
त्रेहान पैलेस,
अरमान, जो कि अभी- अभी अश्की के कमरे में उसे ढूंढते हुए आया था और उसके कमरे में उसे ना पाकर अब वह परेशानी से उसका पूरा कमरा देख रहा था कि कहीं अश्की मिल जाए. लेकिन अश्की उसे कहीं नहीं मिली. अब वह कमरे से बाहर आया, तो उसने एक बार फिर से सामने खडे सर्वेंट की तरफ देखा, जो अभी भी वहां पर सफाई कर रहा था. अब वो सर्वेंट के पास आया और उसे देखते हुए बोला, अश्की कहां पर है? वह सर्वेंट काफी पुरानी थी. जाहिर सी बात थी, वह अश्की के बारे में तो जानती ही थी. इसीलिए वह अरमान की तरफ देखते हुए बोली, वह तो सुबह में बडी साहब के साथ मंदिर गई थी.
अभी तक वह आई नहीं और मेमसाहब शायद आ भी गई है। जैसे ही उसने यह कहा, अरमान की आंखें बडी हो गई. अब अगले ही पल वह जल्दी से नियति जी के कमरे की तरफ बढ गया. जैसे ही वह नियति जी के कमरे में आया, तो उसकी नजरें नियति जी पर गई, क्योंकि नियति जी अपने पैर पर पैर चढा कर बैठी हुई थी और बडे मजे से कॉफी इंजॉय कर रही थी. लेकिन जैसे ही उसने अरमान की तरफ देखा, एक पल के लिए उसकी कॉफी की ठसक लग गई. लगभग से खांसते हुए वह अरमान की तरफ देखने लगी. वही वास्तव जी, जो साइड में बैठे हुए चाय पीते हुए अखबार देख रहे थे, उसकी तरफ देखते हुए बोले, क्या बात है, सुबह- सुबह बहुत ठसकी लग रही हैं. लगता है। इसके आगे वह कुछ कहता कि तभी नियति जी ने जल्दी से उनके हाथ पर अपना हाथ रख दबा दिया. ऐसा लग रहा था, जैसे वास्तव जी कुछ बोलने वाले थे. लेकिन नियति जी ने उन्हें बोलने से रोक दिया. अब नियति जी ने उन्हें इशारा करते हुए अरमान की तरफ देखने को कहा, तो उनकी नजर जैसे ही अरमान पर पडी, एक पल के लिए उनका कलेजा जैसे उनके मुंह को आ गया था. वह जल्दी से अपनी जगह पर खडे होते हुए बोले, अरे! तुम यहां पर।
वास्तव जी की बात सुनकर अरमान की नजरे उन पर गहरी हो गई. वह उन्हें गहरी नजरों से देखते हुए एक आईब्रो ऊपर की तरफ चढाकर बोला, क्या मुझे बताना पडेगा कि मैं यहां पर क्यों आया हूं? उसकी बात सुनकर एक पल के लिए वास्तव जी के हाथ पैर ठंडे होने लगे थे. दूसरी तरफ नियति जी का भी यही हाल था, क्योंकि वह दोनों जानते थे कि अरमान यहां पर क्यों आया है. नियति जी अब अरमान की बातों से पल्ला झाडने के लिए, उसकी तरफ देखकर बोली, मुझे नहीं पता कि तुम यहां पर क्यों आए हो? जैसे ही नियति जी ने यह बात कही, अरमान अपना आपा खो बैठा. अगले ही पल वह आगे की तरफ आया और नियति जी की गर्दन पर अपना हाथ रखते हुए दांत पीसकर बोला, अश्की कहां पर है?
वही वास्तव जी भी एक पल के लिए अरमान का यह रूप देख कर एक पल के लिए कांप उठे. इस वक्त उनका दिल जोरो जोरो से धडकने लगा था. लेकिन अगले ही पल वह सख्त होते हुए अरमान की तरफ देखकर बोले, यह क्या तरीका है अरमान, वह दादी है तुम्हारी. तुम इस तरह से उनका गला नहीं पकड सकते। इतना कहते हुए वह आगे की तरफ आए और अगले ही पल उसने अपना हाथ अरमान के हाथों पर रख दिया, ताकि वह नियति जी को छुडा सके. वही नियति जी की आंखें तो पूरी तरह से ऊपर की तरफ चढ चुकी थी.
उन्हें सांस लेने में इतनी ज्यादा दिक्कत हो रही थी कि वह अपना मुंह पूरी तरह से खोलते हुए हवा अंदर की तरफ खींचने लगी थी. लेकिन फिर भी अरमान ने उनकी गर्दन इतनी जोर से पकडी हुई थी कि उन्हें सांस आ ही नहीं रही थी. उसकी तरफ वह हाथ पैर मारते हुए घुट्टी हुई आवाज में बोली, छोडो मुझे अरमान, बताती हूं, बताती हूं। जैसे ही उसने बताती हूं कहा, अरमान ने एक झटके से उसकी गर्दन छोड दी. अगले ही पल नियति जी जोरो जोरो से खांसने लगी.
