
ठाकुर हवेली,
सांवरी इस वक्त अभय के मुंह पर बैठी हुई थी और उसके मुंह को अपने हाथों से दबाते हुए उसके मुंह में पी कर रही थी। उसे इस वक्त अभय के मुंह में पी करने में इतना मजा आ रहा था कि उसने उसका पूरा मुंह गिला करके रख दिया था। वही अभय, जिसकी आंखें अब खुलने लगी थी। उसने जब हल्की सी आंख खोली, तो सांवरी पर ध्यान गया। अगले ही पल, वह पीछे की तरफ हुई कि तभी दरवाजा खुला। रणवीर अंदर की तरफ आया और उसकी आंखें हैरत से फैल गई, क्योंकि जिस तरह से सांवरी बैठी हुई थी, उसका पूरा बाथरॉब ऊपर की तरफ उठा हुआ था।
जिस वजह से उसकी pussy रणवीर के सामने थी। दूसरी तरफ अभय, जिसकी आंख खुली थी, उसने अब करवट ली और अगले ही पल फिर से सो गया। क्योंकि उसे नशा ही इस हद तक हुआ पड़ा था कि उसकी आंखें ही नहीं खुल रही थी। अब उसे कुछ भी महसूस नहीं हो रहा था कि उसके ऊपर से कितनी स्मेल आ रही होगी। वही सांवरी, जिसका रंग उड़ा हुआ था, उसने अब रणवीर की तरफ देखा, तो मुंह बनाते हुए बोली, "तुम यहां पर क्या कर रहे हो?"
रणवीर, जिसकी नजर सीधी उसकी pussy पर पड़ी थी, उसे अपना गला सूखता हुआ महसूस होने लगा। इतनी पिंक फ्लावर जैसी पूसी देखकर उसका दिल कर रहा था कि वह अपना मुंह सांवरी की टांगों में दे और उसे शक करने लगे। वही सांवरी अब दोबारा से बोली, "बोलो ना, तुम यहां पर क्या कर रहे हो?" जिस तरह से वह बोल रही थी, रणवीर ने एक नजर अभय की तरफ देखा और अगले ही पल सांवरी के पास आया। वह उसे गोद में उठकर बाहर की तरफ ले जाने लगा। तभी सांवरी चिल्ला कर बोली, "यह तुम क्या कर रहे हो?
तुम मुझे ऐसे उठा कर नहीं ले सकते जा सकते?" वहीं रणवीर उसे लेकर इतनी तेजी से वहां से निकला था कि अभय को थोड़ी देर के लिए आवाज आई, लेकिन उसे कहां ही सुनने वाला था। क्योंकि वह इस वक्त इतनी ज्यादा गहरी नींद में था कि कोई इसके पास नगाड़े भी बजाए, तो शायद उसे सुनाई ना देते।
वहीं रणबीर उसे बाहर की तरफ लेकर आया, तो सांवरी चिल्लाने लगी। लेकिन घर में उसका चिल्लाना सुनने वाला कोई नहीं था, क्योंकि अभय की मॉम तो घर पर थी ही नहीं। वह तो लखनपुर अभय के नाना नानी के पास गई हुई थी, जो कि अभी पिछले रात ही गई थी। क्योंकि वह जानती थी कि अभय उनके सामने ही सांवरी के साथ इतना गंदा सलूक करेगा और वह देख नहीं पाएंगे। जिस वजह से अभय और उनकी लड़ाई भी हो सकती है। इसीलिए वह कल रात ही लखनपुर के लिए निकल चुकी थी।
दूसरी तरफ रणवीर, जोकि सांवरी को उठाकर अपने रूम में लेकर आया और अगले ही पल उसने सांवरी को बेड पर पटक दिया। जिससे सांवरी का एक बार फिर से बॉथरॉब ऊपर की तरफ उठ गया। बाथरॉब उठते ही उसकी पूसी एक बार फिर से रणवीर के सामने थी। एक बार फिर से उसकी pussy को देखकर रणवीर की हालत खराब होने लगी। लेकिन उसने खुद को कंट्रोल किया और उसका बाथरॉब ऊपर से नीचे की तरफ सरकाया। वह सांवरी के चेहरे को गौर से देखने लगा, जहां पर थप्पड़ लगने की वजह से नीले निशान थे। उन निशानों को देखकर रणवीर के हाथों की मुट्ठियां कस चुकी थी।
वही सांवरी उसकी तरफ देखकर रोते हुए बोली, "तुम बहुत गंदे हो। तुमने मुझे ऐसे ही जाने दिया। अगर तुम चाहते, तो मेरी मदद कर सकते थे। लेकिन तुमने मेरी मदद नहीं की। उसने मुझे बहुत मारा।" इतना कहते हुए वह लगभग से रोने लगी। वहीं रणवीर उसकी तरफ देखते हुए उसके चेहरे पर झुका और उसके आंसुओं को साफ करते हुए बोला, "तुम चाहती हो कि मैं तुम्हारे मदद करूं?" उसकी बात सुनकर सांवरी अपना मुंह दूसरी तरफ घूमाते हुए बोली, "मुझे नहीं पता, क्योंकि तुम झूठे हो।
एक पल के लिए तुमने मेरे मन में आश जगाई कि मैं तुम मेरी मदद कर सकते हो। लेकिन अगले ही पल तुमने वह मेरी आश तोड़ दी। जब तुमने मुझे गाड़ी से उतारा और चुपचाप मुझे जाने दिया। उन्होंने, उन्होंने मेरे साथ इतनी गंदी हरकत की। उन्होंने मेरे मेरे मुंह पर..।" इतना कहते हुए वह रोने लगी। लेकिन रणवीर, जिसने खुद भी ड्रिंक की हुई थी, उसकी आंखें यह चीज देखकर लाल होने लगी थी। उसे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था कि अभय ने सांवरी के साथ ऐसा बिहेव किया था।
