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Real abhay

ठाकुर हवेली,

अभी-अभी कोई दरवाजा तोड़कर अंदर की तरफ आया था और दर्पण जी, जो कि अपना अंडरवियर नीचे करके अपना डिक बाहर की तरफ निकाल रहे थे, वह एकदम से जमीन पर जा गिरे, क्योंकि उस शख्स ने गाड़ी बिल्कुल उनके पास लाकर खड़ी कर दी थी। अब वह जमीन पर वैसे ही लुढ़क गए थे। इस वक्त दर्पण जी की सांस हद से ज्यादा गहरी चल रही थी। अभी तक उन्हें उस शख्स का चेहरा नहीं दिखा था। उनके हाथ अपने सीने पर थे। अभी भी उनका अंडरवियर नीचे की तरफ था और उसका dick अंडरवियर के बाहर ही था, जोकि पूरी तरह से ढीला पड़ गया था।

उस पर पी की बूंदे ऊपर की तरफ उभर आई थी। दूसरी तरफ अभय, जो कि यह सब देख रहा था, उसका कलेजा ही जैसे मुंह को आ गया था। लेकिन जैसे ही उसने गाड़ी के अंदर बैठे शख्स को देखा, तो उसका चेहरा पूरी तरह से पीला पड़ गया। उसने अब दर्पण जी की तरफ देखा, जो अभी भी गहरी सांस भर रहे थे। वही गाड़ी में बैठा हुआ शख्स इस वक्त गहरी नजरों से अभय को देख रहा था। जिसका चेहरा पूरी तरह से पीला पड़ चुका था। अब उस शख्स ने जैसे ही अपने कदम बाहर की तरफ रखे, अब जाकर निर्मला जी, जो की टेबल के बीच अभी भी कांच पर गिरी हुई थी। उनकी नजर उस शख्स पर पड़ी, तो उनके मुंह से एक ही आवाज निकली, "अभय.." इतना कहते हुए निर्मला जी की आंखें बड़ी हो गई। वही दर्पण जी, जोकि जमीन पर गिरे हुए थे, उन्होंने जब उस शख्स का चेहरा देखा, तो एक पल के लिए उनका चेहरा भी

पूरी तरह से उड़ गया। वह जल्दी से अपना अंडरवियर ऊपर की तरफ करके खड़े हुए और उस शख्स की तरफ देखते हुए बोले, "तुम यहां पर, कौन हो तुम? तुम अभय के बहरूपिया हो ना?" जैसे ही दर्पण जी ने यह बात कही, सामने खड़ा शख्स, जोकि कोई और नहीं, सही मायने में अभय था। इस वक्त उसके सिर पर पट्टी बंधी हुई थी। उसने जब नीचे गिरी हुई सांवरी को देखा, तो उसकी आंखें बड़ी हो गई। क्योंकि सांवरी की हालत इस वक्त हद से ज्यादा खराब कर दी गई थी। उसको यूं देखकर अभय की आंखें जैसे लाल होने लगी थी। उसने अब सामने खड़े शख्स को देखा, जो कि अभय का चेहरा लेकर इतने दिनों से

ठाकुर हवेली में रह रहा था, अब उसके पास आया और अगले ही पल उसने उस शख्स की गर्दन पकड़ ली। वह उसे लगभग से पीछे की तरफ धकेलने लगा। जैसे ही अभय ने उस शख्स की गर्दन पकड़ी और उसे पीछे धकेलना शुरू किया, जमीन पर पड़े हुए दर्पण जी का चेहरा पूरी तरह से सफेद पड़ चुका था।

वह जल्दी से ऊपर की तरफ उठने को हुए, लेकिन उनका हाथ कांच पर पड़ा। एक बार फिर से वह जमीन पर गिर गए। वह चिल्लाते हुए बोले, "गॉड्स, कहां हो तुम सब लोग?" लेकिन कोई भी गार्ड आगे नहीं आया। गार्ड जबकि वहीं पर खड़े थे। लेकिन किसी की भी हिम्मत नहीं थी कि वह आगे आ जाए। सब ने अपना सिर नीचे की तरफ झुका रखा था। तभी अभय दांत पीसकर बोला, "इनमें से किसी दले की हिम्मत नहीं है कि वह आगे आकर मुझे रोक सके। क्या कहा था कि मैं अब वहां से छूटकर कभी घर पर वापस नहीं आ सकता।

उस होटल से निकलते ही आपने मेरे पीछे गुंडे भिजवा दिए। जब मेरी गाड़ी रुकी, तो उन गुंडो ने मुझे किडनैप कर लिया। वैसे प्लानिंग अच्छी थी, बाबा।" इतना कहते हुए अभय अब अपने बाप की तरफ बढ़ने लगा। तभी पीछे से दूसरा अभय, जो कि अभय का हमशक्ल था, वह अब आगे की तरफ आया। तभी अभय की नजर ऊपर की तरफ गई, जहां पर रणवीर खड़ा था और उसका सिर पूरी तरह से फट चुका था। रणबीर को इस हालत में देखकर अभय की आंखें बड़ी हो गई। अब उसने नीचे पड़े हुए दर्पण की तरफ देखा और गुस्से में दांत पीसते हुए बोला, "आपकी हिम्मत कैसे हुई रणवीर पर हमला करवाने की।"

