
मथुरा में,
ठाकुर हवेली,
अभय इस वक्त बालकनी में खड़ा था और अपनी लाल आंखों से बाहर की तरफ देख रहा था। इस वक्त उसने हाथों में वाइन का गिलास पकड़ा हुआ था। धीरे-धीरे वो सिप लेते हुए वाइन पी रहा था। उसकी नज़रें हवेली के दरवाजे पर टिकी हुई थी। अभी थोड़ी देर पहले ही उसे रणबीर का कॉल आया था और रणवीर ने उसे बता दिया था कि सांवरी उसे मिल चुकी है। वह गुस्से में दांत पीसकर बोला, "एक बार घर पर आजा कुत्तिया, आज तुझे मैं सच में बताऊंगा कि कुटिया होती कैसी है। ना आज मैंने तेरी भोंसड़ी के छेद को फाड़ कर छोड़ दिया ना, तो मेरा नाम भी अभय ठाकुर नहीं। तेरी हिम्मत कैसे हुई भागने की और किसके साथ भागी तू?
पहले तो तुम मेरा फिर भी झेल लेती थी, लेकिन आज तुम मुझे झेल नहीं पाएगी, साली रंडियां, कुत्तिया। मेरा तो दिल कर रहा है कि अभी तुझे बालों से पकड़कर घसीटते हुए लेकर आऊं, जहां पर भी तू है और ऐसा चोदूं कि तू याद रखें। लेकिन जो तूने काम किया है ना, उसकी सजा तो तुझे मिलकर रहेगी। वह सजा मैं तुझे बखूबी दूंगा।" इतना कहते हुए अभय के चेहरे पर डेविल एक्सप्रेशन थे। उसके चेहरे के एक्सप्रेशन नॉर्मल तो बिल्कुल भी नहीं लग रहे थे। ऐसा लग रहा था, जैसे वह सांवरी को बहुत ज्यादा बड़ी सजा देने वाला हो। जो शायद उसके दिमाग में इस वक्त चल रही थी।
वहीं दूसरी तरफ,
रणवीर की गाड़ी इस वक्त मथुरा की गलियों में दौड़ रही थी। रणवीर के साथ बैठा हुआ राका, जोकि गाड़ी ड्राइव कर रहा था, वह बार-बार रणवीर की तरफ ही देख रहा था। क्योंकि रणवीर की नजरे बार-बार रियर व्यू में से पीछे की तरफ बैठी हुई सांवरी पर जाकर टिक जाती थी। वही सांवरी ने अपना चेहरा पूरी तरह से नीचे की तरफ किया हुआ था। ना चाहते हुए भी आज उसे रणवीर के साथ हवेली वापस आना पड़ रहा था। उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे। उसको यूं रोता हुआ देखकर पता नहीं क्यों रणवीर को अजीब सी वाइब आ रही थी। उसे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था। लेकिन वह कर क्या सकता था। तभी उसकी नजर राका पर गई, जो उसे ही देख रहा था।
रणवीर ने जब उसे देखा, तो वह उसकी तरफ घूमाते हुए बोला, "क्या मेरे मुंह पर लिखा है कि मैं तेरी मां चोदने वाला हूं।" उसकी बात सुनकर राका हैरानी से रणवीर की तरफ देखने लगा। वहीं दूसरी तरफ सांवरी, जिसने यह बात साफ-साफ सुनी थी, उसकी आंखें भी रणवीर की बात सुनकर बड़ी हो गई थी। तभी राका हैरानी से बोला, "कैसी बात कर रहे हो, साहब?" तभी रणवीर दांत पीसकर बोला, "तो अपनी मां chuda ना, गाड़ी चला, क्यों मेरी तरफ नजरे टिका कर मेरी गांड मारने पर तुला हुआ है।" उसकी बात सुनकर राका तो बस उसकी तरफ देखता ही रह गया। वहीं सांवरी, वह तो बस हैरानी से रणवीर की तरफ ही देखने लगी, जिसकी नजरे अब उस पर नहीं थी।
