
ठाकुर हवेली,
रात के 2 बजे,
सांवरी इस वक्त नीचे फर्श पर लेटी हुई थी, जहां पर अभय ने उसके चेहरे पर pee किया था। वह अभी भी पूरी तरह से नेकेड थी। अभय इस वक्त बिस्तर पर सो रहा था। उसे जैसे इस चीज की रत्ती भर भी परवाह नहीं थी कि सांवरी किस तरह की हालत में कैसे नीचे जमीन पर लेटी हुई थी। वही सांवरी अपनी सूनी आंखों से ऊपर सीलिंग की तरफ देख रही थी। उसकी आंखों के आंसू उसके गालों पर जम चुके थे। वह अभी भी जिस तरह से लेटी हुई थी, कोई भी उसे देखता, तो उस पर तरस खा जाए। लेकिन अभय में तो जैसे इंसानियत नाम की चीज ही नहीं थी।
इस वक्त सांवरी के चेहरे पर साइड पर नीले निशान पड़े हुए थे। जिसे देखकर साफ पता चल रहा था कि सांवरी को शायद आज अभय ने मारा भी था और शायद बहुत बुरी तरह से मारा था। उसके पूरे शरीर पर किसी ने किसी चीज के निशान थे। आज की रात उसकी सबसे काली और सबसे बड़ी रात थी। सांवरी के शरीर में तो जैसे उठने की जान तक नहीं थी, लेकिन फिर भी अब किसी तरह से हिम्मत करके वह अपनी जगह से उठी। इस वक्त वह पूरी तरह से टूट चुकी थी। उसका दिल कर रहा था कि वह खुदकुशी कर ले। लेकिन उसने खुद को संभाला और उसकी नजर सामने टेबल पर पड़ी, जहां पर अभय की बची हुई शराब पड़ी हुई थी। जो कि अभय ने कुछ देर पहले ही छोड़ी थी। वह साथ-साथ सांवरी के साथ सेक्स कर रहा था और साथ ही ड्रिंक भी कर रहा था।
वह बोतल आधी भरी पड़ी थी। सांवरी ने उस बोतल को देखा। लेकिन अगले ही पल अपना चेहरा दूसरी तरफ घूमाते हुए धीरे-धीरे कदमों से बाथरूम की तरफ जाने लगी, क्योंकि इस वक्त वह पूरी तरह से अभी के पी से भरी पड़ी थी। उसे खुद से ही इस वक्त घिन महसूस हो रही थी। कुछ ही देर में, वह शावर के नीचे आकर खड़ी हुई और शॉवर का पानी उसके ऊपर गिरने लगा। नेकेड तो वह पहले से ही थी। शॉवर का पानी गिरते ही उसने अपना चेहरा ऊपर की तरफ उठाया और उसकी आंखों में वही पल घूमने लगा, जब अभय ने उसके मुंह पर बाथरूम किया था। उस पल को याद करते ही सांवरी ने अपने होठों पर हाथ रखा और फूट-फूट कर रोने लगी। अब जाकर उसका कलेजा जैसे फटे जा रहा था। उस चीज को याद करते हुए ही उसका दिल बुरी तरह से टूट रहा था। अभय ने उसे दर्द देने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। अब वह एक बार फिर से रोते हुए चिल्लाई। "आप गलत थी मां, आप गलत थी। मुझे आपका कहना मानना ही नहीं चाहिए था। इतने गंदे शख्स से आपने मुझे बांध दिया। मैं