
ठाकुर हवेली,
रणबीर इस वक्त पूरी तरह से सांवरी के ऊपर झुका हुआ था। अभी-अभी जो उसने कहा था, उससे सांवरी की धड़कनें जैसे रुक सी गई थी। सांवरी एक टक रणवीर को ही देखे जा रही थी। उसका दिल जोरो जोरो से धड़क रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह रणबीर को क्या जवाब दे। अभी रणवीर उसके होठों पर उसे चूमने को बोल रहा था। कुछ देर रणवीर को देखते रहने के बाद सांवरी लगभग से अपनी नजर दूसरी तरफ घूमाते हुए बोली, "आपको ऐसी बातें मुझसे नहीं करनी चाहिए, रणवीर जी, अच्छा नहीं लगता है। अगर किसी ने हमें यूं देख लिया, तो बवाल हो जाएगा।" तभी रणवीर उसके चेहरे को अपने हाथों में भरकर उसकी आंखों में आंखें डाल कर बोला, "मैंने कौन सा तुम्हें अपने साथ सेक्स करने को बोल दिया। मैंने तो सिर्फ किस करने को कहा है।" उसकी बात सुनकर सांवरी की आंखें बड़ी हो गई। अगले ही पल, वह नज़रे चुराते हुए बोली, "कैसी बातें कर रहे हैं आप?
आपको कितनी बार कह चुकी हूं कि मैं ऐसी लड़की नहीं हूं, तो क्यों आप मेरे पीछे पड़े हुए हैं। फिलहाल के लिए मैं सिर्फ इतना चाहती हूं कि आप अपने जख्म पर हल्दी लगवा ले। अगर हल्दी का लेप लग जाएगा, तो आपके जख्मों में इन्फेक्शन नहीं करेगा। समझने की कोशिश कीजिए, रणवीर जी।" तभी रणवीर उसकी आंखों में देखते हुए बोला, "लेकिन मुझे तो कुछ और चाहिए।" इतना कहते हुए रणबीर की नजर उसके होठों पर थी। जिस तरह से रणवीर उसके होठों को देख रहा था, सांवरी के रोंगटे खड़े हो रहे थे। उसे कुछ-कुछ हो रहा था। लेकिन अब वह गहरी ने सांस लेते हुए बोली,
"प्लीज, चुप कर जाइए रणवीर जी, मुझे हल्दी का लेप लगाने दीजिए। आप कब से अपनी बातें किए जा रहे हैं। आपको इतना नहीं पता चल रहा है कि मैं आपके साथ कंफर्टेबल नहीं हो पा रही हूं।" इतना कहते हुए वह अपनी लगभग से नजरे चुरा रही थी। तभी रणवीर ने उसकी ठोड़ी के नीचे हाथ रखा और उसका चेहरा ऊपर की तरफ उठाते हुए उसके होठों की तरफ देखते हुए बोला, "तुम कंफर्टेबल नहीं हो?" तभी सांवरी अपनी नजरे दूसरी तरफ घूमाते हुए बोली, "नहीं।"
उसकी बात पर रणबीर ने अब उसका चेहरा एक बार फिर से अपनी तरफ घुमाया और अगले ही पल बिना सांवरी की परमिशन लिए होठों पर होंठ रख दिए। एक पल के लिए सांवरी का दिल जैसे धक सा रह गया। वह तो बस हैरानी से रणवीर की तरफ ही देखे जा रही थी । जिसकी आंखें पूरी तरह से खुली थी। वह सांवरी का चेहरा देख रहा था। इस वक्त सांवरी का चेहरा पूरी तरह से लाल पड़ चुका था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर वह क्या करें। इस हद तक रणवीर उसके पीछे पड़ा हुआ था कि उसका साथ छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था। तभी पीछे से किसी की आवाज सुनाई दी। इस शख्स की आवाज सांवरी बहुत अच्छी तरह से पहचानती थी। उस शख्स की आवाज सुनकर सांवरी का दिल धक सा रह गया, क्योंकि यह अम्मा जी की आवाज थी।
