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Jalaad

त्रेहान पैलेस,

अरमान की गाडी इस वक्त तेजी से सडक पर दौड रही थी. इस वक्त उसकी आंखें आग की तरह दहक रही थी. इस वक्त उसने अपने हाथ में वाइन की बोतल पकडी हुई थी, जो उसने अपने होठों से लगा रखी थी. वह लगातार होठों से लगाए हुए ही गाडी को ड्राइव कर रहा था. जिस हाथ से उसने वह वाइन पकडी हुई थी, उसी हाथ से इस वक्त लगातार खून बहे जा रहा था. लेकिन अरमान ने उस बोतल को इतनी कसकर पकडा हुआ था कि ब्लीडिंग और भी ज्यादा हो रही थी. क्योंकि अरमान के हाथ में जो कांच का टुकडा धंसा हुआ था, वह और भी अंदर धंसता जा रहा था.

जिस वजह से उसके हाथ में और भी गहरा घाव बने जा रहा था. लेकिन उसके चेहरे से देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे उसे अपने हाथ में तकलीफ ही नहीं हो रही हो. क्योंकि इस वक्त तो उसे जो तकलीफ हो रही थी, वह अपने दिल में हो रही थी. वह इस वक्त इतनी ज्यादा स्पीड में गाडी चला रहा था कि अगर एकदम से ब्रेक लगाई जाए, तो गाडी संभाल नहीं सकता था लेकिन फिर भी उसका ध्यान सामने की तरफ था. वह खून सी आंखें उसने सडक पर तो गढाई हुई थी, लेकिन उसकी आंखों के सामने इस वक्त अश्की का चेहरा घूम रहा था और उसके कानों में अश्की के कहे हुए वह लफ्ज गूंज रहे थे.

शाम को ही इंगेजमेंट थी, लेकिन अरमान ने इस वक्त जो अपनी हालत बना रखी थी, उसे ऐसा देखकर लग रहा था कि शायद ही वह आज शाम प्रियंका से इंगेजमेंट करें. तकरीबन पाँच दस मिनट बाद उसकी गाडी एक बडे से विला के आगे आकर रुकी. कुछ ही second में अरमान गाडी से बाहर निकला और उस विला के अंदर की तरफ चला गया. तकरीबन पंद्रह बीस मिनट बाद वह एक अंधेरे से डूबे हुए कमरे में एक किंग साइज सोफे पर बैठा हुआ था. अभी भी उसके होठों में सिगरेट जल रही थी और साथ ही में वह वाइन की बोतल अब टेबल पर पडी हुई थी. लेकिन बीच- बीच में वह उसके लंबे- लंबे सीप भी भर रहा था. इस वक्त उसका दिमाग जैसे पूरी तरह से घुमा हुआ था.

जिस कमरे में इस वक्त वह बैठा हुआ था, वहां पर किसी की घुट्टी आवाजें गूंज रही थी. उस आवाज को सुनकर अरमान के चेहरे पर कुछ राहत भरी लकीरें उभर आई थी. क्योंकि सामने हंसिका के साथ तीन बॉडीगार्ड्स एक पीछे से खुद को हंसिका की तरफ मूव कर रहा था, दूसरा उसके मुंह की तरफ, तो तीसरा लगभग से उसकी बॉडी पर जोर- जोर से spank कर रहा था. जिससे हंसिका बुरी तरह से तडप रही थी. यह लगभग से पिछले दिन से चल रहा था. जिस तरह से वह हंसिका को लेकर आए थे, हंसिका की हालत इतनी ज्यादा खराब हो गई थी कि इस वक्त उसके शरीर पर नीले निशान बन चुके थे. दूसरी तरफ गौरव का भी कुछ ऐसा ही हाल था. उसे भी बांधकर एक टेबल पर लेटाया गया था और वह भी उल्टा. दूसरी तरफ से बॉडीगार्ड उसके ऊपर चढा हुआ था और खुद को उसकी तरफ मूव कर रहा था. ऊपर से गौरव के मुंह में पूरी तरह से कपडा ठूंसा गया था.

अरमान, जो कि कब से सिगरेट के लंबे कश भर रहा था. जब उसने गौरव की तरफ देखा, तो उसके कानों में वही पल घूमने लगा, जब अश्की जोर- जोरों से चिल्ला रही थी और गौरव ने उस पर तरस नहीं किया था. पहले तो उसने उसके पैर को पूरी तरह से अपने पैर के नीचे मसला था और दूसरा, जिस तरह से उसने अश्की के गाल पर थप्पड जडा था. उससे अश्की के गाल पर एक निशान भी पड चुका था. जिस पर अरमान की नजर बखूबी गई थी. ऊपर से जिस तरह से अश्की चिल्लाई थी, जब हंसिका फोन पर बात कर रही थी, तो अरमान को साफ सुनाई दिया था. अब अरमान अपनी जगह से खडा हुआ और अगले ही पल उसने जावेद की तरफ देखकर कुछ इशारा किया.

