
ठाकुर हवेली,
सांवरी इस वक्त बालकनी में खड़ी थी और सामने का नजारा देखकर उसका कलेजा जैसे मुंह में आ गया था। क्योंकि गार्डन में अभी-अभी रणवीर आकर बैठा था और उसके कंधे पर गोली लगी हुई थी, जो वह फाउंटेन में अपने कंधे को धो रहा था। ऐसा लग रहा था, जैसे गोली उसके अंदर तक धंस गई हो। उसके खून से फाउंटेन का पानी पूरी तरह से ब्लड से भर चुका था। उस मंजर को देखकर सांवरी की सांस जैसे थम सी गई थी। इसलिए वह जल्दी से अपने रूम से बाहर निकली और भागते हुए नीचे की तरफ आई।
दूसरी तरफ रणवीर, जोकि फाउंटेन में अपना कंधा पूरी तरह से धो रहा था, इस वक्त उसका चेहरा पसीने से भर चुका था और सांस बेहद गहरी चल रही थी। साफ पता चल रहा था कि गोली का दर्द उसे किस हद तक हो रहा था। अभी वह फाउंटेन के पानी में हाथ धो ही रहा था कि तभी उसका फोन, जोकि उसकी पॉकेट में पड़ा था, वह बजने लगा। उस फोन को बजते हुए देखकर वह गुस्से में तिलमिलाते हुए बोला, "कौन है यह madarchod, जो ढंग से बैठने भी नहीं दे रहा है। अरे सालों! तुम्हारी वजह से।" अभी वह बोल ही रहा था कि तभी उसने सामने की तरफ देखा, जहां पर सांवरी अभी-अभी आकर खड़ी हो गई थी।
उसकी आंखों से आंसू तेजी से बहने लगी थे। सांवरी को यूं रोता हुआ देखकर रणवीर हैरानी से बोला, "तुम्हें क्या हुआ? और तुम रो क्यों रही हो?" उसने इतना ही कहा था कि वही सांवरी, जो कि दूर खड़ी थी, उसका तो कलेजा जैसे फटा जा रहा था। उसका रोना और भी तेज होने लगा। तभी रणवीर हड़बड़ाते हुए बोला, "हुआ क्या है? बोलो तो सही तुम्हें क्या हुआ है?" सांवरी की लगातार नजर रणवीर के कंधे पर बनी हुई थी। जहां पर अभी भी खून बहे जा रहा था। उसका खून रुकने का नाम नहीं ले रहा था, क्योंकि गोली काफी ज्यादा अंदर तक फंसी हुई थी।
वहीं रणवीर का फोन उसकी पॉकेट में बजे जा रहा था, लेकिन उसका ध्यान तो पूरा सांवरी के चेहरे पर बना हुआ था। वह एक बार फिर से सांवरी के चेहरे को हाथों में भरते हुए बोला, "बोल भी, हुआ क्या है तुम्हें?" लेकिन सांवरी कुछ बोली नहीं, बस रोए जा रही थी। अब रणबीर को गुस्सा आने लगा। वह दांत पीसते हुए मन ही मन बोला, "एक तो madarchod इन भोसड़ी वालों के साथ जाकर, कमिने वहां पर मुझे गू खाने ले गए।
पता ही नहीं चला कहां से फायरिंग स्टार्ट हो गई। और एक यह है, दिमाग खाने को आ गई है। रोए जा रही है, इरिटेट किए जा रही है। बता भी नहीं रही कि क्या हुआ है?" अब वह एक बार फिर से सांवरी के पास आया और उसको कंधों से हिलाते हुए बोला, "बोल भी।" अभी उसने हिलाया ही था कि रणबीर की खुद की आह निकल गई थी, क्योंकि उसके कंधे में एक बार फिर से दर्द बहुत जोर से उठा था। जिससे सांवरी अपने होश में आई और वह रोते हुए बोली, "यह गोली आपको कहां से लगी? कितना दर्द हो रहा होगा आपको? जल्दी चलिए, मैं आपको डॉक्टर के पास ले जाती हूं। गोली, यह गोली कहां से लगी आपको और इतनी अंदर तक?" इतना कहते हुए उसकी आवाज भी कांप रही थी।
अब उसने अपनी आंखों से आंसू साफ किए और गहरी और दर्द भरी आवाज में बोली, "चलिए ना।" तभी रणवीर उसका हाथ अपने कंधे से हटाते हुए बोला, "पहली बात तो यह कि मैं कहीं नहीं जाने वाला। और दूसरी बात, यह रोना ना अपना बंद करो। मुझे इरिटेशन हो रहा है।" तभी सांवरी अपने आंसुओं को साफ करते हुए बोली, "मैं रो नहीं रही हूं। मुझे रोना आ रहा है।" तभी रणबीर भी उसको गहरी नजरों से देखते हुए बोला, "क्यों रोना आ रहा है? क्या बात है, गोली तो मुझे लगी है। तुम्हें थोड़ी लगी है, जो इतना रोए जा रही हो।" इतना कहते हुए रणबीर की आवाज भी हल्की धीमी पड़ चुकी थी।
