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Abhay ki galiya!brutal intmacy 🔞🔞🔞

Hotel Paradise,

सांवरी इस वक्त अभय के पास उसकी ब्लैंकेट नीचे से खींच रही थी, क्योंकि अभय बिल्कुल नेकेड बेड पर लेटा हुआ था और उसका dick भी हार्ड पोजीशन में था। उसे यूं सोते हुए देखकर सांवरी को बेहद अजीब लग रहा था। लेकिन दरवाजे का लॉक टूट गया था, जिस वजह से सांवरी अभय को ब्लैंकेट उड़ाने आई थी, क्योंकि उसने यहां से भागने का प्लान बना लिया था। लेकिन तब भी वह उसे इस तरह से छोड़कर तो बिल्कुल भी नहीं जा सकती थी, जिस तरह से वह इस वक्त लेटा हुआ था।

वह अभी ब्लैंकेट अभय के नीचे से खींच ही रही थी कि तभी अभय की आंखें खुल गई। अभय की आंखें खुलता देखकर सांवरी का पूरा शरीर ठंडा पड़ गया। एक पल के लिए उसकी पूरी रूह कांप उठी थी। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर वह करें क्या। डर के मारे उसने हाथों की मुट्ठियां भींच ली थी और ब्लैंकेट को वैसे ही छोड़ दिया। वही अभय, जिसने अपनी आंखें खोली थी, उसने कुछ सेकंड्स के लिए आंखें खोली और अगले ही पल दोबारा बंद कर ली। बंद करते हुए ही उसने करवट ले ली और अगले ही पल वह उल्टे मुंह हो कर लेट गया। अब उसकी ब्लैंकेट उसके पैरों से नीचे की तरफ सरक गई थी। यह चीज देखकर सांवरी ने अब गहरी सांस ली।

उसने जल्दी से ब्लैंकेट उठाकर अभय के ऊपर उड़ा दी, लेकिन अभी भी उसकी धड़कने हद से ज्यादा तेज चल रही थी। क्योंकि यह किसी माइनर हार्ट अटैक से कम नहीं था। जिस तरह से अभय ने आंखें खोली थी। अब वह जल्दी से दरवाजे की तरफ आई और देखते ही देखते दरवाजे से उसने बाहर की तरफ अपने कदम रख दिए।

कुछ ही देर में वह पूरी तरह से होटल पैराडाइस के बाहर थी। दूसरी तरफ अभय अभ भी गहरी नींद में सो रहा था। उसे कुछ भी होश ही नहीं था कि आखिर सांवरी उसके पास है भी या नहीं। वही सांवरी ने सड़क पर जाकर इधर-उधर देखा, तो उसे कैब ड्राइवर दिखाई दिया। वह जल्दी से कैब ड्राइवर की तरफ भागी, तो कैब ड्राइवर ने उसके सामने आकर गाड़ी रोकी। सांवरी अब कैब ड्राइवर से कुछ बोलने को हुई कि तभी ड्राइवर उसकी तरफ देखते हुए बोला, "मैडम कहां पर जाना है?" कैब ड्राइवर की बात सुनकर सांवरी पूरी तरह से खामोश हो गई। अगले ही पल उसकी आंखों के सामने एक औरत का चेहरा घूम गया, जो उससे कह रही थी। "सांवरी, तुझे मेरी कसम, अगर तू इस घर में वापस आई तो। तेरे बाबा के ऑपरेशन के लिए बहुत पैसे दिए हैं उन्होंने हमें, बदले में सिर्फ तुझसे शादी मांगी है। जानती हूं, तेरी उम्र कम है। लेकिन वह तुझे बहुत खुश रखेंगे, बेटा।

अगर तू वापस आई, तो मेरा मरा हुआ मुंह देखेगी, समझी।" यह कहते हुए उस औरत ने सांवरी के आगे हाथ जोड़ लिए थे। यह सावरी की मां संध्या थी। संध्या इस वक्त अपनी आंखों में उम्मीद लिए सांवरी की तरफ देख रही थी। जो जो संध्या ने बातें की थी, उसे सुनकर सांवरी पूरी तरह से टूट चुकी थी। अब वह कैसे ही वहां पर रह सकती थी। संध्या ने बड़ी मुश्किल से सांवरी को मना कर अभय से शादी करवाई थी। अभी वह अपने ख्यालों में ही थी कि तभी कैब ड्राइवर बोला, "ओ मैडम, कुछ बोलोगी कि कहां जाना है?"