कुछ ही देर में जावेद एक अपने हाथ में धारदार हथियार लेकर अरमान की तरफ बढा और अरमान के हाथों में थमा दिया. अरमान ने भी उस हथियार को अपने हाथों में लेकर अपने कदम गौरव की तरफ बढा दिए. दूसरी तरफ गौरव ने जैसे ही अरमान को अपनी तरफ आता देखा और उसके हाथ में वह हथियार देखा, तो उसके रोंगटे खडे होने लगे. एक तो वह बॉडीगार्ड अच्छा खासा उसे ठोक रहा था और दूसरा उसके मुंह में जो कपडा ठूंसा हुआ था, उस वजह से वह बोल भी नहीं सकता था अरमान अब उसके पास आकर खडा हुआ, तो अब वह बॉडीगार्ड अपने आप पीछे की तरफ हट गया. वह जल्दी से अपनी पैंट पहन कर पीछे की तरफ हो गया.

तभी दो बॉडीगार्ड्स और आगे की तरफ आए. उन्होंने गौरव की रस्सियां खोलकर उसे सीधा कर बैठाया. पर कुछ ही देर में गौरव के पैर एक टेबल पर रखे गए. जैसे ही गौरव के पैर टेबल पर रखे गए, गौरव का शरीर पूरी तरह से कांपने लगा. अभी भी उसके मुंह में कपडा ठूंसा गया था. उसके हाथों को दो- तीन बॉडीगार्ड्स ने पकडा हुआ था. दोनों तरफ से उसे पूरी तरह से जकडा गया था. ना वह हिल पा रहा था, ना कुछ कर पा रहा था. ना वह खुद को प्रोटेक्ट कर सकता था. इस वक्त उसकी बॉडी कांप तो रही ही थी, साथ में उसके पूरे शरीर पर पसीने आने लगे थे.

अरमान अब पूरी तरह से उसके पास आया और उसकी आंखों में देखते हुए बोला, बहुत शौक है ना तुझे अपने पैरों से किसी के पैर को मसलने का, इसी पैर से तूने मेरी दिलरुबा के पैर को अपने पैर तले लेकर दबाया था ना. मेरी दिलरुबा कितना तडपी थी। उसकी बात सुनकर गौरव की आंखें हैरत से फैल चुकी थी. अब जाकर उसे वह पल याद आया, जब उसने अश्की का पैर अपने पैर तले लेकर जोरों से मसला था. जिससे अश्की की चीख उस पहाडी पर गूंज चुकी थी. एक पल के लिए गौरव की सांस जैसे वहीं पर सूखने लगी. अब उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह अरमान को कैसे रोके.

लेकिन इससे पहले वह अपने ख्यालों से बाहर आता कि तभी अरमान ने जो अपना हाथ में धारदार हथियार पकडा हुआ था, उससे सीधा वार अरमान ने गौरव के पैर पर किया. अगले ही पल गौरव का पैर कटकर जमीन पर गिर गया. जिससे गौरव की भयावह घुट्टी चीख वहां पर गूंज गई. वह लगभग से रोए जा रहा था. उसके पैर से खून निकल रहा था. लेकिन अरमान को इस चीज से कोई फर्क नहीं पड रहा था. वह अभी भी उस हथियार से आराम से खेल रहा था. अब गौरव की तरफ देखते हुए अब उसने अपनी नजर गौरव की लोअर बॉडी की तरफ दौडाई और अरमान की नजर अपनी लोअर बॉडी पर पाकर गौरव का शरीर पूरी तरह से थरथरा उठा. उसका पूरा बदन कांप रहा था.

तभी अरमान ने बॉडीगार्ड को कुछ इशारा किया, तो बॉडीगार्ड्स ने अब गौरव को वैसे ही पकडकर पूरी तरह से स्ट्रक्चर पर लेटा दिया. अब अरमान एक बार फिर से उसके चेहरे पर आया और बोला, बहुत शौक है ना तुझे किसी के साथ Night स्पेंड करने का या फिर कार में टाइम स्पेंड करने का, जबर्दस्ती करने का. बहुत गर्मी है ना तेरे शरीर में, आज मैं तेरी गर्मी अच्छे से निकालता हूं। इतना कहकर अरमान ने अपने हाथ में पकडा हुआ हथियार अब गौरव की लोअर बॉडी की तरफ ले जाकर अगले ही पल उसके प्राइवेट पार्ट को पूरी तरह से उसके बदन से अलग कर दिया. अब तो गौरव की जैसे जान ही उसके बदन से अलग हो गई. उसका पूरा शरीर सुन्न पड चुका था.

