
राठौर फार्महाउस,
अभी-अभी मृत्युंजय ने पेंट का बटन खोला था, जिससे उसका लॉन्ग dick धानी के मुंह पर आकर रखा था। जिसे देखकर धानी ने अपने होठों पर जीभ घुमाई और मृत्युंजय की तरफ देखा। जिसका चेहरा पूरी तरह से मदहोश हो चुका था। लेकिन धानी की हरकत को देख कर मृत्युंजय की धड़कनें जैसे स्किप हो गई थी। वह अपनी मदहोशी भरी नजरों से धानी को देखते हुए बोला, "तुम्हे नहीं लगता शायगर्ल कि तुम कुछ जायदा बोल्ड होने लगी हो।" उसकी बात पर धानी उसके ऊपर आ गई। जैसे ही धानी उसके ऊपर आई, मृत्युंजय का dick धानी को अपनी लोअर बॉडी पर लगा। उसे महसूस कर धानी के चेहरे पर स्माइल और भी लंबी हो गई। वही मृत्युंजय उससे गहरी आवाज में बोला, "लगता है तुम्हें कुछ और भी चाहिए।" तभी धानी उसे उसी टोन में जवाब देते हुए बोली, "आप बोल्ड होने की बात कर रहे हैं, मुझे इस तरह का बनाया किसने है?" मृत्युंजय उसे देखते हुए बोला, "तो क्या मैं तुमसे एक बात पूछ सकता हूं?"
मृत्युंजय की बात पर धानी ने हां में सिर हिलाया। तभी मृत्युंजय उसकी तरफ देखते हुए बोला, "मुझ पर इतना भरोसा क्यों? क्या पता, वह वीडियो सच्चाई भी तो हो सकती है।" तभी धानी मृत्युंजय का कॉलर पकड़ते हुए दांत पीसकर बोली, "वह कभी सच्चाई हो ही नहीं सकती, क्योंकि जिस इंसान को मैंने अपने अंदर समेटा है ना, वह ऐसा काम कभी कर ही नहीं सकता। अगर उसने ऐसा काम किया, तो उसकी आंखों से ही वह चीज बयान हो जाएगी। जो मुझे आपकी आंखों में नजर ही नहीं आ रही। एक बार मेरी आंखों में देखकर कह दीजिए कि वह आप ही थे। मुझे पता है, कहीं ना कहीं पीछे से वह आप ही लग रहे थे। लेकिन उसके हाथ में वो रिंग नहीं है, जो आपने हाथ में पहनी थी।"
जैसे ही धानी में यह बात कही, एक पल के लिए मृत्युंजय की आंखें बड़ी हो गई। अब धानी ने उसका हाथ पकड़ा और उसके हाथ में एक गोल्ड की रिंग थी। वो रिंग इतनी खूबसूरत थी कि धानी उसके लिए लेकर आई थी। उसने उस रिंग को अपने कपबोर्ड में ही संभाल कर रख लिया था, लेकिन मृत्युंजय को नहीं दिया था। पर जब धानी मौत के मुंह में थी और मृत्युंजय को छोड़कर चली गई थी, मृत्युंजय का उसे कमरे में जाने का दिल नहीं करता था, जहां पर धानी और मृत्युंजय रहते थे। इसीलिए वह मॉरीशस चला गया था।
लेकिन उससे पहले एक बार वह कमरे में आया था, तो उसने धानी की अलमारी ऐसे ही खोल दी थी। जब उसने धानी की अलमारी खोली, तो उसकी आंखें उसके कपड़ों में कहीं ना कहीं उसका दीदार करना चाहती थी। लेकिन उसके वह कपड़े मृत्युंजय की आंखों को तकलीफ पहुंचा रहे थे। तब एकदम से उसकी नजर वार्डरोब के साइड पर गई, जहां पर एक छोटी सी डिब्बी पड़ी हुई थी। उसे डिब्बी को देखकर एक पल के लिए मृत्युंजय के हाथ उसकी तरफ बढ़ गए। लेकिन अगले ही पल, उसने अपना हाथ पीछे की तरफ खींच लिया।