कैब ड्राइवर की आवाज सुनकर सांवरी अपने ख्यालों से बाहर आई और ना में सिर हिला दिया। तभी कैब ड्राइवर चिल्लाते हुए बोला, "सुबह-सुबह बोहनी का टाइम है।" वह गुस्से में सांवरी की तरफ देखते हो बोला, "औकात नहीं है गाड़ियों में बैठने की, तो क्यों बैठी हो। सुबह-सुबह आ जाते हैं टाइम वेस्ट करने, बोहनी का टाइम होता है और ऊपर से तुम जैसे सुबह-सुबह लोग मिल गए, तो बस फिर, फिर तो सारा दिन ही खराब चल जाएगा मेरा। नहीं जाना था कहीं, तो रोका क्यों, पागल लड़की कहीं की?" इतना कहकर वह कैब ड्राइवर गुस्से में अब वहां से चला गया।

वही सांवरी का चेहरा पूरी तरह से मायूस हो चुका था और उसकी आंखों में नमी उतर आई थी। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर वह जाए तो जाए कहां। उसकी मां तक ने उसे इतनी बात कही थी कि वह घर पर वापस कभी नहीं आएगी। अब तो उसके घर जाने के दरवाजे भी बंद थे। उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। एक पल के लिए उसका दिल कर रहा था कि वह खुद की जान ले ले। लेकिन अब वह वीरान सी सड़कों पर चलने लगी और अपनी पिछली जिंदगी को थोड़ी देर के लिए याद करने लगी, जब उसकी शादी अभय से हुई थी।

जिस दिन उसकी शादी अभय से हुई थी, तो सांवरी का घूंघट बहुत लंबा किया गया था, जिस वजह से उसे अभय की शक्ल दिखाई नहीं दे रही थी। सांवरी बेहद हल्की उम्र की थी, महज 16 साल की। अभी कुछ दिन पहले ही वह 17 की हुई थी। सांवरी का चेहरा घुंघट से ढका हुआ था। जब उसे मंडप में लाया गया, तो उसे तो यह भी नहीं बताया गया था कि उसकी शादी हो किस इंसान से रही है। बस उसने नाम सुना था अभय ठाकुर, इसके अलावा उसे अभय के बारे में कुछ नहीं पता था। अभय, जहां पर सांवरी रहती थी, वहां की बहुत जानी-मानी हस्ती थी। बहुत कम उम्र में ही अभय ने अपना यह मुकाम हासिल कर लिया था। इस वक्त अभय 27 साल का था। भले ही उसकी उम्र ठीक-ठाक थी, लेकिन सांवरी के लिए वह बहुत ज्यादा बड़ा था।

अभय की तो शादी की उम्र थी, लेकिन सांवरी की बिल्कुल भी उम्र नहीं थी। अभय शादी के मंडप में बैठा हुआ अपनी मां को गुस्से भरी नजरों से देख रहा था। जैसे कि वह यह शादी करना ही नहीं चाहता था। लेकिन उसकी मां ने उसे जबरदस्ती शादी के लिए मनाया था। एक तो अभय को अपनी मां पर इस हद तक गुस्सा आ रहा था कि वह उसकी शादी एक उससे छोटी उम्र की लड़की से कर रही थी। दूसरा वह किसी से प्यार करता था, जिस वजह से वह सांवरी से तो कभी प्यार कर ही नहीं सकता था। यही सोच सोच अभय का खून खौल रहा था।

अभय, जोकि मंडप में बैठा हुआ था, उसकी आंखों के सामने एक लड़की का चेहरा घूम रहा था। जो उसे छोड़कर जा रही थी। उस लड़की ने अभय से एक बात कही थी, जिसे सुनकर अभय की आंखें हैरत से फैल गई थी। वह लड़की गरिमा, जो कि अभय की गर्लफ्रेंड थी। उसके मां बाप के मजबूर करने की वजह से उसने शादी के लिए हां कर दी थी। एक बार रात में जब वह अभय से मिली, तो उसने अभय को सारी बात बताई कि वह अभय के साथ और नहीं रह सकती। क्योंकि उसके मां-बाप ने उसकी शादी किसी और के साथ तय कर दी है।

