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Ranveer aur sawri amne samne

मथुरा में,

सांवरी इस वक्त एक टूटे से घर के आगे खड़ी थी। उस घर को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे कि वह काफी पुराना हो। उस घर का लकड़ी का दरवाजा काफी हद तक टूटा हुआ था, जो की टेढ़ा हुआ पड़ा था। जिस वजह से वह ठीक से ना तो खुल पा रहा था, ना तो बंद हो पा रहा था। इसीलिए थोड़ा बहुत खुला ही था और उसे बंद करने के लिए जैसे एक कपड़ा लपेटा गया था। जो की कुंडी के आसपास घूमाना पड़ता था। वह घर काफी ज्यादा पुराना था और नीचे गाय के गोबर की लिपाई की गई थी। जो की पूरी तरह से सूखी हुई थी। इस वक्त रात का वक्त था। सांवरी अब उस घर के अंदर की तरफ जा ही रही थी कि तभी वहां पर एक औरत आई। जैसे ही उस औरत की नजर सांवरी पर पड़ी, एक पल के लिए वह हैरान हो गई।

यह औरत सांवरी की मामी शिल्पा थी। शिल्पा ने जैसे ही सांवरी को देखा, वह अपने होठों पर हाथ रखते हुए बोली, "क्या रे सांवरी, तू यहां पर क्या कर रही है। तुझे पता है, तेरा पूरा ससुराल तुझे ढूंढ रहा है और तू यहां पर है।" इस वक्त सांवरी ने अपने चेहरे पर से मास्क हटा लिया था। जिस वजह से शिल्पा ने उसे देखते ही पहचान लिया था। अब जिस तरह से शिल्पा चिल्ला कर बोल रही थी, उसके चिल्लाने भर से ही सांवरी का मामा राकेश भी बाहर की तरफ दौड़ा आया। वह शिल्पा की तरफ देखते हुए बोला, "क्यों गला फाड़ रही है रे madarchod, सुबह होती है, तेरा गला फाड़ना शुरू हो जाता है। रात हो जाती है, सोने भी नहीं तो देती।

ऐसी कौन सी तेरी किसी ने गांड मार ली है, जो इतना चिल्ला रही है।" तभी शिल्पा चिल्लाते हुए बोली, "आपका दिमाग तो खराब नहीं हो गया है। क्या क्या भोंके जा रहे हैं आप? किसी कुकुर की तरह मेरे पीछे-पीछे सूंघते हुए आ जाते हैं और बोलते हैं कि मैं भोंक रही हूं।" उसकी बात सुनकर राकेश मुंह बनाते हुए बोला, "बकवास बंद कर, अब यह बता कि हुआ क्या है, जो इतना गला फाड़ रही थी।" तभी शिल्पा चिल्लाते हुए बोली, "तुम्हें तुझे सामने दिखाई नहीं दे रहा है। तेरी भांजी खड़ी है, जिसे उसका ससुराल ढूंढ रहा है। इस पर तो इनाम भी रखा है। कलमुंही यहां पर आ गई है। अगर इसके घर वालों को पता चल गया ना, तो हमारे सिर पर तांडव करने आ जाएंगे। इसीलिए जल्दी से फोन कर दो इसके घर पर।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी एक बूढ़ा शख्स बाहर की तरफ आया, जो कि शिल्पा के चिल्लाने की वजह से बाहर की तरफ आया था।

वह शख्स इस वक्त इतना बूढ़ा था कि उसने अपनी आंखों पर चश्मा चढ़ा रखा था। उस चश्मे से भी उसे जैसे साफ दिखाई नहीं दे रहा था। उसने हाथ में लाठी पकड़ी हुई थी और बड़ी मुश्किल से वह चल रहा था। वही सांवरी, जोकि डर के मारे अपनी जगह पर सुन्न होकर खड़ी हो चुकी थी। उसकी आंखों से आंसू बहने ही वाले थे कि तभी उसकी नजर अपने नाना पर गई। नाना को देखकर एक पल के लिए सांवरी की आंखों में उम्मीद जाग उठी। वह जल्दी से नाना जी के पास जाते हुए बोली, "नानू, कैसे हो आप?" जैसे ही सांवरी के नाना बलवंत जी ने सांवरी की आवाज सुनी, एक पल के लिए वह हैरान रह गए। वह जल्दी से बोले, "सांवरी बिटिया, तू यहां पर क्या कर रही है, बेटा?"