उसको यूं खस्ता हुआ देखा अरमान को कुछ खास फर्क नहीं पडा था. लेकिन उसकी नजर अब उन पर चील की तरह बनी हुई थी कि कब वह अपने मुंह से कोई आवाज निकालेगी. तभी नियति जी खांसते हुए बोली, वह, वह मेरे साथ सुबह मंदिर गई थी. लेकिन मंदिर से आते वक्त पता नहीं कहां चली गई और मैंने भी उसे ज्यादा ढूंढने की कोशिश नहीं की. बस लेकर जरूर गई थी. लेकिन मुझे नहीं पता, वह कहां गई मंदिर से। उसकी बात सुनकर अरमान ने अपने जबडे पूरी तरह से कस लिए थे. वह अब एक बार फिर से नियति जी की तरफ बढने लगा कि तभी वास्तव जी उसके सीने पर हाथ रखते हुए बोले, पीछे होकर बात करो अरमान, तुमसे एक ही बात बार- बार नहीं कहूंगा मैं, दादी है वह तुम्हारी. Kiss तरह से पेश आ रहे हो। तभी अरमान अपनी बैक से गन निकालते हुए पूरी तरह से वास्तव जी पर पॉइंट करते हुए बोला,
आपके किए हुए कांड मुझसे छुपे नहीं है, समझे आप. जो जो आपने किया है ना, उसका हिसाब तो मैं करूंगा ही, लेकिन उससे पहले उसका हिसाब करना बहुत जरूरी है. जिससे यह शुरुआत हुई है। जैसे ही अरमान ने यह बात कही, वास्तव जी का रंग पूरी तरह से उड गया. वह अपनी नजरें चुराते हुए बोले, कौन से कांड की बात कर रहे हो तुम? कुछ भी बोले जा रहे हो। उसकी बात पर अरमान व्यंग्य से हंसा और उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोला, पहले तो मुझे मेरी अश्की के बारे में पता करना है कि वह है कहां पर इस वक्त। तभी नियति जी उसकी तरफ देखते हुए बोली, हमें नहीं पता, तुम्हारी अश्की कहां पर है, समझे तुम. और रही बात म, अब वह तुम्हारी कहां से हो गई. उसने तो तुम्हें तलाक दे दिया है।
उसकी बात पर अरमान का गुस्सा एक बार फिर से बढने लगा. अगले ही पल उसने अपने हाथों में पकडी हुई गन नीति जी के पैरों की तरफ पॉइंट की और एक फायर उनके पैरों के बीचों बीच कर दिया. जैसे ही वहां पर गोली की आवाज हुई, नियति जी और वास्तव जी अपनी जगह पर खडे- खडे कांप उठे. उन्हें ऐसा लगा, जैसे उनकी रूह ने भी उनका साथ छोड दिया हो. अरमान ने जिस तरह से उन पर गोली चलाई थी, उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वह जिंदा भी होगी. पर जब उन्होंने खुद को जिंदा पाया, तो नियति जी जल्दी से वास्तव जी के गले लगते हुए बोली, आप इसे समझाते क्यों नहीं, कितना जिद्दी है। अभी वह बोल ही रही थी कि तभी अरमान उनकी तरफ गहरी नजरों से देखते हुए बोला, दुआ कीजिएगा कि अश्की जहां भी हो, सही सलामत हो. नहीं तो मैं आपको तो जिंदा जलाऊंगा ही, साथ में आपकी रूह को भी मरने नहीं दूंगा. उसे भी जिंदा जलाऊंगा।
उसकी बात सुनकर नियति जी के रोंगटे खडे हो गए. अरमान उन्हें गहरी नजरों से देखते हुए वहां से निकल गया. दूसरी तरफ वास्तव जी अब नियति जी की तरफ देखते हुए बोले, इसे सच्चाई कैसे पता चली? अगर इस सच्चाई पता चल चुकी है, तो हमें उसे बताना होगा। इतना कहते हुए अब वह दोनों एक दूसरे की तरफ देख रहे थे. इस वक्त उन दोनों के रंग पूरी तरह से उड चुके थे, और चेहरे पीले पड चुके थे.
उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर वह क्या ही करें. लेकिन किसी तरह खुद को संभालते हुए वास्तव जी बालकनी की तरफ गए और कुछ ही देर में उन्होंने किसी को फोन लगाया.
