
मथुरा,
Rayaa गांव,
एक लड़की सड़क पर चले जा रही थी। इस वक्त उसने एक पजामा टीशर्ट पहना हुआ था और उसका मुंह पूरी तरह से एक मास्क से ढका हुआ था। उस लड़की की आंखों से आंसू बह रहे थे। उस लड़की की नजरे इधर-उधर घूम रही थी, जहां पर लोगों की चहल पहल लगी हुई थी। वह इस वक्त एक मार्केट में खड़ी थी, जहां पर लोग सब्जियां वगैरा खरीद रहे थे। उस लड़की की आंखों में आंसू थे। तभी उस लड़की की नजर एक औरत पर पड़ी, जो कि वहां पर खड़ी सब्जियां खरीद रही थी। उस औरत को देखकर लड़की की हालत और भी खराब होने लगी और आंखों से आंसू झर झर बहने लगे।
पिछले 6 घंटे से सफर करके वह मथुरा पहुंची थी। अब वह लड़की एक औरत को देख रही थी, जो कि उसकी मां थी। यह लड़की कोई और नहीं, सांवरी थी। ना चाहते हुए भी सांवरी खुद को रोक नहीं पाई थी। वह इस वक्त अपने गांव पहुंच चुकी थी। भले ही वह अपने गांव पहुंच चुकी थी, लेकिन उसे इतना हक भी नहीं था कि वह अपनी मां को गले लगा सके। क्योंकि अगर वह अपनी मां के पास चली जाती, तो हो सकता था कि अभय को पता चल जाता कि वह इस वक्त अपने गांव पहुंच चुकी है।
यह बात सांवरी बहुत अच्छी तरह से जानती थी कि अब तक अभय उसे कहां कहां तक नहीं ढूंढ रहा होगा। इस वक्त सांवरी का दिमाग पूरी तरह से ब्लैंक पड़ चुका था। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर वह जाए तो जाए कहां। उसके लिए तो कोई रिश्ता भी नहीं था, जहां पर वह जा सके। लेकिन रह रहकर उसे अपनी मां का ख्याल आ रहा था। इस वजह से वह अपनी मां के पास आई थी। पर अब उसे एक बार फिर से अपनी मां की बातें याद आने लगी थी। उन बातों को याद कर वह यह तो समझ गई थी कि अगर वह अपनी मां के सामने गई, तो वह दोबारा से उसे अभय ठाकुर के सामने कर देगी। यह चीज तो वह बिल्कुल भी नहीं चाहती थी, क्योंकि पिछले 1 साल से वह नरक भोग रही थी। अब उसमें इतनी जान नहीं थी कि वह और नरक भोग सके। अभी वह सिर्फ 17 साल की थी, लेकिन इस वक्त उसका शरीर ऐसा बन चुका था, जैसे वह 20 साल की हो।।दिखने में उसका शरीर सुडोल हो चुका था, जोकि बहुत ज्यादा खूबसूरत लगता था और वह भी अभय की वजह से।
अपनी मां को देखकर उसकी आंखों में आंसू तो आ ही रहे थे, साथ ही साथ वह गहरी गहरी सांस भर रही थी। इस वक्त जिस तरह से वह अपना चेहरा छुपा कर साइड पर खड़ी रो रही थी, वही जानती थी कि वह किस तरह से खुद को संभाले खड़ी थी। ना तो वह अपनी मां से मिल सकती थी, ना ही वह अपने बाबा से मिल सकती थी। वह रोते-रोते अब पीछे की तरफ पलटने को हुई कि तभी वह किसी से टकरा गई। जैसे ही वह किसी से टकराई, तो उसकी हाथों में पकड़ी हुई एक पानी की बोतल, जो कि उसने मुंबई से चलते वक्त ली थी, वह उसके हाथों से छूट गई।।सामने खड़े शख्स के ऊपर पानी के छींटे जा पड़े। तभी वह लड़का चिल्लाते हुए बोला, "मादरचोद, यह कौन है, जिसे मौत पड़ी है, जो रणवीर ठाकुर के आगे आकर खड़ा हो गया।
इतनी मजाल साले बहनचोद, किसकी मां की भोंसड़ी फटी है।" इतना कहते हुए उस लड़के ने अपनी आंखें ऊपर की तरफ उठाई और उसकी ब्राउन आंखें सामने खड़े शख्स से टकरा गई। जिसकी आंखें पूरी तरह से काली थी। वही सांवरी, जो कि उस शख्स के टकराई थी।। टकराने की वजह से उसकी टोपी, जो कि उसने पहनी हुई थी, वह नीचे की तरफ गिरी। अगले ही पल, उसके बाल पूरी तरह से खुल गए और खुलने की वजह से आधे बाल उसके चेहरे पर आ गए थे। लेकिन फिर भी उसका चेहरा साफ दिखाई दे रहा था। Ranveer की नजर उसके चेहरे पर ठहर चुकी थी। एक पल के लिए जैसे वह कुछ कहना ही भूल गया था। वह पूरी तरह से चुप हो गया था और सामने खड़ी लड़की को देख रहा था। जिसे देखकर आज पहली बार रणवीर की आंखों में एक अलग ही खुमारी छाने लगी थी। तभी पीछे से एक लड़का दौड़ा-दौड़ा आया और रणवीर के कंधे पर हाथ रखते हुए बोला,