निर्मला जी की आवाज सुनकर सांवरी ने जल्दी से रणवीर के कंधों पर हाथ रखा और अगले ही पल उसे पीछे धकेलने की कोशिश करने लगी। लेकिन रणबीर भी कुछ कम नहीं था। उसने उतना ही कसकर सांवरी की कमर को पकड़ लिया और उसके होठों को चूमने लगा। हालांकि सांवरी जिस कदर उसे धक्का दे रही थी, उसे अपने कंधे में दर्द हो रहा था। पर फिर भी उस कंधे के दर्द को एक किनारे करके वह लगातार उसके होठों को चूमे जा रहा था।
लेकिन जब सांवरी को वह आवाज तेज होती हुई महसूस हुई, तो अगले ही पल सांवरी ने अपना हाथ जानबूझकर रणवीर के कंधे पर रख दिया, जहां पर गोली लगी थी। जिस वजह से रणवीर की पकड़ उसकी कमर पर ढीली हो गई। अगले ही पल, सांवरी ने उसे जोरदार धक्का दिया। जिससे रणवीर पीछे दीवार से जा लगा। लेकिन अभी भी उसकी नजरे जिस कदर सांवरी पर थी, एक पल के लिए सांवरी के रोंगटे खड़े हो रहे थे। उसकी वह नजरे सांवरी को किस हद तक बेचैन कर रही थी, यह खुद रणबीर भी नहीं जानता था। दूसरी तरफ निर्मला जी अंदर की तरफ आई। उसने किचन में जब सांवरी को देखा, अगले ही पल उसका चेहरा पूरी तरह सुन्न हो गया। यह थी निर्मला जी, रणवीर और अभय की मां, जिन्होंने यह रिश्ता करवाया था। अब वह आगे की तरफ आए। अगले ही पल, उसने सांवरी को अंदर जाकर पूरी तरह से गले से लगा लिया। रणवीर तो उनके पीछे ही था, जोकि दीवार से सटा हुआ खड़ा था। अभी भी वह शर्टलेस था, लेकिन वह इस तरह से अपनी मां के सामने नहीं आ सकता था। क्योंकि अगर वह इस तरह से अपनी मां के सामने आ जाता, तो शायद सांवरी को निर्मला जी गलत समझती। इसीलिए वह जल्दी से बाहर की तरफ निकला और अपने कमरे में चला गया।
जैसे ही रणवीर किचन से बाहर चला गया, वैसे ही सांवरी ने एक राहत की सांस ली। फिर निर्मला जी की तरफ देखते हुए बोली, "आप आ गई, मां।" तभी निर्मला जी गहरी सांस लेकर बोली, "हां, मैं आ गई। जानबूझकर गई थी उस दिन, क्योंकि जानती थी कि उस राक्षस का बिहेव तेरे प्रति क्या होगा, इसीलिए चली गई थी। अगर मैं नहीं जाती, तो हो सकता था कि शायद मैं खुद को ही ठेस पहुंचा लेती कि मैंने तुझे किसके हाथों सौंप दिया।" तभी सांवरी उनकी बात बीच में काटते हुए बोली, "इसमें आपकी गलती नहीं है अम्मा, इसमें गलती किस्मत की है। जब किस्मत ही मेरी फटी हुई है, तो इसमें आपका क्या कसूर?"