वहीं दूसरी तरफ,
अरमान देखते ही देखते बाहर की तरफ निकल चुका था. तभी उसने अपने असिस्टेंट को Call लगाया. पहले रिंग पर ही उसने फोन उठाया और सामने से अरमान चिल्ला कर बोला, मुझे अश्की किसी भी हालत में चाहिए। उसकी बात सुनकर सामने अरमान का असिस्टेंट घबराते हुए बोला, जी बॉस. उसमें इतना ही कहा था कि अरमान ने फोन काट कर अपनी गाडी स्टार्ट कर दी. अब उसकी गाडी त्रेहान इंडस्ट्रीज की तरफ जा रही थी. उसका गुस्सा उसके सिर पर चढ चुका था. वह खुद से ही बोला, आई होप कि तुमने यह सब कुछ खुद ना किया हो. अगर यह सब तुमने खुद किया ना, तुम्हारी जान मै अपने हाथों से ले लूंगा, दिलरुबा.
इतना कहते हुए इस वक्त उसके चेहरे पर हद से ज्यादा गुस्सा झलक रहा था. उसका दिमाग भी इतना गर्म था कि उसकी आंखें हद से ज्यादा लाल हो गई थी. तकरीबन आधे घंटे बाद उसकी गाडी त्रेहान फार्महाउस के आगे आकर रुकी. जाने वह त्रेहान इंडस्ट्रीज वाला था, लेकिन रास्ते में ही उसने अपनी गाडी त्रेहान फार्म हाउस की तरफ मोड ली थी. अरमान अभी अपनी गाडी से निकलने ही वाला था कि तभी अचानक से उसका फोन रिंग हुआ. फोन की तरफ देखकर उसकी नजरें पूरी तरह से सर्द हो गई, क्योंकि इस वक्त उसके फोन पर हंसिका का Call आ रहा था. हंसिका का Call देखकर एक पल के लिए उसकी एक आईब्रो ऊपर की तरफ हो चुकी थी कि आखिर हंसिका उसे क्यों Call कर रही थी.
अरमान ने फोन उठा कर अपने कान के पास लगाया कि तभी दूसरी तरफ से हंसिका की जोर- जोरों से हंसने की आवाज आई. हंसिका की हंसती हुई आवाज सुनकर अरमान का चेहरा पूरी तरह से ठंडा पड चुका था. उसका चेहरा इतना ठंड पड चुका था कि इस वक्त उसका चेहरा बिल्कुल ही एक्सप्रेशन लेस हो चुका था. एक तिनका भी उसके चेहरे पर किसी भाव का नजर नहीं आ रहा था. वही हंसिका हंसी और बोली, क्या बात है, अपनी कुत्तियां को ढूंढ रहे हो? हंसिका की बात सुनकर एक पल के लिए अरमान की पकड स्टीयरिंग व्हील पर कस गई. आंखें हद से ज्यादा लाल हो गई. लेकिन उसने अभी भी हंसिका को आगे से कुछ भी जवाब नहीं दिया. वहीं Hansika एक बार फिर से ऊंचे से हंसते हुए बोली,
क्या बात है, आवाज नहीं निकल रही है अपनी मिस्ट्रेस के लिए। अब उसकी बात सुनकर अरमान की पकड और भी स्टेरिंग व्हील पर कसती जा रही थी उसके माथे की नसें उभर कर बाहर की तरफ आ रही थी. दूसरी तरफ हंसिका अब उसे गहरी आवाज में बोली, नहीं मिलेगी वह तुम्हें, जब तक मैं नहीं चाहूंगी. जानते हो वह कहां पर है? उसकी बात पर अभी भी अरमान ने कोई जवाब नहीं दिया. उसका जवाब ना पाकर हंसिका के चेहरे पर अजीब से एक्सप्रेशन आ गए थे.
उसे पता नहीं क्यों, अरमान का यह चुप रहना बिलकुल भी पसंद नहीं आ रहा था अगले ही पल उसने फोन डिस्कनेक्ट कर दिया. अरमान का फोन डिस्कनेक्ट होते ही हंसिका के चेहरे पर हैरानी भरे भाव आ गए. उसे तो समझ ही नहीं आया कि आखिर अरमान ने फोन क्यों डिस्कनेक्ट कर दिया. अब उसने सामने खडे गौरव की तरफ देखा, जो कि उसे गहरी नजरों से देख रहा था. अब गौरव की नजरे सामने बेड पर लेटी हुई अश्की पर थी, जो की पूरी तरह से बेहोश थी.
गौरव अब हंसिका की तरफ देखकर बोला, उसका दिमाग जरूरत से ज्यादा चलता है. इसलिए अपना फोन स्विच ऑफ कर दो और यह सिम डीएक्टिवेट कर दो अभी के अभी. उसे पता नहीं चलना चाहिए कि हम कहां पर हैं। गौरव की बात पर हंसिका ने जल्दी से हां में सिर हिलाया और अगले ही पल उसने फोन स्विच ऑफ कर दिया. फिर उस सिम को फोन से निकाल कर पूरी तरह से तोड मरोड दिया.
