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Ranveer ka gussa

ठाकुर हवेली,

अभी-अभी सांवरी ने रणवीर को जोरदार थप्पड़ जड़ा था, क्योंकि उसने सांवरी की मां को उसके काबिल ना होने की बात कही थी और वह कहीं ना कहीं सच भी था। लेकिन सांवरी को इस चीज का बहुत ज्यादा बुरा लगा था। इस वक्त वह गुस्से से कांपते हुए रणबीर की तरफ देख रही थी, जिसका चेहरा पूरी तरह से दूसरी तरफ हो रखा था। इस वक्त रणवीर का चेहरा भी पूरी तरह से लाल था और गुस्से से तमतमा रहा था। सांवरी अब उसकी तरफ देखते हुए बोली, "लगता है शायद तुम्हारी मां तुम्हारे साथ नहीं है। इसीलिए तुम किसी की मां को इस तरह की बातें बोल रहे हो।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी Ranveer ने उसकी तरफ अपनी लाल आंखों से देखा।

अगले ही पल, उसने सांवरी का गला पकड़ लिया, जिसे देखकर सांवरी की आंखें हैरत से फैल गई। अभी वह कुछ समझा या कुछ बोल पाती, रणवीर ने लगभग से उसे पीछे की तरफ धकेलते हुए उसे दीवार से लगा दिया और दांत पीसकर बोला, "हाउ डेयर यू, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी मॉम तक पहुंचाने की। तुमने थप्पड़ मारा, उसका मैंने कोई जवाब नहीं दिया। लेकिन तुमने क्या सोचा, तुम मेरी मॉम तक पहुंच जाओगी। इतनी औकात नहीं है तुम्हारी।" उसकी बात सुनकर सांवरी व्यंग्य से हंसी और बोली, "मैं जानती हूं, मेरी किसी चीज की औकात नहीं है। लेकिन आपको भी अपनी लिमिट नहीं क्रॉस करनी चाहिए थी। जैसे आपकी मां है, वैसी मेरी भी मां है।"

उसकी बात सुनकर रणवीर का गुस्सा और भी ज्यादा बढ़ गया। वह चिल्लाते हुए बोला, "अपनी मां का कंपैरिजन मेरी मां से तो करना ही मत, जिसने तुम्हें एक रईसजादे को देखकर बेच दिया। वह कितनी औकात की मालिक होगी, यह तो देखकर ही पता चल रहा है। रही बात तुम्हारी, तुम तो हो ही बेवकूफ, अगर सही होती, तो यहां पर ना बैठी होती।

अरे! तुम्हारे अंदर तो इतनी हिम्मत नहीं की तुम अभय ठाकुर से लड़ सको। उसके सामने घुटने टेक लेती हो। वह तुम्हारे साथ जैसा बिहेवियर करता है, उसे खुद के साथ करने देती हो। अरे! इंसान हो, जानवर थोड़ी हो। जो तुम अपने साथ इस तरह का बिहेव करने देती हो। कभी सोच कर देखा है, तुम्हें कितना बुरा लगता है, कितना तकलीफ होती होगी।" रणवीर की बात पर सांवरी की आंखों में नमी उतरने लगी। वह रोते हुए बोली, "मुझे जितना मर्जी बुरा कह लो, वह मेरी किस्मत है। पति है वह मेरे, कर सकते हैं, जो चाहे।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी रणवीर व्यंग्य से हंसा और बोला, "यही तो तुम्हारी घटिया सोच है।

तुम जैसी लड़कियां पति को अपनी सिर्फ किस्मत मानकर उनसे जूते तक खाती हो। जानती हो क्यों, क्योंकि तुम्हारी सोच यही होती है कि तुम्हारा पति तुम्हारी डेस्टिनी है। चाहे वह तुम्हें तुम्हारे अंदर तक तुम्हें भुन कर रख दे, छेद कर दे, तुम्हारे मुंह पर मूत दे, लेकिन साला तुम लोगों की हिम्मत नहीं है कि उनके आगे जबान लड़ा जाओ।" उसके मुतने की बात सुनकर सांवरी की आंखें बड़ी हो गई। उसे वह पल याद आने लगा, जब अभय ने उसके चेहरे पर बाथरूम किया था। उस पल को याद करते ही सांवरी की आंखों से आंसू बाहर की तरफ लुढ़क आए।

