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Frusasted abhay! periods

होटल पैराडाइज,

अभय इस वक्त शर्टलेस सावरी के सामने खड़ा था और सावरी की सांस उसके गले में अटक चुकी थी। क्योंकि जिस तरह से अभय पिछली रात सावरी के साथ वाइल्ड होकर इंटिमेट हुआ था, अभी तक सावरी का शरीर दर्द से तड़प रहा था। लेकिन अब जिस तरह से अभय एक बार फिर से उसके सामने अभय शर्ट निकाल कर खड़ा हो गया, तो सावरी की सांसे अब गहरी होने लगी थी। उसकी आंखों से आंसू तेजी से बहने लगे थे, क्योंकि अभी उसकी हालत नहीं थी कि वह अभय को और झेल पाती। उसे ऐसा लग रहा था, अगर एक बार फिर से अभय ने अपनी हैवानियत उसे दिखाई, तो वह शायद मर ही जाएगी।।

वह रोते हुए ना में सिर हिला कर बोली, "नहीं, प्लीज, रुक जाइए। हमें बहुत दर्द हो रहा है।" तभी अभय उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोला, "बहनचोद, साली कुत्तिया, तू मुझे मना करेगी।" इतना कहते हुए अभय पूरी तरह से उसके ऊपर झुका। अगले ही पल उसकी टांग पकड़कर उसने उसे पूरी तरह से अपनी तरफ खींच लिया। जिससे सावरी की जान उसकी हलक में अटक गई। अभय ने अब उसकी गर्दन को पकड़ा और उसे बेड पर धंसा दिया।

वह दांत पीसकर बोला, "साली रंडियां, एक तो मां ने तुझे मेरे गले बांध दिया और ऊपर से मुझे नखरे दिखाती है। रुक, तुझे अभी बताता हूं।" इतना कहकर वह आसपास देखने लगा। जिस तरह से वह आसपास देख रहा था, ऐसा लग रहा था, जैसे कोई चीज ढूंढ रहा हो। उसकी इस तरह से आसपास देखता देखकर सावरी का दिल घबराने लगा। अब वह लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली, "अरे नहीं, नहीं कुंवर सा, मेरी इतनी औकात नहीं है कि मैं आपको मना कर सकूं। बस हम यह कह रहे थे।"

"तू अपना कहना ना कहना अपनी गांड में डाल। मुझे तेरी कोई बात नहीं सुननी। मुझे बस तेरी भोंसड़ी चाहिए, समझी।" अभय की बातें सुनकर सावरी की आंखें नम होने लगी थी। उसे अपने दिल में एक हुक महसूस हो रही थी। कहां शादी के बाद लड़कियों के कई ख्वाब होते हैं, यहां तो अभय ने उसके सारे ख्वाब ही चकनाचूर कर दिए थे। शादी तो उसकी अभय से हो गई थी, लेकिन अभय पत्नी के तौर पर अभी भी कुछ नहीं समझता था। वही सावरी, जो की लाखों सपने संजोकर अभय के साथ घर में आई थी, तब से अभय उससे नफरत करता था। क्योंकि अभय की मां ने उसकी शादी जबरदस्ती सावरी से की थी। यह चीज अभय को सवारी से और भी नफरत करने पर मजबूर करती थी। उनका सिर्फ एक रिश्ता था। वह था सेक्स का, जो कि अभय पूरी शिद्दत से निभा रहा था। लेकिन पत्नी, वह तो जैसे अभय को उसमें नजर ही नहीं आ रही थी। एक हफ्ता हो गया था उनकी शादी को, लेकिन अभय उसके करीब नहीं आया था। लेकिन कल जिस तरह से अभय उसके करीब आया, उसने तो जैसे सावरी की जान ही उसके बदन से अलग कर दी थी। जिस तरह से अभय उसके साथ इंटीमेट हुआ था, वह बेहद ब्रूटल था। सावरी की पूसी पूरी तरह से सूज चुकी थी। उसे अपनी पुसी में हद से ज्यादा दर्द हो रहा था। ऊपर से अभय ने उसकी ass तक को नहीं छोड़ा था। उसकी ass में से भी ब्लड निकल रहा था। जिस वजह से उसे अपनी बैक में भी हद से ज्यादा दर्द हो रहा था। बेचारी सावरी चल भी ऐसे रही थी, जैसे उसके पेट में चोट लगी हो। उसकी कमर से लेकर उसका पैर पूरी तरह से दर्द से भर चुका था सही तरह से वह खड़ी तक नहीं हो रही थी।