तभी शिल्पा अपने माथे पर हाथ रखते हुए बोली, "क्या बे बूढ़े, तेरे को नहीं पता कि क्या करने आई होगी? यहां पर तुझे मिलने ही आई होगी और यह सुबह से अपने घर से गायब है और इसका पति इसे ढूंढ रहा है सुबह से। इनाम भी रख दिया है इस पर। अभी तक किसी को मिली नहीं है और वह यहां पर भी ढूंढ कर जा चुके हैं। पर तब तक तो यह भी नहीं थी यहां पर। उसने आदमियों को भेजा था अपने, हालांकि वह मुंबई में था।

पता नहीं, कहां मुंह काला करवा कर आ रही है यहां पर।" तभी बलवंत जी चिल्लाते हुए बोले, "चुप कर शिल्पा, तेरा दिमाग तो ठीक है। बच्ची अगर घर पर आई है, कोई वजह होगी। तू चिल्लाई जा रही है, चिल्लाई जा रही है। मुझे बच्ची से बात करने दे।" तभी शिल्पा मुंह बनाते हुए बोली, "तू तो चुप ही कर। फोन लगाओ इसके पति को।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी बलवंत जी राकेश को देखते हुए बोले, "अगर तुमने फोन लगाया, तो मैं तुम्हें यहां से बेदखल कर दूंगा, यह बात याद रखना।" जैसे ही राकेश ने यह बात सुनी, एक पल के लिए उसकी आंखें हैरत से फैल गई। वहीं दूसरी तरफ शिल्पा का दिमाग भी पूरी तरह से घूम गया। वह उसकी तरफ देखते हुए बोली, "अबे ओ बूढ़े, इस लड़की के पीछे पागल हो गया है क्या? बुढ़ापे में सठिया गए हो।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी बलवंत जी सांवरी का हाथ पकड़ते हुए बोले, "क्या बात है बेटा, तुम यहां पर क्या कर रही हो?"

अभी बलवंत जी इतना बोल ही रहे थे कि तभी सांवरी उनके गले लगते हुए बोली, "नानू, मुझे नहीं जाना उस घर में वापस। वह इंसान, इंसान कहलाने के लायक नहीं है। वह बहुत गंदा है नानू, मुझे बहुत।" इतना कहते हुए वह चुप हो गई। लेकिन सांवरी की बात बलवंत जी बहुत अच्छे से समझ चुके थे। वह अब उसको पीछे करते हुए बोले, "लेकिन बेटा पति है वह तुम्हारा और ऐसे ही तुम।" अभी वह बोल ही रहे थे कि तभी सांवरी बीच में रोकते हुए बोली, "नहीं नानू, वह पति नहीं है मेरा, वह जल्लाद है। मुझे मारता है वह।"

अभी वह बोल ही रही थी कि तभी शिल्पा बीच में आते हुए बोली, "तो क्या हुआ, अगर एक आध धर दिया तो। लड़कियों को इतना कमजोर नहीं होना चाहिए। अगर लड़के मार भी देना, तो कोई बात नहीं होती, खा लेनी चाहिए।" तभी पीछे से राकेश मन ही मन बड़बड़ाया, "तुमसे तो एक नहीं खाई जाती और तुम दूसरों को यह बात बता रही हो। तुम तो मेरे धर देती हो।" सवारी और बलवंत जी ने तो उसकी बात नहीं सुनी, लेकिन शिल्पा ने राकेश की बात साफ़ सुन ली थी। वह उसे घूरते हुए बोली, "अपनी जुबान ना अपने अंदर रखना, दोबारा ऐसी बात मत कर देना। नहीं तो लात आएंगे अभी तुम्हें।"