दूसरी तरफ रणवीर ने उसकी तरफ देखते हुए अब उसने अपना हाथ नीचे की तरफ किया और बोला, "आइंदा मेरी मां को बीच में मत लाना, समझी तुम। तुम्हारी मां की तरह मेरी मां तो बिल्कुल भी नहीं है। उसने अभी भी अपनी बेटी को गले से लगा कर रखा है। रही बात तुम्हारी मां की, तो इतनी हैसियत ही नहीं है कि वह अपनी बेटी को अपनी गले से लगा कर रखती। उसे तो सिर्फ पैसा चाहिए था। इसलिए उसने तुम्हें इस दरिंदे के हाथों बेच दिया।" इतना कहते हुए रणबीर उसे ऊपर से नीचे की तरफ देखने लगा। तभी सांवरी उसकी तरफ देखते हुए बोली, "तुम्हें क्या पता, हमारे क्या हालात थे।" तभी रणवीर उसकी तरफ देखते हुए बोला, "हालातो के आगे घुटने नहीं टेके जाते, उनसे लड़ा जाता है।

तुम्हारी मां ने हालातो के आगे घुटने नहीं टेके, उन्होंने जानबूझकर तुम्हें बेचा है। और रही बात तुम्हारी, तुम हालातो के आगे घुटने टेक रही हो। अभय ठाकुर जैसे इंसान का जुल्म सहकर। वह तुम्हें कब कच्चा चबा जाएगा, तुम्हें पता ही नहीं चलेगा। जानती हो, एक दिन ऐसा आएगा कि वह तुम्हें जमीन में गढ़वा देगा। लेकिन उसकी हवस पूरी नहीं होगी। तुम्हारे शरीर पर बने हुए निशानों से पता चल रहा है कि वह किस कदर तुम्हारा यूज करता है। अगर फिर भी तुम उसकी होना चाहती हो, आईटी'एस योर चॉइस, मैं बीच में नहीं आने वाला।

और रही बात प्यार की, वह तो आज नहीं तो कल तुम मुझसे जरूर करोगी, मुझे विश्वास है।" उसकी बात सुनकर एक पल के लिए सांवरी उसकी तरफ देखते ही रह गई। रणबीर अपनी बात कह कर वहां से जा चुका था। लेकिन रणबीर के जाते ही सांवरी घुटनों के बल गिर गई और फूट-फूट कर रोने लगी। वह रोते हुए खुद से बोली, "मैं कर भी क्या सकती हूं, यह मेरी किस्मत है। अगर वह मुझे इस तरह से।" इतना कहते हुए वह चुप हो गई, लेकिन उसकी आंखों के सामने वही पल घूमने लगा, जब-जब अभय उसके साथ इंटीमेट हुआ था। जिस तरीके से हुआ था, वह इतना ब्रूटल होता था कि सांवरी की रूह तक कांप जाती थी।

वहीं दूसरी तरफ,

अभय की कार में,

अभय इस वक्त गाड़ी की बैक सीट पर बैठा हुआ था। वही राका गाड़ी चला रहा था। उनके आगे पीछे काफी ज्यादा गाड़ियां चल रही थी।।वहीं दूसरी तरफ आगे बैठा राका, जोकि गाड़ी चला रहा था, उसका ध्यान कहीं और ही था। भले ही वह गाड़ी चला रहा था। पर दूसरी तरफ, अभय, जो कि अपना फोन चला रहा था, उसकी नजर एकदम से उसने ऊपर की तरफ उठी, तो मिरर में से राका की तरफ गई। जिसका ध्यान कुछ खास गाड़ी चलाने में नहीं था। उसको यूं देखकर अभय की आंखें सर्द हो गई। वह दांत पीसते हुए बोला, "लगता है बहन चोद, तुझे अपनी जॉब प्यारी नहीं है।" जैसे ही अभय ने यह बात कही, राका अपने होश में आया। वह हड़बड़ाते हुए सामने की तरफ देखकर बोला,