उसके चेहरे पर पसीने की बूंदे अभी भी उबर रही थी और दर्द के मारे उसके माथे के नसे भी तनती जा रही थी। वही सांवरी रोते हुए बोली, "आप मेरे साथ ऐसी बात नहीं कर सकते। मुझे, मुझे आपको हॉस्पिटल किसी भी हाल में लेकर जाना होगा।" सांवरी की बात सुनकर रणबीर अपने सिर पर हाथ रखते सांवरी से कुछ बोलने को हुआ कि तभी पीछे से एक बॉडीगार्ड रणवीर के आगे आकर अपना सिर झुका कर बोला, "साहब, डॉक्टर घर पर आ रहे है। तकरीबन 15 मिनट में डॉक्टर यहां पर पहुंचते ही होंगे।" रणवीर ने उस गार्ड की बात सुनकर हां में सिर हिलाते हुए उसे वहां से भेज दिया। फिर वह सांवरी की तरफ देखते हुए बोला, "अब तो ठीक है, डॉक्टर आ रहे हैं यहीं पर।" उसकी बात सुनकर सांवरी, जिसकी आंखों से अभी भी आंसू बहे जा रहे थे, वह अपने आंसू साफ करते हुए बोली, "हां, ठीक है। लेकिन, लेकिन आप चलिए मेरे साथ, मैं आपको।"
अभी वह बोल ही रही थी कि रणबीर उसके करीब हुआ और बोला, "करना क्या चाहती हो, कहां लेकर जाना चाहती हो मुझे? पक्का ना, अगर मैं तुम्हारे साथ चलूं, तो क्या मुझे वह मिलेगा, जो मैं चाहता हूं।" उसकी बात सुनकर सांवरी हैरानी से उसके चेहरे की तरफ देखते हुए बोली, "कौन सी चीज।" उसकी हैरानी को देखकर रणवीर के चेहरे पर डेविल स्माइल आ गई। अब वह सांवरी को और भी गहरी नजरों से देखने लगा, जिसे महसूस कर सांवरी का दिल जोरो जोरो से धक-धक करने लगा।
वहीं दूसरी तरफ,
मुंबई में,
अभय की मीटिंग चल रही थी और इस मीटिंग में सामने के शख्स के साथ एक लड़की आई हुई थी, जो कि कब से अभय को अपनी गहरी नजरों से देख रही थी। उसका गला इतना ज्यादा डीप था कि वह अभय को अपनी तरफ आकर्षित करने की पूरी पूरी कोशिश कर रही थी। अभय भी अपनी मदहोशी भरी नजरों से उस लड़की को देख रहा था। पास में खड़ा राका भी यह चीज बहुत अच्छी तरह से नोटिस कर रहा था। लेकिन उसने कुछ कहा नहीं। सामने खड़ा शख्स यह तो बहुत अच्छी तरह से जानता था कि अभय ठाकुर कोई छोटी-मोटी आसामी तो बिल्कुल भी नहीं था। इसीलिए वह शख्स अपने साथ उस लड़की को लेकर आया था। यह शख्स अभय की कमजोरी के बारे में भी जानता था कि अभय को सेक्स में बहुत ज्यादा इंटरेस्ट था। इसीलिए वह अपने साथ लड़की को लेकर आया था, जो उसे पूरी तरह से अपनी तरफ अट्रैक्ट करने की कोशिश कर रही थी। इस वक्त उस लड़की ने छोटी सी स्कर्ट पहनी हुई थी। उसकी जो शर्ट थी, जो कि उसने अपनी स्कर्ट के अंदर डालकर इन की हुई थी और उसके दो बटन ऊपर के खुले थे। जिस वजह से उसके क्लीवेज काफी हद तक बाहर की तरफ उभर कर आ रहे थे।
वही वह शख्स, जो सामने खड़ा था, उसके चेहरे पर इस वक्त डेविल्स स्माइल थी। वह अब अभय की तरफ देखते हुए बोला, "मिस्टर ठाकुर, आपको हमारी डील कैसी लगी? आपको हमारी डील पसंद आई?" अभय भी उस लड़की की तरफ तिरछी नजरों से देखते हुए बोला, "आपकी डील तो वाकई मेरे दिल को लगी। अगर चाहे तो आज ही आपकी डील फाइनल हो सकती है और वजह भी आप जानते हैं।" उसकी बात सुनकर उस शख्स की, जोकि उसके सामने बैठा हुआ था। उसकी डेविल स्माइल और भी लंबी हो गई। वह अभय की तरफ हाथ बढ़ाते हुए बोला, "जरूर मिस्टर ठाकुर,
अरे! यह लड़की बहुत अच्छी डील हैंडल करती है। अब यही आपके साथ की डील हैंडल करेगी। सो, अब मैं यहां से चलता हूं।" अभी वह बोल ही रहा था कि तभी बीच में राका अभय के कान के पास झुकते हुए बोला, "लेकिन मालकिन का क्या?" उसने इतना ही कहा था कि तभी अभय के जबड़े पूरी तरह से कस गए। वह उसे सर्द नजरों से देखते हुए धीमे से बोला,
"पहले तो तेरी मालकिन की मां की chut, और दूसरा तेरी भी मां की chut...।
सारे लंड के मुंह वाले, काम मेरा करता है और नाम उस भोसड़ी का लेता है। मेरे सामने नजर मत आना, बहन चोद, निकल जा यहां से। अब मुझे यहां पर इस लड़की के साथ थोड़ा वक्त बिताना है। और तू भी जा किसी लड़की को पकड़ ले, किसी कमरे में ले जा और chod Dal."
