
रात के 8 बजे,
अभय का कमरा,
सावरी इस वक्त बेड पर अभी भी वैसे ही लेटी हुई थी और उसके बदन में जैसे बिल्कुल भी जान नहीं थी। अभी भी वह इसी तरह बेजान उस ब्लड वाली चद्दर पर लेटी हुई थी। उसकी ass से जो ब्लड निकला था, जो नीचे की तरफ बह रहा था। वह वैसे ही सूख चुका था। उसका चेहरा इस वक्त पूरी तरह से बेजान नजर आ रहा था। रो-रो कर उसकी आंखों से जो आंसू निकले थे, वह आंसू उसके गालों पर जम से गए थे। अभी दोपहर 1 बजे का टाइम हो गया था, लेकिन वह अपनी जगह से हिली तक नहीं थी। उसकी छोटा सा सिर, जिसमें मांग में भरा हुआ सिंदूर, उसे खूबसूरत तो बना रहा था, लेकिन उसे अभागन भी बता रहा था।
तभी रूम का दरवाजा खुला और अभय अंदर की तरफ आया। इस वक्त उसने हद से ज्यादा ड्रिंक की हुई थी। उसने जैसे ही सावरी को सामने लेटे हुए देखा, तो उसकी आंखें एक बार फिर से सर्द हो गई। जाहिर सी बात थी, जिस तरह से अभय उसके साथ इंटीमेट हुआ था, वह बहुत ज्यादा ब्रूटल था। जिस वजह से जब अभय ने उसे छोड़ा, कुछ ही देर में सावरी बेहोश हो चुकी थी। तब से सावरी को होश नहीं आया था। अभी को ऐसा लग रहा था कि सावरी पूरी तरह से गहरी नींद में है। अभय अंदर की तरफ आया और अगले ही पल उसने साइड पर रखा हुआ पानी का जग उठाकर सावरी के चेहरे पर उड़ेल दिया।
जैसे ही अभय ने पानी का जग सावरी के चेहरे पर उड़ेला, सावरी एकदम से गहरी सांस लेते हुए होश में आई। अगले ही पहले उसका शरीर एक पल के लिए कांप उठा। उसने जब अभय को अपनी आंखों के सामने देखा, तो एक बार फिर से उसके हाथ पैर ठंडे पड़ने लगे। वही अभय अब उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोला, "साली बहनचोद, ऐसा कौन सा तेरी गांड़ सोने के लिए फुदक रही थी। तुझे छोड़ कर चार घंटे बाहर क्या गया, तू साली भड़वी सो गई। तुझे कमरा साफ करने का नहीं पता, हरामजादी।" इतना कहते हुए अभय का चेहरा गुस्से से लाल था।
उसकी गालियां सुन कर सावरी को बहुत तकलीफ हो रही थी। अभय एक बार फिर से उसे देखते हुए बोला, "उठ जा बहन की लोड़ी, गांड़ चोदूं दोबारा, तब जाकर उठेगी। चल जल्दी साफ कर ये सारा।" इतना कहते हुए उसने पूरे रूम की तरफ इशारा किया। सावरी ने भी अब किसी तरह खुद को संभाला और बेड से उठकर चद्दर उठाकर खुद को ढकने लगी। तभी अभय ने उसके हाथ से चद्दर लेकर खींचते हुए बोला, "चल बहन की लोड़ी, किसी पराए मर्द के सामने है, जो तू नंगी होकर यह सब कुछ नहीं कर सकती, चल सफाई कर।"
इतना कहते हुए वह पूरी तरह से सावरी के हाथ से चद्दर खींचने लगा हुआ था। अभय की हरकत देखकर सावरी को अपने अंदर कुछ टूटता हुआ महसूस हो रहा था। वह रोते हुए बोली, "इसे मत खींचिए, मेरे कपड़े भी आपने फाड़ दिए। मैं काम कैसे करूंगी।" इतना कहते हुए सावरी ने चद्दर पकड़ ली थी। सावरी के ऐसे चद्दर पकड़ने से अभय का गुस्सा और भी बढ़ गया। अब वह सावरी के बालों को मुट्ठी में भरते हुए बोला, "साली कुतिया, अब तू मुझे बताएगी कि मुझे क्या करना है क्या नहीं..?