उसने तो अभय को ही ऐसा सोचा था कि अभय ही गालियां निकालता है। लेकिन यहां रणवीर को गालियां निकालते हुए देखकर सांवरी के कानों में से धुआं निकलने लगा था। वहीं रणबीर अब राका की तरफ देखते हुए बोला, "अगर अब तूने मेरे तरफ देखते हुए अपनी मां चूदवाई ना, तो कसम से मैंने गाड़ी में ही तेरी गांड मार लेनी है। तुझे देख कर इतना गुस्सा आ रहा है ना, दिल कर रहा है तेरा लैंड ही तेरी गांड में घुमा कर डाल दूं। जिस तरह से तू मुझे देख रहा है।"
रणवीर के मुंह से ऐसी गाली सुनकर राका के तो होश ही उड़ गए थे। लेकिन अब जाकर रणवीर की भी नजर रियर व्यू मिरर में से दोबारा से पीछे बैठी सांवरी पर गई, जिसका रंग पूरी तरह से उड़ा हुआ था। उसको यूं देखकर रणवीर ने पलट कर देखा और मुंह बनाते हुए बोला, "ऐसे क्या देख रही है मुझे? कभी कड़क लड़का नहीं देखा क्या तूने?" रणवीर की बात सुनकर सांवरी जल्दी से हड़बड़ा गई और अपना सिर जल्दी से उसने दोबारा से नीचे की तरफ झुका लिया। उसका यू सिर झुकाते हुए देखकर एक पल के लिए रणबीर की नजरे उस पर गहरी हो गई।
वह बिना राका की तरफ देखते हुए बोला, "गाड़ी रोक।" राका रणवीर की तरफ देखते हुए बोला, "क्यों बॉस?" जैसे ही उसने क्यों boss कहा, रणवीर ने उस तिरछी नजरों से देखते हुए कहा, "तेरा लंड काटना है, देगा मुझे अपना लंड, कुर्बानी दे दे अपने लंड की, फिर क्या हुआ?"
रणवीर की बात सुनकर राका के होश पूरी तरह से उड़ गए। जल्दी से हड़बड़ा कर उसने गाड़ी की ब्रेक लगा दी। अगले ही पल, रणवीर गाड़ी से बाहर निकला। रणवीर उसे देखते हुए बोला, "पार्टीशन ऑन कर गाड़ी का।" उसकी बात सुनकर राका ने अजीब सी नजरों से रणवीर को देखा और घबराई हुई आवाज में बोला, "लेकिन साहब।" इससे आगे वह कुछ बोलने को हुआ कि रणबीर ने उसे गहरी नजरों से देखा और दांत पीसकर बोला, "लगता है तुझे आज ही मुझसे अपनी गांड मरवानी है। कितनी बकवास करने लगा है तू?"
रणवीर की गालियां सुन सुन कर तो राका का दिमाग ही घूमे जा रहा था, क्योंकि रणवीर अभी कुछ दिन पहले ही आया था। राका उसके साथ अभी कुछ दिन पहले ही काम पर लगा था। आज रणवीर की गालियां सुनकर जैसे राका का तो दिमाग पूरी तरह से उड़ गया था। राका ने अब जल्दी से पार्टीशन ऑन किया। वह अब रणबीर की गालियां और सहन नहीं कर सकता था। इसलिए उसने जल्दी से पार्टीशन ऑन कर दिया। वहीं रणबीर ने अब बैक सीट पर जाते हुए उसने पार्टीशन पर दो उंगलियां बजाते हुए नॉक किया। जिसका मतलब साफ था कि राका गाड़ी चला सकता है।
लेकिन राका को यह चीज बहुत अजीब लग रही थी कि रणबीर सांवरी के साथ पीछे क्यों बैठा है। वहीं दूसरी तरफ बैक सीट पर, रणबीर इस वक्त गहरी नजरों से सांवरी को देख रहा था, जो अब पूरी तरह से दूसरी तरफ सीट पर सट चुकी थी। इस वक्त उसका डर से बुरा हाल हो चुका था। पसीने से लथपथ हुए जा रही थी। दिल जैसे धड़कने से इनकार करने लगा था। वहीं रणवीर उसके चेहरे को गौर से देखते हुए बोला, "क्या रे, तू सच में मेरी भाभी है?" उसकी बात पर सांवरी ने कुछ नहीं कहा, बस अपना सिर नीचे की तरफ झुका दिया।
