
Hotel Paradise,
आदर्श ध्वनि को कंधे पर उठाकर अपने रूम में लेकर आया था। अगले ही पल, उसने एक झटके से ध्वनि को बेड पर पटक दिया, जिससे ध्वनि की कमर में हद से ज्यादा दर्द उठ रहा था। वह चिल्लाते हुए बोली, "तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे वहां से उठाने कर लाने की, बहुत हो गया तुम्हारा टॉर्चर। मैं अब और तुम्हारा टॉर्चर नहीं बर्दाश्त कर सकती हूं। तुम्हारे लिए अगर मैं कुछ नहीं हूं, तो मुझे मेरे हाल पर छोड़ क्यों नहीं देते।" उसकी बात सुनकर आदर्श की नजरे ध्वनि पर गहरी हो गई। आज पहली बार ध्वनि इस तरह से उससे बात कर रही थी, जो कि आदर्श को अंदर तक जला रहा था। उसकी आंखों के सामने वह पल घूम रहा था, जब कुछ देर पहले वह प्रतीक के कमरे में उसके गले से लगी हुई थी। प्रतीक ने उसके मैरिज प्रपोजल को हां कर दी थी और उस चीज को याद करते ही उसका खून खोलने लगा हुआ था।
लेकिन फिलहाल के लिए अभी उसने ध्वनि को कुछ नहीं कहा था। वह सिर्फ गहरी नजरों से ध्वनि को देख रहा था। उसने अब अपनी पॉकेट में से सिगरेट बॉक्स निकाला और अपने होठों में सिगरेट फसाई। वह सामने ही सोफे पर जाकर बैठ चुका था। दोनों पैर उसने सामने कॉफी टेबल पर रखे। वह अपने पैरों को हिला रहा था। अभी वह अपने पैरों को हिला ही रहा था कि तभी उनका दरवाजा खटखटाने की आवाज आई और किसी के बाहर से चिल्लाने की आवाज़ भी आ रही थी। यह चिल्लाने की आवाज किसी और की नहीं, प्रतीक की थी। प्रतीक लगातार चिल्लाते हुए बोला, "ध्वनि, दरवाजा खोलो। इस कमीने की बातों में आने की तुम्हे कोई जरूरत नहीं है। मैं तुम्हारी मदद करूंगा। इससे तुम्हें छुटकारा मैं दिलाऊंगा। छोड़ दो इसे, दरवाजा खोलो, मैंने पुलिस को कॉल किया है, वह आती ही होगी।"
पुलिस का नाम सुनकर आदर्श के चेहरे पर डेविल स्माइल उतर आई। दूसरी तरफ ध्वनि का चेहरा पूरी तरह से पीला पड़ चुका था। अभी कुछ देर पहले उसकी आंखों के सामने वह मंजर घूमने लगा, जब वह प्रतीक के गले लगी हुई थी। आदर्श की आंखें पूरी तरह से लाल हो गई थी। अगले ही पल, आदर्श ने अपनी बैक से गन निकाली और प्रतीक के पैरों के बीचो-बीच मारी। जिससे ध्वनि वहीं पर खड़ी-खड़ी कांप उठी थी। प्रतीक तो जैसे सुन्न ही पड़ गया था। उसका दिल जैसे धड़कना ही भूल गया था।
प्रतीक इस होटल का मालिक जरूर था, लेकिन उसने कभी भी कोई इल्लीगल काम नहीं किया था। और आदर्श, आदर्श का इलीगल तो क्या, आदर्श की तो इल्लीगल की दुनिया थी। इसी चीज को मध्य नजर रखते हुए प्रतीक के साथ कभी भी कुछ हो सकता था। यह सोच सोच कर ध्वनि की जान निकलने लगी थी। उसने यह कदम उठा तो लिया था, लेकिन उसे इतना पता चल चुका था कि उसने आदर्श को हद से ज्यादा गुस्सा दिला दिया है। इस वक्त ध्वनि का पूरा शरीर सुन्न पड़ चुका था। वह सामने खड़े आदर्श को देख रही थी, जिसके हाथ में गन थी। आदर्श ने अब एक्सप्रेशन लैस होकर ध्वनि की तरफ देखा और दो उंगलियों से अपने पास आने का इशारा किया। जिस तरह से आदर्श ने उसे इशारा किया था, ध्वनि का दिल जैसे धक सा रह गया था। वह अपनी आंखों में नमी लिए एक टक आदर्श के चेहरे की तरफ देखकर ना में सिर हिलाते हुए बोली, "नहीं, मैं तुम्हारे पास।" अभी उसने इतना ही कहा था कि आदर्श ने गन अब पूरी तरह से प्रतीक पर तान दी थी। इस चीज को देखकर ही ध्वनि का दिल उसके मुंह को आ चुका था।