गौरव अब गहरी आवाज में बोला, हम सिम बाद में चेंज कर लेंगे. पहले इसे उठाकर हमें यहां से जगह चेंज करनी होगी, बिकॉज वह हमारी लोकेशन ट्रेस करके सबसे पहले यहीं पर आएगा। इतना कहकर गौरव ने उसे गोद में उठाया और अब वह वहां से निकल चुके थे. वही अरमान दूसरी तरफ आराम से गाडी में अभी भी बैठा हुआ था. अभी भी उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था. तभी उसके फोन पर दोबारा से किसी का Call आया और यह Call उसके पर्सनल असिस्टेंट का था.
अरमान ने अगले ही पल फोन उठाया और दूसरी तरफ से जो कहा गया, उसे सुनकर उसके चेहरे पर डेविल स्माइल उतर आई. अब अरमान ने अपनी गाडी त्रेहान इंडस्ट्रीज की तरफ मोड ली. अरमान के चेहरे से देखकर ही पता लगाया जा सकता था कि इस वक्त उसका दिमाग खाली तो बिल्कुल भी नहीं था. जैसे- जैसे उसके चेहरे के भाव बदल रहे थे, वैसे- वैसे उसके चेहरे पर अजीब से एक्सप्रेशन भी आते जा रहे थे. जो रास्ता आधे घंटे में पूरा किया जा सकता था, वह अरमान ने पंद्रह मिनट में ही पूरा कर लिया. अब उसकी गाडी त्रेहान इंडस्ट्रीज के आगे आकर रुकी.
त्रेहान इंडस्ट्रीज के आगे कार रुकते ही उसका असिस्टेंट बाहर की तरफ आया. वह उसके आगे सूट झुकाते हुए बोला, boss, वह मिल गई। इतना कहते हुए असिस्टेंट पूरी तरह से पीछे की तरफ हुआ और उसने अंदर जाने का इशारा किया. अरमान भी अब अंदर की तरफ आ गया. देखते ही देखते वह दोनों एक अंधेरे से डूबे हुए कमरे में थे. त्रेहान इंडस्ट्रीज कहने को बहुत ज्यादा बडी थी और इसी में कुछ रहस्यमई कमरे भी थे, जो शिवाय अरमान और उसके असिस्टेंट रोहित के अलावा कोई नहीं जानता था.
कुछ ही देर में वहां पर एक लडकी बंधी हुई थी और इस वक्त उस लडकी का चेहरा पूरी तरह से काले रंग के कपडे से ढका गया था. ऐसा लग रहा था, जिस तरह से वह अपनी घुट्टी आवाज निकाल रही थी, उसके मुंह को भी पूरी तरह से बांधा गया था. अगले ही पल अरमान उसके सामने आया और उसने वह ब्लैक Color का कपडा पूरी तरह से उसके चेहरे पर से हटाया. वह उस लडकी को गहरी नजरों से देखने लगा.
वहीं दूसरी तरफ,
गौरव और हंसिका इस वक्त एक गहरी खाई के ऊपर खडे हुए थे. जिस तरह से वह इस वक्त एक खाई पर खडे थे, ऐसा लग रहा था कि दोनों के दिमाग में बहुत कुछ चल रहा था. गौरव हंसिका की तरफ देखते हुए दांत पीसकर बोला, तुम जो मर्जी करना, लेकिन उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश मत करना. अभी मैंने उसके साथ सुहागरात नहीं बनाई है. एक बार मुझे उसके साथ रात बिताने दो, फिर जो मर्जी करती रहना. मुझे कोई फर्क नहीं पडेगा, अगर वह मर भी जाएगी तो। गौरव की बात सुनकर हंसिका अपने सिर पर हाथ रखते हुए बोली, तुम अपना मुंह बंद रखोगे. पहले मुझे उसे फोन लगाने दो और अपनी बकवास सब बंद रखना। इतना कहकर उसने अरमान को दोबारा से किसी नए नंबर से Call करने लगी. यह नंबर उसने अभी- अभी थोडी देर पहले ही खरीदा था.
