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Besharmi ki hadde paar

ठाकुर हवेली,

अभी-अभी सांवरी अपनी बात कह कर बाहर गई थी कि तभी उसकी चीख की आवाज अंदर तक गूंज गई थी। उस आवाज को सुनकर एक पल के लिए रणबीर की सांस थम सी गई थी। दूसरी तरफ, अभय के चेहरे पर डेविल स्माइल उतर आई थी। वह खुद में ही बड़बड़ाया, "लगता है कुत्तिया को ठिकाने लगाने वाला आ गया। बहुत हाथ से फिसलने लगी थी, भोसड़ी की।" अभी वह बोल ही रहा था कि तभी किसी के बाहर से चिल्लाने की आवाज आई। "अभय, अभय...."

इस आवाज को सुनकर पास ही में खड़ी निर्मला जी की सांस भी उनके हलक में अटक चुकी थी। वह धीरे से बड़बड़ाई, "दर्पण जी।" उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। इस वक्त वह पूरी तरह से कांप रही थी। उनका दिमाग पूरी तरह से ब्लॉक हो चुका था। ना वह कुछ समझ पा रही थी। जैसे सोचने समझने की शक्ति तो उनकी मानो एक पल के लिए खत्म ही हो गई है। तभी उनके कानों में एक बार फिर से सांवरी की दर्दनाक चीख की आवाज सुनाई दी। इस चीज को सुनकर उनका दिल धक सा रह गया। वही रणवीर, जो कि अपनी जगह पर खड़ा जम चुका था। वह अब जल्दी से वहां से बाहर की तरफ जाने को हुआ कि तभी अभय ने पास में पड़ा हुआ वास रणवीर के सिर पर दे मारा। जिससे एक पल के लिए रणबीर की आंखों के आगे अंधेरा छा गया। उसने पलट कर अभय की तरफ देखा, जोकि डेविल स्माइल के साथ उसे देख रहा था।

वहीं रणवीर उसे गुस्से भरी निगाहों से देखते हुए बोला, "मादरचोद, हरामजादे।" वह अभी बोल ही रहा था कि तभी मृत्युंजय ने उसके सिर पर दोबारा मारा और इस बार रणवीर संभाल नहीं पाया और दूसरी तरफ जा गिरा। यह चीज देखकर निर्मला जी ने अपने होठों पर हाथ रख लिए। रणबीर इस वक्त लहू लोहान जमीन पर पड़ा था। उसके सिर से खून लबालब जमीन पर गिर रहा था। रणवीर की आंखें बंद हो चुकी थी। अभय बाहर की तरफ जाने लगा। तभी निर्मला जी उसका हाथ पकड़ते हुए बोली, "अभय, अभी तो शर्म कर लो, अपने भाई तक की जान लेने पर आ गए हो तुम। अरे! उसने क्या बिगाड़ा है तुम्हारा, तुमने उसको इस तरह से मारा और वह लड़की, तुम्हारी पत्नी है ना, बाप बनने वाले हो तुम।"

अभी निर्मला जी बोल ही रही थी कि तभी अभय उन्हें धक्का देते हुए बोला, "चल पीछे हट, दिमाग खराब कर रही है।" इतना कहकर उसने निर्मला जी को लगभग से पीछे की तरफ धक्का दिया। जिस कारण निर्मला जी संभाल नहीं पाई और पीछे की जाकर उनका सिर दीवार से लगा। एक पल के लिए उनकी आह निकल गई। लेकिन अगले ही पल उनकी आंखों में आंसू आ गए। कहीं ना कहीं यह सारी कमियां उनकी ही थी। अगर उन्होंने शायद अभय की परवरिश ठीक तरह से की होती, तो शायद आज अभय राक्षस की जगह एक इंसान होता। उन्होंने अपने होठों पर हाथ रखा और रोने लगी। उन्हें अब सांवरी पर तरस आ रहा था कि पता नहीं अब सांवरी का क्या होने वाला है।

इसलिए उन्होंने अपने आंसू पोंछे और बाहर की तरफ आई। बाहर का नजारा देखकर उनका दिल दहल गया, क्योंकि दर्पण जी ने सांवरी के बालों को बुरी तरह से पकड़ा हुआ था। उसके हाथ में सांवरी का पल्लू पड़ा हुआ था। वह अभय की तरफ देखकर बोली, "तू इसे नंगी करेगा या मैं करूं। इस हरामजादी ने हमारी इज्जत पर दाग लगाने की कोशिश की, कुत्तियां ने।" इतना कहते हुए उन्होंने सांवरी के पेट में एक मुक्का जड़ दिया। जिसे देखकर निर्मला जी का दिल तड़प उठा और वह चीखते हुए बोली, "दर्पण जी..."