अब वह बिना देरी किए अपने कदम आदर्श की तरफ बढ़ाने ही वाली थी कि आदर्श ने उससे पहले ही अपने कदम ध्वनि की तरफ बढ़ा दिए। अगले ही पल, उसने ध्वनि को अपने कंधे पर उठाया और देखते ही देखते वहां से ले जाने लगा। तभी ध्वनि चिल्लाते हुए बोली, "मुझे नीचे उतारो, मै चलकर जा सकती हूं तुम्हारे साथ।" लेकिन आदर्श ने उसकी एक बात नहीं सुनी। वही प्रतीक तो अभी भी अपनी जगह पर सुन्न होकर खड़ा था। उसे तो कुछ समझ ही नहीं आया कि अभी कुछ देर पहले उसके साथ हुआ तो हुआ क्या। लेकिन अगले ही पल, जब ध्वनि की चीख की आवाज उसके कानों में पड़ी, तो वह होश में आया। अब उसने इधर-उधर देखा, तो अब ध्वनि उसे कहीं भी नहीं दिखाई दी। इसीलिए वह जल्दी से उन दोनों के पीछे की तरफ भागा। इस वक्त प्रतीक का दिल जोरो जोरो से धड़क रहा था। लेकिन अब उसकी नजर आदर्श पर गई, जोकि पूरी तरह से लिफ्ट में जा चुका था।
अभी भी ध्वनि उसके कंधे पर टंगी हुई लगभग से नीचे उतरने की जिद किए जा रही थी। वह लगातार आदर्श के पीठ पर मुक्के बरसा रही थी।
प्रेजेंट टाइम,
ध्वनि का चेहरा एक बार फिर से पीला पड़ने लगा था, क्योंकि प्रतीक उसके पीछे आ चुका था। अब वह आदर्श के चेहरे की तरफ देख रही थी, जिसका चेहरा पूरी तरह से एक्सप्रेशन लैस था। लेकिन उसके माथे की नसें बता रही थी कि वह किस तक कदर गुस्से में है। इस वक्त उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंचा हुआ था। लेकिन वह ध्वनि के सामने बिल्कुल शांत रहने की कोशिश कर रहा था। आज पहली बार आदर्श ध्वनि के सामने जैसे खुद को कम डाउन रखने की कोशिश कर रहा था।
लेकिन अंदर ही अंदर उसके ज्वालामुखी उमड़ रहा था। यह बात ध्वनि को अंदर ही अंदर पता चल चुकी थी। तभी प्रतीक की आवाज दोबारा से ध्वनि के कानों में पड़ी। "ध्वनि, कुछ तो बोलो, बस पुलिस आती होगी। तुम बाहर तो निकलो, मैं इस कमीने को देख लूंगा।" अभी प्रतीक बोल ही रहा था कि तभी पीछे से पुलिस की आवाज आई। आवाज को सुनकर ध्वनि की आंखें बड़ी हो गई और उसका दिल एक पल के लिए जैसे धड़कना ही भूल गया।
सामने सोफे पर बैठे हुए आदर्श का चेहरा अब पूरी तरह से डेविल वाइब दे रहा था। सामने बैठी ध्वनि का चेहरा तो अब जैसे उसमें से खून निचोड़ चुका हो।
आदर्श ने अब बड़े आराम से अपना सिर पीछे टिकाते हुए सिगरेट अपने होठों में फंसाते उसने अब सामने पड़े टेबल पर से रिमोट उठाया और दरवाजा खोल दिया। जैसे ही उसने दरवाजा खोला, ध्वनि की सांस हलक में अटक गई। दूसरे ही पल पुलिस और प्रतीक दोनों अंदर की तरफ इंटर हो चुके थे। प्रतीक ने अब ध्वनि की तरफ देखा, जोकि आराम से बेड पर बैठी हुई थी। उसने अपना चेहरा पूरी तरह से नीचे की तरफ झुकाया हुआ था और उसकी आंखें पूरी तरह से नम थी। वह अपने आंसुओं को कंट्रोल करने की कोशिश कर रही थी। दूसरी तरफ आदर्श, जो कि आराम से सोफे पर बैठा हुआ था, उसका सिर पूरी तरह से सोफा रेस्ट पर लगा हुआ था।
