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Panick sanvri

ठाकुर हवेली,

अभय इस वक्त रणवीर के कमरे के बाहर खड़ा हुआ था और कब से रणवीर का दरवाजा खटखटा रहा था। लेकिन रणवीर दरवाजा खोलने का नाम ही नहीं ले रहा था। जिस वजह से अभय पूरी तरह से फ्रस्ट्रेटेड हो चुका था। उसका दिल कर रहा था कि वह रणवीर के कमरे का दरवाजा तोड़ दे। लेकिन फिर गहरी सांस लेकर बोला, "मुझे रणवीर के कमरे का दरवाजा तोड़ना ही क्यों है? उसने थोड़ी ना सांवरी को अपने पास रखा होगा। मैं भी खामखां दरवाजा पीटे जा रहा हूं। वह गई कहां, भगोड़ी कहीं की। अभी तो इसके मुंह पर मुता है, लगता है इसके मुंह के अंदर मूतना पड़ेगा मुझे।

हरामखोर! आने दो इसको, इसकी गांड ना मैंने तोड़ दी तो मेरा नाम भी अभय ठाकुर नहीं। इसकी इतनी बेज्जती की फिर भी यह भाग गई। शर्म नहीं आती इसको।" अभी वह खुद में बड़बड़ा ही रहा था कि तभी रणवीर के कमरे का दरवाजा खुला। जिसे देख अभय ने नजर उठाकर रणवीर की तरफ देखा, जो कि इस वक्त पूरी तरह से शर्टलेस था। उसकी कमर पर टॉवल बंधा हुआ था। उसे देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे वह नहा कर आया हो। अभय उसकी तरफ देखते हुए बोला, "तू इस वक्त नहा रहा है? टाइम देखा है, कितना हो रहा है। रात के ढाई बजने को है और तू नहा रहा है।" तभी रणवीर मुंह बनाते हुए बोला, "तो क्या मैं नहाऊ भी ना, चाहे ढाई बज रहे हो। वैसे सुबह के 4 बजने वाले हैं। लगता है भैया आपने रात को कुछ ज्यादा ही पी ली है।"

उसकी बात पर अभय मुंह बनाते हुए बोला, "हां, हां, चल ठीक है। अब यह बताओ कि वह भगोड़ी कहां है?" उसकी बात पर रणवीर के चेहरे पर गुस्सा झलकने लगा। वो अभय को तिरछी निगाहों से देखते हुए बोला, "आप किस बारे में बात कर रहे हैं, भैया?" "अरे वही हरामजादी, जिसको तू रात को पकड़ कर लेकर आया था।" उसकी बात सुनकर एक पल के लिए रणबीर ने दांत पीस लिए। वह बोला, "आप ही के कमरे में होगी भैया, आप मुझे क्यों पूछ रहे हैं? मेरे रूम में थोड़ी ना आई होगी और मेरे रूम में आकर वह करेगी क्या?" उसकी बात पर अभय ने अपना सिर हिलाया और मुंह बनाते हुए बोला, "साली बहन चोद, पता नहीं कहां मर गई है।

कमरे में भी कहीं नहीं है।" तभी रणवीर मुंह बनाते हुए बोला, "बाथरूम में चेक किया आपने?" रणवीर की बात पर अभय मुंह बनाते हुए बोला, "हां देखा, वहां पर भी नहीं थी।" तभी रणवीर उसकी तरफ देखते हुए बोला, "एक बार फिर से चेक कीजिए अपने कमरे में।" कह कर रणवीर ने उसे कमरे में जाने का इशारा किया। अभय मुंह बनाते हुए बोला, "मैंने कहा ना, नहीं है।" रणवीर भी उसकी तरफ गहरी नजरों से देखते हुए बोला, "एक बार देख तो लीजिए। आप पहले ही कहे जा रहे हैं कि नहीं है।" रणवीर की बात सुनकर अब अभय ने एक बार फिर से अपना सिर हिलाया और अपने कदम अपने कमरे की तरफ बढ़ा दिए। कुछ ही सेकंड में वह कमरे के बाहर खड़ा था। अब उसने कमरे में दाखिल हुआ, तो तभी सांवरी, जोकि बाथरूम में से निकली थी। वह अपने बालों को पोंछते हुए बाहर की तरफ आ रही थी। इस वक्त उसने साड़ी पहनी हुई थी।

