
Hotel Paradise,
ध्वनि इस वक्त बाथरूम के दरवाजे के आगे खड़ी थी और उसकी आंखों में दुनिया जहां की नमी छाई हुई थी। वह खुद से ही बोली, "आपने तो कभी मुझसे प्यार किया ही नहीं, क्या हूं मैं आपके लिए, टॉय के अलावा मैं कुछ नहीं। मैं तो बेवकूफों की तरह.." इतना कहते हुए वह चुप हो गई लेकिन उसकी आंखों से आंसू उसके गालों पर आ चुके थे, जो कि उसके दिल का दर्द साफ बयां कर रहे थे। अब वह रोते हुए ही सामने बेड पर गई और खुद बेड पर बैठ गई। "मुझे यहां से निकलना होगा,
और उसके लिए मुझे चाहे कुछ भी करना पड़े।" इतना कहते हुए ध्वनि के चेहरे से ऐसा लग रहा था, जैसे उसके दिमाग में कुछ चल रहा हो। अब उसने एक नजर बाथरूम की तरफ देखा, जहां दरवाजा अभी भी बंद था। अगले ही पल, वह अपनी जगह से खड़ी हुई और वार्डरोब की तरफ बढ़ गई। देखते ही देखते उसने कुछ ही पलों में कपड़े पहने और बाहर की तरफ आ गई। उसने एक बार फिर से बाथरूम की तरफ देखा। अब एक बार फिर से उसकी आंखों में नमी छा गई। लेकिन अगले ही पल उसने खुद को संभाला और अपने कदम बाहर की तरफ बढ़ा दिए। कुछ ही देर में वह रूम से बाहर निकल कर वहां से जा चुकी थी। वही आदर्श, जो कि अभी भी दीवार से हाथ लगाए शावर के नीचे भीग रहा था, उसकी आंखें इस वक्त हद से ज्यादा लाल थी और जबड़े पूरी तरह से कसे हुए थे।
वह खुद से ही बोला, "आग से खेल रही हो तुम, तुमने उसके दिल में जगह बनाई, जो की पूरी तरह से पत्थर दिल था। इसकी सजा तो तुम्हें भुगतनी हीं पड़ेगी, क्योंकि पत्थर दिल पत्थर होता है। तुमने इस पत्थर दिल को मॉम करने की कोशिश की है, ध्वनि राजपूत।" इतना कहते हुए आदर्श की नजरे अब ऊपर की तरफ उठ गई थी। अब शावर का पानी उसकी आंखों के अंदर से होते हुए उसके गालों पर आ रहा था। अगले ही पल, उसने अपनी आंखें कसकर बंद कर ली। तकरीबन 10 मिनट ऐसे ही खड़े रहने के बाद शॉवर का पानी बंद किया और अपनी कमर पर टॉवल लपेटे हुए बाहर की तरफ आया।
उसने इधर-उधर देखा, तो वहां पर इस वक्त कोई नहीं था। ध्वनि वहां से जा चुकी थी। ध्वनि को वहां ना देखकर एक पल के लिए उसका चेहरा पूरी तरह से एक्सप्रेशन लेस था। लेकिन उसकी आंखें जो तूफान उगल रही थी, वह तो अब आदर्श ही जानने वाला था। तभी उसके फोन पर किसी का कॉल आया और उसने अपने फोन की तरफ देखा, जहां पर उसके पर्सनल असिस्टेंट का कॉल आ रहा था। उसने अब फोन उठाया और दूसरी तरफ से असिस्टेंट की आवाज आई।
"Boss, आज रात सिंघानिया की पार्टी है।
और होटल पैराडाइज के मालिक प्रतीक को भी यहां पर इनवाइट किया गया है। हमारी आज रात सिंघानिया के साथ इस पार्टी में मीटिंग होने वाली है।" उसकी बात पर आदर्श गहरी आवाज में बोला, "कोई न्यूज़।" उसकी बात पर आगे से असिस्टेंट बोला, "यस बॉस, इस पार्टी में एक बहुत बड़ा धमाका भी होने वाला है, क्योंकि वहीं पर ड्रग डीलिंग और गर्ल्स सप्लायर भी आने वाले हैं।"
असिस्टेंट की बात सुनकर आदर्श के चेहरे पर डेविल स्माइल उतर आई। वह असिस्टेंट से बोला, "मेरी सिंघानिया के साथ अपॉइंटमेंट फिक्स करो। याद रहे, उन्हें पर्सनली अपॉइंटमेंट के लिए बोलना है।" उसकी बात पर असिस्टेंट ने हां में जवाब दे दिया और अब फोन काट कर वह अपने काम में लग गया। दूसरी तरफ आदर्श, जो कि अभी भी वैसे ही खड़ा था। इस वक्त उसकी कमर पर सिर्फ टॉवल था और उसके अलावा कुछ भी नहीं था। लेकिन अब वह बालकनी में जाकर खड़ा हुआ, तो उसका चेहरा पूरी तरह से काला पड़ गया क्योंकि,
भले ही वह टॉप फ्लोर पर था, लेकिन उसकी नजर सामने ही रूम में बने हुए टॉप सेकंड फ्लोर, जोकि उसके सामने ही बिल्डिंग में बना हुआ था, उसे पर थी, क्योंकि उसमें ध्वनि इस वक्त प्रतीक के गले लगी हुई थी। होटल पैराडाइज काफी बड़ा था, जिसमें दो बिल्डिंग से एक में 48 फ्लोर्स थे और दूसरे में भी 48 फ्लोर थे। लगभग से दोनों बिल्डिंग बराबर खड़ी थी, जिसमें एक दूसरे में थोड़ा बहुत तांका झांकी हो सकती थी। लेकिन यहां की हाई-फाई लोगों की समिति के कारण वह एक दूसरे को नहीं देखते थे। जिस वजह से लोग अपनी ही जिंदगी में सीमित रहते थे।
फिलहाल आदर्श का चेहरा पूरी तरह से लाल पड़ चुका था और कांप रहा था। उसके जबड़े पूरी तरह से कस चुके थे। वह गुस्से में दांत पीसते हुए बोला, "यह तुमने ठीक नहीं किया ध्वनि, तुमने एक बार फिर से वही हरकत की, जो मुझे पसंद नहीं थी।" इतना कहते हुए आदर्श का गुस्सा और भी ज्यादा बढ़ने लगा। वही ध्वनि, जोकि प्रतीक के गले लगे हुए थी, वह अब प्रतीक के गले से अलग हुई और प्रतीक उसके गालों पर हाथ रखते हुए बोला, "क्या बात है ध्वनि, कुछ बोलोगी?"