पर फिर कुछ सोचते हुए उसने एक बार फिर से उस डिब्बी को उठाया। जैसे ही उसने उस डिब्बी को देखा, तो एक पल के लिए मृत्युंजय की आंखों में नमी उत्तर आई। अंगूठी को देखकर मृत्युंजय का दिल जैसे धक सा रह गया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या कहें। क्योंकि धानी की वह अंगूठी, जिस पर मृत्युंजय का नाम बड़े खूबसूरत तरीके से लिखा था।
वह भी बिल्कुल बारीक अक्षरों में M R। वह उसे हद से ज्यादा खूबसूरत लग रहा था और अब उसने उस अंगूठी को पहना और दूसरे ही पल उस की नजर साइड में पड़े हुए उसके लेटर पर गई, जो शायद उसने मृत्युंजय के लिए ही लिखा था। जब वह मृत्युंजय से अपने प्यार का इजहार करने वाली थी। लेकिन कभी उसकी हिम्मत ही नहीं पड़ी। अब मृत्युंजय ने उस लेटर को उठाया और पढ़ने लगा। उसे लेटर में लिखा था, "मृत्युंजय जी, शायद ही मैं यह बात कभी आपको आपके मुंह पर बोल सकूं। मुझमें इतनी हिम्मत नहीं है कि मैं आपसे ऐसी बातें कर सकूं। वैसे तो मैं बहुत बोलती हूं।
लेकिन इसे बोलने में भी कहीं ना कहीं सूनापन है। शायद आपने कभी महसूस नहीं किया।" उसकी बात पर एक पल के लिए मृत्युंजय की आंखों के सामने वही पल घूमने लगा, जब वह धानी के साथ पहली बार इंटिमेट हुआ था। इंटिमेट होते हुए भी धानी की आंखें काफी ज्यादा सूनी थी। उसने अब एक बार फिर से लेटर पढ़ना शुरू किया और लेटर में लिखा था । "भले ही आप जैसे मर्जी हो सबका दिल दुखाते हैं, मेरा भी दिल बहुत बार दुखाते हैं। मुझे खुद से दूर करते हैं। लेकिन फिर भी मुझे आप हद से ज्यादा प्यारे लगते हैं। पता नहीं चला कि कब मुझे आपसे इश्क हो गया। तलब सी लग गई है आपकी, मैं आपके बिना रह नहीं पा रही हूं, मैं आपके साथ भी रह नहीं पा रही हूं।
क्योंकि आपको तो यह चीज मंजूर ही नहीं। लेकिन एक दिन ऐसा आएगा, जब मैं आपकी दुनिया में नहीं रहूंगी, तो शायद उससे पहले पहले मैं यह अंगूठी आपको दे सकूं। अगर मैं हिम्मत जुटा सकूं तो। शायद यह लेटर आपको तब ना मिले, लेकिन मेरे मरने के बाद तो यह आपको लेटर जरूर मिलेगा।" धानी ने अब बड़े लेटर्स में साइड पर लिखा, आई लव यू मेरी जिंदगी, मरने के बाद भी शायद मैं किसी और से इतना प्यार नहीं करूंगी, जितना मैं आपसे कर बैठी हूं। आप जानते हैं, मुझे एक बीमारी है। जिसका शायद कोई इलाज नहीं और मैं बहुत कम दिनों की मेहमान हूं।
लेकिन फिर भी आज आपको बताने का दिल कर रहा है कि शायद कुछ दिन आपके साथ अच्छे से बिता लूंगी, जी लूंगी और शायद सही मायने में आप मुझे अपने दिल में जगह दे दे। मुझे ब्लड कैंसर है और शायद जल्द ही आपको पता चल भी जाए। पर तब तक मैं आपसे बहुत दूर जा चुकी होगी, क्योंकि यह लेटर मेरे जीते जी तो आप तक पहुंचेगा नहीं, मरने के बाद पहुंच जाए। इससे ज्यादा मैं आपसे कुछ कह नहीं पाऊंगी।" इतना कहकर उसने उस लेटर को बंद कर दिया। अब धानी की नजर उस रिंग पर थी, जोकि मृत्युंजय ने इस वक्त पहनी हुई थी। वही मृत्युंजय उसे अपनी लाल आंखों से देख रहा था और अब एक पल के लिए उसका एक कतरा आंसू बाहर की तरफ आ गया। जिसे महसूस कर धानी ने उसका वह कतरा उसकी आंखों से साफ किया और बोली,
