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Me kya hu?apke liye

होटल पैराडाइज,

ध्वनि इस वक्त घिन भरी नजरों से सामने लेटे हुए आदर्श को देख रही थी, जोकि बेड पर लेटा आराम से सिगरेट पी रहा था। इस वक्त ध्वनि का चेहरा पूरी तरह से एक्सप्रेशन लैस था। ऐसा लग रहा था, जैसे उसके दिमाग में कुछ चल रहा हो। वही आदर्श, जो कि सिगरेट पी रहा था, उसके चेहरे पर इस वक्त तिरछी मुस्कुराहट थी। उसे पता था कि ध्वनि उसी की तरफ देख रही है। लेकिन फिर भी वह बिना उसकी परवाह किए अपनी जगह से उठा। इस वक्त वह पूरी तरह से नेकेड था।

वह ऊपर की तरफ उठा और बालकनी की तरफ जाने लगा, तो एक पल के लिए ध्वनि की आंखें हैरत से फैल गई। क्योंकि आदर्श पूरी तरह से नेकेड था और इस तरह से वह बालकनी की तरफ जा रहा था। यह सबसे ज्यादा हैरानी की बात थी। अगर कोई उसे इस तरह से बालकनी में देख लेता तो, वैसे भी अभी शाम हुई थी। लेकिन दिन पूरी तरह से ढला नहीं था। हल्की-हल्की रोशनी बालकनी में से होते हुए अंदर की तरफ आ रही थी। सुबह से लेकर शाम बीत गई थी, लेकिन आदर्श ने सिर्फ ध्वनि को इंटेंस ब्लोजॉब के अलावा और कुछ नहीं दिया था। उनके बीच दोपहर से खामोशी इस हद तक बनी हुई थी कि उसकी गवाही जमीन पर पड़ी हुई सिगरेट दे रही थी। ना ध्वनि कुछ बोल रही थी और ना ही आदर्श। लेकिन अब आदर्श अपनी जगह से खड़ा होकर जैसे ही बालकनी की तरफ बढ़ने को हुआ कि तभी ध्वनि पीछे से आवाज देते हुए बोली, "कम से कम कमर पर तौलिया तो लपेट लीजिए।

मेरे सामने तो अपनी शर्म बेचकर खा ही गए है, लेकिन लोगों के सामने तो कम से कम शर्म कर लीजिए।" उससे बोलने के अंदाज पर एक पल के लिए आदर्श के चेहरे पर तिरछी मुस्कुराहट तैर गई थी। लेकिन उसने ध्वनि की तरफ पलट कर नहीं देखा। उसने अब एक बार फिर से अपने कदम बालकनी की तरफ बढ़ा दिए और बड़े आराम से बालकनी में जाकर रेलिंग पर खड़ा हो गया। यह चीज देखकर ध्वनि और भी ज्यादा हैरान थी। उसे इस वक्त आदर्श पर हद से ज्यादा गुस्सा आ रहा था कि किस कदर आदर्श वहां पर खड़ा था। अगर किसी बच्चे या बुजुर्ग की नजर ही उस पर पड़ जाती, तो लोगों को कैसा लगता। वही आदर्श, जोकि बालकनी में खड़ा सिगरेट पी रहा था, वह नीचे की तरफ देख रहा था। इस वक्त वह लोग टॉप फ्लोर पर थे और नीचे से सब लोग चीटियों के बराबर लग रहे थे। किसी का भी ऊपर देख पाना इस कदर लगभग से नामुमकिन था। कोई गौर से भी देखें, तब भी किसी को पता नहीं चलने वाला था।

