
ठाकुर हवेली,
इस वक्त अभय अपने कांपते हुए हाथ से सांवरी की ब्रेस्ट को सहला रहा था। अभय की आंखें बहुत ज्यादा लाल थी और उसका पूरा बदन जैसे कसा हुआ था। लेकिन अगले ही पल उसने खुद को कंट्रोल किया। उसने जल्दी से अपना हाथ पीछे की तरफ खींचा और अगले ही पल सांवरी की तरफ पीठ कर ली। सांवरी की तरफ पीठ करके वह गहरी गहरी सांस भरने लगा। उसकी आंखों के सामने एक लड़की का चेहरा घूम रहा था, जिस वजह से अचानक ही उसकी आंखों के सामने धुंधलापन छाने लगा। जिस वजह से उसका हाथ अपने सिर पर आ चुका था।
एक पल के लिए अभय के कदम भी लड़खड़ा गए थे। उस लड़की की वह खूबसूरत आंखें बार-बार अभय की आंखों के सामने घूमने लगी। अब अभय की आंखें जैसे खून की तरह लाल होने लगी थी। अगले ही पल, अभय को अपने दिल में एक जोरदार दर्द महसूस हुआ। जिससे एक पल के लिए उसके माथे की नसें और गर्दन की नसें ऊपर की तरफ उभर आई। उसे देखकर ही पता चल रहा था कि किस कदर उसे अपने सीने में दर्द हो रहा था। अगले ही पल, उसका दर्द इतना ज्यादा बढ़ गया कि एकदम से वह नीचे जमीन पर जा गिरा। सांवरी अभी भी बेड पर वैसे ही लेटी हुई थी।
लेकिन अभय के गिरते ही उसकी आंखें खुली। उसने पलट कर अभय की तरफ देखा, तो एक पल के लिए सांवरी की सांस गहरी होने लगी। वह लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली, "Thakur Sahab" सांवरी ने इतना ही कहा था कि अगले ही पल वह फिर से बेहोश हो गई। वही अभय जमीन पर लेटा हुआ अब सीलिंग की तरफ देख रहा था। उसके सीने का दर्द, जो कि इतना ज्यादा बढ़ गया था, धीरे-धीरे कर अपने आप नॉर्मल होने लगा। उसके माथे की नसे और गर्दन की नसे, जो तन चुकी थी, वह भी अपने आप नॉर्मल होने लगी। अचानक ही इस तरह से होने से अभय का दिमाग पूरी तरह से ब्लैक हो चुका था। वह खुद नहीं समझा था कि आखिर उसे हुआ क्या। धीरे-धीरे कर वह अपनी जगह से उठा। उसने अपने आपको सामने ही मिरर में देखा और खुद से ही बड़बड़ाया, "यह मुझे क्या हुआ था?"
इतना कहते हुए अभय ने अब एक बार फिर से सांवरी की तरफ देखा, जो एक बार फिर से बेहोश हो गई थी। लेकिन अब उसने जल्दी से सांवरी को कपड़े पहनाएं। अभय ने कपड़े पहनाए ही थे कि तभी उनका दरवाजा नॉक होने लगा। दरवाजे की आवाज सुनकर अभय ने गहरी सांस ली और अपने कदम दरवाजे की तरफ बढ़ा दिए। लेकिन दरवाजे की तरफ कदम बढ़ाते हुए एक बार फिर से उसके कदम लड़खड़ा गए, क्योंकि उसकी आंखों के आगे एक बार फिर से धुंधलापन छाने लगा था।
लेकिन किसी तरह उसने अपना सिर झटकते हुए एक बार फिर से अपने कदम दरवाजे की तरफ बढ़ा दिए। दरवाजा खोला तो सामने ही डॉक्टर खड़ी थी। अब डॉक्टर अंदर की तरफ आई। उसने एक नजर अभय की तरफ देखा और फिर एक नजर सामने लेटी हुई सांवरी की तरफ देखा। जिसका पूरा चेहरा सफेद पड़ा हुआ था। उसे यूं देखकर डॉक्टर की आंखें हैरत से फैल गई। वह अभय की तरफ देखते हुए बोली, "मिस्टर ठाकुर, आपको नहीं पता कि आपकी पत्नी की हालत कितनी खराब है। उसका पूरा चेहरा सफेद पड़ चुका है। मुझे लगता है, उन्हें ब्लड की जरूरत है।" इतना कहते हुए वह आगे की तरफ आई और उसने सांवरी को देखा, तो डॉक्टर का रंग एक पल के लिए पीला पड़ गया। वह अभय की तरफ पलटते हुए बोली,