गरिमा की यह बात सुनकर अभय उसका हाथ पकड़ते हुए बोला, "हम यहां से कहीं भाग जाते हैं।" लेकिन गरिमा उसकी बात नहीं मानी। वह उससे हाथ छुड़ाते हुए बोली, "चाहे जो मर्जी कर लो अभय, प्यार मैंने तुमसे भले ही किया हो, लेकिन मेरा पहला प्यार मेरे लिए मेरे मां-बाप हैं।" उसकी यह बात सुनकर अभय का दिल बुरी तरह से टूट चुका था। जिस वजह से उसका दिल घायल भी हुआ था। इसीलिए तब से वह पत्थर बन चुका था। वह लड़की उसकी जिंदगी से जा चुकी थी और उसने किसी और से शादी कर ली थी। इसी बात का फायदा उठाकर अभय की मां सुहासिनी जी ने अभय की शादी सांवरी से तय कर दी थी, जो कि उनकी पसंद की लड़की थी।

अभय की मां भले ही दिल से पत्थर थी, लेकिन उनका दिल बहुत बड़ा था। सांवरी से वह बहुत प्यार करती थी। अभय की जिद के कारण वह यहां शहर में आया था। लेकिन उसकी मां ने उसे बहुत रोकने की कोशिश की थी, पर अभय उन पर चिल्ला कर बोला, "आपने अपनी शादी का फर्ज निभा दिया, अब मुझे अपनी बीवी के साथ अकेले में वक्त बिताना है।" जिस वजह से सुहासिनी जी चुप रह गई, क्योंकि उन्हें सांवरी पर तरस भी आ रहा था। क्योंकि शादी के कुछ ही दिनों में अभय ने उसकी हालत बहुत हद तक खराब कर दी थी। उसके मुंह से जैसे रौनक ही उतर गई थी। पहली रात जब उनकी शादी हुई, तो सांवरी को अभय के कमरे में कुछ लड़कियां छोड़कर गई। साथ ही में दूध का गिलास भी टेबल पर रखते हुए गई। इस वक्त वह लड़कियां सांवरी को छेड़ रही थी।

जिससे उनके छेड़ने की वजह से सांवरी भी हल्का-हल्का मुस्कुरा रही थी। अभी उसके चेहरे पर से घूंघट नहीं हटा था, लेकिन फिर भी उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कुराहट थी। जो कि उन लड़कियों की वजह से थी। कुछ ही देर में वह लड़कियां वहां से जा चुकी थी और सांवरी उस कमरे में अकेली रह चुकी थी।

ऐसे ही सांवरी कितनी देर ना जाने बेड पर बैठी रही, लेकिन अभय कमरे में नहीं आया। रात के 12 बज गए, सांवरी अभय का इंतजार करती रही। लेकिन अभय का कोई अता-पता नहीं था। ऐसे ही रात का 1 बज गया, अब तो सांवरी को भी नींद आने लगी थी। जब इंतजार की इंतहा हो गई, रात का 1:30 बज गया, तब सांवरी बिस्तर पर लेटी और धीरे-धीरे नींद में जाने लगी। तभी रूम का दरवाजा खुला। रूम का दरवाजा खुलने की आवाज सांवरी के कानों में पड़ी और अगले ही पल वह झट से उठकर बिस्तर पर बैठ गई।

सांवरी अभी बिस्तर पर उठकर बैठी ही थी कि तभी अभय लड़खड़ाते हुए कदमों से अंदर की तरफ आया। अंदर आते ही उसकी नजर सांवरी पर गई। सांवरी को देखकर ही अभय व्यंग्य से हंसा और बोला, "यह कुत्तिया मेरे पल्ले बंधी है, जिसको मैं चोदूं और बस चोदूं, लेकिन छोडूंगा तो नहीं इसे। आज अगर मेरा दिल टूट गया है, यह थोड़ी है कि मेरा लण्ङ खड़ा होना बंद हो गया है।

