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I love you,daddy

Guleria house,

इस वक्त गुलेरिया हाउस पूरी तरह से सजाया जा रहा था। जिस तरह से गुलेरिया हाउस सजाया जा रहा था, उसे देखकर लग रहा था कि यहां या तो कोई बहुत बड़ा इवेंट था या फिर किसी की शादी। वही दरवाजे पर खड़ी बूढी औरत, जो लगभग से 70-72 साल की होगी, वह पूरी तरह से दरवाजे पर बैठकर उन लोगों का काम देख रही थी। वहीं दूसरी तरफ पास ही में एक कर्मी काम कर रहा था, जो कि दरवाजे को फूलों से डेकोरेट कर रहा था। तभी वह औरत, जिसका नाम दामिनी गुलेरिया था, वह अपनी भारी लेकिन लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली, "तुझे दिखाई नहीं दे रहा है, सारे फूल नीचे गिरे जा रहे है। मेरी पोती घर पर वापस आ रही है और मेरे बेटे की इंगेजमेंट है। बड़ी मुश्किल से वह इस इंगेजमेंट के लिए माना है और तू उस पर भी हमें देख रहा है। अभी तेरे यह जो लाठी है ना, यह पीठ पर मारूंगी ना, तुझे अक्ल आ जाएगी।" वही वह वर्कर, जो की फ्लोरिंग कर रहा था, वह अपने सिर पर हाथ फेरते हुए बोला, "सॉरी सॉरी अम्मा जी, गलती से फूल नीचे गिर गए, अभी ठीक किए देता हूं।"

उसकी बात पर अम्मा जी ने हां में सिर हिलाया। तभी पीछे से एक चहकती हुई आवाज अम्मा जी के कानों में पड़ी। "क्या दादी मोम, आप भी ना सुबह से यहां पर बैठी है। इन लोगों के पीछे पड़ी हुई है। चलो ना अंदर चलते हैं। आराध्या भी आती होगी।" तभी पीछे से गरजती हुई आवाज आई। यह किसी औरत की आवाज थी। वह औरत आगे की तरफ आई और अपनी बेटी का हाथ पकड़ते हुए, जोकि दामिनी जी का हाथ थामे हुए थी, लगभग से छुड़ाते हुए बोली, "वह तुम्हारी बहन नहीं है, समझी तुम। वह एक अनाथ लड़की है और इन्होंने उसे अनाथ आश्रम से अडॉप्ट किया था। खासकर तुम्हारे चाचा जी रेयांश खुद तो उस मुसीबत को इस घर में ले आए, ऊपर से महारानी को पढ़ने के लिए कनाडा भेज दिया। क्या बात है?

इतना खर्चा तो खुद की भतीजी पर नहीं किया, जितनी सौतेली बेटी पर कर दिया।" इतना कहते हुए सुमन, जोकि दामिनी जी के बड़े बेटे आयुष की पत्नी थी। वह लगभग से अपनी बेटी ध्रुविका को खींचते हुए अंदर की तरफ ले जा रही थी। तभी दामिनी जी चिल्लाते हुए बोली, "खबरदार सुमन! अगर तुमने हमारी पोती को कुछ कहा। तुम्हें अपनी जिंदगी में जो करना है, करो, लेकिन हमारी पोती को बीच में मत लाओ।" तभी सुमन दांत पीसते हुए बोली, "जो मर्जी कहिए, अम्मा जी, आपके कहने से वह इस घर की बेटी नहीं बन जाएगी। रेयांश उसे गोद लेकर यहां पर लेकर आया था, वह भी कितनी उम्र में सिर्फ 20 साल की उम्र में, जब उसे इतनी ज्यादा समझ भी नहीं थी। आपको तो उसे रोकना चाहिए था। लेकिन नहीं, आपके लिए तो रेयांश समझदार ही बहुत है।"