"देखिए मिस्टर ठाकुर, इलाज यहां पर नहीं हो सकता है इन्हें अस्पताल ले जाना होगा। इनके लिए बहुत जरूरी है। अगर इन्हें हॉस्पिटल ना लेकर गए, तो हो सकता है कि उनकी हालत और भी ज्यादा बिगड़ जाए। प्लीज, इन्हें पहले हॉस्पिटल लेकर चलिए। यहां पर मैं कुछ नहीं कर पाऊंगी।" उसकी बात पर अभय डॉक्टर के पास आया और अगले ही पल दांत पीसते हुए बोला, "साली कुत्तिया, तुझे कोई जवाब पूछा है क्या? तुझे हॉस्पिटल लेकर जाना है क्या? तू मुझे ऑर्डर देगी? चल निकल, हॉस्पिटल लेकर पहुंचता हूं इसे।" डॉक्टर तो बस उसकी तरफ देखते ही रह गई। अभय उसकी तरफ देखते हुए बोला, "मादरचोद, मुझे ऑर्डर दे रही, कुत्तियां।"
डॉक्टर तो हैरानी से अभय की तरफ ही देखे जा रही थी कि कैसे अभय उसे इतनी इजीली गालियां निकाल रहा था। जबकि वह सांवरी का इलाज करने वाली थी। अब वह आगे की तरफ आते हुए बोली, "आप मुझसे ऐसे कैसे बात कर सकते हैं। देखिए ठाकुर साहब, आप मुझसे ऐसी बात।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी एक जोरदार तमाचा अभय ने उसके गाल पर जड़ दिया। वही डॉक्टर की आंखें और भी हैरत से फैल गई। उसने अपने गाल पर हाथ रखा। उसकी आंखों में नमी उतर आई। वह अभय की तरफ देखते हुए बोली, "हाउ डेयर यू, तुम्हें क्या लगता है कि मैं तुम्हारी पत्नी का भी इलाज करूंगी। never मैं भी देखती हूं कि तुम हमारे हॉस्पिटल में अपनी पत्नी को लेकर कैसे आते हो और तुम्हारी पत्नी का इलाज मेरे हॉस्पिटल में कौन करता है।" उसकी बात पर अभय उसकी तरफ देखते हुए अगले ही पल उसके बालों को मुट्ठी में भरा और दांत पीसते हुए बोला, "साली बहन चोद, मुझसे जुबान लड़ाती है फिर से। तू अपने हॉस्पिटल की बात करती है। गांड में डाल अपना हॉस्पिटल, पहले तो मैं तेरे हॉस्पिटल में इलाज करने ही नहीं वाला था। लेकिन तूने अभय ठाकुर को चैलेंज किया है।
अब तेरे हॉस्पिटल में इलाज करने के लिए चाहे तो मुझे तेरी गांड का कीड़ा क्यों ना निकालना पड़े। मैं अब तेरे हॉस्पिटल में आऊंगा और देखता हूं कि कौन मादरचोद मुझे रोकता है।" इतना कहते हुए उसने सांवरी को गोद में उठाया और अगले ही पल बाहर की तरफ चल दिया। वही डॉक्टर दांत पीसते हुए बोली, "अब तुम्हारी पत्नी का इलाज मेरे हॉस्पिटल में तो नहीं होगा। इतने बदतमीज इंसान का इलाज मेरी हॉस्पिटल में मैं कतई नहीं बर्दाश्त करूंगी।" इतना कहकर वह डॉक्टर, जोकि सिया थी, वह बाहर की तरफ आई। तभी उसकी टक्कर रणवीर से हो गई। रणवीर की तरफ देखते हुए वह बोली, "आप देखकर नहीं चल सकते, आपके घर में सभी लोग अंधे हैं क्या?" जैसे ही उसने यह बात कही, रणवीर उसकी तरफ गहरी नजरों से देखते हुए बोला, "और तुम कौन हो?" तभी सिया दांत पीसते हुए बोली, "तुम्हें मेरी यूनिफॉर्म देखकर नहीं पता चल रहा कि मैं कौन हूं? मैं डॉक्टर हूं।
