
Hotel Paradise,
अभी-अभी प्रतीक ध्वनि और आदर्श को जिस तरह से छोड़ कर गया था, उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच चुका था। इस वक्त वह अपने कमरे में इधर-उधर चक्कर काट रहा था। उसका दिमाग पूरी तरह से घुमा हुआ था। वह गुस्से में जबड़े कसते हुए दांत पीसकर बोला, "तुमने यह अच्छा नहीं किया ध्वनि, मैंने तुम्हें खुद से ज्यादा अहमियत दी थी। लेकिन तुमने, तुमने क्या किया, तुमने मुझे झुठला दिया। तुमने अच्छा नहीं किया, ध्वनि और इसकी सजा तुम्हें भुगतनी होगी। चाहे वह तुम्हारे आशिक आदर्श चौहान को ही क्यों ना हो और अब जो होगा, तुम्हारी सोच से भी परे होगा।" इतना कहते हुए प्रतीक के चेहरे पर डेविल स्माइल आ चुकी थी। अब उसने पीछे की तरफ देखा, तो बेड पर अभी भी उसकी ब्लैंकेट उथल-पुथल हो रखी थी क्योंकि कुछ देर पहले जब ध्वनि नहीं आई थी, तब प्रतीक अपने फोन में से porn वीडियो देखते हुए
Masterbute कर रहा था। साथ ही साथ उसकी नज़रें उस लड़की के बदन के हर एक हिस्से पर थी, जो कि वह अपने मोबाइल में से देख रहा था। साथ ही साथ उसका हाथ अपने dick पर साफ चल रहा था। अब उसने अपने कपड़े एक बार फिर से उतारे और दोबारा से बेड पर लेट कर अपनी डिक को सहलाने लगा। साथ ही साथ अब उसने उस वीडियो को सामने एलइडी में लगा लिया था। दरवाजा, जो कि locked था, उसने ध्यान ही नहीं दिया कि उसने अपने रिमोट को उठाकर उसे अनलॉक कर दिया। ऐसे ही सामने एलईडी देखते हुए वह मोस्ट व्यूड करने लगा।
अभी बस 5-10 मिनट ही हुए थे कि वह अपने डिक को पकड़े हुए मास्टरबेट कर ही रहा था कि तभी उसका दरवाजा खुला और एक रूम क्लीनर अंदर की तरफ आई। प्रतीक को यूं देखकर एक पल के लिए उसका कलेजा मुंह को आ गया। वही प्रतीक की भी आंखें हैरत से फैल गई। उसने जब उस क्लीनर को देखा, तो उसकी भी हार्टबीट ड्रॉप हो गई। वहीं दूसरी तरफ रूम क्लीनर जल्दी से अब माफी मांगते हुए बोली, "सॉरी सॉरी सर, मुझसे गलती हो गई। मैं गलती से यहां पर आ गई थी।" वह दांत पीसते हुए बोला, "तुम्हें शर्म नहीं आती, किसी के भी कमरे में ऐसे ही घुस जाओगी।" इतना कहते हुए वह जल्दी से अपनी पैंट पहन रहा था।
वही वह लड़की अब बाहर की तरफ जाते हुए बोली, "सॉरी सर, सॉरी, मैं बाद में आती हूं।" इतना कह कर वह वहां से भाग गई। वही प्रतीक खुद में ही दांत पीसते हुए बोला, "यह अब कहां से आ गई, पागल लड़की।"
वहीं दूसरी तरफ वह लड़की, जिसका नाम नायरा था, जो कि इस होटल में काम कर रही थी। वह अब जल्दी से अपने स्टाफ रूम में जाकर अपने दिल की धड़कनों को काबू करते हुए बोली, "यह मैंने क्या देख लिया?" इतना कहते हुए उसने अपने हाथ को अपने मुंह पर रख लिया था। अभी भी उसकी धड़कनें तेजी से चल रही थी। दूसरी तरफ, वहां पर खड़ी हुई सारी स्टाफ उसकी तरफ देखते हुए बोली, "क्या कर दिया तूने?" स्टाफ की आवाज सुनकर नायरा की आंखें बड़ी हो गई। वह बड़ी-बड़ी आंखों से स्टाफ की तरफ देखने लगी। तभी स्टाफ रूम का दरवाजा फिर से किसी ने नॉक किया। जैसे ही दरवाजा नॉक हुआ, नायरा ने दरवाजा खोला, तो सामने स्टाफ का एक मेंबर खड़ा था। वह नायरा की तरफ देखते हुए बोला, "तुम्हें सर अपने केबिन में बुला रहे है।" उसकी बात सुनकर नायरा का दिल धक सा रह गया। अब तो जैसे उसकी जान उसके कलेजे में ही आ चुकी थी।