इस वक्त अभय अपनी लाल आंखों से सावरी को देख रहा था, जो अपनी नम आंखों से अभय को देख रही थी। अभय उसके ऊपर झुका और अगले ही पल उसके बालों को मुट्ठी में भरते हुए बोला, "जितना मर्जी भोलेपन की चादर अपने चेहरे पर चढ़ा लो, लेकिन इस चद्दर को मैं बहुत अच्छी तरह से जानता हूं। तुम जैसी घटिया बहुत आई मेरी जिंदगी में। जो चाहती थी मेरे पैसे पर राज करना और तेरी यह नियत जो तेरे भोले भाले चेहरे के पीछे छुपी है ना, वह मैं बाहर निकाल कर रहूंगा।

तेरा यह भोला पन मैंने नोच कर दिखा ना दिया, तो मेरा नाम भी अभय ठाकुर नहीं।" इतना कहकर अभय जल्दी से उसके पास आया। तभी सवारी, जो कि अपनी जगह पर खड़ी थी, तभी उसे अपनी pussy में गीलापन महसूस हुआ। उस गीलेपन को महसूस कर सावरी बुरी तरह से कांपने लगी। अगले ही पल, सांवरी ने नीचे की तरफ देखा, तो उसके थाई पार्ट्स पर हल्का-हल्का ब्लड लगा हुआ था। जिसे साफ साबित हो रहा था कि उसे पीरियड्स आ चुके है। वही अभय, जो कि उसकी तरफ बढ़ रहा था, उसने भी उसके थाई पार्ट्स की तरफ देखा, तो उसकी आंखें बड़ी हो गई। अब उसने दांत पीस लिए। वह गुस्से से कांपते हुए बोला,

"साली बहन की लोड़ी, इसे भी अभी आना था। बहन चोद, मूड की सारी की मां चूद गई है।" इतना कहते हुए अभय का चेहरा पूरी तरह से गुस्से में भर गया था। इस वक्त वह पूरी तरह से फ्रस्ट्रेटेड था, क्योंकि उसके दिमाग में सिर्फ इस वक्त सावरी के साथ सेक्स करना चल रहा था जो कि वह बहुत पैशनेट होकर करने वाला था। लेकिन अब सावरी को पीरियड्स आए हुए देखकर अभय का गुस्सा और भी बढ़ गया था। अब वह गुस्से से गरजते हुए बोला, "जा जल्दी निकल यहां से बहन की लोड़ी, पहले ही हरामी कहीं की, ऑल सेट कर बैठी हुई है। अब देख कैसे चूतड़ उठाकर भाग गई है।" कहते हुए उसने सावरी की तरफ देखा, जो कि अब बाथरूम में घुस चुकी थी।

वही अभी अपनी जगह पर खड़ा हुआ था। फ्रस्ट्रेटेड होते हुए उसने अब अपनी जेब से सिगरेट निकाली और दोबारा से सिगरेट के लंबे कश भरने लगा। दूसरी तरफ सावरी, जो की बाथरूम में थी, वह फूट-फूट कर रोने लगी। डर के मारे उसके हाथ पैर ठंडे पड़ चुके थे, क्योंकि आज सच में वह अभय को बिल्कुल भी झेल नहीं पाती। क्योंकि उसका बदन हद से ज्यादा दर्द कर रहा था। जिस तरह से अभय उसके साथ इंटीमेट होता, हो सकता था कि शायद उसकी जान ही उसके बदन से निकल जाती। यह चीज वह बहुत अच्छी तरह से जानती थी कि आज उसमें जान बिल्कुल भी नहीं थी। अब किसी तरह से उसने खुद को बाथरूम पहुंचाया और इधर-उधर सामान ढूंढने लगी। क्योंकि इस वक्त उसे सेनेटरी नैपकिन की जरूरत थी और यह चीज देखकर उसने बाथरूम में देखा। होटल का बाथरूम होने की वजह से वहां पर हर एक फैसिलिटी अवेलेबल थी। वहीं पर सेनेटरी नैपकिन भी थी और उन्हें देखकर अब सावरी ने थोड़ी गहरी सांस ली।