वह तो अभी भी खड़ा होता है ना। आज इसकी ना यह जो छोटी सी भोसड़ी है, मैं फाड़ कर रख दूंगा, ताकि यह कल उठने से पहले ही यहां से भाग जाए।" इतना कहते हुए वह लड़खड़ाते हुए कदमों से सांवरी की तरफ आ रहा था। वही सांवरी, जिसने अभय की अभी-अभी यह भाषा सुनी थी, वह सुनकर ही उसका दिल धक से रह गया था। उसका पूरा शरीर कांपने लगा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह आखिर करें तो करें क्या। वह बस वैसे ही अपने हाथों में हाथ फंसाए कांपते हुए अपनी जगह पर बैठी रही। इस वक्त उसकी डर के मारे बुरी हालत हो रही थी।

दूसरी तरफ अभय अब अपने लड़खड़ाते हुए कदम सांवरी की तरफ बढ़ने लगा। जैसे-जैसे वह सांवरी की तरफ बढ़ रहा था, वैसे-वैसे सांवरी की सांस सूखने लगी थी। अब वह पूरी तरह से सांवरी के पास आकर खड़ा हुआ। अगले ही पल, उसने सांवरी के सिर पर हाथ रखा और सिर पर हाथ रखते ही उसने उसका दुपट्टा पूरी तरह से खींच कर जमीन पर फेंक दिया। जिसे महसूस कर एक पल के लिए सांवरी का पूरा शरीर कांप उठा और चेहरा पूरी तरह से सफेद पड़ गया।

उसने अपनी आंखें पूरी तरह से बंद कर ली थी। लेकिन अभय अब वह बिल्कुल उसके सामने आकर बैठा और उसके चेहरे को देखने लगा, जो कि अभय को अंधेरे की वजह से कुछ खास साफ दिखाई नहीं दे रहा था। उसका चेहरा साफ ना दिखाई देता देख अभय का खून खौल उठा। वह गुस्से में बोला, "साला madrachod, यह बत्ती किसने बुझा दिया रे? शक्ल तो देखूं किस रंडियां से मेरी शादी की है मेरी मां ने। साले लंड के पकोड़े, बत्ती तो ऐसे बुझा कर गई है, जैसे मैंने उनका भोसड़ा फाड़ दिया हो, हरामजादियां साली कुत्तिया।" इतना कहकर वह एक बार फिर से लड़खड़ाते हुए कदमों से उठा और स्विच बोर्ड की तरफ अपने कदम बढ़ा दिए। देखते ही देखते वह स्विच बोर्ड के बिल्कुल पास आकर खड़ा हुआ और लाइट ऑन किया। वहां की सजावट देखकर ही अभय को गुस्सा आ रहा था। लेकिन फिलहाल वह सांवरी का चेहरा देखना चाहता था।

अब वह एक बार फिर से सांवरी के सामने आकर बैठा और अगले ही पल उसके चेहरे पर डेविल स्माइल आ गई। वह उसकी तरफ देखते हुए बोला, "maadarchod, मां मेरी ऐसे ही नहीं तेरे पीछे पागल हो गई है।साला, तू है तो साला कोठी पर बैठने लायक, इतनी खूबसूरत है कि कोई देखे, तो पागल हो जाए।" उसकी बातें सुनकर ही सांवरी का दिल हर बात पर छलनी हुए जा रहा था। अब उसने धीरे से अपनी आंखें खोली और सामने बैठे अभय की तरफ देखा। अभय को देखकर एक पल के लिए सांवरी की नजरे उस पर ठहर गई। अभय था तो बहुत ज्यादा हैंडसम, लेकिन उसको अकल उतनी ही कम थी। अभय की बातों से सांवरी को तकलीफ हो रही थी। भले ही अभय बहुत ज्यादा हैंडसम था, पर उसके बातों का तरीका सांवरी को तकलीफ पहुंचा रहा था। अभी-अभी जो अभय ने बात कही थी, उसे सुनकर ही सांवरी को बहुत ज्यादा तकलीफ हो रही थी। यह कैसी तारीफ हुई कि कोठी पर बैठना, यह तो एक हिसाब से सांवरी की खूबसूरती को ही गाली थी। सांवरी की आंखों में नमी छाने लगी थी, लेकिन अभय को उस चीज से कोई लेना-देना नहीं था।