इतना कहते हुए उसकी आंखों से लगभग से आंसू बाहर को आने को आतुर हो रहे थे। तभी निर्मला जी उसके गाल पर हाथ रखते हुए बोली, "ऐसा मत बोला कर बेटा, कभी ना कभी तो वह सुधरेगा। इतना नालायक भी नहीं है मेरा बेटा।" उसकी बात पर सांवरी के चेहरे पर दर्द भरी मुस्कराहट तैर गई। वह रोते हुए बोली, "अगर वह सुधरने वाले होते मां, तो शायद वह मेरे साथ ऐसा बिहेव करते ही नहीं।" तभी निर्मला जी उसकी तरफ देखकर बोली, "रो मत, बच्ची, कभी ना कभी वह सुधर जाएगा।"
सुधरने की बात पर सांवरी की आंखों के सामने वह पल घूमने लगा, जब अभय ने उसके चेहरे पर बाथरूम किया था। उस पल को याद करते हुए ही उसने निर्मला जी की तरफ देखा और बोली, "अगर मैं आपको कहूं कि आपका बेटा नहीं सुधर सकता, तो क्या आप मानेगी।" तभी निर्मला जी सख्त चेहरे के साथ बोली, "सांवरी बेटा, चाहे जितना मर्जी गलत हो, मां के लिए वह कभी गलत नहीं होता। अभी भी मैं तुझे यही बात कहूंगी कि वह कभी ना कभी सुधरेगा जरूर, लेकिन फिलहाल तुझे उसे वक्त देने की जरूरत है।" उसकी बात पर सांवरी व्यंग्य से हंसी और बोली, "यही तो बात है मां,
आपका दिल मां का है और आप मेरा दर्द नहीं समझ पाएंगे। जब बंद कमरे में वह।" इतना कहकर वह चुप हो गई, लेकिन उसके आंसू सब बयां कर रहे थे, जोकि निर्मला जी साफ देख पा रही थी। वही सांवरी अब अपनी बात कह कर वहां से जा चुकी थी। लेकिन निर्मला जी की आंखों में अब जाकर आंसू आ गए थे। वह खुद में ही बोली, "मैंने खुद इतना दर्द सहा है बेटा कि क्या बताऊं। आज तक तेरे ससुर नहीं सुधरे, तो यह भी तो उनका ही बेटा है। यह कहां से सुधर जाएगा।" इतना कहते हुए निर्मला जी ने आंसू साफ किए और बोली, "मुझे माफ कर दे मेरी बच्ची, मैं तेरा साथ नहीं दे सकती। अगर मैंने तेरा साथ दिया, तो हो सकता है कि तुझे उतना ही ज्यादा दुख दिया जाए इस घर में।"
इतना कहते हुए निर्मला जी का गला भर आया था।
वहीं दूसरी तरफ सांवरी की आंखों से आंसू तेजी से बहे जा रहे थे। वह अब अपने कमरे में आई और आते ही बेड पर लेट कर फूट-फूट कर रोने लगी। लेकिन जैसे ही वह कमरे में आकर लेटी, तभी दरवाजा खुला और अगले ही पल रणवीर अंदर की तरफ आया। आते ही उसने दरवाजा पूरी तरह से लॉक कर दिया। वही सांवरी को जैसे ही दरवाजा खुलने की आवाज आई, तो उसने पलट कर दरवाजे की तरफ देखा। उसकी आंखें बड़ी हो गई। अगले ही पल, वह अपनी जगह से खड़ी हुई और बोली, "यह क्या बदतमीजी है, छोड़ दीजिए ना मेरा पीछा। एक तरफ वह है, जो मुझे हर वक्त अपने जिस्म के नीचे दबाकर नोचते रहते हैं और एक आप हैं, जो मुझे अपने लिए न जाने क्या-क्या कर रहे हैं। क्योंकि कहीं ना कहीं आपकी जरूरत भी जिस्म की है। मैं जानती हूं कि आप मुझसे प्यार नहीं करते हैं, तो कृपया करके मेरा पीछा छोड़ दीजिए।