उसने अभी तक कोई शब्द नहीं बोला था। तभी पुलिस अंदर आते हुए, अभी तक पुलिस ने आदर्श का चेहरा नहीं देखा था, क्योंकि जिस तरफ आदर्श बैठा हुआ था, पुलिस ने अभी तक उस तरफ नजर नहीं डाली थी, क्योंकि वह पीछे रह चुका था। पुलिस की नजर सामने बैठी ध्वनि पर थी। तभी पुलिस आगे आते हुए ध्वनि की तरफ देखकर बोली, "हमें खबर मिली है कि आपको एक लड़का तंग कर रहा है और आपको इस कमरे में कैद करके रखा हुआ है उसे लड़के ने।" अभी उसने इतना ही कहा था कि तभी प्रतीक बीच में आकर बोला, "बिल्कुल सही कहा इंस्पेक्टर, यह मेरी फिआंसे है। यह मुझसे शादी करना चाहती है और इसके पीछे एक लड़का हाथ धोकर पड़ा हुआ है। वहीं इसे उठाकर यहां पर लेकर आया है।"
उसने अभी इतना ही कहा था कि पीछे से एक ठंडी आवाज सबके कानों में पड़ी। उस आवाज को सुनते ही पुलिस की आंखें बड़ी हो गई। उसने अब जाकर पलट कर पीछे की तरफ देखा, तो आदर्श को देखकर पुलिस हैरान रह गई। कांस्टेबल रूद्र ने जब आदर्श को देखा, तो उनका चेहरा पूरी तरह से पीला पड़ गया। वह अब लड़खड़ाती हुई आवाज में बोला, "मिस्टर आदर्श चौहान आप यहां पर।" तभी आदर्श पुलिस की तरफ गहरी नजरों से देखते हुए बोला, "आपको लगता है कि मैं यहां पर किसी लड़की को उठाकर लेकर आऊंगा।" इतना कहते हुए आदर्श की नजरे प्रतीक पर गहरी थी, जो कि अपना सलाइवा गटकने की कोशिश कर रहा था। आदर्श को देखते ही प्रतीक की हालत खराब होने लगी थी। दूसरी तरफ ध्वनि, जो कि अभी भी सिर झुका कर बैठी हुई थी, उसे जैसे सब कुछ पता था कि अब आगे क्या होने वाला था। वही प्रतीक अब हिम्मत करते हुए बोला, "और नहीं तो क्या, तुमने, तुमने ही तो ध्वनि को परेशान करके रखा हुआ है। इसीलिए तो मेरे कमरे से उठाकर लेकर आए। और सर, इन्होंने मेरे पैरों पर गोली भी चलाई थी।"
जैसे प्रतीक बोल रहा था, पुलिस के माथे पर पसीने की बूंदे उभरने लगी थी। वह लड़खड़ाती हुई आवाज में बोला, "लगता है आपको कोई गलतफहमी हुई है। यह बहुत बड़ी हस्ती हैं इस शहर की। आप इन पर इल्जाम लगा रहे है, एक बार फिर से सोच लीजिए। क्या पता आपको कोई गलतफहमी हुई हो।" तभी प्रतीक पुलिस की तरफ देखकर चिल्लाते हुए बोला, "देखिए, यह मेरी फिओंसी है। इसे पूछिए, यह मुझसे शादी करना चाहती हैं।
अगर इन्होंने एक बार कह दिया कि मुझसे शादी नहीं करना चाहती, तो मैं वादा करता हूं, मैं यहां से बिना कुछ बात किए चला जाऊंगा। लेकिन मुझे पता है, यह शख्स उनके साथ जबरदस्ती कर रहा है। यह जबरदस्ती हमारे कमरे में से इन्हें उठा कर लेकर आया है।" तभी पुलिस ने अब ध्वनि की तरफ देखा, जो कि सिर झुका कर अभी भी बैठी हुई थी। पुलिस के अब ध्वनि से कुछ कहने से पहले ही ध्वनि की आवाज पुलिस के कानों में पड़ी, जिसे सुनकर प्रतीक की आंखें हैरत से फैल गई। ध्वनि धीमी सी आवाज में बोली, "मैं इन्हें नहीं जानती।" जैसे ही ध्वनि ने यह बात कही, प्रतीक की आंखें हैरत से फैल गई। उसका मुंह खुला का खुला रह गया। उसे ध्वनि से ऐसी उम्मीद तो बिल्कुल भी नहीं थी। वही ध्वनि की आंखों में एक कतरा आंसू उसके गालों पर लुढ़क आया।
