
ठाकुर हवेली,
इस वक्त रणवीर सांवरी की pussy को देख रहा था और वह पूरी तरह से उसकी पिंक पूसी पर झुका हुआ था। अभी-अभी उसने सांवरी को धमकी दी थी कि अगर वह उसका साथ नहीं देगी, तो वह उसकी हालत अभय से भी ज्यादा खराब कर देगा। जिस वजह से सांवरी का दिल कांप रहा था। उसका दिल कर रहा था कि काश ऐसी जिंदगी से तो भगवान उसे खत्म कर दे वह ज्यादा बढ़िया है। वह जिस कदर दुखी थी, यह वही जानती थी कि उसकी सांस लेना भी उसके लिए मुश्किल हो रहा था। वह रोते हुए रणबीर की तरफ देख कर बोली, "प्लीज, तुम तो मुझ पर दया करो। उसने तो मुझे नोच खाया है। मुझे तो तुम अच्छे इंसान लगे थे।"
उसकी बात पर रणवीर, जो उसकी pussy पर झुक रहा था, उसके होंठ एक पल के लिए रुक गए। वह उसे देखते हुए बोला, "अच्छा तो मैं बहुत हूं, लेकिन खुद के लिए। ओर किसी के लिए नहीं। हां, बस पहली नजर में तुम थोड़ा भा गई थी मुझे। इसीलिए मैंने थोड़ा तुम्हारे साथ अच्छी तरह बात कर ली, नहीं तो मैं किसी से इतना अच्छा हूं, ना ही जितना तुम्हारे साथ बन रहा हूं। अब मेरी पेशेंस का टेस्ट मत लो, समझी। और रही बात अभय की, मैं तुम्हें अभय की पकड़ से छुड़ा दूंगा। तुम फ़िक्र मत करो उसकी।
लेकिन मुझे अब रोकने की कोशिश मत करना, नहीं तो तुम मेरा वह चेहरा देखोगी, जो शायद अभी तक मैं तुमसे छुपा रहा हूं।" रणवीर की बात सुनकर एक पल के लिए सांवरी का दिल धक सा रह गया। वहीं रणबीर अब पूरी तरह से उसकी पूसी पर झुका और अगले ही पल उसने अपना अंगूठा सांवरी की पूसी के लिप्स के बीचो-बीच रखकर क्लीटोरिस पर रगड़ना शुरू कर दिया। जिससे सांवरी के पैर बिस्तर पर कस गए।
उसकी पकड़ ब्लैंकेट पर कश गई और आंखें पूरी तरह से बंद हो गई। उसकी आंखों से अभी भी आंसू बहे जा रहे थे। वह खुद ही खुद मन में बड़बड़ाई, "सभी मर्द एक जैसे होते हैं। सबको सिर्फ जिस्म की तलब लगती है। औरत पर क्या बितती है, किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता।" इतना कहते हुए सांवरी की आंखों से आंसू बह जा रहे थे। वहीं रणवीर उसकी पुसी को अपनी अंगूठे से रगड़ते हुए अपने होठों को चबाते हुए बोला,
"ऐसे ही थोड़ी तेरे पीछे अभय ठाकुर इतना पागल है। उसको भी डर लगता है कि तू छोड़कर भाग न जाए। क्योंकि तू है ही इतनी बला की खूबसूरत।" इतना कहते हुए उसने अब अपनी जीभ को हल्का सा बाहर की तरफ निकाला और उसके क्लीटोरिस पर अपनी जीभ घुमानी शुरू की। जिससे सांवरी की सांस गहरी होने लगी। उसकी ब्लैंकेट पर पकड़ और भी ज्यादा कस गई। वही सांवरी की अब सिसकी निकल गई, क्योंकि अभय ने कुछ देर पहले ही बड़ी बुरी तरह से उसके साथ सेक्स किया था। जिस वजह से उसकी pussy में स्वेलिंग होने लगी थी।
अब जैसे ही रणवीर ने अपनी टंग उसकी पुसी पर फिरानी शुरू की, हल्की सी पी की दो बूंदे बाहर की तरफ आ गई। यह चीज देखकर रणवीर के चेहरे पर डेविल स्माइल उतर आई। वह अपने कपड़े उतारने लगा। यह चीज देखकर सांवरी का पूरा बदन कांपने लगा। वह रोते हुए बोली, "तुम मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते। किसी को मदद करने की कीमत इतनी ज्यादा नहीं होती।" उसकी बात सुनकर रणवीर ने अपनी आई ब्रो ऊपर की तरफ उठाई और बोला, "सीरियसली, यह इससे बहुत ज्यादा होगी कीमत, मुझे तो नहीं लगता। मैं तो अभी कई रात तुम्हारे साथ बिताने की सोच रहा हूं। आफ्टर ऑल तुम हो ही इतनी खूबसूरत, इतनी खूबसूरती से मेरा पेट जल्दी तो नहीं भरने वाला।"
उसकी बात सुनकर सांवरी की आंखें बड़ी हो गई। वह उसकी तरफ देखते हुए बोली, "तुम दोनों को शर्म तो बिल्कुल नहीं आती।" सांवरी की बात पर रणवीर, जो कि अपना हाथ पैंट पर ले जाकर अपनी पैंट को खोल रहा था, अभी उसने अपना बटन ही खोला था कि उसकी बात सुनकर उसकी नज़रें सर्द हो गई। वह दांत पीसकर बोला, "मुझे उस अभय ठाकुर से कंपेयर तो मत करना। अगर कंपेयर करोगी, तो मैं तुम्हें बता दूंगा कि वह चीज क्या है और मैं क्या चीज हूं, समझी तुम।"