रणबीर अब एकदम से उसके पास आया और अगले ही पल उसने उसका हाथ पड़कर सांवरी को अपनी गोद में खींच लिया। सांवरी के होश पूरी तरह से उड़ गए। वह जल्दी से बोली, "यह आप क्या कर रहे हैं? छोड़िए मुझे, आप नहीं जानते कि आप क्या कर रहे है?" तभी रणवीर उसकी तरफ देखते हुए बोला, "भा गई है मुझे तू पहली नजर में ही, जब तुझे कल मास्क में देखा था ना शाम को, तभी तेरी आंखें मुझे भा गई थी। अगर तू मेरी भाभी है, तो भैया को छोड़कर भागी क्यों? देख बता दे अगर कुछ है तो, मैं शायद तेरी मदद कर दूं। हो सकता है मैं तुझे भगा दूं।"
रणवीर की बात सुनकर सांवरी हैरानी से रणवीर की तरफ देखते ही रह गई। वह लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली, "क्या सच में आप ऐसा कर सकते है?" उसकी बात सुनकर रणवीर हां में सिर हिलाते हुए बोला, "बिल्कुल कर सकता हूं, लेकिन पहले मुझे वजह बता कि तू भैया को छोड़कर क्यों भागी?" इतना कहते हुए रणबीर के चेहरे पर इस वक्त मिस्टीरियस एक्सप्रेशन आ चुके थे। तभी सांवरी की आंखों से आंसू बहने लगे। उसके आंसुओं को देखकर एक बार फिर से रणवीर के चेहरे पर अजीब से एक्सप्रेशन आ गए। जब जब सांवरी के आंसू निकल रहे थे, तब तब रणवीर को अजीब से एहसास हो रहे थे, जो वो खुद नहीं समझ पा रहा था।
सांवरी अब अपना सिर नीचे तक की तरफ झुकाते हुए बोली, "क्या बताऊं मैं आपको, क्या आप यकीन करेंगे मेरी बात का कि आपके भाई कैसे है? मेरी शादी मेरी अम्मा ने उनके साथ की थी, क्योंकि उन्होंने मुझे।" इतना कहते हुए वह चुप हो गई। लेकिन रणबीर की एक आई ब्रो ऊपर की तरफ उठ गई थी। वह जानना चाहता था कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी आन पड़ी थी कि सांवरी को अपने से इतने बड़े इंसान से शादी करनी पड़ी।
वह बड़ी गहरी नजरों से सांवरी को देख रहा था। वही सांवरी अपना सिर नीचे की तरफ झुकाते हुए बोली, "मेरी शादी उनके साथ मेरी अम्मा ने की थी, क्योंकि।" इतना कहते हुए उसकी सांसे चौक होने लगी थी। उससे अपनी बात बताई भी नहीं जा रही थी। लेकिन फिर भी खुद को कंट्रोल करते हुए बोली, "क्योंकि आपकी अम्मा ने हमारी अम्मा को 20 लाख दिए थे हमारी शादी के लिए।" उसकी बात सुनकर रणवीर की आंखें बड़ी हो गई। आगे सांवरी बोली, "पिछले 1 साल से मैं आपके भाई के साथ रह रही हूं। लेकिन आपके भाई ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दी। जो वह मेरे साथ रात को करते हैं, वह तो मैं आपको बता भी नहीं सकती हूं।" इतना कहते हुए सांवरी की आंखों से आंसू और भी तेजी से बहने लगे।