"ठाकुर साहब, मुश्किल हो गई, भैया की दुल्हन भाग गई और वह मिल नहीं रही हैं।" उसकी बात सुनकर रणवीर की आंखें हैरत से फैल गई। उसने पलट कर अब देखा, तो वह रणवीर का ही आदमी राका खड़ा था। रणवीर हैरानी से राका को देख रहा था। राका हां में सिर हिलाते हुए बोला, "वह मुंबई से यहां पर आ रहे है, जल्दी से कुछ करो।" जैसे ही सामने खड़ी सांवरी ने यह बात सुनी, एक पल के लिए उसका पूरा शरीर ठंडा पड़ गया। वह इतना तो जान गई थी कि ठाकुर से मतलब था अभय से, मतलब साफ था कि वह मथुरा आ रहा था।
वह बड़ी मुश्किल से भाग कर मथुरा आई थी। अब वह अभय के हाथों में तो बिल्कुल भी नहीं लगना चाहती थी। अब वह जल्दी से वहां से गायब हो गई कि तभी रणवीर ने पलट कर पीछे की तरफ देखा। उस लड़की को गायब पाकर एक पल के लिए वह हैरान हो गया। तभी राका एक बार फिर से रणवीर के कंधे पर हाथ रखते हुए बोला, "चलो छोटे मालिक, नहीं तो देर हो जाएगी। ठाकुर साहब किसी भी वक्त पहुंचते होंगे।" उसकी बात सुनकर रणवीर ने हां में सिर हिला दिया। लेकिन उसकी आंखों के सामने उस लड़की की आंखें घूम रही थी। भले ही उस लड़की ने मास्क पहन हुआ था, पर अब रणबीर के होठों पर एक मध्यम सी मुस्कराहट तैर गई थी।
रणवीर अभय का छोटा भाई दिखने में अभय से भी ज्यादा हैंडसम था। रणवीर और अभय में बहुत फर्क था। जहां अभय बहुत ज्यादा गुस्सा और हाइपर हो जाता था, वहीं रणवीर हमेशा समझदारी से काम लेता था। लेकिन दोनों की एक आदत सेम थी गालियां निकालने वाली। रणवीर का गुस्सा ऐसा था कि पहले तो वह आता नहीं था, जब भी उसका गुस्सा आता था, तो तबाही लाता था। अभय भी उसके गुस्से के आगे कुछ भी नहीं था। भले ही अभय उसका बड़ा भाई था, लेकिन अभय को रणबीर के गुस्से से हद से ज्यादा डर लगता था।
पर इन बातों को दरकिनार कर दोनों भाइयों में बहुत बेशुमार प्यार था। अब रणबीर ने जब अभय के बारे में यह बात सुनी, तो उसे बहुत ज्यादा अजीब लग रहा था। उसे यह उम्मीद तो बिल्कुल भी नहीं थी कि उसकी पत्नी उसे छोड़कर भाग जाएगी। तभी उसके आगे आकर एक गाड़ी रुकी और गाड़ी रुकते ही वह गाड़ी में बैठा और वहां से निकल गया।
दूसरी तरफ सांवरी, जो अभी भी थोड़ी दूरी पर खड़ी उन सबको देख रही थी। उसकी आंखों से आंसू तेजी से बहने लगे थे। वह रोते हुए बोली, "मैं जाऊं तो जाऊं कहां, मैंने सुबह से कुछ नहीं खाया। मेरा पेट दुख रहा है और ऊपर से बाबू साहेब के अगर मैं हाथ लग गई, तो वह मुझे जिंदा जमीन में गाढ़ देंगे। पिछले 1 साल से मैंने दर्द के अलावा कुछ नहीं देखा। मैं किससे शिकायत करूं? मेरी तो कोई शिकायत भी नहीं सुनेगा। अम्मा बापू के पास जाती हूं, तो अम्मा एक बार फिर से मुझे अभय ठाकुर के हवाले कर देगी।" इतना कहते हुए उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। लेकिन अब अपने आंसुओं को साफ करते हुए बोली, "दादाजी, अब वही एक रास्ता है मेरे पास। अगर मैं उनके पास जाऊं, तो हो सकता है कि वह मेरी मदद कर दें।" इतना कहते हुए सांवरी अपनी आंखों से आंसू पोंछ रही थी।।
वहीं दूसरी तरफ,
अभय की गाड़ियों का काफिला मथुरा की सड़कों पर दौड़ रहा था। इस वक्त अभय का चेहरा गुस्से से लाल पड़ा हुआ था। उसने दांत पूरी तरह से पीस रखे थे। वह मन ही मन बड़बड़ाया, "साली कुत्तिया, अब तक तो मैंने तेरे मुंह पर पेशाब नहीं किया, लेकिन अब तुझे ऐसा छोडूंगा नहीं। चोदते चोदते तेरे मुंह के ऊपर पेशाब ना कर दिया, तो मेरा नाम भी अभय ठाकुर नहीं। ऐसी हालत करुंगा कि कुत्तों से बढ़कर तेरी हालत हो जाएगी, साली बहन की लोड़ी।"
