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Sanvri ki madhoshi

ठाकुर हवेली,

अभय सांवरी के सामने खड़ा हुआ था और इस वक्त सांवरी बुरी तरह से कांप रही थी। जो अभय ने उससे पूछा था, उसे सुनकर सांवरी के पैरों तले जमीन खिसक चुकी थी। वही अभय अब दांत पीसकर बोला, "साली कुत्तिया, बताती क्यों नहीं, बहन की लोड़ी, इतनी देर से तुझे कमरे में ढूंढ रहा था। एकदम से कैसे वॉशरूम से निकल आई। लंड का पानी तो था नहीं, जो भोसड़ी में डालने से फटाफट निकल आया। कितना मन कर रहा था मेरा सुबह-सुबह तुझे चोदने का, लेकिन तू तो कहीं नजर ही नहीं आई, बता साली।" इतना कह कर अभय ने उसके बालों को पकड़ना चाहा कि तभी पीछे से रणवीर की आवाज उसके कानों में पड़ी।

"भैया, गाड़ी आ गई, जल्दी चलिए, नहीं तो आपको पहले ही देर हो चुकी है। फिर मत कहना, अगर मैंने भैया को बता दिया तो।" इतना कहकर रणवीर ने एक नजर सांवरी की तरफ देखा, जिसकी आंखों से अभी भी आंसू बह रहे थे। उसका शरीर पूरी तरह से कांप रहा था। उसे यूं देखकर रणवीर की त्योरियां उसके माथे पर पड़ गई और जबड़े एक बार फिर से कसने लगे। उसे तो अभय पर इस वक्त हद से ज्यादा गुस्सा आ रहा था। वह जब देखो, सांवरी को सताने में लगा रहता था। अभय अब रणवीर की तरफ देखकर बोला, "तू घर पर रहना, समझा ना, इसका ख्याल रखना। यह कहीं भागे नहीं।" इतना कहते हुए उसने सांवरी को गहरी नजरों से देखा।

वही सांवरी घबराई हुई नजरों से देखते हुए बोली, "आप फिक्र मत करिए बाबू साहब, मै कहीं नहीं जाऊंगी।" सांवरी की बात पर अभय उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोला, "और तू कहीं जा भी नहीं सकती। अगर इस बार कुत्तिया तू भागी ना, तो देखना, मैं तेरा वह हश्र करूंगा। अभी तो मैंने तेरे चेहरे पर मुता है ना, इस बार तेरे मुंह में मूत दूंगा।" उसकी बात सुनकर एक पल के लिए सांवरी की आंखों से आंसू बह गए। क्योंकि इतनी बेइज्जती, वह भी रणवीर के सामने, उसने कभी सोचा नहीं था। इस वक्त उसका शरीर तो तकलीफ में था ही, लेकिन जो तकलीफ उसके दिल में उठ रही थी, वह शायद जिस्मानी तकलीफ से बहुत ज्यादा थी।

अभय अब अपनी बात कह कर बाहर की तरफ चला गया। अभय के पीछे ही राका भी निकल गया। आज उसे अभय की ड्यूटी मिली थी, इसीलिए वह अभय के पीछे-पीछे जा रहा था। लेकिन उसकी तिरछी नजरे अब रणबीर पर थी, जो अभी भी सांवरी को देख रहा था। सांवरी को इस तरह से देखता पाकर राका के चेहरे पर एक बार फिर से अजीब से एक्सप्रेशन आ गए। लेकिन उसने कहा कुछ नहीं। वह बस अभय के पीछे चला गया। कुछ ही देर में, अपनी गाड़ी में अभय आकर बैठा और तेजी से हवेली से निकल गया। जैसे ही अभय हवेली से निकला, रणवीर, जो कि अभी भी सांवरी के सामने खड़ा था, उसकी नजरें अब सांवरी पर गहरी हो गई थी और चेहरे पर डेविल स्माइल उतर आई थी। जिसे देखकर सांवरी का दिल जोरो जोरो से धड़कने लगा। उसे रणवीर के इरादे कुछ नेक नहीं लग रहे थे।

