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Maar !ranveer ka gussa

अगला दिन,

ठाकुर हवेली,

ठाकुर हवेली के आगे आकर 10-12 गाड़ियां रुकी। यह गाड़ियां कोई किसी और की नहीं, बल्कि अभय की थी, जो कि अभी-अभी आया था। इस वक्त उसके चेहरे पर गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था। अब वह गाड़ी से बाहर की तरफ निकला और उसकी नजर सामने दरवाजे पर खड़ी निर्मला जी पर गई, जो शायद अभय का ही वेट कर रही थी। निर्मला जी आगे आते हुए बोली, "क्या बात है अभय, तूने कल से फोन क्यों नहीं उठाया? और तेरा फोन स्विच ऑफ क्यों आ रहा है? मैं तुझे खुशखबरी..।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी अभय सर्द आवाज में बोला,

"चुप हो जाइए मां, यह कोई खुशखबरी नहीं है।" निर्मला जी की आंखें फटी की फटी रह गई। वह अपने मुंह पर हाथ रखते हुए बोली, "तुम्हारा दिमाग खराब हो गया क्या? बाप बनने वाले हो तुम, और कैसी बातें कर रहे हो तुम?" उसकी बात पर अभय ने कोई जवाब नहीं दिया। वह बस सीधा अपने कमरे की तरफ बढ़ रहा था। वहीं रणवीर, जोकि हॉल में बैठा हुआ था, इस वक्त आराम से कॉफी पी रहा था। इस वक्त उसके चेहरे पर कोई भी परेशानी नजर नहीं आ रही थी। उसने जब अभय को देखा, तो एक पल के लिए उसके होठों के साथ जो कॉफी अभी ही लगाई थी, एक पल के लिए हाथ रुक गए। उसने अपनी नजरे उठाकर अभय की तरफ देखा, जो अभी-अभी दरवाजे से अंदर इंटर हुआ था। अभय को देखकर उसके चेहरे पर डेविल स्माइल आ गई।

दूसरी तरफ,

सांवरी इस वक्त अपने वॉर्डरोब में कपड़े सेट कर रही थी। इस वक्त उसका चेहरा पूरी तरह से मुरझाया हुआ था। रंग पीला पड़ चुका था और कपड़े जिस तरह से वह वार्डरोब में लगा रही थी, उसके चेहरे पर शिकन दिखाई दे रही थी। उसे अपने पेट में हल्का-हल्का दर्द महसूस हो रहा था। वह अपनी जगह से खड़ी हुई और खुद से ही बड़बड़ाई, "मेरे पेट में दर्द क्यों हो रहा है?" इतना कहकर उठते हुए बाहर को आने को हुई कि तभी उसका सिर एक बार फिर से चकराने लगा। एक पल के लिए वह वहीं पर खड़ी हो गई। उसे ऐसा लग रहा था, जैसे कभी भी उसको वोमिटिंग आनी शुरू हो जाएगी।

लेकिन किसी तरह वह गहरी सांस लेकर आगे की तरफ आई। एक बार फिर से उसका सिर घूमने लगा। इस बार वह नीचे गिरने ही वाली थी कि तभी किसी के मजबूत हाथों ने उसे थाम लिया। उसने नजर उठाकर सामने की तरफ देखा, तो एक पल के लिए सांवरी का दिल उसके मुंह को आने को हो गया। क्योंकि उसकी आंखों के सामने इस वक्त अभय खड़ा था। वह जल्दी से अपनी जगह से खड़ी हुई और अभय के सामने सिर झुका कर खड़ी हो गई।

जैसे ही वह उसके सामने सिर झुका कर खड़ी हुई, अगले ही पल, वहां पर एक जोरदार थप्पड़ की आवाज गूंज गई। यह थप्पड़ अभय ने सांवरी को मारा था और सांवरी जमीन पर जा गिरी। अभय गुस्से में दांत पीसते हुए पंजों के बल सांवरी के पास बैठा और उसकी तरफ उंगली पॉइंट करते हुए बोला, "madarchod, साली कुत्तिया, किसके पिल्लों को जन्म देने वाली है तू, किसकी निशानी तेरे पेट में पल रही है।" अभय की बात सुनकर एक पल के लिए सांवरी का पूरा चेहरा फ्रिज हो गया। वह हैरानी से अभय की तरफ देख रही थी। वही अभय ने अब उसके बालों को मुट्ठी में जकड़ते हुए उसे दोबारा से सीधा करके खड़ा हो किया। जिस तरह से बेरहमी से उसके बाल पकड़कर अभय ने सांवरी को खड़ा किया था, एक पल के लिए सांवरी का पूरा शरीर हिल गया था।

