
Hotel में,
अभय इस वक्त होटल के रूम में लगातार उस लड़की की ass पर स्पंक किए जा रहा था। उस लड़की का चेहरा बुरी तरह से कांप रहा था। साथ ही साथ आगे से अभय अपने डिक को पूरी तरह से उसके अंदर स्टॉक कर रहा था। इस वक्त उस लड़की की बैक पूरी तरह से लाल हो चुकी थी। जिस तरह से अभय ने मार मार कर उसकी ass लाल की हुई थी, साफ पता चल रहा था कि किस कदर अभय ने उसके ऊपर कहर ढाया था। अब अभय ने पूरी तरह से उसे अपनी तरफ पलटा और जोर से एक थप्पड़ उसकी पुसी पर मारा। जिससे वह लड़की पूरी तरह से तड़पकर ऊपर की तरफ उठ गई। वह रोते हुए अभय के आगे हाथ जोड़कर बोली, "प्लीज, आपको जो करना है, कीजिए। आपकी डील से मुझे अब कोई मतलब नहीं है। प्लीज, मुझे जाने दीजिए यहां से, मैं अब और नहीं बर्दाश्त कर सकती।" जैसे ही उस लड़की ने यह बात कही, अभय ने उसके बालों को मुट्ठी में भरा और बोला, "साली बहन चोद,
पहले इस भोसड़ी को मेरे लिए मेरे आगे परोसती है और अब तेरे से बर्दाश्त नहीं हो रहा है, मादरचोद साली कुत्तिया।" इतना कहकर उसने जोरदार थप्पड़ उस लड़की के गाल पर जड़ दिया। वह लड़की अब बेड पर जा गिरी। अब अभय ने एक बार फिर से उसके पैरों को पूरी तरह से फैलाया और अब जो उसने किया, उस लड़की का पूरा शरीर थरथरा उठा। क्योंकि अभय ने अपना डिक उसकी pussy पर रखने की बजाय उसकी ass पर रख दिया था। जिससे उस लड़की का पूरा शरीर कांप उठा था। वह लड़की अब लगभग से रोते हुए अपने हाथ जोड़कर बोली, "मुझे छोड़ दीजिए, मैं आज के बाद ऐसा काम कभी नहीं करूंगी। प्लीज, जाने दीजिए मुझे।" उसकी एक बार फिर से गिड़गिड़ाहट सुनकर अभय ने एक बार फिर से उसे जोरदार स्पंक उसकी पूसी पर कर दिया। जिससे उसकी पूसी पूरी तरह से ऊपर की तरफ उठ गई।
वह चिल्ला कर बोली, "प्लीज, छोड़ दीजिए मुझे।" लेकिन इस बार जिस तरह से अभय के सामने वह गिड़गड़ाई थी, अभय उसके चेहरे की तरफ गहरी नजरों से देखने लगा। लेकिन अगले ही पल, उसके चेहरे पर शैतानी मुस्कराहट तैर गई। जैसे उसके दिमाग में कुछ चल रहा हो। उसने उस लड़की की तरफ, जिसका नाम सुनैना था, उसे देखते हुए बोला, "अच्छा ठीक है, अगर तुम चाहती हो कि मैं तुम्हें छोड़ दूं, तो मैं तुम्हें छोड़ दूंगा। लेकिन उसके लिए तुम्हें कुछ करना होगा।" उसकी बात पर सुनैना के चेहरे पर सवालिया एक्सप्रेशन आ गए।
वही अभय के चेहरे पर डेविल स्माइल और भी लंबी होती जा रही थी। पता नहीं क्यों, सुनैना को उसकी स्माइल बिल्कुल भी नॉर्मल नहीं लग रही थी। लेकिन वह कांपते हुए बोली, "ठीक है, आप जो कहेंगे, मैं वह करूंगी। लेकिन प्लीज, मुझे यहां से जाने दीजिए।" सुनैना यहां पर उस डील की खातिर रात को गई थी। लेकिन अब उसे अभय के साथ रहकर हद से ज्यादा पछतावा हो रहा था। अभय ने उसकी हालत इतनी ज्यादा खराब कर दी थी कि उसके होठों के कोने फट चुके थे और आंख के साइड पर नीले रंग का निशान पड़ चुका था। चेहरे पर भी जगह-जगह थप्पड़ों के निशान थे। यहां तक कि उसकी ब्रेस्ट पर भी थप्पड़ के निशान बने हुए थे। हर जगह अभय ने अपने हाथों के निशान की छाप छोड़ी हुई थी।