आपको कभी माफ नहीं करूंगी, मां, कभी नहीं।" इतना कहते हुए सांवरी का दिल भर आया था। ऐसे ही वह पता नहीं कितनी ही देर खुद में तड़पती रही और बातें करती रही। लेकिन उन बातों से उसके दिल को जरा भी सुकून नहीं पहुंच रहा था। उसकी आंखों के सामने बार-बार वही अभय ने जो उसके साथ गंदी हरकत की, वही घूम रही थी। जो शायद वह जिंदगी भर नहीं भूलने वाली थी। तकरीबन 1 घंटे बाद, अब तक तीन बज चुके थे। अब उसने किसी तरह से खुद को संभाला और खुद पर टावर लपेटकर बाहर की तरफ आई। उसकी नजर सामने पड़ी उस शराब पर दोबारा से पड़ी, जो कि अभय ने आधी छोड़ी हुई थी।
अब वह धीरे-धीरे चलते हुए शराब की बोतल के पास आई। उसे देखते हुए वह बोली, "बहुत लोग मानते हैं ना कि इससे तकलीफ कम हो जाती है, तो देखती हूं कि कितनी तकलीफ कम होती है।" अगले ही पल, उसने उस बोतल को उठाया और अपने होठों से लगा लिया। इस वक्त वह इतनी तकलीफ में थी। उस बोतल को होठों से लगाते ही पहले उसे इतना कड़वा टेस्ट आया कि एक पल के लिए उसकी आंखें पूरी तरह से लाल पड़ गई। लेकिन धीरे-धीरे वह पूरी शराब को होठों से लगाए पी गई। देखते ही देखते वह आधी बोतल पूरी खत्म हो गई। यह शराब काफी महंगी थी और लिमिटेड भी साथ ही में। पता नहीं अब सांवरी का क्या हाल होने वाला था, क्योंकि इस शराब में काफी हद तक नशा था, जो शायद सावरी पर हावी होने वाला था।
सावरी के शराब पीते ही उसकी आंखों में नशा भरने लगा। अब उसकी नजर बेड पर नेकेड लेटे हुए अभय पर गई, जो की पूरी तरह से उल्टा लेटा हुआ था। जिस वजह से अभय की ass सांवरी की तरफ थी। सांवरी की जैसे ही नजर उसके ass पर पड़ी और वह मुंह बनाते हुए बोली, "साला, मेरे चूतड़ों पर मार मार के सजा देता है। अपने चूतड़ नहीं देखे कभी। काले कितने हैं, हाय राम, कितने गंदे चूतड़ है इसके।"
इतना कहते हुए उसने अपनी नोज को बंद कर लिया अपनी उंगलियों से। अब वह लड़खड़ाते हुए कदमों से अभय के पास पहुंची, जो अब बहुत ज्यादा गहरी नींद में जा चुका था और शराब पीने की वजह से शायद उसकी नींद खुलने भी नहीं वाली थी। जिस तरह की शराब उसने पी हुई थी, उससे तो फिलहाल उसकी नींद बिल्कुल भी नहीं खुली। सांवरी अब बिल्कुल उसके पास आकर खड़ी हुई और अगले ही पल उसने अपना पैर ऊपर की तरफ उठाया और लगभग से अपनी पैर को उसकी ass पर मारते हुए बोली, "बहन चोद, मेरे मुंह पर पेशाब करने वाले आदमी, तेरे को बताते हूं मैं, तेरे मुंह पर, मुंह पर mutungi.