वह हिलने लायक भी नहीं रहा था. वह चिल्लाए जा रहा था, लेकिन उसके मुंह से आवाज भी नहीं ठीक से निकल रही थी. इस वक्त अरमान का सारा गुस्सा गौरव पर निकल रहा था. दूसरी तरफ खडी हंसिका, वह भी थर थर कांप रही थी. भले ही उसका रेप हो रहा था, लेकिन फिर भी वह अरमान का यह विकराल रूप देखकर थर थर वहीं पर कांप रही थी. जिस तरह का व्यवहार उसने अश्की के साथ किया था, अब उसे अफसोस होने लगा था कि क्यों उसने अश्की के साथ इस तरह का व्यवहार किया. उसको अपने किए हुए पर पछतावा होने लगा था. लेकिन अब पछताए क्या हो, जब चिडिया चुग गई खेत. वह मन ही मन सोच रही थी कि इससे अच्छा तो जो बॉडीगार्ड्स उसे अभी सजा दे रहे हैं, वह चुपचाप इस सजा के सहारे अपना टाइम पास करें. इसीलिए वह मन ही मन दुआ कर रही थी कि कहीं अरमान उसकी तरफ ना आ जाए. दूसरी तरफ अरमान अब गौरव के चेहरे की तरफ आया और उसकी आंखों में देखते हुए बोला, अभी तो सजा बाकी है. इतनी जल्दी हार मान गए तुम। इतना कहते हुए उसने अब एक बार फिर से जावेद की तरफ देखा, तो जावेद ने हां में सिर हिला दिया.

अगले ही पल दो बाल्टिया पानी से भरी हुई वहां पर जावेद लेकर आया और साथ ही में दो बॉडीगार्ड्स भी वहां पर खडे थे. जिनके हाथ में बडे- बडे ग्लव्स चढे हुए थे. उस पानी में शायद कुछ था और अब यह क्या था, यह तो अरमान ही जाने. लेकिन जब उसने उसमें हाथ डाल कर कुछ बाहर की तरफ निकाला, तो सामने खडी हंसिका के होश पूरी तरह से उड गए. क्योंकि इस वक्त उन बॉडीगार्ड के हाथ में जोके पकडी हुई थी, जो कि इंसान और जानवरों का खून पीती थी. यह तालाबों में पाई जाती थी और अब अरमान ने बॉडीगार्ड को इशारा किया, तो बॉडीगार्ड ने उनको गौरव के शरीर पर छिडकना शुरू कर दिया. जैसे- जैसे वह जोंक गौरव के शरीर के साथ लग रही थी, वैसे- वैसे गौरव का शरीर और भी बुरी तरह से तडप रहा था. यह चीज देखकर हंसिका की हालत और भी खराब होने लगी थी.

उसकी आंखों से आंसू तेजी से बहे जा रहे थे. इतना खौफ आज तक उसने कभी भी महसूस नहीं किया था, जितना आज वह अरमान को देखकर खौफ खा चुकी थी. वही अरमान ने दूसरे बॉडीगार्ड की तरफ देखकर आवाज लगाई और बोला, जब यह जोंक अच्छी तरह से इसका खून पीने लगे, तो इन्हें दोबारा से निकाल कर एक बार फिर से इसके शरीर पर छोडा जाए. ताकि इसे पता चले कि जब किसी का खून पीते हैं, तो कैसा लगता है. जब वह जोंक शरीर का साथ कैसे छोडते हैं। वही गौरव अब तिल तिल मर रहा था. लेकिन कुछ कर नहीं पा रहा था. उसे अब अपने किए हुए कर्मों पर बेहद पछतावा हो रहा था कि क्यों उसने अश्की पर इतनी गंदी निगाह डाली. ना वह ऐसी हरकत करता और ना ही अरमान आज उसकी यह हालत करता.

उसका यह हाल करने के बाद अरमान ने अब अपने कदम हंसिका की तरफ बढा दिए, जो अपनी जगह पर खडी थर थर कांप रही थी. उसे ऐसा लग रहा था, जैसे उसकी पूरी बॉडी ही जाम पड गई हो. उसमें जान बाकी ही ना हो. ऊपर से जिस तरह से अरमान उसके करीब आ रहा था, वह किसी राक्षस से कम नहीं लग रहा था. वह लगभग से रोते हुए अरमान की तरफ देख रही थी. अरमान भी अब उसके करीब आया और उसके चेहरे को देखते हुए बोला, फिक्र मत करो, अभी तो तुम्हारी बारी आएगी. लेकिन आज नहीं, आज तुम्हारा लक अच्छा है. फिलहाल के लिए यह लोग ही तुम्हें सजा देंगे। इतना कहते हुए अरमान के नजरे उसके चेहरे पर बेहद गहरी थी. भले ही हंसिका पूरी तरह से उसके सामने बेलिबास थी, लेकिन मजाल था कि अरमान की नजरे एक बार भी उसके बदन पर गई हो. बिल्कुल भी नहीं, उसने एक बार भी हंसिका के शरीर की तरफ अपनी नजर उठा कर भी नहीं देखा था. उसकी नजरें तो सिर्फ और सिर्फ हंसिका के चेहरे पर थी.