सांवरी को अपने कमरे में देखकर एक पल के लिए अभय हैरानी से रणवीर की तरफ देखने लगा। वह रणवीर की तरफ देखते हुए बोला, "कसम से, मैंने इसे पहले कमरे में नहीं देखा। यह जरूर कोई काला जादू जानती है। यह इतनी जल्दी यहां पर कैसे पहुंच गई। मैंने नहीं देखा इसको पहले यहां पर।" तभी रणवीर मुंह बनाते हुए बोला, "बस कीजिए भैया, बहुत हो गया आपका। जब आपको पचती ही नहीं है, तो आप इतना पीते ही क्यों है? आपको पता है, आप इतनी ज्यादा पी लेते कि आपको पता ही नहीं होता कि आप कर क्या रहे हैं।"

उसकी बात पर अभय का चेहरा अजीब सा बन गया। उसे अब सांवरी पर गुस्सा आ रहा था, जो वह अब थोड़ी देर में दोबारा से निकालने भी वाला था। इस वक्त उसकी तिरछी निगाहें सांवरी पर थी, जोकि डर के मारे एक कोने में खड़ी थी। उसने अपना पूरा चेहरा नीचे की तरफ झुका रखा था। इस वक्त उसका दिल जोरो जोरो से धड़क रहा था। उसकी आंखों के सामने वह पल घूम रहा था, जब अभय रणवीर के कमरे के बाहर आकर खड़ा हुआ था और दरवाजा खटखटाने लगा था।

तकरीबन 20 मिनट पहले,

अभय ने जब रणवीर के कमरे का दरवाजा खटखटाया था, तो एक पल के लिए सांवरी का दिल पूरी तरह से कांप उठा था। क्योंकि इस वक्त सांवरी पूरी तरह से नेकेड रणवीर के नीचे थी। उसके पैर पूरी तरह से रणवीर के कंधे पर लिपटे हुए थे और रणवीर उसकी pussy को चूस रहा था। जिसमें सांवरी के भी रोंगटे खड़े हो रहे थे। सांवरी अपनी धुन में अब खोने लगी थी। लेकिन तभी उनके रूम का दरवाजा बजा और बाहर से अभय की आवाज आई। अभय की आवाज आते ही सांवरी के जैसे पूरी तरह से होश उड़ गए।

अगले ही पल, उसकी आंखों से आंसू झर झर बहने लगे। वह लगभग से जल्दी से हाथ बढ़ा कर उठने को हुई, लेकिन रणवीर ने उसके थाई पर हाथ रखकर उसे उठने से रोक दिया। वह अपनी सर्द नजरों से उसे देखते हुए दांत पीसकर बोला, "चुपचाप लेटी रहो।" तभी सांवरी पैनिक करते हुए रो कर बोली, "प्लीज प्लीज, मुझे छोड़ दो। नहीं तो वह मुझे छोड़ेगा नहीं। इस बार मेरी जान ले लेगा।" तभी रणवीर उसकी आंखों में देखते हुए बोला, "तुम चिंता मत करो, मैं उसे तुम्हें हाथ भी नहीं लगाने दूंगा। फिक्र मत करो।" तभी सांवरी उसकी तरफ देखकर दांत पीसकर बोली, "तो तुम क्यों नहीं छोड़ देते हो मुझे? क्यों पड़े हुए हो मेरे पीछे, एक मुसीबत कम है क्या, जो तुम भी मेरे ऊपर चढ़ने को हो रहे हो।

अगर उन्होंने मुझे इस हालत में तुम्हारे साथ देख लिया, वह जिंदा मुझे जमीन में गाढ़ देगा।" तभी रणवीर तिरछी मुस्कुराहट के साथ बोला, "इतनी हिम्मत नहीं है उसके अंदर कि तुम्हें छू जाए। हां, अब तक मैं चुप था, लेकिन अब नहीं रहूंगा। अगर उसने तुम्हें छुआ भी, मैं इस घर में भूकंप मचा दूंगा।" उसकी बात सुनकर एक पल के लिए सांवरी उसकी तरफ देखते ही रह गई। लेकिन अगले ही पल वह खुद को संभालते हुए बोली, "तुम भूकंप मत लाओ, इस वक्त के लिए मुझे छोड़ दो। मुझे किसी न किसी तरीके से कमरे में जाना है। वह दरवाजे पर खड़ा है, मैं कमरे में कैसे जाऊं?" इतना कहते हुए वह लगभग से रोए जा रही थी। उसकी पूरी बॉडी शिवर करने लगी थी। जिस तरह से वह शिवर और पैनिक कर रही थी, अब रणबीर ने उसके पैरों को छोड़ा और पीछे की तरफ हुआ। उसने सांवरी को देखा, जो अब जल्दी से अपनी जगह से उठी और पैनिक करते हुए इधर-उधर देखने लगी। उसका तो जैसे दिमाग काम करना ही बंद हो चुका था।