कुछ ही सेकंड में एक लंबी सी रिंग के बाद अरमान ने Call उठाया. उस नंबर को देखकर अरमान के चेहरे पर डेविल्स स्माइल आ गई के, क्योंकि वह इतना तो समझ चुका था कि यह नया नंबर हंसिका का ही होगा. अरमान ने फोन उठाया और कान से लगाया ही था कि दूसरी तरफ से हंसिका हंसते हुए बोली, क्या बात है, अभी तक पहुंचे नहीं मुझ तक। Hansika की बात पर अभी भी अरमान ने कोई जवाब नहीं दिया. तभी हंसिका हंसते हुए बोली, तुम्हारी जुबान पर तो ऐसे लगाम लगी है, जैसे किसी ने तुम्हारे मुंह से जुबान ही खींच ली हो. क्या हुआ, Mister अरमान त्रेहान? अभी भी अरमान ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया. अब उसकी शांति से हंसिका पूरी तरह से फ्रस्ट्रेटेड होने लगी थी. अरमान के चेहरे पर इस वक्त हद से ज्यादा एटीट्यूड झलक रहा था ना ही वह हंसिका की किसी बात का जवाब दे रहा था, ना ही अब वह फ्रस्ट्रेटेड हो रहा था. अगले ही पल हंसिका के कान में किसी के रोने और चीखने की आवाज सुनाई दी. उस आवाज को सुनते ही हंसिका के होश पूरी तरह से उड गए.
वह जल्दी से हडबडी में बोली, उसे छोड दो अरमान, तुम्हें जो करना है, मेरे साथ करो. वह मेरी बहन है, वह बच्ची है अभी, अरमान। उसका बस इतना कहना था कि अब अरमान की आई ब्रो ऊपर की तरफ उठ गई. पता नहीं क्यों, उसे हंसिका का यह रूप एक दोगला चेहरा लग रहा था. तभी हंसिका दोबारा से अरमान से बोली, प्लीज प्लीज, प्लीज, उसे छोड दो, अरमान प्लीज प्लीज, उसे छोड दो। जिस तरह से उसने यह बात कही थी, अरमान चुपचाप उसकी बातें सुन रहा था. तभी हंसिका पागलों की तरह एक बार फिर से हंसने लगी.
वह हंसते हुए बोली, तुम्हें क्या लगा, मैं तुम्हारे आगे गिडगिडाऊंगी, पागलों की तरह रोऊंगी, जो तुमने मेरी बहन को Kidnap कर लिया. अरे पागल समझा है क्या तुमने मुझे, हंसिका खुद के अलावा किसी से प्यार नहीं करती। इतना कहते हुए हंसिका के चेहरे पर एक अलग ही गुरुर छलक रहा था. वही अरमान भी चुपचाप उसकी बातें सुन रहा था. दूसरी तरफ रोहित उनकी लोकेशन ट्रैक कर रहा था कि तभी उसने अरमान को इशारा किया. देखते ही देखते अरमान और रोहित गाडी में बैठे और वहां से निकल गए. वहीं दूसरी तरफ हंसिका अभी भी अरमान से बातें किए जा रही थी. गौरव उसे देखते कर फ्रस्ट्रेटेड होते हुए बोला, बंद कर दो फोन। लेकिन हंसिका फोन काटने का नाम ही नहीं ले रही थी. उसकी बातें इतनी लंबी हो गई थी कि गौरव का गुस्सा बढते ही जा रहा था. वह दांत कर पीस कर बोला, तभी कहते हैं कि एक औरत में दिमाग नाम की चीज नहीं होती है.
और इसका दिमाग तो कभी था ही नहीं. जब से शादी हुई है, तब से बेवकूफों की तरह हरकतें कर रही है. पता नहीं कैसे अरमान त्रेहान ने इससे शादी कर ली. वैसे सोचने की बात है, इसकी शादी हुई नहीं शायद। इतना कहते हुए वह व्यंग्य से हंसा और बोला, ऑफकोर्स! अरमान त्रेहान जैसा इतने दिमाग वाला लडका वह उस बद दिमाग से शादी करेगा। इतना कहते हुए अजीब सी नजरों से हंसिका को देख रहा था.
उसे ऊपर से लेकर नीचे तक देखने के बाद गौरव कुछ सोचते हुए बोला, वैसे दिखने में कुछ बुरी नहीं है. अगर एक रात बेड पर बिताए, तो कैसे रहेगी। इतना सोचते हुए गौरव के चेहरे पर इंटेंस एक्सप्रेशन आने लगे थे. लेकिन अगले ही पल सामने का नजारा देखकर गौरव के होश पूरी तरह से उड चुके थे. क्योंकि अश्की की आंख खुल चुकी थी. वह गाडी से बाहर भी निकल चुकी थी और वहां पर खुद को देखकर अश्की हैरानी से गौरव और हंसिका को देख रही थी. हंसिका, जो अभी भी फोन पर लगी हुई थी.
