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Thappad /tamasha

ठाकुर हवेली,

रणबीर इस वक्त गुस्से से कांपता हुआ सामने खड़े अभय को देख रहा था। अभी-अभी जो उसने बात की थी, एक पल के लिए अभय की आंखें भी बड़ी हो गई थी। उसका चेहरा भी गुस्से से भर उठा था। अभी-अभी रणवीर ने अभय की आंखों में देखते हुए एक बात कही थी, जो कि यह थी कि वह अब सांवरी को पसंद करने लगा है। यह बात सुनकर अभय का खून खौल उठा। दूसरी तरफ सांवरी, जोकि बेड पर बेजान सी लेटी हुई थी, उसका पूरा चेहरा पीला पड़ चुका था और बेजान भी हो चुका था।

लेकिन अब उसकी आंखें लाल होने लगी। अभय अब दांत पीसते हुए बोला, "तुझे इस रण्डी ने अपने जाल में फंसा लिया।" उसकी बात पर रणवीर का खून और भी खोलने लगा। अगले ही पल, वह तीसरा मुक्का जड़ने ही वाला था कि तभी किसी ने उसका हाथ पकड़ लिया। अगले ही पल, रणवीर ने उस शख्स के चेहरे की तरफ देखा, तो रणबीर की आंखें हैरत से फैल गई। वह दांत पीस कर सामने खड़े शख्स से, जोकि कोई और नहीं सांवरी थी, गुस्से से सांवरी को देखते हुए बोला, "इस जानवर ने जो अभी-अभी तुम्हारे साथ सलूक किया, क्या अभी भी तुम्हारी अक्ल ठिकाने नहीं आई, जो तुम इसे अपने पति का दर्जा देकर बचाने आई हो।"

रणवीर की बात पर सांवरी का चेहरा पूरी तरह से एक्सप्रेशन लैस था। दूसरी तरफ निर्मला जी बस सांवरी की तरफ ही देख रही थी। उन्होंने आज तक सांवरी का यह रूप कभी नहीं देखा था। जिस तरह से सांवरी की आंखें पूरी तरह से सुन्नी थी, उन्हें एक अलग सा ही डर और बेचैनी महसूस हो रही थी। पता नहीं क्यों, उन्हें कुछ अजीब सा लग रहा था। लेकिन अगर वह कुछ ऐसा कर देती, जोकि अम्मा जी को पता चल जाता, तो शायद निर्मला जी की भी जान अटक जाती।।सांवरी इस वक्त पूरी तरह से एक्सप्रेशन लेस होकर सामने खड़े रणवीर की तरफ देख रही थी, जो उसे ही गहरी नजरों से देख रहा था। इस वक्त रणवीर का चेहरा गुस्से से भरा पड़ा था। उसका दिल कर रहा था कि अभय की जान ले लें। जिस कदर उसने सांवरी को मारा था, यह बात उसे अंदर तक आग लगा रही थी। हालांकि वह सांवरी से प्यार नहीं करता था, लेकिन फिर भी उसे सांवरी को इस तरह तकलीफ में देखकर अंदर तक टीस उठती हुई महसूस हो रही थी।

वही सांवरी ने अब उसका हाथ नीचे करते हुए अभय की तरफ अपना चेहरा पलट लिया, जो उसे पहले ही गुस्से से देख रहा था। वह दांत पीसते हुए बोला, "क्या रे कुत्तिया, तुझ में इतनी हिम्मत आ गई कि तू अब मर्दों के बीच में आकर खड़ी होगी।" अभय अभी बोल ही रहा था कि तभी वहां पर एक जोरदार तमाचे की आवाज गूंज गई। उस तमाचे की आवाज सुनकर एक पल के लिए सब की आंखें फटी की फटी रह गई। वहीं अभय, जिसका चेहरा गुस्से से कांप रहा था। उसका चेहरा अब दूसरी तरफ मुड़ गया था। उसकी आंखें पूरी तरह से बंद हो गई थी। एक पल के लिए जैसे उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि सांवरी ने उस पर हाथ उठाया था।

लेकिन अगले ही पल, अभय का चेहरा पूरी तरह से काला पड़ गया। उसने अब अपनी लाल आंखों से सांवरी की तरफ देखा। अगले ही पल, वह उसके बाल पकड़ने को हुआ कि तभी सांवरी ने एक और जोरदार थप्पड़ अभय के चेहरे पर जड़ दिया। जिससे एक पल के लिए अभय अपनी जगह पर संभाल नहीं पाया और पीछे की तरफ हो गया। क्योंकि इस दूसरे थप्पड़ की कामना तो उसने बिल्कुल भी नहीं की थी। अभय ने अपना हाथ अब उसकी तरफ बढ़ाया कि तभी रणवीर ने उसका हाथ कसकर पकड़ लिया और दांत पीसकर बोला, "हिम्मत भी मत कर देना।" तभी अभय उसकी तरफ देखकर गुस्से भरी आवाज में बोला, "तू उसका रंडा लगता है, जो मुझे रोक रहा है।

कमीने धोखेबाज, तुझे हमने पाल पॉस्कर बड़ा किया और तू हमें यह सिला दे रहा है, कमीने कुत्ते। इस रंडियां की chut के पीछे पागल हुए जा रहा है।" उसने जैसे ही यह बात कही, अब रणबीर ने एक जोरदार मुक्का उसके चेहरे जड़ने ही वाला था कि एक बार फिर से सांवरी ने उसका हाथ रोक दिया। फिर अभय की तरफ देखकर एक्सप्रेशन लेस चेहरे से बोली, "मुझे आपसे तलाक चाहिए।" जैसे ही उसने यह बात कही, अभय की आंखें हैरत से फैल गई। एक पल के लिए वहां पर पूरी तरह से सन्नाटा पसर गया। वहीं रणवीर को भी इस चीज की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी। वह भी आंखें फैलाए सांवरी को देखे जा रहा था।