ध्वनि का बयान सुनकर आदर्श के चेहरे पर भी डेविल स्माइल आ गई। अब उसने प्रतीक की तरफ देखते हुए कहा, "वह पत्नी है मेरी, शादी हुई है मेरी उनके साथ, आपकी नहीं, पिछले 6 साल से।" जैसे ही शादी का जिक्र प्रतीक ने सुना, एक पल के लिए प्रतीक की आंखें नम हो गई। उसने अब ध्वनि की तरफ देखा, जो शायद अपनी जगह पर बैठी हुई अपने दिल में न जाने कितना ही दर्द लेकर चुप होकर बैठ गई थी। तभी प्रतीक गुस्से में आदर्श की तरफ देखकर चिल्लाते हुए बोला, "तुमने ही कुछ किया है। अगर तुम्हारी शादी भी इसके साथ हुई है, तो मुझे कोई लेना-देना नहीं है। इतने साल से तुम कहां थे और आज तुम आकर अपनी बीवी पर हक जता रहे हो।
जीने क्यों नहीं देते हो उसे, तुम्हारी वजह से वह सांस लेना तक भूल गई थी।" उसकी बात पर आदर्श की नजरे उस पर गहरी हो गई। तभी प्रतीक एक बार फिर से बोला, "
शायद वह तुमसे प्यार भी।" अभी उसने इतना ही कहा था कि ध्वनि बीच में टोकते हुए बोली, "आप जा सकते हैं, प्रतीक जी..." जैसे ही ध्वनि ने यह बात कही, प्रतीक वहीं पर चुप हो गया। दूसरी तरफ पुलिस ने गहरी सांस ली और आदर्श की तरफ देखते हुए बोला, "मैं माफी जानता हूं मिस्टर चौहान, लेकिन आगे से ऐसी गलती नहीं होगी। हम पूरी जांच के बाद आएंगे।"
पुलिस की बात पर आदर्श ने उंगलियां उसकी तरफ घुमाई, तो पुलिस वहां से चली गई। दूसरी तरफ प्रतीक अपनी लाल आंखों से अभी भी आदर्श को देख रहा था, जो कि उसे ही देख रहा था। आदर्श अब अपनी जगह से खड़ा हुआ और उसने अपने कदम ध्वनि की तरफ बढ़ा दिए, जोकि अपनी जगह पर बैठी हुई थी। अगले ही पल उसने ध्वनि का हाथ पकड़ उसे बराबर खड़ा कर दिया। प्रतीक अभी भी आदर्श को लगातार देखे जा रहा था। उसके हाथों की मुट्ठियां बन चुकी थी। आदर्श ने अब उसके ठोड़ी के नीचे अपनी उंगलियां टिकाई और उसका चेहरा पूरी तरह से ऊपर की तरफ करते हुए प्रतीक की तरफ देखा। फिर डेविल स्माइल के साथ अगले ही पल उसने ध्वनि के होठों पर अपने होंठ रख दिए। जिससे ध्वनि की आंखों से आंसू उसके गालों पर लुढ़क आए। प्रतीक गुस्से से दांत पीसता हुआ उन दोनों को देख रहा था। वही आदर्श लगातार उसके होठों को चूमे जा रहा था और साथ ही साथ अब उसके हाथ ध्वनि के बदन पर चलने शुरू हो गए थे। प्रतीक तो जैसे इस चीज को रोक भी नहीं पा रहा था। देखते ही देखते प्रतीक वहां से पैर पटकते हुए जा चुका था। इस वक्त प्रतीक का चेहरा गुस्से से कांप रहा था।
वही आदर्श ने प्रतीक के जाते ही ध्वनि को छोड़ा नहीं, बल्कि पास में पड़े हुए रिमोट को उठाया और देखते ही देखते दरवाजा बंद कर ध्वनि को बेड पर धक्का दे दिया। अगले ही पल, पूरी तरह उसके ऊपर चढ़ते हुए उसके कपड़े पूरी तरह से फाड़ दिए।।वही ध्वनि किसी बेजान लाश की तरह उसके नीचे लेट गई।
To be continue...
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