पर नहीं थी। जिस वजह से उसकी पिंकी पूरी तरह से विजिबल थी। अब सिर्फ वह ब्रा में रह गई थी। जिसमें से उसके छोटे बूब्स काफी हद तक ब्रा के ऊपर से विजिबल हो रहे थे। वही रेयांश, जो कि इस चीज से पूरी तरह से अनजान था, वह अब दामिनी जी से बात करके जैसे ही पलटा, उसकी आंखें फटी की फटी रह गई, क्योंकि सिवाय ब्रा के आराध्या के शरीर पर कुछ भी नहीं था।
अगले ही पल आराध्या ने अपनी मदहोशी भरी नजरों से रेयांश की तरफ देखा और उसे उंगली से अपनी पास बुलाती हैं। "कम ऑन डैडी, जस्ट कम ना।" इतना कहते हुए उसने अपनी जीभ से उंगलियां लगाई और अपना हाथ दोबारा से अपनी पुसी पर ले जाकर अपनी फिंगर से पुसी की लेयर्स खोलते हुए अंदर की तरफ रगड़ने लगी। उसे यूं देखकर एक पल के लिए रेयांश की हालत खराब हो गई। उसका दिमाग पूरी तरह से घूम चुका था। एक पल के लिए भी उसने आराध्या को इस तरह से इमेजिन नहीं किया था।
हां वह थोड़ी बहुत आराध्या से छेड़खानी कर रहा था, लेकिन इस हद तक उसने नहीं सोचा था। पर अब वह आगे की तरफ आया और उसे देखते हुए बोला, "व्हाट आर यू डूइंग लिटिल प्रिंसेस?" "आपको दिखाई नहीं दे रहा है कि मैं क्या कर रही हूं। अच्छा, अगर आपको नहीं ना दिखाई दे रहा, अब मैं आपको साफ दिखाती हूं।" इतना कह कर वह अपना हाथ पीछे की तरफ लेकर गई। जिससे रेयांश की आंखें और भी बड़ी हो गई। इससे पहले वह आराध्या को रोकता, आराध्या ने अपनी ब्रा पूरी तरह से अपने बदन से अलग कर दी थी। अब उसकी ब्रा जमीन पर गिरी हुई थी।
अब वह पूरी तरह से नेकेड रेयांश के सामने थी। रेयांश की धड़कनों ने इस वक्त बवाल करना शुरू कर दिया था। उसे अपना गला सूखता हुआ महसूस हो रहा था। उसकी हार्डनेस अब और भी ज्यादा बढ़ गई थी। उसे एक पल के लिए ऐसा लग रहा था, जैसे उसका dick उसकी पेंट फाड़कर बाहर की तरफ आ जाएगा। वही आराध्या अब आगे की तरफ आई। जिस तरह से वह चल रही थी, रेयांश की नजरे उस पर गहरी हो गई थी।
तभी वह रेयांश के आगे पूरी तरह से अपने पैरों को फैला कर लेट गई। जिससे उसकी पुसी की लेयर्स पूरी तरह से खुल गई। जिस तरह से उसने अपने पैरों को फैला रखा था, इस वक्त आराध्या हद से ज्यादा रेयांश पर कहर ढा रही थी। आराध्या अब अपने दोनों हाथ पूसी पर रखकर उसे खोलते हुए बोली, "प्लेस शक ना डैडी, आई वांट वेरी बडली यू सक इट ब्रूटली।"
उसकी बात सुनकर रेयांश ने अपना होंठ अंदर की तरफ दबाया और अगले ही पल अपना हाथ उठाकर उसकी pussy पर जोरों से स्पंक किया। जिससे एक पल के लिए आराध्या की चीख निकल गई। वह तड़प उठी थी, जिस तरह से रेयांश ने उसे स्पंक किया था।
वह अगले ही पल उठकर अचानक से उल्टी होकर लेट गई। वह दर्द से तड़पते हुए बोली, "क्या कर रहे हैं डैडी, its hurting." उसने इतना ही कहा था कि रेयांश ने उसके बालों को मुट्ठी में भरा और उसका चेहरा ऊपर की तरफ उठाया। अगले ही पल, उसकी ass को कस के पकड़ते हुए बोला, "don't make me crazy baby, तुम मुझे खेल नहीं पाओगी।" इतना कहते हुए उसने जोर से स्पंक उसकी ass पर किया। जिससे एक पल के लिए आराध्या फिर से चिल्ला पड़ी। लेकिन अगले ही पल वह पागलों की तरह हंसते हुए बोली, "just try me daddy don't argue..."
उसकी बात पर रेयांश सब उसके कान के पास झुका और बोला, "प्रिंसेस, सोते जानवर को मत जगाओ, पछताओगी।" तभी आराध्या ने अपनी ass सीधा उसके पैंट के ऊपर से dick पर मारी और उसे हल्का-हल्का रगड़ने लगी। जिसे महसूस कर रेयांश का चेहरा पूरी तरह से एक्सप्रेशन लेस हो गया। एक पल के लिए रेयांश को अपनी पूरी बॉडी में करंट दौड़ता हुआ महसूस हो रहा था।
To be continue...





Write a comment ...