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Abhay in pain

ठाकुर हवेली,,

अभय ने जो अभी-अभी निर्मला जी के मुंह से सुना था, उसे सुनकर एक पल के लिए अभय का दिल जैसे धड़कना ही भूल गया था। उसके पीछे से दर्पण जी ने इतना कुछ सांवरी के साथ कर दिया था कि अब अब अभय को खुद पर गुस्सा आ रहा था कि उसने क्यों वहां से आने में देर कर दी। अब सांवरी की जो हालात थी, वह खुद को इस चीज का जिम्मेदार भी समझ रहा था। इस वक्त उसकी आंखों के सामने कुछ धुंधली यादें चल रही थी। यह वही यादें थी, जब अभय होटल पैराडाइज में नहाते टाइम आंखें बंद करते हुए एक लड़की को याद कर रहा था। उस लड़की को याद करते ही अभय की आंखें लाल होती जा रही थी।

इस वक्त भी अभय की आंखों के सामने उस लड़की का चेहरा घूम रहा था। होटल में एक खून से लथपथ लड़की, जोकि जमीन पर पड़ी हुई थी। उसके pussy से भी बहुत ज्यादा खून निकल रहा था और साथ ही साथ उसके मुंह से भी खून निकल रहा था। उस लड़की को याद करते हुए ही अभय के हाथ पैर जैसे कांपने लगे थे। उस लड़की की आंखें आधी खुली हुई थी और आधी पूरी तरह से बंद थी। वह लड़की पूरी तरह से जमीन पर लहू लोहान पड़ी हुई थी। उसके बदन पर इस वक्त कोई भी कपड़ा नहीं था। जिस वजह से अभय की रूह तक कांप उठी थी।

इस वक्त अभय की आंखों में उस लड़की को याद करते हुए नमी ने इतना विकराल रूप ले लिया था कि उसकी आंखें लाल हो चुकी थी। तभी निर्मला जी पीछे से आकर उसके कंधे पर हाथ रखते हुए धीमे से स्वर में बोली, "देख बेटा, जो हुआ, ना तू बदल सकता है ना हम बदल सकते हैं। हमें नहीं पता था कि दर्पण जी इस बार भी इस हद तक नीचे गिर जाएंगे। पहले तो उन्होंने जो किया, सो किया।" उसकी बात पर अभय के चेहरे पर हैरानी भरे एक्सप्रेशन आ गए। वह निर्मला जी की तरफ देखते हुए बोला, "आप कहना क्या चाहती है? पहले का मतलब क्या है आपका?"

दूसरी तरफ रणवीर, जो कि अपने आप को संभाल कर किसी तरह से खड़ा हुआ था। वह अब अभय की तरफ देखते हुए बोला, "नीतिका को दर्पण जी ने ही मारा था।" जैसे ही उसने यह बात कही, एक पल के लिए अभय का दिमाग पूरी तरह से घूम गया। अब जाकर उस की आंखों के सामने उस लड़की का चेहरा पूरी तरह से विजिबल हो गया। यह लड़की नीतिका थी, जोकि अभय की गर्लफ्रेंड थी। उसे अभय हद से ज्यादा प्यार करता था। दर्पण जी ने उसे रास्ते से हटाने के लिए पहले तो नीतिका का रेप किया और उसके बाद उन्होंने उसे जान से मार दिया।

जिसका पता अभी तक अभय को शायद नहीं था। अब पता चलने के बाद अभय की आंखें और भी ज्यादा लाल होने लगी। उसने अब पलट कर सांवरी की तरफ देखा, जोकि बेजान सी लेटी हुई थी। इस वक्त सांवरी की हालत बहुत खराब थी। उसे देखकर ही अभय को खुद पर गुस्सा और भी बढ़ते जा रहा था। अगर वह टाइम पर नहीं पहुंचता, तो हो सकता था कि सांवरी की भी हालात नीतिका जैसी होती। इस वक्त अभय का चेहरा गुस्से से कांप रहा था। वह चिल्लाते हुए बोला, "डॉक्टर अभी तक आए क्यों नहीं?" इतना कहते हुए उसने पीछे खड़े सर्वेंट की तरफ देखा, जो कि सर झुका कर दरवाजे पर अभी-अभी आया था। वह लड़खड़ाती हुई आवाज में बोला, "वह साहब, आपको हॉस्पिटल जाना होगा। डॉक्टर घर पर नहीं आ सकते हैं, क्योंकि उनके अस्पताल में एक पेशेंट की जान जाने वाली है। वह उसका ऑपरेशन कर रहे हैं, जब तक आप।" अभी वह बोल ही रहा था कि तभी अभय चिल्लाते हुए बोला,

"अगर डॉक्टर यहां पर नहीं पहुंचा, तो मैं तेरी जान ले लूंगा, बहन चोद, तुम लोगों को अपने लोड़े के लिए नहीं रखा है मैंने।" इतना कहते हुए अभय का चेहरा और भी खतरनाक लग रहा था। उसने अब सांवरी की तरफ देखा और चिल्लाते हुए बोला, "सब बाहर जाओ।" उसकी बात पर निर्मला जी बोली, "लेकिन बेटा..।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी अभय उनकी तरफ देखते हुए बोला, "मैंने कहा बाहर जाइए।" उसकी बात पर निर्मला जी चुप हो गई। उन्होंने रणबीर की तरफ देखा, जो अपनी लाल आंखों से एक टक सांवरी को ही देख रहा था। अभी तक अभय को शायद रणवीर की सच्चाई नहीं पता चली थी।