वह रोते हुए रणवीर की तरफ देखकर बोली, "तुम्हारी गलती है, तुम मुझे यहां पर लेकर ही क्यों आए। अगर उन्होंने मुझे देख लिया, तो वह मुझे कच्चा चबा जाएंगे। मैं कहां जाऊं, कैसे जाऊं मैं अपने कमरे में, बताओ मुझे।" इतना कहते हुए वह लगभग से अपनी हालत भी नहीं देख रही थी कि वह इस वक्त आधी नेक्ड थी। क्योंकि रणवीर ने उसके बाथरॉब की नोट खोल दी थी। जिस वजह से वह ऐसे रणबीर के सामने थी, लेकिन रणबीर को कोई खास फर्क नहीं पढ़ रहा था। उसका ध्यान सिर्फ सांवरी के चेहरे पर था, जो कि रो-रोकर लाल हुए जा रहा था। उसको यूं रोता हुआ देखकर रणवीर का खून खौल रहा था। वह दांत पीसकर बोला, "पहले तो रोना बंद करो। मुझे रोना धोना नहीं पसंद।" तभी वह उसकी तरफ देखकर दांत पीसकर बोली, "अगर आपको रोना धोना नहीं पसंद, तो मैं क्या करूं? मेरी तो जिंदगी उजड़ गई ना। अगर भगवान ना करें उन्होंने मुझे ऐसे पकड़ लिया ऐसी हालत में, तो क्या करेंगे वह मेरा।"

तभी अभय की दरवाजे से दोबारा से आवाज आई, तो सांवरी अंदर खड़ी पूरी तरह से कांप उठी। सांवरी को यूं डरता हुआ देखकर रणवीर का गुस्सा और भी ज्यादा बढ़ने लगा था। पता नहीं क्यों, लेकिन उसे यूं सांवरी का पैनिक करना और हद से ज्यादा डरना अच्छा नहीं लग रहा था। अब उसने उसके होठों पर अपना हाथ रखा और दांत पीसकर बोला, "मुंह बंद रखो अपना, मैं तुम्हें अभी उस कमरे में छोड़ कर आता हूं। लेकिन चुपचाप जो मैं कहता हूं, वह सुनो।"

जैसे ही रणवीर ने उसे अभय के कमरे में छोड़ने की बात कही, एक पल के लिए सांवरी के अंदर जैसे जान पड़ गई। अगले ही पल, उसने जल्दी से अपने आंसू पोंछे और हां में सिर हिलाया। अभय का कमरा रणवीर के कमरे से दूर नहीं था, बिल्कुल बगल का कमरा था। जिस वजह से उन दोनों के कमरे आपस में अटैच हो रहे थे। रणवीर ने सांवरी का हाथ पकड़ा और अच्छे से उसे कवर किया। पहले तो उसने सांवरी की नॉट बांधी। जैसे ही उसने सांवरी की नॉट बांधी, तो एक पल के लिए सांवरी का चेहरा पूरी तरह से लाल पड़ गया। अब उसे समझ आया कि वह किस हालत में रणबीर के सामने खड़ी थी।

उसने अपना चेहरा जल्दी से दूसरी तरफ घूमा लिया। लेकिन इस चीज को देखकर रणवीर के चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कराहट तैर गई थी। अब उसने सांवरी का हाथ पकड़ा और अगले ही पल उसे लेकर बालकनी में पहुंचा। बालकनी की साइड बैकयार्ड एरिया पड़ता था, जिस वजह से बैकयार्ड एरिया में कुछ ज्यादा खास बॉडीगार्ड नहीं थे। हर एक बॉडीगार्ड बैकयार्ड एरिया के दरवाजे पर बैठा हुआ था, जो कि इस वक्त सोया हुआ था, वह भी गहरी नींद में। रणवीर ने पहले सांवरी को पीछे किया कि उसे कोई देखे नहीं। अब वह दरवाजे से इधर-उधर देखने लगा, ताकि कोई सांवरी को देखे नहीं। जब उसने देखा कि सांवरी को कोई नहीं देखेगा, तो उसने अब सांवरी का हाथ पकड़ा और लगभग से आगे की तरफ किया। अब उसे रेलिंग के बिल्कुल पास खड़ा कर दिया। रेलिंग के पास ही एक और रेलिंग जुड़ी हुई थी। उसमें बिल्कुल भी गैप नहीं था, सिर्फ एक लोहे की रेलिंग लगी हुई थी बीच में, बाकी वह पूरी तरह से जुड़ी हुई थी। इस वजह से वह सांवरी को वहां से टांपते हुए बोला, "खिड़की खोल जल्दी से अंदर चली जाओ।"