हर कीमत जिस्म से शुरू नहीं होती, क्या पता किसी के जिस्म की कीमत उसका दिल चीरना ही हो। क्यों आप लोग मेरा दिल चीरना चाहते हैं। हर इंसान एक जैसा है। कोई मेरे शरीर का शोषण करना चाहता है, तो कोई मेरी आत्मा को शोषण करना चाहता है। रणवीर सिंह, मैं आपके आगे हाथ जोड़ती हूं। मेरा दिल बहुत दुखी है। प्लीज, चले जाइए आप यहां से।" उसकी बात रणवीर बहुत गौर से सुन रहा था। लेकिन उसने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। तभी रणवीर एक बार फिर से बोला, "मैं तुम्हारी हर एक बात सुनने को तैयार हूं। रो लो, जितना रो सकती हो, रो लो। आज मैं तुम्हें मौका देता हूं कि तुम मेरी बाहों में टूट कर रो सकती हो।
क्या पता तुम्हारे दिल का बोझ कम हो जाए।" तभी सांवरी आगे की तरफ आई और अगले ही पल, रणवीर के सीने पर जोर जोर से मुक्के मारते हुए बोली, "नहीं रोना मुझे किसी के गले लग कर, नहीं चाहिए मुझे किसी की बाहों में, मुझे कोई नहीं चाहिए। मैं अकेली रहना चाहती हूं। भगवान के लिए चले जाइए। रणवीर जी, चले जाइए यहां से।" इतना कहते हुए लगभग से वह खुद नहीं जानती थी कि रणबीर के साथ क्या किए जा रही थी। लेकिन रणबीर का चेहरा पूरी तरह से एक्सप्रेशन लैस था। लेकिन अंदर ही अंदर पता नहीं क्यों उसके दिल में एक अलग ही आग पैदा हो रही थी। जैसे-जैसे सांवरी रो रही थी, उसके रोने को देखकर रणवीर का दिल अंदर तक जल रहा था, जो वह खुद महसूस कर रहा था। उसे अपने दिल में एक अजीब सी हलचल महसूस हो रही थी। लेकिन अपने चेहरे के नीचे उसने पूरी तरह से उस चीज को दबा रखा था।
वही सांवरी अब रोते हुए बोली, "कोई भी आता है, मेरे शरीर का शोषण करने के लिए आता है। आप भी वही चाहते हैं और अभय, वह तो करते ही मेरे शरीर का शोषण है। उन्हें सिर्फ एक चीज से मतलब है, गलियां निकालना या फिर मेरा।" इतना कहते हुए सांवरी की सांस रुकने लगी थी। उसकी आंखें भारी होने लगी थी। इस वक्त जिस तरह से वह रो रही थी, अब वह पैनिक करने लगी थी।
वह तड़प कर बोली, "मैं आपके आगे हाथ जोड़ती हूं। प्लीज, चले जाइए।" इतना कहते हुए उसकी आवाज बहुत ज्यादा ढीली हो चुकी थी। अगले ही पल, देखते ही देखते उसकी आंखें बंद होने लगी। वह निढाल होकर रणवीर की बाहों में झूल गई। वहीं रणवीर, जो कि उसे अपने एक्सप्रेशन लेस चेहरे से कब से देख रहा था। अब उसने गहरी सांस ली और उसके चेहरे को देखते हुए बोला,
"इतनी तकलीफ अपने अंदर तुम समेट के बैठी हो। कैसे जी रही हो तुम।" इतना कहते हुए रणबीर एक टक बस सांवरी की चेहरे की तरफ ही देखे जा रहा था। जिसके चेहरे पर दुनिया जहां की बेचैनी और दर्द उतरा हुआ था। अब उसने सांवरी को गोद में उठाया और अगले ही पल उसे बिस्तर पर लाकर उसने लेटा दिया। लेकिन आज उसकी नज़रें पूरी तरह से सांवरी के चेहरे पर टिकी हुई थी। उसने एक बार भी अपनी नज़रें इधर-उधर नहीं दौड़ाई थी।
वहीं दूसरी तरफ होटल में,
अभय इस वक्त एक लड़की के साथ इंटीमेट हो रहा था। वह लगभग से उस लड़की को पीट रहा था और साथ ही साथ में अपना dick उसकी pussy में मूव कर रहा था। साथ ही साथ में उसका हाथ लगातार उस लड़की की बैक पर चल रहा था। वह लगातार उसकी ass पर जोर-जोर से स्पंक करते हुए खुद को हार्डली stock कर रहा था।
जिस वजह से उस लड़की की दर्दनाक चीखे उस कमरे में गूंज रही थी। वह लड़की लगभग से रो रही थी। लेकिन अभय को उस पर जरा भी तरस नहीं आ रहा था।
To be continue.....





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