अब अरमान वहां से निकलते हुए लगभग से गाडी में जाकर बैठ गया. एक बार फिर से उसके कानों में वही अश्की के कहे हुए अल्फाज गूंजने लगे. उन अल्फाजों को याद कर करके अरमान का गुस्सा एक बार फिर से बढने लगा.

वहीं दूसरी तरफ,

शेखावत पैलेस में,

नियति जी, वास्तव जी, रोहिणी जी और आर्यन की मां इस वक्त हाल में बैठे हुए थे. उन्होंने डिसाइड किया था कि सगाई आज न होकर कल होगी. जिस वजह से आर्यन का मुंह पूरी तरह से बना हुआ था. वह चाहता था कि किसी तरह से सगाई आज ही हो जाए, ताकि कोई विघ्न ना पडे. लेकिन रोहिणी जी की वजह से, जो अब सगाई के लिए आज के लिए मना कर रही थी, उनको देखकर नियति जी ने कुछ सोचते हुए कल का निर्णय लिया था. जिससे वास्तव जी ने भी हां में सिर हिला दिया था. दूसरी तरफ अश्की, जो कि इस वक्त डाइनिंग टेबल पर बैठी थी, उसका एक बार भी ध्यान उनकी बातों में नहीं था. लेकिन सगाई पोस्टपोन होने वाली बात उसे साफ सुनाई दी थी. लेकिन फिर भी सगाई तो कल होनी ही थी यह बात उसे हद से ज्यादा परेशान कर रही थी. इस वक्त उसका दिल सिर्फ अरमान को देखने के लिए तडप रहा था, क्योंकि जिस तरह से अरमान घायल अवस्था में बाहर गया था, उसे हद से ज्यादा डर लग रहा था. कुछ ही देर में सब डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए खाना खा रहे थे. लेकिन अश्की अब वहां से उठकर जा चुकी थी और रोहिणी जी भी वहां से जा चुकी थी, क्योंकि उन्हें भी कुछ खास भूख नहीं थी.

अश्की, जो अपने कमरे में थी, उसकी नजरें इस वक्त बाहर Garden एरिया पर टिकी हुई थी. इस वक्त लगभग दोपहर के ढाई बज चुके थे, लेकिन अरमान अभी तक घर नहीं आया था. यह चीज अश्की को और भी ज्यादा बेचैन कर रही थी. इस वक्त उसका दिल जोरो जोरो से धडक रहा था. एक अलग ही बेचैनी ने उसके दिल में एक अपनी जगह बना ली थी. उसकी आंखों के सामने अरमान का वह जख्म घूम रहा था, जो थोडी देर पहले कांच टूटने की वजह से अरमान के हाथ में हुआ था.

ऐसे ही अरमान की राह तकते तकते अश्की बेड पर आकर बैठी और पता नहीं, कब उसकी आंख लग गई. उसे पता ही नहीं चला, रात के आठ बजे जाकर उसकी आंख खुली. घडी में टाइम देकर उसकी आंखें और भी हैरत से फैल गई कि वह इतनी देर तक सो रही थी. इसी चीज को सोचकर अब अश्की का दिमाग और भी खराब होने लगा. अब वह उठकर बाहर की तरफ आई और बाहर ही नौकर, जो कि खाना लगा रही थी, उसने उससे पूछा कि अरमान घर पर आया कि नहीं. तो नौकर ने साफ मना कर दिया कि वह तो सुबह से घर ही नहीं आया. जिस वजह से अश्की का चेहरा और भी ज्यादा मायूस हो गया. उसकी आंखों में नमी उतर आई. अब एक बार फिर से अश्की अपने कमरे में चली गई. ना उसने सुबह से कुछ खाया था और अब भी बिना खाए वह कमरे में जा चुकी थी, क्योंकि उसे कहां ही अरमान के बिना चैन आने वाला था. ऐसे ही अश्की बालकनी में जाकर खडी हुई और देखते- देखते वक्त बीत गया और रात के एक बज गया. अभी वह बालकनी में ही खडी थी कि तभी उसके पेट पर उसे किसी का हाथ महसूस हुआ. अगले ही पल किसी की गर्म सांस उसे अपनी गर्दन पर महसूस हुई, जिसे महसूस कर एक पल के लि

ए उसकी धडकन स्किप हो गई.

To be continue.

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