जैसे ही रणवीर ने यह बात कही, सांवरी ने जल्दी से वही किया। वह जल्दी से बालकनी से कूद कर दूसरी अभय की बालकनी में चली गई और देखते ही देखते अंदर चली गई, क्योंकि कमरे में अभय तो था ही नहीं। कमरे में आते ही सांवरी ने राहत की सांस ली।

लेकिन भले ही वह कमरे में आ गई थी। अब वह आ तो गई थी, लेकिन अभय अभी जो उसकी हालत करने वाला था, यह तो सोच सोच कर ही सांवरी की हालत खराब हो जा रही थी। क्या जवाब देगी कि आखिर इतनी देर सांवरी कहां पर थी।

Present time,

वही अभय, जो कि इस वक्त हैरानी से सामने खड़ी सांवरी को देखे जा रहा था, उसका मुंह खुला का खुला रह गया था। उसे तो समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर सांवरी कमरे में पहुंची कैसे। उसने सारा कमरा छान मारा था, लेकिन सांवरी उसे कहीं नहीं दिखाई दी। यह सोच सोच कर अभय का दिमाग अब पूरी तरह से घूम चुका था।

वहीं रणवीर अभय की तरफ देखते हुए बोला, "क्या भैया, आप भी ना, छोटी-छोटी बात पर बवाल करते है। कम पिया कीजिए। अब जाइए, भाभी का ध्यान रखिए।।वैसे मैं आपको बता दूं कि सुबह 6 बजे की डील है, ड्रग्स की। 4 बज गए है, जानते हैं ना और आप तो नशे में लग रहे हैं मुझे। अब कैसे करने जाएंगे।" उसकी बात सुनकर अभय के होश उड़ गए। उसका दिमाग पूरी तरह से खराब हो चुका था। तभी रणबीर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला, "अगर भाई साहब को पता चल गया ना कि आपने यह deal नहीं की, तो आप जानते हैं ना कि आपका क्या हाल करेंगे।

आपको तो अब तक निकल जाना चाहिए था। अभी आप निकलेंगे, तो आपको ढाई घंटे लगेंगे। तब भी आप पहुंच नहीं पाएंगे। ऐसा करते हैं, रहने दीजिए।" तभी अभय उसकी तरफ देखते हुए दांत पीसकर बोला, "बकवास बंद करो अपनी, वैसे भी मेरी नींद उड़ चुकी है। मैं जा रहा हूं। ऐसा करता हूं, प्लेन ले जाता हूं। 2 घंटे में पहुंच जाऊंगा। वैसे भी 2 दिन वहीं पर रहने वाला हूं, तो घर का ख्याल रखना। मां आ जाएगी कल शाम तक, उसके बाद तो मैं भी आ जाऊंगा, तो ध्यान रखना भाभी का।" इतना कहकर उसने अब सांवरी की तरफ देखा।

जिसके चेहरे पर अब पसीना झलक रहा था। अभय ने अंदर की तरफ कदम बढ़ाए और कुछ ही देर में तैयार होकर बाहर की तरफ आया। रणवीर अभी भी हाल में था और सांवरी अभी भी कमरे में ही थी। जैसे ही अभय तैयार होकर बाहर की तरफ निकला, एक पल के लिए सांवरी की नजर उस पर पड़ी, तो वह कांप उठी।

क्योंकि अभय ने अपने कदम सांवरी की तरफ बढ़ा दिए थे। कुछ ही सेकंड में अभय पूरी तरह से सांवरी के सामने आकर खड़ा हुआ और उसे अपनी गहरी नजरों से देखते हुए बोला, "क्या रे बहन की लोड़ी, कुतियां, कहां थी इतनी देर से। मैंने तुझे पूरे कमरे में कहीं भी नहीं देखा।" जैसे ही अभय ने यह सवाल पूछा, सांवरी के होश पूरी तरह से उड़ गए। उसका दिमाग पूरी तरह से ब्लैंक हो चुका था। उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि वह क्या जवाब दे।।

To be continue...

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