सिगरेट पीने के बाद आदर्श अंदर की तरफ आया और उसने एक नजर ध्वनि को देखा, जो कि आराम से बेड पर बैठी हुई थी। लेकिन उसकी आंखों में हल्की-हल्की नमी छाई हुई थी अब? उसे इस वक्त आदर्श पर इस हद तक गुस्सा आ रहा था। पता नहीं क्यों, उसे रोना नहीं लगा था। क्योंकि कहीं ना कहीं ध्वनि के दिल में पहले से ही आदर्श के लिए फिलिंग्स आ चुकी थी। भले ही आदर्श के मन में शायद नहीं आई थी, लेकिन वह तो आदर्श को कहीं ना कहीं पसंद करने लगी थी। भले ही आदर्श की आदतें बिल्कुल भी उसे पसंद करने लायक नहीं थी। लेकिन आज जो आदर्श ने उसके साथ किया था, उसके बाद एक बार फिर से ध्वनि की नजरों में वह गिर गया था।

पर इससे आदर्श को कुछ भी फर्क नहीं पड़ता था। अब वह अंदर की तरफ आया और बाथरूम में जाते हुए बोला, "मुझे सेटिस्फेक्शन की जरूरत है और तुम जानती हो, सिवाय ब्लोजॉब के तुमने कुछ किया नहीं है। सो कम इन।" कहते हुए वह बाथरूम की तरफ बढ़ गया। लेकिन अब ध्वनि की मुट्ठियां कस गई। वह अपना सिर नीचे की तरफ झुकाते हुए बोली, "अगर आपको सेटिस्फेक्शन चाहिए, तो मुझे क्यों बीच में घुसा रहे हैं। किसी और को बुला लीजिए ना।

मैं ही क्यों, हमेशा मेरी ही जिंदगी क्यों बर्बाद करते हैं आप? मुझे अब आपके साथ नहीं रहना।" जैसे ही उसने यह बात कही, आदर्श के कदम वहीं पर रुक गए। अब उसने पलट कर ध्वनि की तरफ देखा, जो सिर झुका कर बैठी थी। उसने एक बार ध्वनि को देखा और अब पहले उसने अपने कदम ध्वनि की तरफ बढ़ा दिए। जैसे ही आदर्श ने अपने कदम ध्वनि की तरफ बढ़ाए, ध्वनि का दिल जोर-जोर से धक-धक करने लगा। इस वक्त वह पूरी तरह से अंदर ही अंदर घबरा रही थी। पता नहीं, अब आदर्श के आगे बोलने का अंजाम क्या होने वाला था।

आदर्श उसके पास आकर खड़ा हुआ। इस वक्त उसका dick पूरी तरह से हार्ड पोजीशन में था। जैसे ही वह ध्वनि के पास आकर खड़ा हुआ, एक पल के लिए उसका dick ध्वनि के माथे पर आकर लगा। जिससे ध्वनि ने ऊपर अपना सिर उठा कर देखा, तो एक पल के लिए उसकी आंखें फटी की फटी रह गई। ध्वनि के चेहरे के बिल्कुल पास आदर्श का dick था, जोकि काफी मोटा और चौड़ा था। उसको देखकर एक पल के लिए ध्वनि की सांस उसके हलक में अटक चुकी थी। आदर्श उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोला, "क्या कहा तुमने, मुझे कुछ गलत सुनाई दिया शायद?" इतना कहते हुए आदर्श लगभग से आगे की तरफ हुआ कि तभी उसका dick उसके होठों को हल्का सा खोलते हुए उसके दांतों पर जाकर लगा। ध्वनि ने अगले ही पल अपना चेहरा पूरी तरह से पीछे की तरफ कर लिया।

वह अब उसे देखते हुए बोली, "क्यों है आप इतना पत्थर, अरे इतनी देर किसी और के साथ रहती, तो शायद वह पिघल जाता।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी आदर्श उसके ऊपर झुका और उसके बालों को मुट्ठी में भरते हुए बोला, "मैं आदर्श चौहान हूं, और चौहान कभी पिघलते नहीं है, यह बात याद रखना। रही बात तुम्हारी, तुम्हें देखकर तो मैं वैसे भी पिघलने नहीं वाला हूं। बिकॉज यू आर..." इतना कहकर वह चुप हो गया, लेकिन ध्वनि के चेहरे पर सवालिया एक्सप्रेशन आ गए। वह रोते हुए बोली, "क्या हूं मैं आपके लिए, कम से काम यही बता दीजिए मुझे। जिस तरह से आप मेरे साथ बिहेव करते हैं, मुझे भी जानने का अधिकार है कि आखिर मैं आपके लिए हूं क्या?"