तभी ऊपर से चिल्लाते हुए रणबीर की आवाज आई। "भाई, मुझे इस बुड्ढे ने नहीं मारा, मुझे इस कमीने किशन ने मारा है।" इतना कहते हुए उसकी नजर नकली अभय, यानी कि किशन पर थी। जो इस वक्त अपनी जगह पर खड़े-खड़े कांप रहा था। यानी इतने दिनों से जो सांवरी के साथ हो रहा था, उसका सही मायने में रेप हो रहा था। वह अब पूरी तरह से जमीन पर लेटी हुई थी। होटल पैराडाइज में जब उसे पीरियड्स आए थे, उसके बाद अभय अगले दिन बाहर किसी काम से गया था। उस वक्त दर्पण जी ने अपनी चाल चली थी। जिस वजह से उन्होंने अभय को वहां से किडनैप करवा दिया था। अब तक जितनी बार भी सांवरी के साथ इंटिमेसी हुई थी, वह किशन और सांवरी के बीच हुई थी ।

क्योंकि अभय का वहां से निकल पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो गया था। अभय ने किशन की तरफ देखा और अगले ही पल अपनी बैक में गन निकाली और देखते ही देखते Kishan पर तान दी। अगले ही पल, गोली किशन के सिर के आर पार थी। अब किशन जमीन पर गिरा हुआ था और यह चीज देखकर दर्पण जी का कलेजा उसके मुंह को आ गया था। इस वक्त उनका पूरा शरीर कांप रहा था। लेकिन अभय की नजरे अब सामने जमीन पर पड़ी हुई सांवरी की तरफ थी। उसे देखकर अभय की आंखें अब हद से ज्यादा लाल हो चुकी थी। उसका गुस्से से इतना बुरा हाल होने लगा था कि उसके माथे की नसें तक ऊपर की तरफ उभर चुकी थी। अभय ने अब जल्दी से अपनी शर्ट के बटन खोलें।

वह धीरे-धीरे सांवरी के पास आया। सांवरी, जोकि जमीन पर गिरी पड़ी थी, इस वक्त वह पूरी तरह से जमीन पर औंधे मुंह गिरी हुई थी, क्योंकि दर्पण जी ने उसके पेट में इतनी जोर-जोर से मुक्के मारे थे कि अभी तक उससे उठा नहीं गया था। ऊपर से उसके मुंह से भी हल्की ब्लीडिंग हो रही थी। अभय ने अब अपनी शर्ट पूरी तरह से उस पर लपेटी और उसे सीधा किया। उसकी नजर सीधे सांवरी की लोअर बॉडी पर गई, जहां पर हद से ज्यादा ब्लीडिंग हो रही थी।

सांवरी को यूं देखकर एक पल के लिए अभय का दिल धक सा रह गया। उसने अब सांवरी का चेहरा देखा, जिसकी आंखें हल्की खुली थी। लेकिन अभी तक उसने किशन की तरफ नहीं देखा था। अभय को अपने करीब देखकर सांवरी की आंखों में आंसू आ गए। उसने अपना चेहरा दूसरी तरफ घूमा लिया।

अभय को फर्क नहीं पड़ा, क्योंकि अभी उसका ध्यान सांवरी की तरफ था। क्योंकि सांवरी की लोअर बॉडी से बहुत ज्यादा ब्लड आ रहा था। इसलिए वह जल्दी से अपनी जगह पर खड़ा हुआ और लगभग से चिल्लाते हुए बोला, "डॉक्टर को कॉल करो।" निर्मला जी, जो कि कांच पर गिरी हुई थी, वह भी अब तक उठकर खड़ी हो चुकी थी। क्योंकि उनकी पीठ काफी हद तक जल चुकी थी। शुक्र था कि उनके सिर में चोट नहीं आई थी, लेकिन फिर भी उनकी पीठ काफी हद तक जल चुकी थी। इस वक्त उन्हें दर्पण जी पर हद से ज्यादा क्रोध आ रहा था। दूसरी तरफ अभय, जो कि अब निर्मला जी की तरफ देख रहा था, अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमाया और गार्ड की तरफ देखते हुए बोला, "इस इंसान को कॉल कोठी में बंद कर दो।

जब तक इसे मैं सजा ना सुना दूं, यह तब तक वहीं पर बंद रहना चाहिए।" इतना कहते हुए उसकी नजर उन गार्ड्स पर थी, जिन्होंने अपना सिर पूरी तरह से अभय के आगे झुका लिया था।

अभय सांवरी को उठाकर कमरे में लेकर गया और देखते ही देखते उसने उसे बेड पर लेटाया। अब तक सांवरी पूरी तरह से बेहोश हो चुकी थी। अभय उसकी तरफ देखते हुए बोला, "मुझे तुझे बचाना होगा, तू आंखें क्यों नहीं खोल रही? आंखें खोल अपनी।" इतना कहते हुए लगभग से उसके चेहरे को दबा रहा था, ताकि वह आंखें खोलें। लेकिन सांवरी अपनी आंखें नहीं खोल रही थी। दूसरी तरफ रणवीर, जो कि दरवाजे पर खड़ा था, उसे बिल्कुल भी अभय का सांवरी के पास आना अच्छा नहीं लग रहा था। उसे अपने दिल में एक अलग ही जलन महसूस हो रही थी।

तभी पीछे से निर्मला जी की आवाज आई। "वह प्रेग्नेंट थी, अभय और वह भी उस किशन के बच्चे से।" जैसे ही अभय ने यह बात सुनी, उसकी आंखें बड़ी हो गई।

To be continue...

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