तूने मेरे मुंह पर मूत कर मेरा मुंह गंदा कर दिया, साले बहन चोद। अब कहां तेरी अम्मा मर गई है, जो उठ नहीं रहा, उठ।" इतना कहते हुए एक बार फिर से उसने अपना पैर अभय की ass पर मारा। लेकिन अभय तो इतनी गहरी नींद में था कि उसे जैसे कुछ सुनाई ही नहीं दे रहा था। वैसे भी सांवरी के पैर तो इतने नाजुक थे कि लगने के बावजूद भी कहां ही अभय को कुछ असर होने वाला था।
सांवरी मुंह बनाते हुए बोली, "साला बहन चोद, पता नहीं किस मां का दूध पिया है, कुंभकरण कहीं का। इसको मैं बताती हूं, बड़ी गालियां निकालता है ना लड्डू कहीं का। मेरे मुंह पर मूतता है, बहन चोद, अभी तेरे को बताती हूं।" इतना कहकर वह पूरी तरह से बेड के ऊपर चढ़ी और अभय के मुंह के बिल्कुल पास आकर खड़ी हुई। अगले ही पल, उसने अभय के सिर के ऊपर अपना पैर एक दूसरी तरफ रखा और दोनों तरफ पैर रखकर खड़ी हो गई। इस वक्त उसने अपने शरीर पर टॉवल लपेट रखा था।
अब सांवरी ने अपना टॉवल ऊपर की तरफ उठाया और अगले ही पल अभय के मुंह पर बैठ गई। "आज मैं तुझे अपना मूत पिलाऊंगी। तूने तो मुझे सिर्फ भिगोया है ना, अभी तेरे को बताती हूं।" इतना कहकर वह खुद ही सीटियां बजाने लगी, ताकि उसे बाथरूम आ जाए। जैसे छोटे बच्चों को बाथरूम करने के लिए उसकी मां सीटियां बजाती है। वैसे ही वह खुद को सीटियां बजाते हुए बाथरूम लाने के लिए मजबूर कर रही थी। लेकिन जब उसे कुछ देर बाथरुम नहीं आया, तो वह मुंह बनाकर बोली,
"बहन का लौड़ा, अभी बाथरुम भी आ नहीं रहा है। बहन चोद, आजा तू भी, इसके मुंह पर मुतना है मुझे। मुझे बदला लेना है इससे, साला madarchod, मेरी जिंदगी बर्बाद करके कैसे सोया हुआ है। लेकिन नहीं, मैं भी बाथरूम लाकर रहूंगी।" अब उसने अपनी पुसी की तरफ देखा, जिसकी हल्की हल्की लेयर्स खुली हुई थी। वह अब अपनी पुसी की तरफ देखकर बोली, "तू मेरी ही भोसड़ी है ना, तो मेरा कहना क्यों नहीं मान रही है। चलना शुरू कर अपना काम, चल, मै तेरे आगे हाथ जोड़ती हूं।" इतना कहते हुए अपना चेहरा नीचे की तरफ झुकाते हुए उसी को देखते हुए अपने हाथ जोड़ रही थी।
फिर बड़े प्यार से बोली, "मैं ना तेरी पूजा करूंगी। चल जल्दी कर, सूसू कर दे।" इतना कहकर दोबारा से सीटिया मारने लगी। कुछ ही देर में, उसने खुद को ढीला छोड़ दिया। जैसे ही उसने अपने आप को ढीला छोड़ा, तो उसे बाथरूम आने लगा। जिसे देखकर उसके चेहरे पर बड़ी लंबी सी मुस्कुराहट तैर गई।
अगले ही पल, उसने अपनी पूसी के क्लीटोरिस पर उंगली रखी और उसे धीरे-धीरे सहलाते हुए अभय के मुंह पर बाथरूम करने लगी। वही दूसरी तरफ, अभय, जोकि खर्राटे छोड़ रहा था। उसके मुंह पर जैसे ही बाथरूम पड़ा, एक पल के लिए वह सहम आया, लेकिन अगले ही पल उसने अपना मुंह खोल लिया। उसको मुंह खोलते देख सांवरी की स्माइल और भी लंबी हो गई । वो अभय की तरफ देखते हुए बोली, "ले, पी मेरा मूत, मादर चोद।"
इतना कहते हुए उसने उसके गालों को और भी दबाया, जिससे अभय का पूरा मुंह खुल गया। सांवरी का बाथरूम उसके मुंह में जाने लगा। उसके बाथरूम को पीते हुए ही अभय की आंखें खुलने लगी। अभी वह आंखें खोल ही रहा था कि तभी उस रूम का दरवाजा खुला और रणवीर, जोकि अंदर की तरफ एकदम से आया था, उसने जब सांवरी को इस तरह से देखा, तो उसकी आंखें हैरत से फैल गई।
वहीं अभय ने भी अब अपनी पूरी आंखें खोल ली थी।
To be continue.....
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