अभी वह अपनी बात कह ही रही थी कि तभी गाड़ी रुक गई। जिससे रणवीर के चेहरे पर अजीब से एक्सप्रेशन आ गए। तभी राका, जो कि आगे बैठा था, वह गाड़ी से बाहर निकला और पीछे का दरवाजा खोलने ही वाला था। तभी रणवीर ने सांवरी को अपनी गोद से उतारते हुए साइड पर बैठा दिया। जिसे देखकर सांवरी हैरानी से रणवीर की तरफ देखने लगी। अब उसकी बची खुची उम्मीद भी जैसे टूट चुकी थी कि रणबीर उसकी हेल्प करेगा। उसे लगा कि शायद रणवीर उसे दिलासा देने के लिए उसके साथ इतना प्यार भरी बातें कर रहा था। लेकिन अब सांवरी को बहुत ज्यादा बुरा लग रहा था, क्योंकि घर जाकर उसे सच में बहुत बड़ी सजा मिलने वाली थी। वह जानती थी कि अभय उसे बिल्कुल नहीं छोड़ने वाला था।
तभी राका ने गाड़ी का दरवाजा खोला और सांवरी की तरफ देखते हुए बोला, "मालकिन, आपको मालिक बुला रहे हैं। उनका रास्ते में फोन आया था। वह बोल रहे थे, आप सीधा उनके कमरे में जाएंगे।" उसकी बात सुनकर सांवरी का रंग पीला पड़ गया। उसने अब एक नजर रणवीर को देखा, जो उसे ही बेफिक्री से देख रहा था। जैसे उसे इस चीज से कोई फर्क ही ना पड़ रहा हो। रणवीर को ऐसे बेफिक्री से बैठा हुआ देख सांवरी का चेहरा पूरी तरह से मुरझा गया। वह गाड़ी से बाहर निकली। उसने अब अपने कदम हवेली की तरफ बढ़ा दिए। हवेली की तरफ कदम बढ़ाते हुए ही सांवरी की आंखों से आंसू नहीं रुक रहे थे। क्योंकि वह जानती थी कि आज उसकी हालत जो होने वाली थी, उसे तो शायद अब कोई नहीं बचा सकता था।
दूसरी तरफ रणवीर, जोकि गाड़ी में बैठा हुआ था, उसके चेहरे पर मिस्टीरियस एक्सप्रेशन थे। वह अब दांत पीसते हुए बोला, "अभय ठाकुर, तेरी बर्बादी का टाइम शुरू हो गया है। क्योंकि तूने पंगा रणवीर राणा से लिया है। रणवीर राणा, जो एक मौत की जिती जागती मिसाल है। तेरा भाई तो मैने कब का टपका दिया। उसकी शक्ल पहले ही मुझसे मिलती थी, और तू मुझे नहीं पहचान पाया।" इतना कहते हुए रणबीर के चेहरे पर मिस्टीरियस स्माइल थी। "तूने मेरा भाई छीना, अब मैं तुझसे तेरी बीवी छीन लूंगा।"
इतना सोचते हुए रणबीर बाहर की तरफ आया। उसने अपनी पॉकेट में से सिगरेट निकालकर अपने होठों में दबा ली और सिगरेट पीने लगा।
वहीं दूसरी तरफ सांवरी धीमे-धीमे कदमों से अंदर की तरफ आ रही थी। इस वक्त हवेली में पूरी तरह से अंधेरा था। ऐसा लग रहा था, हवेली में कोई भी ना हो, क्योंकि घर के सभी मेंबर्स बाहर गए हुए थे, यहां तक की अभय की मॉम भी। सांवरी धीरे-धीरे कर अपने कदम अंदर की तरफ बढ़ा ही रही थी कि तभी उसकी नजर अभय पर गई, जो कि अब सामने रेलिंग पर टिककर खड़ा था। वह उसे गहरी नजरों से देख रहा था। सांवरी अपना चेहरा झुकाए धीरे-धीरे कर ऊपर की तरफ आई। वह लड़खड़ाती हुई जुबान से कुछ कहने को हुई कि तभी एक जोरदार तमाचा वहां पर गूंज गया। जिसे दरवाजे पर आ रहे रणबीर ने भी सुना था और उस थप्पड़ की गूंज सुनकर रणवीर की आंखें बड़ी हो गई।।
दूसरी तरफ सांवरी अब जमीन पर गिरी हुई थी और उसकी आंखों से आंसू तेजी से बह रहे थे।
To be continue..








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