वह अब उसके ऊपर झुका और लगभग से उसके कपड़े खींचते हुए बोला, "उतार इन्हें, मुझे तुझे चोदना है अभी।" अभय की कपड़े उतारने वाली बात सुनकर सांवरी के होश पूरी तरह से उड़ गए। वह अब धीमे से पीछे की तरफ होते हुए लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली, "कपड़े कपड़....... क्यों उतारते है?" इतना कहते हुए लगभग से उसने अपना लहंगा पूरी तरह से मुट्ठियों में बंद कर लिया था। वही अभय अब उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोला, "बताया ना कुत्तिया, तुझे चोदना है मुझे।" उसके शब्दों को सुनकर ही सांवरी को अजीब सा लग रहा था। वह अब सवालिया नजरों से अभय की तरफ देख रही थी। इसे इस चीज का मतलब ही नहीं पता था। उसकी सवालिया नजरे खुद पर पाकर अभय के चेहरे पर डेविल स्माइल और भी लंबी हो गई। उसकी इनोसेंस देखकर अभय को और भी ज्यादा मजा आ रहा था। वह उसकी तरफ देखते हुए बोला, "चल, तुझे लाइव करके दिखाता हूं कि क्या करना है मुझे।" इतना कहते हुए वह लगभग से अपने कपड़े उतारने लगा। अभय को अपने कपड़े उतारता देख सांवरी के होश एक बार फिर से उड़ गए और चेहरा अब पूरी तरह से सफेद पड़ने लगा।

अभय को इस तरह से अपने सामने कपड़े उतारता हुआ देखकर सांवरी ने अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया। उसको यूं चेहरा घूमाता हुआ देख एक पल के लिए अभय की नजर उस पर सर्द हो गई। अब उसने जल्दी से अपने कपड़े उतारे और पूरी तरह से नेक्ड अब सांवरी के सामने था। उसका वह 8 इंच का dick काफी मोटा था। लेकिन सांवरी ने अभी उस तरफ देखा ही नहीं था। सांवरी का मुंह दूसरी तरफ होते देख अभय ने उसके बालों को मुट्ठी में भरा और अपनी तरफ मुंह घुमाते हुए बोला, "साली madarchod, ड्रामा करती है मेरे सामने।

पहले तो सोचा था, तेरी भोंसड़ी को ही अकेले चोदूंगा। अब तो तेरे मुंह को भी चोदूंगा मैं।" इतना कहकर उसने उसके बालों को मुट्ठी में भर लिया था। अब उसने अपने डिक को अपने हाथ में लिया और सांवरी की तरफ देखते हुए बोला, "इस तरफ देख, देख इसे, जब तेरे अंदर जाएगा, तब तुझे पता चलेगा कि चोदना होता क्या है।" उसकी इतनी गंदी बातें सुनकर सांवरी को ऐसा लग रहा था, जैसे किसी ने उसके कानों में जलता हुआ कोयला डाल दिया हो। इस वक्त सांवरी की हालत खराब होने लग गई थी। वह रोते हुए अभय की तरफ देखते हुए बोली, "देखिए बाबू साहब, मुझे नहीं समझ आ रहा कि आप कैसी बातें कर रहे हैं। पर मुझे यह चीज अच्छी नहीं लग रही है। भगवान के लिए मुझे यह सब मत दिखाइए।" सांवरी की बात सुनकर अभय का गुस्सा और ज्यादा बढ़ गया। अब वह गुस्से से दांत पीसकर बोला, "साली, मुझे मना करती है। अब तू रुक।" इतना कहते हुए उसने अब लगभग से उसके लहंगे का ब्लाउज पकड़ा और पीछे से अपने हाथों में उसकी डोरिया एक ही झटके में पकड़ी और पूरी तरह से खींच दी। जिससे सांवरी का रंग और भी ज्यादा उड़ गया। उसका पूरा बदन कांप उठा था। देखते ही देखते अभय ने उसका ब्लाउज पूरी तरह से जमीन पर फेंक दिया था। सांवरी की लहंगे का ब्लाउज पेटर्न था, जिस वजह से उसने नीचे से कुछ नहीं पहना हुआ था।