उसे तो अभी होश ही नहीं था कि अश्की उठ चुकी है. जब अश्की ने उन दोनों को ऐसे देखा, तो उसके भी होश पूरी तरह से उड चुके थे. उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर वह यहां पर कर क्या रही थी. वह तो सुबह मंदिर में थी, वह भी नियति जी के साथ. वह उसे जबरदस्ती मंदिर लेकर गई थी और अब वह गौरव और हंसिका के साथ है. आखिर यह चक्कर क्या था. दूसरी तरफ गौरव अब जल्दी से अश्की के पास आया और उसका हाथ पकडते हुए बोला, तुम्हें होश आ गया, तुम ठीक हो ना। इतना कहते हुए वह सिंपैथी देते हुए उसके गालों पर हाथ रखकर बडे प्यार से उसे मेनू प्लेट करने की कोशिश करने लगा. अश्की तो बस हैरानी से गौरव की तरफ ही देखे जा रही थी. अब वह सिर्फ हां में सिर हिलाते हुए बोली, मैं ठीक हूं गौरव जी, लेकिन मैं यहां पर कैसे आई. मैं तो नियति जी। अभी वह बोल ही रही थी कि तभी गौरव उसकी कमर पर हाथ रखते हुए उसे खुद से सटाने लगा. तभी अश्की उसके हाथ को पीछे की तरफ करते हुए बोली, प्लीज, मुझे ऐसे हाथ मत लगाइए. मुझे बहुत अजीब लग रहा है, गौरव जी। उसकी बात पर गौरव का चेहरा काला पडने लगा वह दांत पीसते हुए अश्की की तरफ देखते हुए बोला, जब वह तुझे छूता है, तब तुझे अजीब नहीं लगता क्या?
गौरव की बात सुनकर अश्की उसे अजीब सी नजरों से देखने लगी. वह लडखडाई हुई आवाज में बोली, कैसी बातें कर रहे हैं आप गौरव जी, और मुझे यह बताइए कि हम यहां पर क्यों आए हैं और हंसिका? अभी वह बोल ही रही थी कि तभी गौरव ने एक बार फिर से उसके चेहरे को अपने हाथों में भरा और उसे बेहद प्यार से बोला, तुम छोडो ना हंसिका को, मैं तो तुम्हें यहां पर अपने साथ लेकर आया हूं. तुम्हें पता है, भले ही मैंने हंसिका से शादी कर ली या फिर हमारी शादी गलती से हो गई. लेकिन मैं प्यार अभी भी तुमसे करता हूं और इसीलिए मैं तुम्हें यहां पर लेकर आया हूं.
तुम्हें पता है, कितने दिन से मैंने हंसिका से शादी की है ना, हमारे बीच कुछ भी नहीं हुआ. मैं उसके साथ एक बार भी इंटिमेट नहीं हुआ हूं। उसकी बातें सुनकर अश्की को शर्म महसूस होने लगी. वह अपनी नजरें झुकाते हुए बोली, गौरव जी, आप कैसी बातें कर रहे हैं? ऐसी बातें शोभा नहीं देती है आपको, वह पत्नी है आपकी। तभी गौरव उसका हाथ पकडते हुए बोला, भले ही वह मेरी पत्नी बन गई हो, लेकिन मैं उससे प्यार कभी नहीं करूंगा. अश्की, मैं तो सिर्फ तुमसे प्यार करूंगा, क्योंकि अब मैं तुमसे शादी करूंगा। उसकी बात सुनकर अश्की का चेहरा पूरी तरह से उड गया. वह जल्दी से अपना हाथ छुडाते हुए बोली, कैसी बातें कर रहे हैं आप गौरव जी, आपकी शादी हो चुकी है हंसिका से।
तभी गौरव भी उसे दांत पीसकर बोला, हो गई होगी मेरी शादी उससे, लेकिन मैं इस शादी को नहीं मानता. तुम भी जानती हो किन हालातो में मेरी और उसकी शादी हुई है. मैंने अभी तक उसे स्वीकार नहीं किया है. भले ही वह मेरी पत्नी है, लेकिन मेरी नजरों में तुम सिर्फ मेरी पत्नी हो. मैंने शुरू से तुम्हें चाहा है और अब भी तुम्हें चाहता हूं. मेरी आंखों में देखो, मेरी आंखों में सिर्फ तुम्हें पाने की तमन्ना है, अश्की। इतना कहते हुए उसने एक बार फिर से अश्की का हाथ पकड लिया था. वहीं अब अश्की उस की पकड से अनकंफरटेबल हो रही थी, क्योंकि जिस तरह से गौरव उसके हाथ को मसल रहा था, उसे यह चीज बिल्कुल भी पसंद नहीं आ रही थी.