इतना कहकर उसने पूरी तरह से अपनी पैंट को बदन से अलग किया और उसके साथ ही अपना अंडरवियर भी उतार दिया। जैसे ही उसने अपना अंडरवियर उतारा, सांवरी की आंखें फटी की फटी रह गई। क्योंकि रणवीर का dick अभय के dick से कहीं ज्यादा लॉन्ग एंड थिक था। वह आंखें फाड़े रणवीर को देखे जा रही थी, जो कि इतना ज्यादा बड़ा था। वह कम से कम 8 से ज्यादा इंच का लग रहा था और ऊपर से उसकी नसें पूरी तरह से उभरी हुई थी। अब तो सांवरी का सांस लेना ही जैसे दुश्वार हो गया था।
क्योंकि पहले ही वह अभय से बहुत ज्यादा तंग थी। वह जिस तरह से उसके साथ सेक्स करता था, उसके लिए असहनीय होता था। आज रणबीर भी शायद उस पर कहर बरसाने वाला था। वहीं रणबीर अब पूरी तरह से उसके ऊपर झुका और अगले ही पल उसने अपने तपते होंठ सांवरी की गर्दन पर रख दिए। जिससे सांवरी को आज खुद से घिन महसूस हो रही थी। वह खुद दांत पीसते हुए बोली, "तुम लोग इंसान कहलाने के लायक नहीं हो। अरे! किसी के इजाजत के बिना उसके जिस्म को छूना, कहां की तुम्हारी मर्दानगी हुई।"
अपनी मर्दानगी पर उंगली उठाता देख रणवीर ने अपना चेहरा पीछे की तरफ किया और गहरी नजरों से सांवरी की तरफ देखते हुए बोला, "मर्दानगी वह नहीं है, जो अभय ठाकुर दिखाता है तुझे। आज मैं तुझे असली मर्दानगी दिखाता हूं।" उसकी बात सुनकर सांवरी के रोंगटे खड़े हो रहे थे। उस की आंखों में नमी उतर आई। वही उसकी नमी उतरते हुए देखकर रणवीर को कुछ-कुछ हो रहा था। पर क्या, यह खुद भी वह नहीं समझ पा रहा था। अब वह उसकी आंखों के ऊपर झुका और अगले ही पल वह उसकी आंखों को चुमते हुए अपने होंठ उसके गालों पर ले आया। धीरे-धीरे कर वह सांवरी के बदन को चूमने लगा। जिस तरह से वह सांवरी के बदन को चूम रहा था, एक पल के लिए सांवरी का पूरा जिस्म जैसे सिहर रहा था।
भले ही वह अभय के साथ बहुत बार सेक्स कर चुकी थी, लेकिन आज रणवीर जिस तरह से उसके साथ पेश आ रहा था, अभय ने कभी भी उसके साथ इस तरह की कोई हरकत नहीं की थी। रणवीर बड़े प्यार से उसके पूरे जिस्म को चूम रहा था। अब उसकी ब्रेस्ट पर जाकर उसकी नज़रें सांवरी के निपल्स पर चली गई, जो की पूरी तरह से हार्ड पोजीशन पर पिंक पिंक खड़े हुए थे। उसके निपल्स को यूं खड़ा हुआ देखकर अभय ने अपने होठों को दांतों तले दबाया और सांवरी के चेहरे की तरफ देखा। जिसकी आंखें पूरी तरह से बंद थी। वह तो यह चीज देखना ही नहीं चाहती थी। लेकिन जिस तरह से रणवीर उसके साथ पेश आ रहा था, उसकी आंखें खुलने पर मजबूर हो रही थी।
वही रणबीर अब उसकी ब्रेस्ट पर झुका और अगले ही पल अपनी जीभ को बाहर निकालते हुए उसने बड़ी सॉफ्टली उसकी निपल्स को शक करना शुरू किया। जिस तरह से वह जीभ बाहर को निकाल कर पूरी तरह से उसके निपल्स के रोल पर घुमा रहा था, सांवरी का पूरा बदन अकड़ने लगा था। उसकी लोअर बॉडी ऊपर की तरफ उठने लगी थी। सांस हद से ज्यादा गहरी चलने लगी थी।
अभी रणबीर उसकी निपल्स को अपनी जीभ से लिक करते हुए रगड़ रहा था और साथ ही साथ उसके हाथ सांवरी की पूसी पर घूम रहे थे। जिससे सांवरी के रोंगटे खड़े हो रहे थे। अभी वह उसकी पुसी पर हाथ फेर ही रहा था कि तभी उसके रूम का दरवाजा नॉक हुआ। दूसरी तरफ से अभय के चिल्लाने की आवाज रणवीर के कानों में पड़ी। "रणवीर, सांवरी को देखा तुमने कहीं...?" जैसे ही अभय की बात रणवीर के कानों में पड़ी, रणवीर के चेहरे पर डेविल स्माइल उतर आई। दूसरी तरफ सांवरी के तो पूरी तरह से होश उड़ गए।
उसका रंग पूरी तरह से सफेद पड़ चुका था और हाथ पैर बुरी तरह से कांप रहे थे।
To be continue......





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