तभी बीच में ध्रुविका बोली, "मॉम, क्यों आप आराध्या के पीछे पड़ी रहती हैं। वह तो पिछले 3 साल से कनाडा गई हुई है। लेकिन फिर भी आप उसे नहीं छोड़ रही है। आज वह 3 साल बाद कनाडा से वापस आ रही है, लेकिन आपको फिर भी चैन नहीं।" उसकी बात पर सुमन ने गहरी सांस ली और उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोली, "ज्यादा जुबान मत खोल, नहीं तो तेरे बाप को बुला लूंगी यहीं पर। चल मेरे साथ अंदर।" इतना कहते हुए वह लगभग से ध्रुविका को खींचते हुए अंदर की तरफ ले गई।

दूसरी तरफ दामिनी जी का चेहरा पूरी तरह से उतर चुका था, जो कि वह खिला हुआ था। लेकिन खुद को संभालते हुए दादी ने अब गार्डों की तरफ देखा और बोली, "तुम क्यों रुक गए हो, जल्दी से तैयारी करो। रात की इंगेजमेंट है। इतना कम टाइम है, तब भी तुम लोग रुक जाते हो। तुम लोगों को अक्ल नहीं है क्या?"

इतना कहते हुए दादी फिर से तैयारी करवाने लगी।

वहीं दूसरी तरफ,

एयरपोर्ट पर,

एक लड़की, जिसने शॉर्ट्स और क्रॉप टॉप पहना हुआ था, साथ में उसने हाई हील्स शूज पहनी हुई थी। लड़की दिखने में बहुत ज्यादा खूबसूरत थी। जिसका गोरा रंग, गहरी काली आंखें और लंबे कमर से भी नीचे आते हुए खुले बाल, होठों के नीचे तिल और माथे के बीच में केंद्र में भी एक तिल, जो कि उसकी खूबसूरती को और भी ज्यादा बढ़ा रहा था। इस लड़की की उम्र लगभग से 18 साल की होगी। वो लड़की लगभग से धीमे-धीमे चलते हुए आगे की तरफ आई और उसकी नजर गाड़ी पर पड़ी। जैसे ही उस गाड़ी को उस लड़की ने देखा, तो उसकी आंखों में चमक आ गई।

वह मन में बोली, "मैं जानती थी, आप जरूर आएंगे, डैडी।" इतना कहते हुए उसका दिल जोरो जोरो से धड़क रहा था। इस वक्त उसने अपने लोअर लिप को अपने दांतों तले दबा लिया था। वह भागते हुए उस गाड़ी के पास आई और अगले ही पल, जैसे ही उसने गाड़ी का दरवाजा खोला, तो उसकी आंखें बड़ी हो गई। क्योंकि गाड़ी की बैक सीट पर इस वक्त कोई भी नहीं बैठा हुआ था। पिछली सीट को खाली देखकर एक पल के लिए उसकी आंखों में नमी उतर आई। लेकिन अब उसने उम्मीद करते हुए गाड़ी की अगली सीट पर देखा, तो वहां पर ड्राइवर था। अब उसकी आंखों से आंसू गालों पर आ चुके थे।

इस वक्त उसे हद से ज्यादा बुरा लग रहा था। वह गाड़ी में बैठी और ड्राइवर से कुछ बोलने को हुई कि तभी ड्राइवर आगे से बोला, "रेयांश सर किसी जरूरी काम से कंपनी में रुके हुए है। इसीलिए वह आपको लेने नहीं आए।" तभी आराध्या खुद में बड़बड़ाई, "क्या काम मुझसे भी ज्यादा इंपॉर्टेंट था?" इतना कहते हुए आराध्या का गला भर आया था। लेकिन अब वह चुपचाप गाड़ी में बैठी रही, पर फिर भी उसे अपने दिल में अजीब सा दर्द महसूस हो रहा था।