अपनी पैंटी तो वह पहले ही बाहर से लेकर आई थी। अब उसने जल्दी से पेंटी पहनी और उसमें senatory napkin रखकर बाहर जाने को हुई। लेकिन उसके हाथ पैर बुरी तरह से कांप रहे थे। क्योंकि इसकी हिम्मत नहीं पड़ रही थी कि वह बाहर कदम भी रखें।

वहीं दूसरी तरफ,

बाहर खड़ा अभय पूरी तरह से फ्रस्ट्रेटेड होकर अपनी लोअर बॉडी की तरफ देख रहा था। उसकी पेंट पर पूरी तरह से उभार बना हुआ था। उसका dick इस वक्त पूरी तरह से हार्ड पोजीशन में था। अब वह उसे तंग कर रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर वह करें क्या? सावरी, जो की बाथरूम में थी, उसने हल्का सा दरवाजा खोलकर अभय की तरफ देखा, जो फ्रस्ट्रेटेड होकर अपनी कमर की तरफ देख रहा था। उसको इस तरह से अपनी लोअर बॉडी की तरफ देखता पाकर उसकी नजर भी खुद-ब-खुद उसकी लोअर बॉडी की तरफ गई, तो उसके होश पूरी तरह से उड़ गए।

डर के मारे एक बार वह फिर से बुरी तरह से कांपने लगी। उसकी पहले ही बाहर जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी। अब तो उसकी जैसे जान ही उसके गले में अटक चुकी थी। अब तो वह बाहर जाने का रिस्क ही नहीं ले सकती थी। उसे अभय पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं था। अभय का क्या पता कि वह पीरियड्स में ही उसके साथ सेक्स करने लगता, तो उसकी हालत तो और भी पत्थर हो जाती। इसीलिए वह चुपचाप बाथरूम का दरवाजा बंद कर एक साइड पर होकर बैठ गई। इस वक्त उसकी आंखों से आंसू तेजी से बह रहे थे।

वही बाहर खड़ा अभय फ्रस्ट्रेटेड होकर खुद से ही बोला, "मुझे इससे पूछना होगा कि कितने दिन के लिए है। साला, मतलबी बहुत बहनचोद है। साला, जब देखो, लंड को आग पहले लग जाती है।" अब वह अपनी डिक की तरफ देखकर बोला, "साले बहन चोद, बैठ जा, जब देखो, सब की गांड फाड़ने को फिरता है।

अब उसकी भोसड़ी से खून निकल आया, तो मैं भी क्या करूं? साली चूतियां को भी आज ही होना था। साला गांडू तो मैं हूं। जो इसकी भोंसड़ी के पीछे मरा जा रहा हूं। यह बहन चोद बैठने का नाम नहीं ले रहा।" इतना कहते हुए उसने अपनी लोअर बॉडी पर हाथ रखकर उसे नीचे की तरफ करने की कोशिश की। लेकिन एक बार फिर से उसका dick पूरी तरह से अकड़ कर खड़ा हो गया। अब वह गुस्से से दांत खींचते हुए बोला,

"साली बहन चोद, तू खड़ा हो जा पहले, फौजी है जो तैनात किया है तुझे किसी ने।" अब उसने अपनी पैंट उतारी और धीरे-धीरे कर अपनी लोअर बॉडी को सहलाने लगा। सहलाते हुए कब वह अपने डिक को मस्ट्यूटयूट करने लगा, उसे भी पता नहीं चला। इस वक्त उसका यह करना बहुत जरूरी था, वरना उसे एक अलग ही बेचैनी सी लगी रहती है।

तकरीबन 15:20 मिनट मस्ट्यूट करने के बाद भी उसका काम नहीं हो रहा था। अभय के हाथ पूरी तरह से लाल पड़ चुके थे। अब उसका चेहरा और भी गुस्से से लाल होने लगा, क्योंकि उसके हाथ हद से ज्यादा दर्द करने लगे थे। अब वह गुस्से से कांपते हुए बोला, "साली को खून आ रहा है, इसमें मैं क्या कर सकता हूं। मुझे तो अपनी प्यास बुझानी चाहिए ना। मुझसे नहीं रुका जाएगा।" इतना कहकर उसने अपने कदम बाथरूम की तरफ बढ़ा दिए।

To be continue...

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