रणबीर भी कहीं ना कहीं सांवरी से बहुत प्यार करने लगा था। यह बात शायद रणवीर समझ चुका था। इस वक्त जिस तरह से वह सांवरी को देख रहा था, उसका दिल कर रहा था कि वह सांवरी को किसी तरह उठाए और हॉस्पिटल लेकर भाग जाए। लेकिन इस वक्त जैसे उसके हाथ पूरी तरह से बंधे हुए थे। इसीलिए उसने गहरी सांस ली और वहां से चला गया।

वही अभय ने अब सांवरी की तरफ देखा और उसके गालों को थपथपाते हुए बोला, "ऐ आंख खोल, जल्दी आंख खोल, नहीं तो पीट दूंगा तेरे को यहीं पर लेटे-लेटे। आज तक तो मैंने पीटा नहीं है। लेकिन मैं पीट जरूर दूंगा। हां, वह बात अलग है कि हवस का थोड़ा पुजारी हूं। देख, मेरी बात सुन ध्यान से, मैं मानता हूं कि मैं बहुत kameena हूं, जाहिल हूं, मेरी जाहिल panti के कारण मैने नीतिका को खो दिया और अब तुम मुझे छोड़ कर ऐसे नहीं जा सकती। समझी ना, आंखें खोल जल्दी से। मुझे नहीं पता उस कमीनें ने तेरे साथ क्या किया, क्या नहीं, मैंने उसे मार दिया है। लेकिन मैं तुझे..।" इतना कहते हुए अभय रुक चुका था। लेकिन उसकी आंखों में जो नमी थी, वह जैसे उसकी आंखों से बाहर आने को आतुर हो रही थी। लेकिन फिर भी उसने उस नमी को बाहर नहीं आने दिया।

इस वक्त अभय का दिल जोरो जोरो से धड़क रहा था। आज पहली बार अभय को इस हालत में अगर सांवरी देखती, तो शायद उसका भी दिल अभय के लिए पिघल जाता। अभय एक बार फिर से खुद को संभालते हुए बोला, "चल उठ, उठ, मै मानता हूं कि मैं बहुत हारामी हूं। लेकिन मैं खुद को बदलने की कोशिश करूंगा। मैं अब और नुकसान नहीं कर सकता, उठ, उठ जल्दी। मुझे अपने सीने में तकलीफ हो रहा है, उठ जा...।

देख, अगर तू ना उठी, तो मैं तुझे बद्दुआ दे दूंगा सड़ी हुई। जैसे कि तेरी गांड में खुजली हो, या फिर तुझे भगवान करे कि तुझे तेरा पति तेरी गांड लेकर होश में लाए।" अभय को खुद नहीं समझ आ रहा था कि वह क्या-क्या बोले जा रहा था। इस वक्त उसका दिमाग जैसे चलना ही बंद हो चुका था। अभी भी उसकी नजर बार-बार सांवरी के चेहरे पर पड़ रही थी। लेकिन अचानक से उसकी नजर दोबारा से सांवरी की लोअर बॉडी की तरफ गई, जहां से ब्लीडिंग अभी भी हो रही थी। उसको ब्लीडिंग करते हुए देखकर अभय जैसे एक पल के लिए पैनिक करने लगा था। इसलिए वह जल्दी से खुद को संभालते हुए वार्डरोब की तरफ बढ़ा और तेजी से वार्डरोब में से कुर्ती प्लाजो और साथ में कुछ सैनिटरी नैपकिंस लेकर आया।

इस वक्त उसने जो कपड़े हाथ में पकड़े हुए थे, वह काफी ज्यादा सॉफ्ट थे। वह सांवरी के अकॉर्डिंग ही कपड़े लेकर आया था। अब धीरे-धीरे कर उसने सांवरी के सारे कपड़े उतारे। जब उसने सांवरी के बदन की तरफ देखा, तो एक पल के लिए उसके चेहरे के भाव बदलने लगे। उसे अपने माथे पर पसीने की बूंदे उभरती हुई महसूस होने लगी। उसकी नजरें सांवरी की ब्रेस्ट पर थी। ब्रेस्ट को देखकर उसे dick में सेंसेशन फील होने लगी और उसका पूरा बदन कांपने लगा। उसके हाथों की नसें भी बाहर निकलने को हो रही थी।

जिस तरह से वह इस वक्त सांवरी को देख रहा था, ऐसा लग रहा था, जैसे वह खुद को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा हो। उसने अपने हाथों में पकड़े हुए कपड़ों को देखा और फिर एक बार सांवरी के बदन की तरफ देखा। सांवरी के बदन को देखते ही उसे उसका बदन कस्ता हुआ महसूस होने लगा। अगले ही पल उसने धीरे-धीरे अपने कांपते हुए हाथ सांवरी की ब्रेस्ट की तरफ बढ़ाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते वह सांवरी की बेस्ट को सहलाने लगा।

To be continue....

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