साली, मेरे जाने के बाद बहन चोद पूरी तरह से बेड पर गांड फैला कर सोई है। अब मादर चोद, मेरे आगे जुबान लड़ा रही है।" इतना कहते हुए अभय का चेहरा गुस्से से कांप रहा था। अभय को इतना गुस्से में देखकर सावरी का दिल जोरो से धक धक कर रहा था। वह रोते हुए बोली, "माफ कर दीजिए कुंवर सा, गलती हो गई। हम आपको नहीं रोकेंगे।" इतना कहते हुए सावरी ने लगभग से हाथ जोड़ लिए थे। उसकी आंखों से आंसू लबालब बहे जा रहे थे। सावरी को इस तरह से हाथ जोड़ता देखकर एक पल के लिए अभय की नजर उसके हाथों पर ठहर गई। अब अभय के हाथों की मुट्ठियां बन चुकी थी।
उसकी नजर सावरी के हाथों से होकर उसके चेहरे पर पड़ रही थी, रो-रो कर लाल पड़ चुका चेहरा। सांवरी बहुत ज्यादा मासूम लग रही थी और उसकी आंखें रो-रोकर सूज भी चुकी थी। उसको इस तरह से देखकर अभय ने अपना चेहरा घुमाया और सामने सोफे पर जाकर बैठ गया। अब वह सावरी को गहरी निगाहों से देख रहा था। वही सावरी अपना मुंह नीचे की तरफ झुका कर एक टक वहीं पर खड़ी रही।
सावरी को यूं शांति से खड़ा देखकर अभय फिर से दांत पीसते हुए बोला, "साली, अब क्या लंड लेकर तेरे पीछे आऊ, जल्दी कर।" इतना कहकर वह सावरी को गहरी निगाहों से देखने लगा। वही सावरी का दिल अब तेजी से धड़कने लगा था। उसने अब अपने हाथों में पकड़ी हुई चद्दर को फोल्ड करना शुरू किया। जिसे देखकर अभय की नजरे चद्दर के पीछे खड़ी सावरी पर थी। उसके वह छोटे-छोटे हाथ, जिस तरह से वह चद्दर को संभालने की कोशिश कर रही थी। उससे सही से blanket संभाली नहीं जा रही थी। वह ब्लैंकेट सांवरी से बहुत ज्यादा बड़ी थी और ऊपर से वह पूरी तरह से नेक्ड थी।
अब जिस तरह से सावरी ने चद्दर को पूरी तरह से ऊपर की तरफ उठाया था, उस वजह से अभय को सावरी दिखाई नहीं दे रही थी। ऊपर से सावरी से वह चद्दर सही तरह से फोल्ड भी नहीं हो रही थी। उसको यूं चादर फोल्ड करते देख एक पल के लिए अभय के चेहरे पर फ्रस्ट्रेशन साफ दिखाई दे रही थी, क्योंकि वह सावरी को पूरी तरह से देखना चाहता था।
लेकिन सावरी उस चद्दर से उलझी हुई थी, जिस वजह से उसे वह साफ दिखाई नहीं दे रही थी। लेकिन कुछ देर अभय ने खुद को कंट्रोल किया और अपने हाथों में सिगरेट बॉक्स लिया और सिगरेट को अपने होठों मैं लगाते हुए अपनी फ्रस्ट्रेशन को दूर करने की कोशिश कर रहा था। वही सावरी, जो की लगातार उस ब्लैंकेट को समेटने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उससे ब्लैंकेट फोल्ड नहीं हो रही थी। तभी अभय अपनी जगह से खड़ा हुआ और उसने अपने कदम सावरी की तरफ बढ़ा दिए।
वही सावरी, जो कि अपने ही ध्यान ब्लैंकेट को समेटने में लगी हुई थी, जैसे ही अभय उसके पास आकर खड़ा हुआ, उसका बदन पूरी तरह से कांप उठा। उसको यूं कांपता हुआ देखकर अभय की नजरे उस पर और भी गहरी हो गई। अगले ही पल, उसने उसके हाथ से ब्लैंकेट छीनी और बेड के दूसरी तरफ देखते हुए उसे ज़ोर से बेड पर धक्का दिया।
वह उसकी तरफ में देखते हुए अपनी डोमिनेटिंग वॉइस में बोला, "अब इससे ज्यादा कंट्रोल मै नहीं कर पाऊंगा।" इतना कहते हुए उसने एक ही झटके से अपनी शर्ट के बटन तोड़ते हुए अपने बदन से अपनी शर्ट को अलग कर दिया।
यह चीज देख कर सावरी की सांस उसकी गले में अटक गई।
To be continue..








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