अभय की बात सुनकर राका का सिर पूरी तरह से नीचे की तरफ हो चुका था। उसे अभय की बातें बिल्कुल भी अच्छी नहीं लग रही थी।
राका अब वहां से निकल चुका था और अभय अब उस लड़की के सामने अकेला था। वही वह लड़की धीरे-धीरे कर अपनी शर्ट के बटन खोलने लगी। देखते ही देखते उसके पूरे कपड़े नीचे जमीन पर बिखरे हुए थे और वह पूरी तरह से neked अभय के सामने थी। उस लड़की का शरीर सांवरी से ज्यादा उभरा हुआ था, जिस वजह से वह अभय को ज्यादा अट्रैक्ट कर रही थी। लेकिन सांवरी जितनी वह खूबसूरत बिल्कुल भी नहीं थी।
उसकी वह ब्राउन पुसी को देखकर अभय तिरछी मुस्कुराहट के साथ बोला, "तेरी तो ब्राउन है रे।" अभय की बात पर लड़की ने मुंह बनाया और नाक फूलाते हुए बोली, "किसी की गोरी भी होती है और पिक भी होती है। मैंने देखा नहीं आज तक।" तभी अभय आईब्रो ऊपर की तरफ उठाते हुए बोला, "है ना, मेरी पत्नी की पूरी पिंक पिंक है।
उसे तो पूरा खा जाने को दिल करता है।" तभी वह लड़की मुंह बनाते हुए बोली, "ऐसी लड़कियों की जो भोसड़ी होती है ना, वह फटी होती है, फटी।" उसकी बात सुनकर अभय के चेहरे पर गुस्सा आ जाता है। वह उसकी तरफ देखते हुए बोला, "गलत, जुबान संभाल के बात कर, पत्नी की बात कर रही है तू मेरी। जब मैं उससे मिला था ना, वह पूरी तरह से पवित्र थी। चार जगह से तेरी तरह भोसड़ी नहीं फटवाई थी उसने।" उसकी बात सुनकर वह लड़की उसकी तरफ देखते ही रह गई। वही अभय अब अपनी जगह से उठा और बोला, "यह डील कैंसिल है। अब मेरा मन नहीं है इस डील को करने का।" जिसे सुनकर उस लड़की के होश पूरी तरह से फाख्ता हो गए थे।
अब वह लड़की जल्दी से अभय के आगे आकर बोली, "आई एम सो सॉरी सर, आई एम सो सॉरी, मैं आगे से ऐसी कोई बात नहीं करूंगी। आपको सेटिस्फाइड भी पूरी तरह से करुंगी। अगर आपको मेरी पुसी पसंद नहीं आई, तो यह boobs देखिए ना, काफी बड़े हैं।" उसकी बात सुनकर अभय ने उसे तिरछी नजरों से देखा। वह लड़की तो ऐसे अपने boobs को दिखा रही थी, जैसे उन boobs को बेचने ही वाली हो।
अभय ने अब गहरी सांस ली और बोला, "चल ठीक है, तेरी चुत को आज थोड़ा टेस्ट कर ही लेता हूं। चल, जा सामने लेट और दिखा अपना जलवा थोड़ा बहुत बिस्तर पर, फिर मैं देखता हूं कि तुझे चोदना है या नहीं।"
लड़की उसकी तरफ देखते ही रह गई।
वहीं दूसरी तरफ,
सांवरी इस वक्त रणवीर के सामने खड़ी थी और हैरानी से रणवीर को देख रही थी। अब वह दोनों किचन में थे। सांवरी उसे वहां पर लेकर आई थी। वह चाहती थी कि रणबीर की चोट पर थोड़ी बहुत हल्दी लगा दी जाए, ताकि एंटीबायोटिक के कारण उसके चोट पर जम्स ना लगे। लेकिन रणबीर ने हल्दी लगवाने के लिए जोर से मांगा था, उसे सुनकर सांवरी का दिल जैसे धड़कने से इनकार करने लगा था।
वहीं रणवीर उसके कान के पास झुकते हुए बोलो, " करोगी ना मेरे होठों को kiss.....।"
To be continue...





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