तुम्हारे भाई ने मेरी वह बेइज्जती की है कि मैं अब तुम्हारी भाभी का इलाज अपने हॉस्पिटल में नहीं होने दूंगी।" तभी रणवीर उसकी तरफ उंगली पॉइंट करते हुए बोला, "अभी तो फिलहाल मेरे भाई ने तुम्हारे मुंह का बुरा हाल किया है। लेकिन अब मैं तुम्हारे मुंह का बुरा हाल कर दूंगा, वह भी अपने लंड के साथ। जब मेरा 8 इंच का लंड तुम्हारे मुंह में जाएगा, तुम्हारी अकल ठिकाने आ जाएगी।" रणवीर की बात सुनकर सिया के तो होश ही उड़ गए। वह तो बस अभय को ही ऐसा समझ रही थी। यहां तो सभी लोग ही उसे सनकी लग रहे थे। अब वह जल्दी से वहां से भागते हुए दरवाजे तक आई और देखते ही देखते वहां से निकल गई।
दूसरी तरफ अभय की गाड़ी तेजी से सड़कों पर दौड़ रही थी। उसकी नजर बार-बार सांवरी पर जा रही थी। अभय के चेहरे पर इस वक्त हद से ज्यादा परेशानी झलक रही थी। वही सांवरी के होंठ अब पूरी तरह से नीले पड़ने लगे थे। उसे यूं देखकर अभय का दिल जोरो जोरो से धड़क रहा था।
उसकी आंखों के आगे हल्की-हल्की झलकियां घूम रही थी। जिस वजह से उसकी आंखों के आगे एक बार फिर से धुंधलापन छाने लगा था। पता नहीं क्यों, लेकिन उसे साफ दिखाई नहीं दे रहा था एक तरफ वह गाड़ी चला रहा था, दूसरी तरफ उसे दिखना बंद हो रहा था। इस वक्त तो पूरी तरह से अंधेरा पड़ चुका था। इस वजह से उसको सड़क पर कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। अभय का दिमाग पूरी तरह से सुन्न हुआ पड़ा था। लेकिन फिर भी किसी तरह से वह गाड़ी चला रहा था। तभी सामने से ट्रक की रोशनी उसकी आंखों में पड़ी, क्योंकि उसे सामने हाईवे पर कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। एक रोशनी पड़ने से अभय ने अचानक से ही अपनी गाड़ी को घुमाया, तो गाड़ी सामने ही पेड़ में जाकर लगी। अगले ही पल, अभय का सिर गाड़ी के स्टीयरिंग व्हील पर जाकर लगा।
स्टीयरिंग व्हील पर लगते ही अभय के सिर से खून का फव्वारा छूट पड़ा। दूसरी तरफ सांवरी उसे तो कोई होश ही नहीं था कि वह किस हाल में है क्योंकि उसकी हालत बढ़ते पल के साथ खराब होते जा रही थी। तभी सांवरी की तरफ का दरवाजा खुला और कोई शख्स उसे गोद में उठाते हुए वहां से ले गया। इस वक्त उस शख्स ने अपने चेहरे पर नकाब पहना हुआ था। दूसरी तरफ अभय, जिसके सिर से खून बह रहा था, उसकी आंखें हल्की-हल्की खुली थी। उसे धुंधलापन नजर आ रहा था। जैसे ही वह शख्स सांवरी को उठाकर लेकर गया, एक पल के लिए अभय ने भी अपना हाथ उठाया था। लेकिन अगले ही पल वह पूरी तरह से बेहोश हो गया।
To be continue...





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