एक पल के लिए वह पूरी तरह से कांप उठी थी। अभय के पकड़ने के तरीके ने उसे पूरी तरह से हिला दिया था। अभय उसे लगभग से खींचते हुए बाहर की तरफ ले जाने को हुआ। वही निर्मला जी, जोकि उसके कमरे के तरफ आई ही थी कि दरवाजे पर उस कमरे का नजारा देखकर एक पल के लिए उनका दिल पूरी तरह से दहल गया। वही अभय ने अपनी पेंट की बेल्ट निकालते हुए सांवरी को बेड पर धकेला और अगले ही पल जोर से वह बेल्ट सांवरी की पीठ पर दे मारी। जिससे सांवरी पूरी तरह से तड़प उठी। उसने बेल्ट के आगे का बक्कल भी सांवरी की पीठ पर दे मारा था। जिससे सांवरी की चीख पूरी तरह से उस हवेली में गूंज उठी थी। दूसरी तरफ बाहर बैठे रणवीर ने जब सांवरी की चीख की आवाज सुनी, तो एक पल के लिए उसकी आंखें बड़ी हो गई।

उसकी कॉफी वहीं पर छूट गई। वह तेजी से सांवरी के कमरे की तरफ भागा। वही अभय लगातार सांवरी के ऊपर बेल्ट बरसाते हुए बोला, "मादरचोद कुत्तियां, तू मेरे बच्चों को जन्म देगी या फिर किसी और के बच्चे को पेट में रख कर बैठी है। किसके पिल्ले हैं यह, मुझे यह बता साली हरामजादी। तुझे उस दिन भी समझाया था कि मेरा दिमाग मत गर्म करना और तू प्रेग्नेंट हो कर बैठ गई।" इतना कहते हुए वह लगातार सांवरी पर अपनी बेल्ट बरसाए जा रहा था। वही सांवरी बुरी तरह से तड़प रही थी। निर्मला जी, जो कि दरवाजे पर खड़ी थी, वह बुरी तरह से कांप रही थी। उनकी भी हिम्मत नहीं थी कि वह आगे जाकर अभय से सांवरी को छुड़ा दे। क्योंकि वह भी जानती थी कि अगर वह आगे की तरफ गई,

तो हो सकता था कि अभय निर्मला जी पर भी हाथ उठा देता। वैसे भी इस घर में यह नॉर्मल था कि कोई भी मर्द अपनी औरत पर तो हाथ उठा ही सकता था। साथ में उसे यह भी अधिकार मिला हुआ था कि वह किसी भी औरत पर हाथ उठा सकता था, चाहे उसकी मां ही क्यों ना हो। लेकिन रणबीर इकलौता ऐसा था, जिसने कभी भी किसी औरत पर हाथ नहीं उठाया था। यहां तक की निर्मला जी को रणवीर पर बहुत ज्यादा भरोसा था। वह कभी भी अभय और दर्पण जी जैसा तो बिल्कुल भी बिहेव नहीं करता था। दर्पण जी अभय के पिता थे। वह भी अभय की तरह बहुत ज्यादा क्रुएल हार्टेड थे। अभी तक वह बाहर से ठाकुर हवेली नहीं आए थे। जब वह ठाकुर हवेली प्रवेश करने वाले थे, तो पता नहीं हवेली का क्या ही हाल होने वाला था।

दर्पण जी तो निर्मल पर हाथ उठाते ही थे, साथ में कभी-कभी अभय भी अपनी लिमिट क्रॉस कर देता था। एक दो बार तो अभय ने निर्मला जी की गर्दन भी पकड़ ली थी। लेकिन तब रणवीर के ना होने की वजह से अभय बहुत ज्यादा निर्मला जी पर भारी पड़ चुका था। वही सब सोचते हुए निर्मला जी चुप एक साइड पर खड़ी हो गई। तभी रणवीर आगे की तरफ आया। उसने जब अंदर का नजारा देखा, तो उसकी आंखें हैरत से फैल गई। वहीं अभय लगातार सांवरी को मारे जा रहा था।