उसकी बात पर एक पल के लिए आदर्श के हाथ उसके बालों पर ढीले पड़ गए। उसका चेहरा पूरी तरह से एक्सप्रेशन लेस हो गया। वह अपनी जगह से सीधा खड़ा हुआ और एक बार फिर से बाथरूम की तरफ कदम बढ़ाने लगा। तभी ध्वनि पीछे से बोली, "मुझे जानना है, मेरे सवालों का जवाब मुझे चाहिए। आखिर मैं आपके लिए हूं क्या? अगर इतना ही है, तो बताइए ना क्या हूं मैं आपके लिए। हर वक्त आप मुझे टॉर्चर करते हैं, मुझे जीने नहीं देते। आपने पिछली बार भी मुझे इस हद तक टॉर्चर कर दिया कि मुझे खुद से नफरत होने लगी। जिस वजह से मुझे आप पर.." इतना कहते हुए वह चुप हो गई। लेकिन उसकी आवाज जिस तरह से लड़खड़ा गई थी, एक पल के लिए आदर्श की धड़कनों ने स्पीड पकड़ ली थी।

ध्वनि की चुपी बहुत कुछ बयां कर रही थी। वही आदर्श भी चुपचाप उसकी तरफ पीठ करके खड़ा था। लेकिन अभी भी उसका चेहरा पूरी तरह से एक्सप्रेशन लेस था। लेकिन ध्वनि ने अब गहरी सांस ली और आदर्श की तरफ देखते हुए बोली, "मुझे जानना है कि मैं आपके लिए क्या हूं। एक बीवी का टैग लेकर अपने माथे पर मैं आपके साथ नहीं रह सकती। आई वांट ए डायवोर्स।"

डिवोर्स का नाम सुनकर एक पल के लिए आदर्श के माथे की नसे तन गई। लेकिन अगले ही पल उसने पूरी तरह से अपना चेहरा एक्सप्रेशन लैस किया और एक बार फिर से अपने कदम बाथरूम के दरवाजे की तरफ बढ़ा दिए। देखते ही देखते वह बाथरूम में पूरी तरह से अंदर की तरफ जा चुका था। लेकिन पीछे से ध्वनि चिल्लाते रह गई कि मुझे जानना है कि मैं आपके लिए क्या हूं। क्यों आप मुझे इतना परेशान करते हैं? क्यों आप मेरा पीछा नहीं छोड़ देते? लेकिन आदर्श ने उसकी बातों का कोई जवाब नहीं दिया। वह अब बाथरूम में आकर पूरी तरह से शावर के नीचे खड़ा हो चुका था। दूसरी तरफ ध्वनि, जो कि पीछे चिल्ला रही थी, वह जैसे ही दरवाजे के पास आई और उसने दरवाजा खोलने की कोशिश की, तो उसकी आंखें हैरत से फैल गई।

आदर्श ने अंदर से दरवाजा लॉक कर दिया था। यह पहली बार था कि आदर्श ने उसके लिए बाथरूम का दरवाजा अंदर से बंद किया हुआ था। यह चीज देखकर एक पल के लिए ध्वनि अचंभे में थी।

दूसरी तरफ आदर्श, जोकि शावर के नीचे खड़ा हुआ था, इस वक्त उसकी आंखें पूरी तरह से बंद थी। वह खुद से ही बोला, "मत पूछो बीवी कि तुम मेरे लिए क्या हो? और ना ही शायद मैं तुम्हें कभी बता पाऊंगा कि तुम मेरे लिए.....

अब क्या हो.....।"

To be continue.....

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