जैसे ही निर्मला चीखी, दर्पण जी ने नजर उठाकर ऊपर की तरफ देखा, तो उनके चेहरे पर डेविल स्माइल आ गई। वह अभय की तरफ देखते हुए बोले, "लो आ गई दूसरी कुत्तियां दुम हिलाते हुए इसके पीछे।" तभी निर्मला जी नीचे आते हुए बोली, "छोड़ दीजिए, बच्ची है वह।" अभी निर्मला जी बोल ही रही थी कि दर्पण जी ने जोरदार तमाचा उनके गाल पर जड़ दिया।

निर्मला जी नीचे जमीन पर जाकर गिरी। वही दर्पण जी ने अब सांवरी को लगभग से अभय की तरफ धकेला और बोला, "इसका नामोनिशान मिटा दे, क्योंकि यह हमारे खानदान में हमारे मुंह पर कलंक पोतने आई थी। क्या कहा इसने कि यह तलाक देगी तुझे। अगर तूने इसे ना मौत के घाट उतारा, तो मैं तुझे मौत के घाट उतार दूंगा।" इतना कहकर दर्पण जी उसके करीब आए और अगले ही पल एक और जोरदार मुक्का उन्होंने सांवरी के पेट में जड़ दिया। जिससे सांवरी के मुंह से खून का फव्वारा छूट पड़ा। जिस तरह से दर्पण जी ने उसे मारा था, सांवरी की बेहद बुरी हालत हो गई थी। उसका पेट इस वक्त फटने को आ गया था। जिस तरह से दर्पण जी ने दो मुक्के उसके पेट में मारे थे, इस वक्त उसे अपने पेट में हद से ज्यादा दर्द हो रहा था। अब तो उसमें इतनी हिम्मत भी नहीं थी कि वह खुद को बचा सके।

दर्पण जी अब उसकी तरफ देखते हुए बोले, "नंगा कर इसे अभी यही पर, मैं चोदूंगा और फिर तू चोदना।" दर्पण जी की बात पर अभय राक्षसों की तरह हंसते हुए उनकी तरफ देखने लगा और बेहद हंसी भरी आवाज में बोला, "आपसे नहीं होगा बाबूजी।" अभी वह बोल नहीं रहा था कि तभी दर्पण जी दांत पीसते हुए बोले, "जैसे तुझसे तो अपनी बिंदनी संभाली गई। बाहर मुंह मारने जा रही थी। वह रणवीर है ना, उसी के साथ मुंह काला करने वाली थी।

पहले तो उसे ठिकाने लगा दो।" इतना कहते हुए वह अपने पजामे का नाड़ा ढीला करने लगे। उसे देखकर अभय के चेहरे पर डेविल स्माइल आ गई। अब वह सांवरी की तरफ आया और अगले ही पल उसने सामने की साड़ी लगभग से खींचते हुए उसके बदन से अलग कर दी। वहीं सांवरी धीमी सी आवाज में बोली, "नहीं प्लीज, मुझे छोड़ दीजिए।" वह बोल रही थी, ऐसा लग रहा था, जैसे कि जान उसके हलक से निकल रही हो।

देखते ही देखते अभय ने उसकी साड़ी पूरी तरह से उसके बदन से उतार कर अलग कर दी। वह सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। ब्लाउज में से उसका सीना काफी हद तक रिवील हो रहा था। जिसे देखकर दर्पण जी के चेहरे पर हवस साफ दिखाई दे रही थी। वह अपने पजामे को लगभग से पूरी तरह से नीचे की तरफ गिरा चुके थे। अब उनका हाथ अपने अंडरवियर पर था, जिसमें से वह अपना dick लगभग से आधा बाहर निकाल चुके थे। निर्मला जी भी यह सब देख रही थी। वह अब अपनी जगह से खड़ी हुई और जल्दी से दर्पण जी के पास आकर बोली, "अरे! बच्ची है वह, बेटी है हमारी, अगर उसके साथ आप ऐसा करेंगे, भगवान आपको कभी माफ नहीं करेगा।" तभी दर्पण जी उसके बालों को मुट्ठी में भरते हुए बोले, "साली कुत्तिया, जो हो रहा है ना तेरी वजह से हो रहा है, बहन की लोड़ी, चल कमरे में तुझे भी ठंड करुंगा।" कह कर निर्मला जी को धक्का दिया। जिससे निर्मला जी टेबल पर जाकर लगी, जोकि कांच का था। जैसे ही निर्मला जी कांच के टेबल पर गिरी, उनके सिर में लग गई। वह कांच भी पूरी तरह से टूट चुका था और अब निर्मला जी के सिर पर से भी खून बह रहा था।

वही अभय बस चुपचाप यह सब देख रहा था। वही दर्पण जी अपनी dick को सहलाते हुए अब आगे की तरफ आए और पूरी तरह से सांवरी पर झुकने लगे। तभी वहां पर एक गाड़ी की आवाज गूंज गई। वह गाड़ी पूरी तरह से अंदर घुसती चली आई और देखते ही देखते वह गाड़ी इतनी तेजी से अंदर आई थी कि उनका दरवाजा तक टूट चुका था। इस गाड़ी में बैठे शख्स को देखकर अभय की और दर्पण जी की आंखें हैरत से फैल गई थी।

वही अभय का चेहरा तो पूरी तरह से पीला पड़ चुका था।

To be continue...

कोई guess kar sakta hai kaun aya hai?

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