वह अभी अपने ख्यालों में ही था कि तभी उसकी गाड़ी राज महल के आगे आकर रुकी। राजमहल को देखते ही अभय ने अपने चेहरे के एक्सप्रेशन नॉर्मल किए। अभी अभय की गाड़ी राजमहल में आकर रुकी ही थी कि तभी दो चार गाड़ियां और राजमहल में दाखिल हुई। यह गाड़ी किसी और की नहीं, रणवीर ठाकुर की थी।
रणवीर जैसे ही अंदर की तरफ आया, तो अभय के एक्सप्रेशन और भी ज्यादा चेंज हो गए। वह बिल्कुल ही नॉर्मल होकर रणवीर को देखकर मुस्कुराया और अपने कदम रणवीर की तरफ बढ़ाते हुए बोला, "कैसे हो छोटे नवाब?" उसकी बात सुनकर रणवीर हल्का सा मुस्कुराते हुए बोला, "ठीक हूं भैया, क्या हो गया, भाभी?" अभी वह बोल ही रहा था कि तभी अभय उसकी तरफ देखकर बोला, "मत कहो उसे भाभी, भाभी कहलाने लायक नहीं है वह औरत। जानते हो ना, छोड़कर भाग गई मुझे।"
अभय की बात सुनकर रणवीर बिल्कुल ही चुप हो गया। वह अब सख्त लहजे में बोला, "लेकिन भाई, जो मर्जी हो जाए, उस औरत को मैं आपके कदमों में लाकर फेंक लूंगा। यह मेरा वादा रहा और आप जानते हैं कि रणवीर अपना वादा पूरा करता है।" इतना कहते हुए रणबीर का चेहरा पूरी तरह से एक्सप्रेशन लैस था।
तभी अभय उसकी तरफ देखकर बोला, "लेकिन तूने तो अपनी भाभी का चेहरा भी नहीं देखा है।" तभी रणवीर अभय की तरफ देखकर बोला, "तो आप दिखा दीजिए ना, फोटो दिखा दीजिए। सुबह तक भाभी आपके कदमों में होगी।" उसकी बात सुनकर अभय के चेहरे पर तिरछी मुस्कुराहट तैर गई। अगले ही पल, उसने अपने फोन से रणवीर की तरफ एक फोटो दिखाई। फोटो को देखकर एक पल के लिए रणवीर अपनी जगह पर फ्रीज हो चुका था। वह अभय की तरफ देखते हुए बोला, "क्या सच में भाई, यह भाभी हैं। यह तो आपसे बहुत छोटी है।"
उसकी बात पर अभय उसे तिरछी नजरों से देखते हुए बोला, "भाभी भाभी होती है, रणवीर और यह लड़की मुझे किसी भी हालत में चाहिए।" अभय की बात सुनकर रणवीर को बहुत अजीब सा लग रहा था। उसके दिमाग में अब बहुत कुछ चल रहा था। वह अभय की तरफ देखकर बोला, "आपने इतनी छोटी लड़की से शादी..." इतना कहकर वह चुप हो गया, क्योंकि अभय अब वहां से जा चुका था।
लेकिन रणवीर को अब यह चीज बहुत अजीब लग रही थी। उसने अब सामने खड़े राका की तरफ देखा। वह भी हैरानी से अभय को देख रहा था, क्योंकि अभय की उम्र 27 साल की थी और वह लड़की महज 17 साल की लग रही थी। वहीं रणवीर भी यह चीज सोचने पर मजबूर हो गया था। रणवीर इस वक्त 23 साल का था और अभी वह शादी नहीं करना चाहता था। क्योंकि उसे अपनी बराबर की लड़की नहीं मिल रही थी। वह एक बहुत सुशील और संस्कारी लड़की चाहता था। लेकिन उसे ऐसी लड़की अब तक नहीं मिली थी, क्योंकि जो भी उसके पीछे लड़की आई थी, वह उसके पैसों को देखकर ही उस पर मर मिटी थी। भले ही रणवीर बहुत ज्यादा हैंडसम था, लेकिन सभी लड़कियों को उसकी दौलत ही चाहिए थी। इसी वजह से रणवीर किसी की और देखता तक नहीं था।
रणवीर फोटो की तरफ देखते हुए बोला, "यह लड़की की आंखें कुछ देखी देखी लग रही है, राका?" यह कहते हुए अचानक ही रणवीर की आंखें बड़ी हो गई। तभी उसे याद आया कि जब वह मार्केट में था, उस लड़की की आंखें same इस लड़की से मिल रही थी। जो इस वक्त अभय ने उसे दिखाई थी। यह चीज सोचते हुए उसकी आंखें बड़ी हो गई और जल्दी से वह राका की तरफ देखते हुए बोला, "जल्दी गाड़ी निकाल, राका।"
To be continue...








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