वह अब लगातार उसे पीटते हुए बोला, "साली मादरचोद, अगर तेरा बच्चा करने से भोसड़ी फट गई, तो वह तो खुला हुआ मैदान हो जाएगी। मुझे तो टाइटनेस चाहिए टाइटनेस।" इतना कहते हुए वह लगातार उसे मारे जा रहा था। जैसे इसमें सारा कसूर ही सांवरी का हो। जबकि यह सारा कसूर अभय का था। उसने एक बार भी सांवरी को कभी भी कोई पिल्स नहीं दी ताकि वह प्रेग्नेंट ना हो। जब भी वह सेक्स करता, वह सांवरी के साथ बिना कंडोम के सेक्स करता। जिसका नतीजा आज अभय के सामने था। दूसरी तरफ रणबीर अब अंदर की तरफ आया और अगले ही पल वह बेल्ट लगभग से अभय के हाथों से खींचते हुए उंगली पॉइंट करके बोला, "बकवास बंद करो अपनी, तुम्हें दिखाई नहीं दे रहा है कि वह किस हालत में है। तुम्हें एक बार भी उस पर तरस नहीं आ रहा। उसका चेहरा देखकर भी तुम्हें तरस नहीं आ रहा।"

रणवीर की बात सुनकर अभय की एक आई ब्रो ऊपर की तरफ उठ गई। वह उसे देखते हुए बोला, "तुम कौन होते हो हमारे बीच बोलने वाले?" तभी रणवीर उसे देखते हुए बोला, "अपनी शक्ल देखी है तुमने कभी, उससे पूछा है, जिसे तुम मार रहे हो। किस कदर तुम उसके साथ जानवरों की तरह बिहेव करते हो। कभी देखा है खुद को। वह इंसान है, कोई जानवर नहीं, जिस तरह से तुम उसको पीट रहे हो। प्रेग्नेंट ही हुई है ना, किसी और से तो हुई नहीं होगी। तुम्हारे बच्चे की मां बनी है।" तभी अभय दांत पीसकर बोला, "अपनी तमीज मत भूलो रणवीर, भाभी है वह तुम्हारी।" तभी रणबीर भी उसके कॉलर को पकड़ते हुए लगभग से उसे पीछे धकेलते हुए ले गया और अगले ही पल उसने एक जोरदार पंच अभय के चेहरे पर जड़ दिया। इस वक्त रणवीर का चेहरा पूरी तरह से कांप रहा था।

दूसरी तरफ सांवरी, जो कि बिस्तर पर लेटी हुई थी, उसे तो जैसे अपने शरीर में जान महसूस होनी ही बंद हो गई थी। वह बस चुपचाप बेड पर लेटी हुई थी, जैसे उसमें कोई जान ही ना हो। अभय के पीटने की वजह से उसकी पूरी पीठ छिल गई थी। लेकिन उसे तो मानो फर्क ही नहीं पड़ रहा था। वहीं रणबीर ने जब पलट कर उसकी पीठ को देखा, तो उसका गुस्सा और भी ज्यादा बढ़ गया। अब उसने अभय की तरफ देखा और उसके मुंह पर थूकते हुए बोला, "सच बताऊं, तू तो आदमी कहलाने के लायक नहीं है, हिजड़े..।"

रणवीर की बातें सुनकर अभय की आंखें चौड़ी हो गई।।वह गुस्से से कांपने लगा। अगले ही पल, उसने भी रणवीर का कॉलर पकड़ा और उसे लगभग से पीछे धकेलने को हुआ। इससे पहले कि वह पीछे की तरफ धकेलता, रणवीर ने उसके हाथों को पूरी तरह से खोल दिया और अगले ही पल उसे दीवार के साथ धक्का दिया। जिससे अभय की पीठ दीवार से जा लगी। अब रणबीर उसे देखते हुए बोला, "पहले तो मैं सोच रहा था कि नहीं, मैं यह बात नहीं करूंगा। लेकिन अब मैं तुझे तेरे मुंह पर बोल कर जाता हूं। नहीं मानता हूं मैं उसे भाभी, और नहीं हूं मैं उसका देवर।

मैं उसे पसंद करने लगा हूं।" जैसे ही रणवीर ने यह बात कही, अभय का चेहरा पूरी तरह से फ्रिज हो चुका था।

To be continue.....

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