तकरीबन आधे घंटे बाद उसकी गाड़ी गुलेरिया हाउस के आगे आकर रुकी। गुलेरिया हाउस को सजता हुआ देखकर एक पल के लिए आराध्या के चेहरे पर सवालिया एक्सप्रेशन आ गए। "आखिर गुलेरिया हाउस इतना सजा क्यों हुआ है?" कहते हुए उसका दिल पता नहीं अजीब सी बेचैनी से भर चुका था। वह अब गाड़ी से बाहर उतरी और उसने बाहर दरवाजे पर ही दादी को देखा, तो एक पल के लिए उसके चेहरे पर चमक आ चुकी थी। अगले ही पल, वह भागते हुए दादी के पास आई। दामिनी जी, जो कि व्हीलचेयर पर बैठी हुई थी, उन्होंने जैसे ही आराध्या को देखा, तो अपने हाथ पूरी तरह से फैला लिए और आराध्या उनके गले से जा लगी।

उनके गले से लगते ही आराध्या के दिल को सुकून मिल गया। वहीं दादी का भी यही हाल था। दामिनी जी आज दिल से बहुत ज्यादा खुश थी। उन्होंने अब अपना चेहरा पीछे की तरफ किया और आराध्या के चेहरे को अपने हाथों में भरते हुए बोली, "

आ गई मेरी बच्ची, बहुत इंतजार करवाया तूने, कैसी रही तेरी पढ़ाई?" तभी आराध्या बोली, "बहुत अच्छी दादी।" तभी दादी मुंह बनाते हुए बोली, "तब तो तू जाना नहीं चाहती थी, Reyansh ने तुझे जबरदस्ती भेजा था।"

दामिनी जी की बात पर एक पल के लिए आराध्या की आंखें लाल हो गई। लेकिन अगले ही पल वह फीका सा मुस्कुराते हुए बोली, "क्या ही फर्क पड़ता है दादी, वैसे रेयांश कहां पर है?" उसके मुंह से रेयांश सुनकर दामिनी जी उसे तिरछी नजरों से देखते हुए बोली, "पापा है वह तेरे।" तभी आराध्या बात बीच में काटते हुए बोली, "अरे दादी, प्लीज शुरू मत हो जाइएगा फिर से, ठीक है ना। वह कहीं से भी मेरे पापा नजर नहीं आते हैं। इतना हैंडसम इंसान मेरा पापा कैसे हो सकता है।" उसकी बात पर एक पल के लिए दामिनी जी की हंसी छूट गई थी। आराध्या शुरू से ही रेयांश को रेयांश कह कर बुलाती थी।

"मैं कभी भी रेयांश को डैडी कह कर नहीं बुलाया था।" Reyansh 20 साल का था, जब उसने आराध्या को गोद लिया था और आराध्या उस वक्त 7 साल की थी। जब वह अनाथ आश्रम में अकेली रो रही थी और रेयांश की नजर उसे पर पड़ते ही उसने आराध्या को गोद ले लिया था। क्योंकि आराध्या एक जगह पर बैठी सिर नीचे झुकाए हुए रोए जा रही थी और उसे चुप करवाने वाला कोई भी नहीं था। Reyansh ने अनाथ आश्रम से पूछा, तो उन्होंने बताया कि आराध्या के मॉम डैड की डेथ एक कार एक्सीडेंट में हो चुकी थी। तब से रेयांश ने आराध्या को पाला था।

इस वक्त आराध्या अपनी ही सोच में गुम थी। तभी उसके कानों में दामिनी जी की आवाज पड़ी "और तुझे एक और खुशखबरी देनी है।" दामिनी जी की आवाज सुनकर आराध्या अपने होश में वापस आई और दामिनी जी को सवालिया नजरों से देखने लगी। तभी दामिनी जी खुश होते हुए बोली, "चल पहले मुंह मीठा कर, तुझे खुशखबरी देती हूं।" इतना कहते हुए उसने नौकर की तरफ देखा, जो वहीं पर बैठी साइड पर लड्डू बना रही थी। उसने नीचे ही काफी बड़ी प्रान्त लगाई हुई थी। उसी में दूसरी तरफ प्लेट रखी हुई थी, जहां पर वह मोतीचूर के लड्डू हाथों से बना बनाकर दूसरी प्लेट में रख रही थी। अब उसने उस औरत की तरफ देखा, तो उसने हां में सिर हिलाया। वह एक प्लेट किचन से लाने चली गई, ताकि वह लड्डू एक प्लेट में लगा सके। कुछ ही सेकंड में वह प्लेट लेकर आई और उसने वह लड्डू प्लेट में लगाए और उठकर दामिनी जी की तरफ आते हुए बोली, "लीजिए दादी जी।" तभी दामिनी जी उसकी तरफ देखते हुए बोली, "चल, पहले मुंह मीठा कर, तुझे बताती हूं खुशखबरी।" तभी आराध्या मुंह बनाते हुए बोली, "पहले मुझे खुशखबरी सुनाइए, फिर लड्डू खाऊंगी।" उसकी बात पर दामिनी जी ने उसे तिरछी नजरों से देखा और बोली,