"तू चल, सुबह से कितनी बार फेरी मर चुके हैं वह लोग। चल तू अपने ससुराल चल।" वही बलवंत जी अब सांवरी का हाथ पकड़ते हुए बोले, "रुक जा शिल्पा, पहले उसकी बात तो सुनने दे।" तभी शिल्पा बीच में आते हुए बोली, "कुछ नहीं सुनना है। इसको इसके ससुराल छोड़कर आना है।" शिल्पा मन ही मन बोली, "अगर इसको ससुराल छोड़ कर आ गई, तो मेरे तो 20 लाख पक्के इनाम के।" इतना कहते हुए शिल्पा के चेहरे पर तिरछी मुस्कुराहट थी। इस वक्त शिल्पा के चेहरे पर जितना लालच था, वह साफ दिखाई दे रहा था। अब उसने जल्दी से अपने फोन को निकालना चाहा, तभी बलवंत जी उसके फोन पर हाथ रखते हुए बोले, "नहीं शिल्पा बेटा, थोड़ी देर रुक जा, मुझे बात करने दे।"

लेकिन शिल्पा ने उनकी एक नहीं सुनी। अब वह जल्दी से अपना हाथ छुड़ाते हुए बोली, "आप बात करते रहिए, लेकिन मेरी एक बात कान खोलकर सुन लीजिए, यह यहां पर नहीं रहेगी। हम इसे यहां पर नहीं रहने देंगे। इसका पति इसे ढूंढ रहा है। अगर वह उसे ढूंढ रहा है, तो सच में इसे प्यार ही करता होगा ना। कोई पागल थोड़ी है कि मार कुटाई करने के बाद अपनी लुगाई के पीछे इस तरह से पागल होता फिरे। छोड़िए हमारा हाथ।" इतना कहते हुए उसने हाथ छुड़ाया और अपने फोन पर एक नंबर डायल करने लगी। वही बलवंत जी का चेहरा अब पूरी तरह से सफेद पड़ चुका था। सांवरी तो थर-थर कांपने लगी थी। उसे अब अपना यहां पर आना सबसे ज्यादा गलत डिसीजन लग रहा था। वह अपने नानू की तरफ देखते हुए बोली, "नानू, मैं आपके आगे हाथ जोड़ती हूं और अब मैं यहां पर नहीं रुक सकती।" इतना कहकर वह लगभग से वहां पर भागने को हुई थी। तभी वहां पर तीन-चार गाड़ियां आकर रुकी। जैसे ही उन गाड़ियों की आवाज सांवरी के कानों में पड़ी,

तो वह जैसे अपनी जगह पर खड़ी-खड़ी सुन्न रह गई। वही Shilpa, जो कि फोन लगा रही थी, उनके चेहरे पर भी अब डेविल स्माइल तैर चुकी थी। वह अब मन ही मन बड़बड़ाई, "हो गया काम शुरू, मेरे तो 20 लाख पक्के।" इतना कहते हुए बड़ी अदा से राकेश की तरफ देख रही थी और राकेश जी चेहरे पर भी अब कुटिल मुस्कराहट तैर गई।

दूसरी तरफ बलवंत जी भी अब अपनी जगह पर खड़े-खड़े जम चुके थे। उन्हें पता नहीं क्यों सांवरी का रोना अच्छा नहीं लग रहा था। जरूर कोई ना कोई बात तो थी ही, जो सांवरी इतना ज्यादा रो रही थी। गाड़ियों के रुकते ही उनमें से एक लड़का बाहर की तरफ आया। वह लड़का दिखने में इतना ज्यादा हैंडसम था। उसकी वह ब्राउन आइज उसे और भी ज्यादा हैंडसम बना रही थी। उसके आइब्रो के साइड पर एक स्टड डाला हुआ था और ऊपर से उसकी दाढ़ी काफी हद तक बड़ी हुई थी, जो कि उसे और भी ज्यादा अट्रैक्टिव बना रही थी उसने अपने स्लीव्स को पूरी तरह से ऊपर की तरफ फोल्ड किया हुआ था। अपने होठों में इस वक्त सिगरेट फसाई हुई थी। साथ में उसकी आंखों पर ब्लैक शेड्स भी चढ़े हुए थे।