उसे गौरव का Touch बिल्कुल भी पसंद नहीं आ रहा था. अरमान का Touch जब भी उसे महसूस होता था, वह जैसे एक पल के लिए सुकून से भर जाती थी. लेकिन अब गौरव का Touch पाते ही उसे पता नहीं क्यों बेचैनियों ने घेर लिया था. जैसे- जैसे गौरव के हाथों का दबाव उसके हाथों पर बढ रहा था, अश्की को खुद से घिन सी महसूस होने लगी थी. वह उससे हाथ छुडा नहीं पा रही थी. लेकिन वही गौरव भी उसका हाथ छोडने को तैयार नहीं था. वह लगभग से उसका हाथ पकडते हुए अपने हाथों में लेकर मसले जा रहा था. पर अब उसका दूसरा हाथ अश्की की कमर पर आ चुका था. वह अब अश्की की तरफ देखकर उसकी चेहरे को अपने एक हाथ में भरते हुए ऊपर की तरफ उठाकर बोला,
क्यों ना हम दोनों एक हो जाए, अश्की, शादी तो मैं तुमसे बहुत जल्द कर लूंगा. लेकिन अब मुझे तुमसे यह दूरी बर्दाश्त नहीं हो रही. हर वक्त मेरा दिल तुम्हारे लिए बेचैन रहता है. तुम्हें पाने के लिए बेचैन रहता है। इतना कहते हुए गौरव का हाथ अश्की की पीठ पर आ चुका था. जिस तरह से वह उसकी पीठ को सहलाने लगा था, एक पल के लिए अश्की का दिल पूरी तरह से कांप उठा था.
वह जल्दी से पीछे की तरफ होते हुए बोली, प्लीज गौरव जी, मुझे छोड दीजिए. यह अच्छा नहीं है. मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा है ऐसे आपका छूना। तभी गौरव दांत पीसते हुए बोला, इसीलिए तो बोल रहा हूं, उसका छूना तुम्हें अच्छा लगता है और मेरी छुअन से तुम अब पीछे- पीछे भाग रही हो. तुम इतनी कैसे बदल गई हो, अश्की? एक टाइम पर हमारी शादी होने वाली थी और आज। अभी वह बोल ही रहा था कि तभी अश्की चिल्ला कर बोली, लेकिन तब अरमान जी मेरी जिंदगी में नहीं थे. अब अरमान जी मेरी जिंदगी में है. मैं उनसे प्यार करती हूं।
अश्की के मुंह से अरमान के लिए इजहार सुनकर गौरव का चेहरा गुस्से से कांप उठा. वह दांत पीसते हुए बोला, तेरी हिम्मत कैसे हुई उसे प्यार करने की। इतना कहते हुए उसने लगभग से एक जोरदार तमाचा अश्की के गाल पर जड दिया. जिससे अश्की से संभाला नहीं गया और वह दूसरी तरफ जमीन पर जा गिरा. इस चांटे की आवाज सुनकर हंसिका की तंद्रा टूटी, जो कब से वह फोन पर बातें किए जा रही थी. उन दोनों को यूं देखकर हंसिका हैरानी से गौरव की तरफ देखने लगी. उसने अभी फोन भी नहीं काटा था, वह जल्दी से फोन गाडी के डैशबोर्ड पर रखते हुए गौरव के पास आई और बोली, तुम पागल हो गए क्या, तुमने उसे मारा क्यों और यह होश में कब आई? तभी गौरव उसकी तरफ देखकर दांत पीसते हुए बोला, जब तुम उस महाशय से फोन करने में बिजी थी.
और यह, यह कह रही है कि इसे उससे प्यार हो गया है. इसका करवाता हूं आज प्यार, बहुत प्यार करती है ना उससे, अब आज मेरा प्यार झेलेगी और वह भी इस गाडी में। गौरव की बात सुनकर हंसिका के चेहरे पर अजीब से एक्सप्रेशन आ गए. वह उसकी तरफ देखकर बोली, पागल हो गए हो तुम क्या, यहां पर गाडी में खुले मे ऐसी हरकते करोगे। उसकी बात पर गौरव उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोला, तुम चाहो तो गाडी में तुम्हारे साथ भी कर सकता हूं. ज्यादा बकवास मत करो, समझी तुम. मुझे तो बस तुम्हारी शक्ल नहीं पसंद, इसीलिए तुम्हारे करीब नहीं आ रहा हूं. नहीं तो अब तक तुम्हें भी ठोक चुका होता कितनी बार। उसकी बात सुनकर हंसिका का मुंह खुला का खुला रह गया.
वही अश्की पीछे की तरफ खिसकते हुए बोली, ऐसा मत कीजिए गौरव जी, भगवान के लिए मुझे छोड दीजिए. अगर अरमान जी को पता चल गया, वह आपको जिंदा नहीं छोडेंगे। इतना कहते हुए वह पीछे की तरफ खिसक रही थी. उसको यूं खिसकता हुआ देखकर गौरव राक्षसों की तरह हंसा और बोला, तुझे किसने कहा है कि वह यहां तक पहुंच जाएगा. उसे यहां तक आने का पता ही नहीं चलेगा, क्योंकि हम है ही उस जगह पर। इतना कहते हुए उसने अश्की के पैर पर लगभग से अपना पैर रख लिया था.