वहीं दूसरी तरफ,
आदर्श और ध्वनि का कमरा,
इस वक्त ध्वनि पूरी तरह से बेलीबास आदर्श के नीचे लेटी हुई थी। आदर्श उसकी गर्दन पर झुकते हुए उसके गले को पूरी तरह से चूम रहा था। जैसे-जैसे आदर्श उसके गले को चूम रहा था, वैसे-वैसे ध्वनि की सांस भी गहरी होने लगी थी। भले ही वह किसी लाश की तरह उसके नीचे लेटी हुई थी। अब यह बात ध्वनि भी रेसिस्ट नहीं कर सकती थी कि आदर्श के छूने से उसे बहुत ज्यादा फर्क पड़ने लगा था। लेकिन फिलहाल के लिए उसकी आंखों से आंसू तेजी से बह रहे थे। उसे आदर्श पर हद से ज्यादा गुस्सा आ रहा था, क्योंकि आदर्श जिस तरह की धमकियां उसे देता था, उसका दिल करता था कि कई बार आदर्श का मुंह तोड़ दे। लेकिन वह ऐसा कुछ भी नहीं कर सकती थी, क्योंकि उसे आदर्श से हद से ज्यादा डर भी लगता था।
वही आदर्श उसकी गर्दन को जिस तरह से आज चूम रहा था, वह एक अलग ही एहसास थे। वह बड़े आराम से ध्वनि की गर्दन को चूम रहा था। धीरे-धीरे कर अब वह नीचे की तरफ जाने लगा कि तभी उसकी नजर ध्वनि के बूब्स पर गई, जहां पर एक साइड पर एक निशान बना हुआ था। उस निशान को देखकर एक पल के लिए उसकी नज़रें ध्वनि के बूब्स पर गहरी हो गई। वह ध्वनि के चेहरे के पास आया और अगले ही पल, उस की गर्दन को पकड़ते हुए बोला, "तुमने यह निशान मुझे पहले क्यों नहीं दिखाया? और यह निशान आया कहां से?" इतना कहते हुए वह लगभग से उसकी गर्दन को पूरी तरह से पकड़ चुका था। जिस तरह से आदर्श ने उसकी गर्दन पर ग्रिप बनाई हुई थी, ध्वनि को एक पल के लिए सांस लेने में दिक्कत होने लगी थी। वह लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली, "क्या कर रहे हैं आप आदर्श, मुझे दर्द हो रहा है। सांस नहीं ली जा रही मुझसे।" तभी आदर्श उसे दांत पीसते हुए बोला, "आई डोंट केयर अबाउट कि तुम्हें सांस आ रही है या नहीं आ रही, तुम्हारे शरीर पर यह निशान आया कैसे?" इतना कहते हुए उसने उसकी ब्रेस्ट की तरफ देखा, जहां पर वह निशान था। उस निशान को देखकर ध्वनि की आंखें भी हैरत से फैल गई। उसे भी याद नहीं था कि यह निशान कहां से आया। वह आदर्श की तरफ देखते हुए बोली, "नहीं पता चला मुझे, कैसे आया यह निशान।" तभी आदर्श उसकी गर्दन को और भी जोर से दबाते हुए बोला, "मुझे जानना है। मुझे नहीं पता, तुम कैसे बताओगी, लेकिन एक्सप्लेन इट।
तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई खुद को नुकसान पहुंचाने की।" अभी वह बोल ही रहा था कि तभी ध्वनि को याद आया कि जब वह सुबह बाथरूम में नहा रही थी, तभी दरवाजा खोलते वक्त दरवाजा उसकी ब्रेस्ट पर अचानक से लगा। जिस वजह से उसे दर्द भी एक पल के लिए महसूस हुआ। लेकिन उसे अपने दिल में इतना ज्यादा दर्द हो रहा था कि इस दर्द को उसने पूरी तरह से इग्नोर कर दिया। वह अब लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली, "सुबह नहाते वक्त बाथरूम का दरवाजा लग गया था।" इतना कहते हुए उसकी सांसे चौक होने लगी थी। तभी आदर्श ने उसका गला छोड़ा, तो ध्वनि एकदम से खांसने लगी। वह उसकी तरफ देखते हुए बोली, "कितने जल्लाद हैं आप आदर्श, आप क्या चाहते है कि आपके साथ सारी उम्र रहूं। किस तरह से, आपके इस रूप को देखकर? आप तो कभी बदले नहीं, लेकिन मैं, मैं तो आपके पीछे।" इतना कहते हुए वह चुप हो गई। लेकिन उसने आगे से कुछ नहीं कहा। तभी आदर्श उसके चेहरे पर झुकते हुए बोला, "तुम मेरे पीछे क्या?" इस वक्त आदर्श जिस तरह से बोला था, एक पल के लिए ध्वनि भी हैरानी से आदर्श की तरफ देखने लगी थी। क्योंकि आदर्श बहुत सॉफ्टली उसके साथ बोला था।
वही आदर्श अब दोबारा से उसके गाल पर हाथ रखते हुए बोला, "बोलो ना मेरे पीछे क्या?" तभी ध्वनि अपना मुंह दूसरी तरफ घूमाते हुए बोली, "क्या ही फर्क पड़ता है, आपको कौन सा कोई फर्क पड़ता है। मेरे जीने या मरने से जब आपको कोई फर्क ही नहीं पड़ता, तो मेरा कुछ कहना भी आपके लिए मैटर..।" इतना कहते हुए उसकी आंखों से आंसू उसके गालों पर आ चुके थे। तभी आदर्श गहरी सांस लेकर बोला, "फाइन, अगर नहीं बताना है तो तुम्हारी मर्जी, मुझे तो फिलहाल के लिए सेक्स करना है।" इतना कहकर अब वह दोबारा से उसकी गर्दन पर झुका और अगले ही पल उसके हाथ उसके बूब्स पर थे। धीरे-धीरे कर वह उसके बूब्स को हल्का-हल्का प्रेस करने लगा। जैसे ही वह उसके बूब्स को प्रेस करने लगा, तो ध्वनि की आंखें कसकर बंद हो गई। वही आदर्श लगातार उसके बूब्स को प्रेस करते हुए अब अपना चेहरा उसके बूब्स के पास लेकर गया। अगले ही पल, उसकी निपल्स के इर्द-गिर्द अपनी जीभ को घुमाते हुए बोला, "वैसे एक बात कहूं बेबी, तुम टेस्टी तो बहुत हो।" इतना कहते हुए वह लगातार उसके निपल्स के एरोल पर अपनी जीभ घुमा रहा था।
जैसे-जैसे वह उसके निपल्स के एरोल पर अपनी जीभ घुमा रहा था, वैसे-वैसे ध्वनि को अपनी पुस्सी में एक अलग ही सेंसेशन feel होने लगी थी। देखते ही देखते, उसे अपनी pussy में गीलापन महसूस होने लगा था। वहीं आदर्श लगातार उसके निपल्स के एरोल पर अपनी जीभ घूमाते हुए अब उसने उसके निपल्स को अपने होठों में लेकर हल्का-हल्का शक करना शुरू किया। दूसरा हाथ अब उसकी pussy पर जाने लगा। कुछ ही सेकंड में, वह अपनी दो उंगलियों से उसके क्लीटोरिस को रगड़ रहा था और साथ में एक बूब्स को हाथ में पकड़कर उसे शक किए जा रहा था। अब उसका शक इतना हार्ष हो गया था कि ध्वनि के हाथ पूरी तरह से ब्लैंकेट पर कस गए थे। उसका जो हाथ उसकी पुसी पर चल रहा था,