सांवरी अपने कदम पीछे की तरफ लेते हुए बोली, "वह हमें बहुत काम है और सुबह के सिर्फ मुझे।" अभी वह बोल ही रही थी कि रणबीर अंदर की तरफ आया और अगले ही पल अभय के कमरे का दरवाजा उसने पूरी तरह से बंद कर दिया। जिसे देखकर सांवरी का दिल धक सा रह गया।

वह लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली, "यह क्या कर रहे हैं आप? आपको नहीं पता, आप उनके भाई हैं। आप क्यों बार-बार मुझे।" अभी वह बोल ही रही थी कि रणबीर उसकी तरफ तेजी से बढ़ा और अगले ही पल उसने सांवरी के सीने पर से पल्लू हटाकर नीचे जमीन पर गिरा दिया। जिससे सांवरी का सीना अब रणवीर के सामने था। इस वक्त सांवरी ने जिस तरह का ब्लाउज पहना था, वह काफी ज्यादा डीप था। जिस वजह से उसकी क्लीवेज साफ रणवीर को दिखाई दे रही थी। उसकी क्लीवेज को देखकर रणवीर को अपने शरीर में एक अलग ही गर्माहट महसूस हो रही थी।

वही सांवरी का दिल तो धक सा रह गया था। वह अपने दोनों हाथ अपने सीने पर रखते हुए चिल्लाई और बोली, "बस कीजिए आप, अब क्यों मेरे पीछे पड़े हुए है? क्यों मेरी जिंदगी को नरक बनाना चाहते हैं? अगर उन्हें पता चल गया, तो वह मुझे गला घोटकर मार डालेंगे। ऊपर से मेरा तो कोई है भी नहीं, जो मुझे यहां पर बचा सके।" उसकी बात सुनकर रणवीर की एक आई ब्रो उपर की तरफ उठ गई। उसकी आइब्रो उठी हुई देखकर सांवरी अपनी दर्द से भरी हुई आवाज में बोली, "सही तो बोल रही हूं, कौन है मेरा यहां पर और अगर वह मुझे मिटाने पर आए, वह तो मेरी हस्ती तक मिटा देंगे। मैंने देखा है, किस तरह के दरिंदे हैं वह। मैं आपके आगे हाथ जोड़ती हूं, आप जो भी हैं, प्लीज, मुझसे दूर रहिए।"

उसकी बात रणवीर ने सुनी, लेकिन कहा कुछ भी नहीं। अगले ही पल, उसने सांवरी को गोद में उठाया। जैसे ही उसने सांवरी को गोद में उठाया, सांवरी की आंखें बड़ी हो गई। वह रणवीर के सीने पर हाथ रखते हुए बोली, "क्या कर रहे हैं आप? प्लीज, ऐसा कुछ मत कीजिए। मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकती। रोज-रोज यह गंदगी मुझसे झेली नहीं जाती।" उसके मुंह से गंदगी का नाम सुनकर रणवीर की नजर उस पर गहरी हो गई और कदम वहीं पर रुक गए। अब उसने उसके चेहरे की तरफ देखा, जिस पर दुनिया जहां की मासूमियत ने अपना पहरा जमा रखा था।

उसकी आंखों से बहते हुए आंसू जैसे रणवीर का आज दिल धड़का रहे थे। रणवीर ने अब उसे बिस्तर पर लेटाया और खुद पूरी तरह से उसके चेहरे पर झुक गया। जिससे सांवरी की सांस गहरी होने लगी। वह अब रणवीर की तरफ देखते हुए बोली, "क्या आपको डर नहीं लग रहा? अगर आपके भैया को पता चल गया, तो हो सकता है कि वह आप पर भी अपना कहर बरसाए और मुझे, मुझे तो वह इस हवेली में कहीं जिंदा चुनवा देंगे।" सांवरी अभी बोल ही रही थी, लेकिन रणबीर का ध्यान उसकी बातों में तो कहीं था ही नहीं। उसका ध्यान तो उसके होठों पर था। पतले सुर्ख होंठ, जिस पर कोई लिपस्टिक नहीं लगी हुई थी। ऊपर से उसके बाल, जो कि अभी-अभी उसने भिगो रखे थे और वह टॉवल में लिपटे हुए थे।