अब अभय उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोला, "चलो ठीक है, अगर तुम वह काम करोगी, तो मैं तुम्हें अभी यहां से जाने दूंगा। लेकिन अगर वह काम तुमसे नहीं हुआ, तो तुम्हारी जो हालत होगी, वह इससे भी बदतर होगी।" इतना कहते हुए अभय की नजरे उस पर गहरी हो गई थी। वही वह लड़की बस अभय को देखे जा रही थी। अंदर ही अंदर उसे डर भी लग रहा था। पता नहीं, अभय उसे क्या काम देने वाला है। लेकिन वह अभय की तरफ देख रही थी, जो कि अब अपनी जगह से खड़ा हुआ। अभी भी उसका dick पूरी तरह से हार्ड पोजीशन में था। जिसे देखकर उस लड़की का दिल जोरो जोरो से धक धक कर रहा था। उसे पता नहीं था कि कब अभय उसके साथ शुरू हो जाए। इसीलिए उसे डर लग रहा था। उसके दिमाग में बस यही बात चल रही थी कि अगर अभय उसके साथ इस तरह से इंटिमेट हो रहा था, तो वह अपनी पत्नी के साथ किस हद तक ब्रूटल होता होगा।
यह सोचते हुए सुनैना का दिमाग पूरी तरह से बंद पड़ चुका था। वही अभय ने अब टेबल पर से ग्लास उठाया और सामने ही टेबल पर रख दिया। अगले ही पल, उसने अपने dick को हाथों में होल्ड किया और उस गिलास में पी करने लगा। दूसरी तरफ सुनैना तो बस हैरानी से अभय की तरफ ही देखे जा रही थी कि आखिर अभय करना क्या चाहता है। जब अभय ने वह गिलास पूरी तरह से भर दिया, तो उसने उस गिलास को उठाया और सुनैना की तरफ लेकर आया। वह सुनैना की तरफ देखकर बोला, "चल इसे पी अभी मेरी आंखों के सामने।" जैसे ही उसे अभय ने यह चीज उसके सामने की, उसके पैरों तले जमीन ही खिसक गई। एक पल के लिए उसकी सांसे थम सी गई और सुनैना की आंखों से आंसू तेजी से बहने लगे।
वहीं दूसरी तरफ,
सांवरी इस वक्त बेड पर पूरी तरह से बेहोश पड़ी हुई थी। इस वक्त उसकी आंखें पूरी तरह से बंद थी। हालांकि वह बेहोश थी, लेकिन उसकी आंखों में एक कतरा आंसू, जो कि जमा पड़ा था, वह उसके गालों पर लुढ़क गया। रणवीर, जो कि यह देख रहा था, एक पल के लिए वह सांवरी के चेहरे की तरफ देखता ही रह गया। उसे बहुत ज्यादा अजीब लग रहा था। जिस तरह से सांवरी के आंसू उसके गालों पर लुढ़क रहे थे। हालांकि सांवरी बेहोश थी। कुछ ही देर में डॉक्टर वहां पर आए। तभी पीछे से निर्मला जी भी उसके साथ अंदर की तरफ आई।
निर्मला जी रणवीर की तरफ देखकर बोली, "क्या हुआ है बेटा इसे।" तभी रणवीर उसकी तरफ देखते हुए बोला, "पता नहीं मां, बेहोश हो गई है। पता नहीं कैसे?" उसकी बात सुनकर निर्मला जी के चेहरे पर परेशानी भरे एक्सप्रेशन आ गए। वहीं वह अब डॉक्टर की तरफ देखते हुए बोली, "जल्दी डॉक्टर साहब।" डॉक्टर हां में सिर हिलाते हुए आगे की तरफ आया और सांवरी को चेक करने ही वाला था कि तभी उसकी नजर रणवीर की बाजू पर गई, जहां पर