माफ कीजिएगा मालिक, वह हम आपसे कुछ कहना चाहते थे।" तभी अभय उसकी तरफ देखते हुए बोला, "क्या हुआ, लंड में खुजली हो रही है या गांड में खुजली हो रही है। अगर गांड में खुजली हो रही है, तो मैं अपना लंड दे देता हूं। तुझे अगर लंड में खुजली हो रही है, तो किसी और की गांड मार ले। तू कहे तो किसी बॉडीगार्ड की गांड मरवा दूं।"

उसकी बात सुनकर राका अपना चेहरा नीचे की तरफ झुकाते हुए बोला, "बात जरूरी है, साहब।" जैसे ही उसने यह बात कही, अभय उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोला, "हां, तो मैंने कौन सा तुझे एनइंपॉर्टेंट बात कह दी है। मैंने भी तो तुझसे जरूरी बात ही की है। अब देख, तू ठुकाई करना चाहता होगा, इसीलिए तो तुझे।" अभी वह बोल ही रहा था कि तभी राका उसकी बात को काटते हुए बोला, "सांवरी मैडम को लेकर है, मालिक....।"

जैसे ही राका के होठों पर सांवरी का नाम आया, अभय के जबड़े पूरी तरह से कस गए। अगले ही पल, उसने कहा, "गाड़ी रोक, madarchod* गाड़ी रोक, अभी तेरी गांड फाड़ के बताता हूं। किसकी बात कर रहा है तू। बहुत गांड फैलाए बैठा है ना यहां पर, लगता है अपनी औकात भूल गया है। नाम किसका ले रहा है, मालकिन है वह तेरी, हरामजादे।" उसकी बात पर राका, जोकि गाड़ी चला रहा था, उसने अगले ही पल गाड़ी की ब्रेक लगाई। वह जल्दी से हाथ जोड़ते हुए बोला, "मालिक, ऐसी कोई बात नहीं है। आप हमें गलत समझ रहे हैं। हम तो आपके भले।" अभी वह बोल ही रहा था कि अभय बोला, "लगता है madarchod तुझे आज कुछ ज्यादा ही गर्मी चढ़ी हुई है। हरामजादों, मैं तुम्हें अपनी नौकरी पर रखता हूं, ताकि तुम लोग

मेरे काम आ सको। लेकिन तुम तो मेरी ही गांड मारने पर तुले हुए हो। चल आज तेरी गांड ना फाड़ दी, तो मेरा नाम भी अभय ठाकुर नहीं।" राका हाथ जोड़ते होते हुए बोला, "माफ कर दीजिए मालिक, मैं आज के बाद मालकिन का नाम कभी नहीं लूंगा। मैं लूंगा ही नहीं उनका नाम।" इतना कहते हुए लगभग से राका की आंखों में पानी आ गया था।

वही अभय अब उसकी तरफ गहरी नजरों से देखते हुए बोला, "बहनचोद, अब तू बैठ यहीं पर अकेला, मैं दूसरी गाड़ी में आऊंगा। तू अकेला ही जा कमीने, मैं तो तुझे सबसे वफादार समझ रहा था।

Madarchod, अगर आगे से अपना लंड हमारी तरफ उठाने की कोशिश की ना, तो उखाड़ के रख दूंगा।" अभय की गालियां सुनकर राका ने अपना चेहरा नीचे की तरफ झुका लिया। वह अब खुद से ही बुदबुदाते हुए बोला, "मुझे तो मालिक को कुछ कहना ही नहीं चाहिए था। खामखा इतनी गालियां सुन ली।" यही सोचते हुए वह चुप हो गया। अब अभय उसकी गाड़ी में से निकला और पिछली गाड़ी में जाकर बैठ गया। वही राका अब खुद में बड़बड़ाया, "आप बहुत पछताने वाले हैं मालिक, और शायद तब तक बहुत देर हो जाए।" इतना कहते हुए राका चुप हो गया और गाड़ी ड्राइव करने लगा।

वहीं दूसरी तरफ,

सांवरी इस वक्त बालकनी में खड़ी थी और उसकी आंखों से अभी भी आंसू बह रहे थे और कानों में रणबीर की कही हुई बातें गूंज रही थी। तभी उसकी नजर गार्डन एरिया में पड़ी और एक पल के लिए उसकी धड़कन जैसे स्किप हो गई।

To be continue...

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