"बहुत जिद्दी है ना तू।" इतना कहते हुए उसने आराध्या को घूरा, तो आराध्या ने हां में सिर हिला दिया। इतना कहते हुए आराध्या के चेहरे पर मुस्कुराहट और भी लंबी हो गई थी। तभी दामिनी जी बोली, "आज शाम को रेयांश की इंगेजमेंट है।" जैसे ही उसने यह बात कही, आराध्या के हाथ में पकड़ा हुआ बैग नीचे जमीन पर जा गिरा और दूसरे हाथ में पकड़ा हुआ फोन भी जमीन पर जा गिरा। एक पल के लिए आराध्या पूरी तरह से फ्रिज हो चुकी थी और उसका दिल धक सा रह गया था। वही दामिनी जी उसे देखकर बोली, "क्या हुआ बेटा, तू ठीक तो है ना? कहीं चक्कर वक्कर तो नहीं आया तुझे, चल इधर आ, बैठ यहां पर।" इतना कहते हुए लगभग से उसका हाथ पकड़ कर नौकरानी को बोला, "चेयर लेकर आ।" तो नौकरानी हां में सिर हिलाते हुए बोली, "अभी लाती हूं।"

लेकिन आराध्या, उसका तो जैसे दिमाग ही पूरी तरह से घूम चुका था। वह अब दादी की तरफ देखते हुए बोली, "दादी, रुको, मै अभी आती हूं।" इतना कहते हुए वह लगभग से बाहर की तरफ भागी। देखते ही देखते वह गाड़ी में बैठी और गुलेरिया हाउस से निकल चुकी थी। वहीं दामिनी जी तो बस आराध्या की तरफ देखते ही रह गई। उन्हें तो कुछ समझ में ही नहीं आया कि आखिर आराध्या को हुआ क्या? एक पल के लिए उनके चेहरे पर परेशानी झलक उठी। अगले ही पल, उसने डरते हुए अपने पास ही में पड़े हुए फोन को रेयांश को घुमा दिया।

वहीं दूसरी तरफ,

गाड़ी में बैठी आराध्या ड्राइव कर रही थी। ड्राइवर को उसने, जब वह गाड़ी के पास आई थी, तभी उसे बाहर निकाल दिया था। क्योंकि वह जानती थी कि कहीं ना कहीं ड्राइवर उसे गुलेरिया इंडस्ट्रीज नहीं लेकर जाएगा। इसीलिए उसने लगभग से ड्राइवर को बाहर की तरफ धकेला और खुद गाड़ी में बैठकर गाड़ी ड्राइव करने लगी। तकरीबन आधे घंटे बाद, उसकी गाड़ी गुलेरिया इंडस्ट्रीज के आगे आकर रुकी। इस वक्त उसका दिल जोरो जोरो से धड़क रहा था।

आंखों से पानी इतनी ही तेजी से बह रहा था। वह रोते हुए गुलेरिया इंडस्ट्रीज के अंदर आई और देखते ही देखते लिफ्ट में से होते हुए पूरी तरह से ऊपर टॉप फ्लोर पर पहुंची। इस वक्त उसके पैर पूरी तरह से कांप रहे थे और दिल जैसे धड़कने से इंकार कर रहा था। कुछ ही देर में, वह एक बड़े से केबिन के आगे आकर खड़ी हुई और अपने कांपते हुए हाथों से उसने उस केबिन के दरवाजे पर हाथ रखा। अगले ही पल, दरवाजा खोला, तो केबिन में कोई नहीं था। सामने चेयर लगी थी, वह भी खाली थी और उसके सामने ही बड़ा सा सोफा लगा हुआ था, वह भी खाली था। इस वक्त वही जानती थी कि उसका दिल किस कदर तकलीफ में था।