और यह लड़का कोई और नहीं, बल्कि रणवीर था। रणबीर जैसे ही गाड़ी से बाहर निकला, तो उसकी नजर सामने खड़ी सांवरी पर गई। सामने खड़ी सांवरी को देखकर एक पल के लिए उसके लिए जैसे वक्त रुक सा गया। सांवरी दिखने में काफी हद तक बहुत ज्यादा खूबसूरत थी। वही सांवरी, उसकी सांसे तो गहरी होनी शुरू हो गई थी। उसने अभी कुछ देर पहले ही रणवीर को देखा था। अब एक बार फिर से रणवीर को अपने सामने देखकर उसके पैर पूरी तरह से थर-थर कांपने लगे।

उसकी आंखों से आंसू तेजी से बहने लगे। वह तो जैसे अपना पैर आगे तक नहीं बढ़ा पा रही थी। वहीं रणवीर का भी कुछ ऐसा हाल था। लेकिन वह किसी और तरीके से था। वह डर नहीं रहा था, उसकी आंखों में कुछ और ही था। आज तक किसी को ना देखने वाला रणवीर एक लड़की को अपनी नजर भर कर देख रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर क्यों? लेकिन अगले ही पल, राका, जो कि उसका बॉडीगार्ड था। वह उसके कंधे पर हाथ रखते हुए बोला, "मालिक, जल्दी चलिए, भाभी को लेकर जाना भी है।" जैसे ही उसने भाभी कहा, एक पल के लिए रणबीर के चेहरे पर शिकन आ गई। लेकिन अगले ही पल उसने खुद को नॉर्मल किया। सच ही तो था, आखिर सांवरी थी तो उसकी भाभी ही।

रणबीर अब अपने कदमों से चलते हुए सांवरी की तरफ आया। जैसे-जैसे वह अपने कदम सांवरी की तरफ बढ़ा रहा था, वैसे-वैसे रणवीर की नजरे उसके चेहरे पर और भी ज्यादा गहरी होती जा रही थी। सांवरी की वह काली आंखें और ऊपर से उसकी पतली सी नाक पर वह ब्लैक कलर की डायमंड वाली नोज रिंग, जो की हद से ज्यादा खूबसूरत थी। उसके गोरे रंग की तो वह और भी ज्यादा शोभा बढ़ा रही थी। ऊपर से पतले से होंठ, जोकि नेचुरली पिंक थे। रणबीर अब पूरी तरह से उसके सामने आकर खड़ा हुआ, तो एक पल के लिए सांवरी का तन-बदन जैसे ठंड पड़ गया।

वहीं रणवीर अब उसकी तरफ देखते हुए बोला, "चले सांवरी जी।" जैसे ही उसने सांवरी जी कहा, पीछे खड़ा राका भी हैरान रह गया। वही सांवरी उसकी तरफ देखते हुए रोते हुए बोली, "प्लीज, मुझे छोड़ दीजिए। मुझे, मुझे वहां पर नहीं जाना। वह इंसान जल्लाद है।" सांवरी की बात पर रणबीर अब उसकी तरफ गहरी नजरों से देखते हुए बोला, "और आप ऐसा क्यों बोल रही हैं?" जैसे ही उसने यह बात कही, सांवरी की आवाज उसके गले में अटक गई। वह रणवीर को क्या ही बताएं? लेकिन उसकी आंखों से आंसू तेजी से बह रहे थे, जो उसकी दास्तान को बयां कर रहे थे। पता नहीं क्यों, रणवीर को उसके बहते हुए आंसू बहुत ही अजीब लग रहे थे। उसे अच्छा नहीं लग रहा था जैसे।

To be continue...

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