अभी भी खून लगा हुआ था। वह अब रणवीर की तरफ देखते हुए बोला, "देखिए, आपके हाथ में लगता है कुछ ज्यादा ही गहरा घाव हुआ पड़ा है। आपका चेकअप करना पड़ेगा।" अभी वह बोल ही रहा था कि तभी रणवीर उसके कॉलर को पकड़ते हुए दांत पीसकर बोला, "साले मादरचोद, तुझे पूछा है किसी ने कि मेरे हाथ को किसकी जरूरत है, किसकी नहीं। जो तू यहां पर काम करने आया, कर ना। क्यों मेरे साथ गांड मरवाता फिर रहा है।
अगर अब कोई बकवास की ना, तो मैं कसम से तेरी गांड फाड़कर रख दूंगा, समझा। अब जल्दी से उसे चेक कर कि क्या हुआ है।" वहीं पास में खड़ी निर्मला जी भी रणवीर की तरफ देखते ही रह गई। आज तक उन्होंने कभी रणवीर को गालियां निकालते हुए नहीं देखा था। भले ही अभय गालियां निकलता था, वह इस चीज को मानती भी थी। लेकिन आज रणवीर को गालियां निकालते हुए देखकर निर्मला जी हैरान थी। रणबीर भी कभी निर्मला जी के सामने गालियां बिल्कुल भी नहीं निकालता था। आज उसने जैसे अपना आपा खो दिया था। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसके साथ हो क्या रहा है। वही डॉक्टर रणवीर की गलियां सुनकर हैरानी से रणवीर की तरफ देख रहे थे। उसने अब जल्दी से हाथ चलाना शुरु किया। अगले ही पल, वो सांवरी के बिल्कुल पास आकर खड़े हुए और उसका चेकअप करने लगे। कुछ देर उसे एग्जामिन करने के बाद डॉक्टर पलट कर रणवीर और निर्मला जी की तरफ देखते हुए बोला,
"देखिए मिस्टर एंड मिसेज ठाकुर, अपना बाहर जाकर वेट कीजिए। मुझे थोड़ा चेकअप और भी ज्यादा करना होगा, क्योंकि इनका कुछ खास पता नहीं चल रहा है। काफी ज्यादा कमजोर है यह।" उसने इतना ही कहा था कि रणबीर दांत पीसकर बोला, "क्यों तेरी गांड दुख रही है हम यहां पर खड़े हैं तो।" वही निर्मला जी अब रणबीर की तरफ देखकर बोली, "रणवीर, जरा बोलने की नजाकत मत भूलो, ठाकुर खानदान हैं हम। अपनी जुबान पर लगाम दो जरा।" निर्मला जी की बात पर रणबीर अब चुप हो गया। निर्मला जी अब बाहर की तरफ आते हुए बोली, "बाहर आओ, भाभी है वह तुम्हारी। अपनी शर्म मत भूलो, उनका चेकअप करने दो।" इतना कहते हुए निर्मला जी ने पलट कर सर्द नजरों से रणवीर की तरफ देखा। वहीं रणवीर भाभी शब्द सुनकर एक पल के लिए उसकी मुट्ठियां कस चुकी थी।
लेकिन अब रणबीर बाहर की तरफ आया और डॉक्टर ने दरवाजा बंद करके चेकअप करना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में, डॉक्टर चेकअप करके बाहर की तरफ आए और निर्मला जी की तरफ देखते हुए बोले, "मुबारक हो, Mrs Thakur,
छोटी मालकिन मां बनने वाली है, और आप दादी।" जैसे ही डॉक्टर ने यह बात कही, रणवीर की सांस वहीं पर थम गई। उसे ऐसा लगा, जैसे किसी ने उसके पैरों तले से जमीन ही खींच ली हो। उसकी आंखें पूरी तरह से लाल पड़ चुकी थी। दिमाग पूरी तरह से एक पल के लिए सुन्न पड़ गया।
To be continue....





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