लेकिन ध्वनि कुछ बोल ही नहीं रही थी। वही प्रतीक अब उसका हाथ पकड़ते हुए उसको बेड के पास लेकर आया और उसे बिठाते हुए बोला, "कुछ तो बोलो यार, तुम तो कुछ बोल ही नहीं रही हो। अगर कुछ बोलोगी नहीं, तो मुझे कैसे पता चलेगा कि तुम्हारे साथ हुआ क्या है। किसी ने कुछ कहा, किसी स्टाफ ने तुमसे कुछ कहा, तुम मुझे बता सकती हो।।यू नो ना व्हाट, आई फील फॉर यू, don't be cry baby." उसकी बात पर ध्वनि रोते हुए अपनी आंसू साफ करने लगी। लेकिन उसके आंसू रुक ही नहीं रहे थे। इस वक्त उसे जो महसूस हो रहा था, यह वही जानती थी। वह एक बार फिर से प्रतीक के गले लग गई। आदर्श वही खिड़की में खड़ा अभी भी ध्वनि और प्रतीक को ही देख रहा था।
जैसे-जैसे ध्वनि उसके गले लग रही थी, वैसे-वैसे आदर्श का गुस्सा बढ़ते जा रहा था। तभी प्रतीक उसको पीछे करते हुए बोला, "कुछ तो बोलो यार, मेरा दिल घबरा रहा है। अब जैसे तुम कर रही हो, पहले तुम पानी पियो।" इतना कहते हुए वह अब अपनी किचन की तरफ बढ़ने लगा कि तभी ध्वनि ने उसका हाथ पकड़ते हुए ना में सिर हिला दिया।
ध्वनि को यूं रोता हुआ देखकर प्रतीक को अजीब सी फीलिंग आ रही थी। वही आदर्श का दिल बुरी तरह से जल रहा था कि ध्वनि को अपनी फिलिंग्स बताने के लिए प्रतीक के पास जाना पड़ा। इतना तो उसे पता चल चुका था कि ध्वनि और प्रतीक के बीच इस वक्त कुछ भी नहीं है। लेकिन इस वक्त जो ध्वनि फील कर रही थी, वह कहीं ना कहीं आदर्श को पता था कि उसके दिल में क्या बात चल रही थी। लेकिन फिर भी वह इस वक्त गुस्से में था, क्योंकि वह बार-बार प्रतीक के गले लग रही थी। दूसरी बात, उसे अपना दर्द बताने के लिए प्रतीक के पास जाना पड़ा। इस वजह से उसके जबड़े और भी ज्यादा कसने लगे थे। अब वह अपनी बालकनी से अंदर की तरफ आया और तेजी से वार्डरोब की तरफ बढ़ गया। कुछ ही देर में, उसने अपने कपड़े पूरी तरह से पहने और बाहर की तरफ आया और लिफ्ट से होते हुए नीचे ग्राउंड फ्लोर पर आया। दूसरी तरफ ध्वनि, जोकि प्रतीक की तरफ देख रही थी, उसने अब जो कहा, उसे सुनकर एक पल के लिए प्रतीक की धड़कनें स्किप हो गई।
ध्वनि अब रोते हुए प्रतीक की तरफ देखकर बोली, "विल यू मैरी मी।" जैसे ही यह आवाज प्रतीक के कानों में पड़ी, एक पल के लिए प्रतीक ध्वनि की तरफ देखता ही रह गया। लेकिन तभी वहां पर कुछ टूटने की आवाज आई और उस टूटने की आवाज सुनकर ध्वनि की नजरे दरवाजे की तरफ उठ गई। जहां पर अभी-अभी आदर्श आकर खड़ा हुआ था और इस वक्त उसका चेहरा इस हद तक काला पड़ चुका था कि ध्वनि का दिल कांप उठा था।
वहीं प्रतीक की नजरे अभी भी ध्वनि के चेहरे पर टिकी हुई थी। अब वह आगे की तरफ आया और अगले ही पल उसने ध्वनि को गले लगा लिया। यह चीज देखकर आदर्श का खून पूरी तरह से खोल उठा।
To be continue...





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