ध्वनि की पूसी पर गीलापन महसूस कर आदर्श के चेहरे पर डेविल स्माइल उतर आई थी। भले ही ध्वनि अपनी फिलिंग्स एक्सप्रेस नहीं कर पा रही थी, लेकिन उसी की बॉडी लैंग्वेज आदर्श को बहुत कुछ बयां कर रही थी। आदर्श अब उसकी पूसी की प्लेयर्स को खोलते हुए अपनी दो उंगलियां उसकी कलेक्टर्स से रगड़ते हुए फिर उसके हॉल पर ले जाते हुए अब उसने उन्हें दो उंगलियों को थोड़ा सा ऊपर उठाकर जोर से वहां पर स्पंक किया, जिससे एक पल के लिए ध्वनि की आह निकल गई। अगले ही पल, वह उंगलियों से दोबारा से ध्वनि की पूसी पर रगड़ने। 2 सेकंड उसकी पूसी को रगड़ता, तो 2 सेकंड उस पर जोर से स्पंक करता है, जिससे ध्वनि पूरी तरह से बेहाल होने लगी थी। आदर्श अब उसके निप्पल से हटा और दोबारा से उसकी वजाइना पर आकर उसने अपनी दो उंगलियों को रखकर हल्का सा वजाइना को खोला। जिससे सामने ही क्लीटोरिस उसे दिखाई देने लगा। क्लीटोरिस को देखकर ही आदर्श को कुछ कुछ होने लगा। अब वह पूरी तरह से उसकी pussy पर झुका और अगले ही पल उसकी पुसी के क्लीटोरिस को मुंह में लेकर हल्का सा खींचकर उसने एकदम से छोड़ा, तो एक पल के लिए ध्वनि की फिर से आह निकल गई। वह आदर्श की तरफ देखते हुए बोली, "मुझे दर्द हो रहा है।"
उसकी बात पर आदर्श ने उसे गहरी नजरों से देखा और बोला, "दर्द हो रहा है तो क्या करूं, बर्दाश्त करो।" उसकी बात पर ध्वनि ने कुछ नहीं कहा। वह बस आदर्श की तरफ ही देख रही थी। आदर्श उसकी पूसी को अब हल्की-हल्की शक करने लगा था, जिससे ध्वनि की सांस गहरी होने लगी थी। अब वह आदर्श की तरफ देखते हुए बोली, "मुझे, मुझे कुछ हो रहा है मिस्टर चौहान, प्लीज रुक जाइए।" लेकिन आदर्श नहीं रुका। उसने अपने दो फिंगर ली और ध्वनि के ass hole पर रखते हुए उसको हल्का-हल्का सहलाने लगा। जिससे ध्वनि की लोअर बॉडी ऊपर की तरफ उठने लगी। उसकी लोअर बॉडी को ऊपर की तरफ उठता हुआ देखकर आदर्श के दिमाग में एक आइडिया आया। उसने अब दो तकिए नीचे जमीन पर रखकर सेट कर दिए। फिर उसने ध्वनि की तरफ देखा, जोकि पूरी तरह से मदहोशी से अब आदर्श को देख रही थी। उसने ध्वनि को उठाया और पूरी तरह से उसका सिर नीचे जमीन पर लगा दिया। फिर उसकी लोअर बॉडी पूरी तरह से ऊपर की तरफ उठा दी। इस तरह से आदर्श ने उसे नीचे जमीन पर लेटाया था। आदर्श के सामने उसकी ass और pussy दोनों थे। ध्वनि की लोअर बॉडी पूरी तरह से ऊपर की तरफ उठी हुई थी। ध्वनि को तो कुछ पता ही नहीं चला कि आखिर आदर्श उसके साथ कर क्या रहा है। वह तो हैरानी से बस आदर्श की तरफ देखे जा रही थी कि आखिर आदर्श करना क्या चाहता है। लेकिन अब उसकी पोजीशन देखकर ध्वनि का दिल जोरो जोरो से धक धक कर रहा था। ध्वनि के पैर आगे की तरफ थे और उसकी पीठ बेड के साथ लगे हुए पिलोज के साथ लगी हुई थी। उसको इस पोजीशन में लेटाकर आदर्श के चेहरे पर डेविल स्माइल आ गई। अगले ही पल, उसने बेड के साइड ड्रॉअर खोला और उसमें से एक चीज निकाली। उस चीज को देखकर ध्वनि की धड़कनें जैसे एक पल के लिए रुकने को हो गई। यह कुछ कोई और नहीं, डॉट वाला वाइब्रेटर था, जिससे ध्वनि की अब जान निकलने वाली थी।
To be continue...





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