रणवीर ने उस टॉवल को देखा, जो उसके बालों में बंधा हुआ था और एक ही झटके से उसके बालों से अलग कर दिया। जिस वजह से उसके बालों से पानी के छींटे रणवीर के चेहरे पर आ पड़े। अभी भी सांवरी हालांकि लेटी ही हुई थी, लेकिन वह इतनी ज्यादा खूबसूरत और आकर्षक लग रही थी। ऊपर से उसकी साड़ी, जो कि उसके सीने से नीचे की तरफ गिरी हुई थी, लेकिन उसके बदन पर ही थी। जिस वजह से साड़ी नीचे की तरफ से खिसकने से उसका पेट भी नजर आ रहा था। वह पतला सा गोरा पेट, जिसमें छोटी सी नाभि, वह हद से ज्यादा खूबसूरत थी। भले ही अभय की वजह से उसका शरीर भर गया था, पर अभी भी वह इतनी ज्यादा मोटी नहीं हुई थी। लेकिन खूबसूरत तो वह हद से ज्यादा थी। ऐसा लगता था, अगर कोई भी उसे हाथ लगाए, तो वह मैली हो जाएगी, बिल्कुल किसी गुड़िया की तरह। रणवीर ने अब उसके बालों को कान के पीछे किया और उसके चेहरे पर झुकते हुए बोला,

"पहले तुम्हारे साथ कोई नहीं था, लेकिन अब मैं हूं। और एक बात याद रखना, अब से तुम मेरी हो।" इतना कह कर रणवीर ने उसके होठों पर होंठ रख दिए। वहीं सांवरी का दिल तो जैसे धड़कना ही भूल गया और उसकी आंखें हैरत से फैल गई। पहले तो रणवीर उसको जिस तरह से प्यार कर रहा था, लेकिन अब जिस तरह से उसके होठों पर अपने होंठ रखे थे, एक पल के लिए सांवरी अपनी सांसे पूरी तरह से रोक कर लेट गई थी। वह सांस लेना ही भूल गई थी। वहीं रणवीर लगातार बड़े प्यार से कभी उसके ऊपर के होंठ को, तो कभी नीचे के होंठ को चूमने लगा। जैसे-जैसे वह उसके होठों को चूम रहा था, सांवरी की आंखें, जोकि हैरत से फैली हुई थी। वह अब धीरे-धीरे नॉर्मल होने लगी थी। एक टाइम ऐसा आया कि सांवरी की आंखें पूरी तरह से बंद हो चुकी थी। वहीं रणबीर की आंखें तो पहले ही बंद थी।

जिस तरह से रणवीर उसे चूम रहा था, एक पल के लिए सांवरी भी उसमें खोने लगी थी। आज पहली बार उसे जैसे अजीब से एहसास हो रहे थे। जिस तरह से रणवीर उसके होठों को चूम रहा था, वैसे-वैसे सांवरी भी खोए जा रही थी। वह भी उसके होठों में कहीं ना कहीं खोने लगी थी। वहीं रणबीर ने अब आंखें खोली और गहरी नजरों से सांवरी को देखा। अब वह अपने हाथ उसके सीने के boobs पर लेकर गया और धीरे-धीरे उसके बूब्स को सहलाने लगा।

लेकिन अगले ही पल रणवीर ने उसका ब्लाउज पूरी तरह से फाड़ कर उसके बदन से अलग कर दिया। जिसे महसूस कर सांवरी का दिल मानो रुक सा गया। उसकी आंखें, जो बंद हुई थी, वह एक बार फिर से हैरत से फैल गई। अब जाकर वह होश में आई कि रणबीर एक बार फिर से उसके साथ शुरू होने लगा था।

वहीं रणबीर ने अब उसके नंगे boobs को देखा और अगले ही पल अपने होठों पर जीभ घुमाई। जिस वजह से सांवरी के पूरे शरीर में करंट दौड़ गया। अब रणबीर ने उसके चेहरे की तरफ देखा, जो उसे ही देख रही थी। लेकिन उसकी आंखों में अब नमी उतर आई थी। रणबीर अब मन ही मन बोला, "दो दिन है मेरे पास, अगर इन दो दिनों में मैंने तुझे अपने आप से प्यार करने पर मजबूर नहीं कर दिया, तो मैं भी रणवीर ठाकुर नहीं। फिर होगी मेरे असली बदले की शुरुआत।" इतना कहते हुए रणबीर के चेहरे पर डेविल स्माइल उतर आई।

to be continue....

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