लेकिन अगले ही पल, उसकी नजर बुक्शेल्फ पर पड़ी, तो उसे देखकर आराध्या आगे की तरफ आई। उसमें से उसने एक बुक निकाली। जैसे ही उसने वह बुक निकाली, दरवाजा खुल गया। आराध्या को जैसे पहले ही पता था कि यहां पर एक दरवाजा है। अब वह अंदर की तरफ आई, तो उसकी नजर बालकनी में खड़े हुए रेयांश पर पड़ी, जो कि इस वक्त आराध्या की तरफ पीठ करके खड़ा था। रेयांश को देखकर उसका दिल जोरो जोरो से धड़क रहा था। रेयांश की नजरे बाहर की तरफ थी, जो कि आसमान की तरफ देख रही थी। उसकी बॉडी ऐसी थी, मानो किसी बॉडीबिल्डर की हो। पीछे से उसके मसल्स पूरी तरह से कसे हुए थे। इस वक्त उसने सिर्फ एक पैंट पहनी हुई थी। वह पूरी तरह से शर्टलेस था और साथ में सिगरेट पी रहा था। उसके वह ब्राउन लिप्स देखकर पता चलता था कि वह कितनी सिगरेट पीता होगा। लेकिन फिर भी उसकी हैंडसमनेस बिल्कुल भी कम नहीं हुई थी, आंखें किसी शहर की तरह।

रेयांश ने पीछे की तरफ बिल्कुल भी पलट कर नहीं देखा था। वही आराध्या अब धीरे-धीरे कदमों से उसकी तरफ बढ़ी। अगले ही पल, भागते हुए रेयांश के पीछे गई और उससे पूरी तरह से लिपट गई। वही रेयांश के चेहरे के भाव एक पल के लिए पूरी तरह से बदल चुके थे और उसकी आंखें पूरी तरह से बंद हो चुकी थी। तभी आराध्या बोली, "आई मिस यू डैडी, आई मिस यू सो मच..."

तभी रेयांश गहरी आवाज में बोला, "तुम यहां क्या करने आई हो....?

जानती हो ना हमारा रिश्ता क्या है?" उसकी बात सुनकर आराध्या की आंखें बड़ी हो गई। उसने अब अपना चेहरा पीछे की तरफ किया, तो रेयांश उसकी तरफ पलटा। उसकी गहरी नजरे आराध्या के चेहरे पर थी, जो उसने पिछले तीन साल से नहीं देखा था। आराध्या की आंखों में आंसू आ गए। वह रेयांश की तरफ देखते हुए बोली, "जानती हूं कि मेरा और आपका क्या रिश्ता है। वह रिश्ता ना मैंने कभी माना है और ना कभी मानूंगी।" तभी रेयांश उसकी तरफ गहरी नजरों से देखते हुए बोला, "तुम्हें न्यूज़ नहीं मिली घर से।" तभी आराध्या उसकी तरफ देखते हुए बोली, "आप मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते हैं।

यू नो व्हाट आई मीन डैडी, यू आर only माय..."

उसकी बात पर रेयांश को 3 साल की पहले की कही हुई आराध्या की बातें याद आ गई, जब आराध्या ने उसे पहली बार आई लव यू कहा था। तब जाकर रेयांश ने उसे खुद से दूर भेजने का इरादा बनाया था, क्योंकि आराध्या उससे बहुत ज्यादा छोटी थी। Reyansh उससे बहुत बड़ा था। दोनों में 13 साल का डिफरेंस था, जोकि रेयांश बिल्कुल भी अफोर्ड नहीं कर रहा था।

To be continue...

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