वो उसके पैर को बुरी तरह से अपने पैर से मसलने लगा था.
जैसे ही गौरव ने उसके पैर पर पैर रखा, अश्की की एक खौफनाक चीख वहां पहाडी पर गूंज गई. वह रोते हुए चिल्लाते हुए बोली, मुझे दर्द हो रहा है गौरव जी, प्लीज, छोडिए मेरे पैर को। लेकिन गौरव था कि उसके पैर को छोडने का नाम हीनहीं ले रहा था. वह दांत पीसकर बोला, क्या अभी भी कहोगी कि उसे प्यार करती हो, हां। इतना कहते हुए वह लगभग से उसके पैर को मरोडे जा रहा था अपने पैर के नीचे रखकर. वही अश्की अब उसकी आंखों में देखते हुए बोली, आप पागल तो नहीं हो गए है, वह पति है मेरे.
उनसे इश्क करना मेरा धर्म है और सारी उम्र मैं उनसे इश्क करूंगी. इससे मुझे आप रोक नहीं सकते हैं. चाहे आप मेरी जान ही क्यों ना ले ले। उसकी बात सुनकर गौरव के जबडे और भी ज्यादा कस गए. वह एक बार फिर से अश्की के ऊपर झुका और उसके बालों को मुट्ठी में भरते हुए बोला, साली कुत्तिया, मेरे सामने प्यार मोहब्बत की बात करती है. आज तुझे बताता हूं। इतना कहते हुए उसने अश्की के बालों को मुट्ठी में भरा और लगभग से घसीटते हुए गाडी की तरफ ले जाने लगा.
जिस तरह से वह घसीटते हुए लेकर जा रहा था, उसने बेहद बेरहमी से इस वक्त अश्की के बालों को मुट्ठी में पकडा हुआ था. वही अश्की रोते हुए उसके आगे हाथ जोडकर बोली, प्लीज गौरव जी, ऐसा मत कीजिए. मैं मर जाऊंगी। तभी गौरव उसे लगभग से गाडी में धकेलते हुए बोला, तो मर जा, लेकिन आज तो मैं तेरे साथ अपनी सुहागरात मना कर रहूंगा। इतना कहते हुए वह अपनी शर्ट के बटन खोलने लगा. वही हंसिका अपने सिर पर हाथ रखते हुए बोली, यह तो पागल हो गया, लगता है। इतना कहते हुए उसने अपना चेहरा दूसरी तरफ घूमा लिया था.
वही अश्की अब पूरी तरह से गाडी के साइड Door से लग चुकी थी. उसे इस वक्त इतना ज्यादा डर लग रहा था कि उसका दिल कर रहा था कि वह जल्दी से यहां से भाग जाए, या तो अरमान यहां पर आ जाए. वह मन ही मन अपने हाथों को जोडते हुए बोली, हे भगवान! प्लीज, मुझे बचा लीजिए. मुझे नहीं पता था कि गौरव जी इतने गंदे इंसान निकलेंगे. प्लीज मान. आ जाओ। इतना कहते हुए उसका मन पूरी तरह से भर आया था.
दूसरी तरफ हंसिका, जो कि बाहर खडी थी, वह अब गौरव की तरफ देखते हुए बोली, जल्दी अपना काम खत्म करके मुझे Call कर देना, मैं दूसरी तरफ जा रही हूं. और हां, जरा सी भी दया मत दिखाना इस लडकी पर. जितना हो सके पेलना इसे, बहुत नुकसान किया है इसने मेरा, साली रखैल कहीं की। हंसिका की बात सुनकर अश्की की आंखों में नमी उत्तर आई थी.
दूसरी तरफ गौरव, जो अब हंसिका की तरफ देख रहा था, वह अब उसकी तरफ देखकर बोला, चल जा जा निकल यहां से, मुझे तुझसे सीखने की जरूरत नहीं है. अगर चाहती है, तो आजा तू भी साथ में, ठुकाई करवा ले। उसकी बात पर हंसिका उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोली, वह तो आज इस लडकी का हश्र देखकर पता चलेगा कि तुम मेरे साथ रहने के काबिल भी हो कि नहीं। उसकी बात पर गौरव दांत पीसकर बोला, और तेरे साथ मै रहने भी नहीं वाला हूं।
अभी वह बहस कर ही रहे थे कि तभी वहां पर कितनी सारी गाडियों की आवाज आई. उन गाडियों की आवाज सुनकर हंसिका की आंखें बडी हो गई. वहीं अश्की की भी इन गाडियों की आवाज को पूरी तरह से पहचान चुकी थी. और अगले ही पल वह जोरों से चिल्लाई,
मान.
To be continue.





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