"उसे वक्त अगर पापा मुझे एंटोनियो नहीं लेकर आते, तो शायद मैं बच नहीं पाती। मेरी बिट्स उस वक्त बंद नहीं पड़ी थी, बिल्कुल मध्यम चल रही थी। कभी भी मेरी पल्स रुक सकती थी। लेकिन यहां के फेमस डॉक्टर, डॉक्टर निकोलस ने मेरा इलाज किया और उन्होंने अपना एक एक्सपेरिमेंट मेरे ऊपर किया। हालांकि उन्होंने पापा को बताया था कि वह सिर्फ एक एक्सपेरिमेंट है। उन्होंने वह इंजेक्शन सिर्फ एक चूहे पर इस्तेमाल किया था, जिसमें कैंसर के सिम्टम्स नजर आ रही थी। लेकिन उन्होंने अभी तक वह इंजेक्शन किसी और इंसान पर ट्राई नहीं किया था। लेकिन पापा ने उनके आगे हाथ जोड़ते हुए बोला कि अगर बचना होगा, तो बच जाएगी। वैसे भी तो उसकी जान जा ही रही है। एक ट्राई करने में क्या ही फर्क पड़ता है। इतना कहते हुए सौरभ जी की आंखों में आंसू थे। दूसरी तरफ धानी, जोकि स्ट्रक्चर पर लेटी हुई थी, उसका शरीर पूरी तरह से बेजान था और चेहरा पूरी तरह से पीला पड़ चुका था।
डॉक्टर निकोलस ने अब वह इंजेक्शन धानी को दिया और जैसे ही वह इंजेक्शन धानी को दिया, उसका असर 15 मिनट में दिखाई देने लगा। धानी की हार्टबीट, जोकि बिल्कुल ना के बराबर चल रही थी, वह धीरे-धीरे बढ़ने लगी। यह चीज देखकर सौरभ जी और निकोलस एक दूसरे की तरफ देखने लगे। निकोलस के चेहरे पर मुस्कुराहट थोड़ी-थोड़ी बढ़ने लगी थी, लेकिन 15 20 मिनट बाद ही धानी ने सांस गहरी लेनी शुरू कर दी। जिससे निकोलस का रंग पीला पड़ गया। लेकिन अगले ही पल उसकी सांस इतनी तेज हुई कि सौरभ के हाथ पैर भी कांप चुके थे। पर अब एकदम से उसकी सांस नॉर्मल हो गई और नॉर्मल होते ही धानी की सांस कंट्रोल में आ गई। यह चीज देखकर निकोलस ने गहरी सांस ली और सौरभ जी की तरफ देखकर बोले, "कंग्रॅजुलेशंस मिस्टर सौरभ, आपकी बेटी अब खतरे से बाहर है। अब उन्हें कुछ नहीं होगा।" इतना कहते हुए निकोलस के चेहरे पर एक अलग ही मुस्कुराहट दिखाई दे रही थी, क्योंकि अब उनका एक्सपेरिमेंट कामयाब हो गया था। पहली बार था कि उसे किसी इंसान ने एक्सपेरिमेंट करने से रोका नहीं था।
प्रेजेंट टाइम, धानी इस वक्त आंखों में नमी लिए मृत्युंजय की तरफ देख रही थी। वही मृत्युंजय की भी आंखें लाल हो चुकी थी। अब जाकर उसे पता चला था कि धानी कैसे बची थी। उसका दिल पता नहीं क्यों कहता था कि कहीं ना कहीं धनी जिंदा थी। क्योंकि जब उस दिन धानी की डेड बॉडी मृत्युंजय के सामने थी, मृत्युंजय का दिल कांप रहा था और उसका शरीर जैसे चलना बंद हो चुका था। वह इस वक्त पीछे दीवार से लगकर नीचे जमीन पर बैठा धानी की डेड बॉडी को देख रहा था।
To be continue....





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