जो इस वक्त अभय से बात कर रही थी। तभी निर्मला जी बीच में आकर बोली, "बेटा, मेरी बात।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी सांवरी अपना हाथ दिखा कर निर्मला जी को रोकते हुए बोली, "मां प्लीज, बीच में मत बोलिए और इस इंसान को तो बचाने की कोशिश करिएगा ही मत। यह इंसान इंसान कहलाने लायक नहीं है।" इतना कहते हुए सांवरी ने अपनी नजरें निर्मला जी की तरफ की, तो निर्मला जी की आंखें शर्म से झुक गई। एक पल के लिए उन्हें अपना वक्त भी याद आ गया, जब उन्हें दर्पण जी ने इस कदर मारा था कि अगले दिन तक उनसे पानी में हाथ डालना भी मुश्किल हो गया था। उनका पूरा बदन छिल गया था।

वही हाल सांवरी का हुआ पड़ा था। तभी अभय उसकी तरफ देखते हुए बोला, "तो तुम लोगों की यह मिली भगत है। तुम लोग मेरी पीठ पीछे यह सब कुछ गुल खिला रहे थे।" दूसरी तरफ राका, जो अभी-अभी नीचे से गाड़ी पार्क करके ऊपर की तरफ आया था, तभी वह बीच में आते हुए बोला, "मालिक, मैं आपको यही बताना चाहता था। लेकिन आप तो बात सुनते ही नहीं है।" अभी वह बोल ही रहा था कि तभी अभय उस पर चिल्लाते हुए वाला, "चुप रे madarchod!

जब यह बहन के लोड़े गुल खिला रहे थे, तो तब क्या तू गांड मरवाने गया हुआ था। तब तूने मेरे को क्यों नहीं बताया।" अभी वह बोल ही रहा था कि तभी सांवरी एक्सप्रेशन लैस होकर बोली, "आपका तमाशा हो गया हो तो मुझे 24 घंटे के अंदर-अंदर तलाक चाहिए।" फिर सांवरी ने रणबीर की तरफ देखा और बोली, "आप मुझे तलाक के पेपर तैयार करवा कर दे सकते हैं। अगर नहीं करवा कर दे सकते, तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। मैं बाहर से करवा लूंगी। चाहे किसी से भी करवाऊं।" जैसे ही उसने यह बात कही, तभी रणवीर उसके चेहरे को अपने हाथों में थामने ही वाला था कि तभी अभय का खून खोल उठा। वह रणबीर की तरफ देखते हुए बोला, "कुत्ते खबरदार! जो तूने उसे हाथ लगाया तो, अभी वह मेरी पत्नी है।

बहन चोद, यहां तो गांडू की कमी थोड़ी है अपना भाई गद्दार निकला, तो मैं किसी को क्या बोलूं। लेकिन इस कुत्तिया को तो सब पता था ना, यह कुत्तिया तो आस्तीन की सांप निकली। इसी मादरचोद ने इसको अपनी तरफ खींचा होगा और नीचे भी लेट गई होगी। यह बच्चा भी इसी का होगा।" उसकी बात सुनकर सांवरी को जैसे कोई फर्क ही नहीं पड़ा। वह बस अपने कदम बाहर की तरफ लेने लगी कि तभी रणवीर अभय की तरफ देखकर बोला, "अपनी जुबान संभाल के बात करो, अभय ठाकुर।" जैसे ही उसने अभय ठाकुर कहा, तो अभय की आंखें बड़ी हो गई। वह रणबीर की तरफ देखकर बोला, "तू इस लड़की के लिए अपने भाई से इस तरह से बात करेगा।"

तभी रणवीर दांत पीसकर बोला, "मैं अपने भाई से बात नहीं कर रहा हूं। मैं कमीने इंसान से बात कर रहा हूं, जिसे औरतों की इज्जत करना तो बिल्कुल भी नहीं आता।

और रही बात सांवरी की, बहुत जल्द मैं उससे शादी करूंगा।" तभी अभय उसकी तरफ घूर कर देखते हुए बोला, "तू उससे शादी करेगा और वह तुझसे शादी कर लेगी। तुझे क्या लगता है, जितना मैंने उसे टॉर्चर किया है ना, वह तेरी परछाई तक पसंद नहीं करेगी। और रही बात इस कुत्तियां की, तो इस कुत्तिया को तलाक देगा कौन। इसकी अकल तो अभी ठिकाने आ जाएगी, जब उसे बालों से घसीटते हुए मैं ऊपर लेकर जाकर कमरे में चोदूंगा, तो उसकी सारी हेकड़ी निकल जानी है।

इसको नंगा करके पूरे घर में ना घुमा दिया, तो मेरा नाम भी अभय ठाकुर नहीं।" उसकी बात पर रणवीर का खून खौल उठा। अब वह उसके पास आया और अभय की कॉलर को पकड़ते हुए बोला, "अपनी बकवास बंद रखो अभय ठाकुर, भूलो नहीं कि अब उसके पीछे मैं खड़ा हूं और देखता हूं कि तुम उसे कैसे छूते हो। उसको छूने के लिए तुम्हें मुझे भेदना होगा।" अभी वह बोल ही रहा था कि तभी एक जोरदार चीख सांवरी की कमरे में आई। उस चीख को सुनकर अभय के चेहरे पर शातिर मुस्कुराहट आ गई।

To be continue....

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