वह सांवरी के चेहरे पर झुकते हुए बोला, "तुम फ़िक्र मत करो। आज तुम्हारे साथ जो हुआ है, वो अब दोबारा नहीं होगा।" तभी सांवरी व्यंग्य से हंसते हुए बोली, "और उसे रोकेगा कौन?" तभी रणवीर उसके चेहरे को अपने हाथों में भरते हुए बोला, "मैं रोकूंगा।" इतना कहते हुए लगभग से रणवीर उसके चेहरे पर झुकने लगा। तभी सांवरी उसके सीने पर हाथ रखते हुए बोली, "जो करना है, दूर से करो। मैं पहले ही इतनी गंदी दलदल में फंसी हुई हूं। अब मुझमें हिम्मत नहीं है कि मैं और गंदगी में फंस पाऊं।" इतना कहकर उसने रणवीर को अपने से दूर करना चाहा, लेकिन रणबीर पूरी तरह से उसके चेहरे पर झुकते हुए बोला,
"लेकिन मैं तुम्हें दलदल नहीं दूंगा, मैं तुम्हें प्यार दूंगा।" उसकी बात पर सांवरी एक पल के लिए उसकी आंखों में देखती रही और फिर अगले ही पल उसे दूर करते हुए बोली, "जानती हूं कौन सी दलदल और कौन सा प्यार, मुझे कुछ नहीं चाहिए। मुझे सिर्फ यहां से आजादी चाहिए।" इतना कहकर उसने रणवीर को पीछे की तरफ किया। वह अपनी जगह से लड़खड़ाते हुए उठने लगी। तभी रणवीर ने उसका हाथ पकड़ा और झटके से उसे बेड पर गिराते हुए बोला,
"तुम नहीं चाहती हो, मैं तुम्हारी मदद करूं?" उसकी बात पर सांवरी उसकी आंखों में देखते हुए बोली, "और मदद करने का तुम क्या चाहते हो?" सांवरी की बात पर रणबीर के चेहरे पर तिरछी मुस्कुराहट आ गई। वह उसकी आंखों में देखते हुए बोला, "तुम भी जानती हो कि मैं तुमसे क्या चाहता हूं।" इतना कहते हुए उसने अपनी तिरछी नज़रों से सांवरी को ऊपर से नीचे की तरफ देखा। जिसे महसूस कर सांवरी के शरीर में पूरी तरह से करंट दौड़ गया।
लेकिन अगले ही पल, उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। वह अब दांत पीसकर बोली, "तुम मर्द, सब एक जैसे होते हो। तुम्हें सिर्फ जिस्म से मतलब होता है और तुम भी वही करना चाहते हो, जो अभय ठाकुर मेरे साथ कर रहा है।" तभी रणवीर उसके चेहरे पर झुकते हुए बोला, "वह तो जल्लाद है, मैं तो प्यार से करूंगा।" इतना कहते हुए रणबीर अपना हाथ उसकी गर्दन पर रखते हुए नीचे की तरफ ले जाने लगा। तभी सांवरी उसका हाथ पकड़ कर पीछे की तरफ झटकते हुए बोली,
"मुझे कुछ नहीं करना और ना ही मुझे तुम्हारी मदद की जरूरत है, समझे तुम।" इतना कह कर वह उठने लगी। लेकिन अभय ने उसकी टांगों को अपनी टांगों में फंसाते हुए एक बार फिर से लेटा दिया। जिससे सांवरी की धड़कन एक पल के लिए रुक सी गई। अगले ही पल रणवीर ने उसके बाथरॉब की नॉट खोल दी। जिससे सांवरी का पूरा बदन अब रणबीर के सामने था। उसके boobs और उसकी पुसी को देखकर एक पल के लिए रणवीर जैसे पागल सा हो गया।
उसकी वह पिंक पिंक निपल्स और ऊपर से पिंक पिंक पूसी देखकर रणवीर की हालत खराब होने लगी। लेकिन सांवरी, सांवरी का तो जैसे दिमाग घूम गया। वह पहले ही अभय से अपना पीछा छुड़ाना चाहती थी और रणबीर भी उसके साथ वही सब कुछ चाहता था, जो अभय चाहता था। वहीं रणबीर अब पूरी तरह से उसकी लोअर बॉडी पर झुका और अगले ही पल उसके पैरों को फैलाने की कोशिश की। तभी सांवरी झटपटाते हुए बोली, "यह क्या तरीका है, दूर रहो मुझसे।" इतना कहते हुए उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। वह खुद के बाथरॉब को ठीक करते हुए खुद को ढकने लगी। लेकिन रणबीर ने उसके हाथ पर हाथ रखा और सर्द नजरों से देखते हुए बोला, "अगर तुम मेरा साथ नहीं दोगी, तो मैं भी तुम्हारी हालत अभय ठाकुर जैसी करूंगा, एक बात याद रखना।
या हो सकता है उससे भी बदतर।" रणवीर की बात सुनकर अब सांवरी की आंखों से जैसे नदिया बहने लगी। उसकी हालत तो ऐसी थी, जैसे आगे कुआं, पीछे खाई।
To be continue...





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