अब उसके छोटे-छोटे बूब्स अभय के सामने थे। उसके बूब्स को देखकर अभय के होठों पर तिरछी मुस्कुराहट आ गई। अब अब तिरछे होठों से बोला, "यह तो अभी ठीक से पक्के भी नहीं, चल कोई बात नहीं, इसे निचोड़ने का मजा भी अलग ही आएगा। जल्द ही मैं इसे पके हुए आम बना दूंगा।" इतना कहते हुए उसने उसकी ब्रेस्ट को हाथों में भर लिया। जैसे ही अभय ने उसकी ब्रेस्ट को हाथों में भरा, सांवरी बुरी तरह से तड़प उठी। उसका शरीर जैसे सुन्न पड़ गया। वह रोते हुए बोली, "मुझे छोड़ दीजिए बाबू साहब, मुझे डर लग रहा है।" तभी अभय उसकी तरफ देखते हुए बोला, "अभी तो कुत्तिया मजा आने वाला है। रुक जा, जब तुझे कुत्तिया बनाकर यहीं पर पेलूंगा ना, तब बताना।" इतना कहकर अभय ने उसकी ब्रेस्ट को मुंह में भरा और जोर-जोर से शक करने लगा। जिससे सांवरी बुरी तरह से झटपटाने लगी।

जिस तरह से अभय उसकी ब्रेस्ट को सक कर रहा था, सांवरी दर्द से मरे जा रही थी। अब अभय ने नीचे की तरफ एक अपना हाथ ले जाकर उसकी लहंगे की डोरी पूरी तरह से तोड़ दी। वह लहंगा उसके बदन से अलग करने लगा। तभी सांवरी लहंगा पकड़ते हुए बोली, "रहने दीजिए बाबूजी, उसे मत उतारिए।" उसकी बात सुनकर अभय ने अपना चेहरा उसकी तरफ घुमाया और अगले ही पल उसके बूब्स पर लगभग से जोर से स्पंक करते हुए बोला, "चुप कर जा, मुझे जो करना है, करने दे। मैं तुझे आज बक्शने वाला नहीं हूं। यह जो तेरा छोटा सा बदन है ना, आज मुझे बहुत झेलेगा।" इतना कहते हुए वह लगभग से खींचातानी के साथ उसका लहंगा उतारने लगा। उसी के साथ ही उसकी पैंटी भी उतर गई। अब उसकी वह पिंक गोरी पूसी अभय के सामने थी, जिसे देखकर अभय ने अपने होठों पर जीभ घुमाई और बोला, "क्या रे,

इतनी गुलाबी, क्या खाती है रे तू? मैंने तो पॉर्न वीडियो में भी इतनी गुलाबी नहीं देखी। बस अंग्रेजों की इतनी गुलाबी होती है, बाकी तो काली पीली होती हैं।" उसकी बात सुनकर सांवरी, जो कि खुद को समेटने की कोशिश कर रही थी, इस वक्त शर्म के मारे डूब कर उसका बुरा हाल हुए जा रहा था। आंखों से आंसू बहे जा रहे थे। उसको अपने आप को छुपाता हुआ देखकर अभय को अब गुस्सा आने लगा। वह उसके चेहरे को ऊपर की तरफ उठाते हुए बोला, "madarchod, अगर इतना ही था तो जब तुझे शादी करने के लिए मना करने को कहा था, तो तू क्यों नहीं मानी। कुत्तिया, पहले पैसे की खातिर शादी करती है। अब अपने शरीर को ऐसे छुपा रही है, जैसे मैं इसे चखू भी ना। अब तो तेरी भोसड़ी मैं बहुत अच्छी से फाड़ दूंगा, तू रुक।" इतना कहकर वह लगभग से उसकी पूसी के ऊपर झुका। अगले ही पल वह उसकी पूसी के लिप्स को खोलने लगा। अगले ही पल उसने एक ऊंगली उसकी पूसी में डाल दी। जैसे ही उसने अपनी ऊंगली उसकी पूसी में डाली, एक पल के लिए सांवरी बुरी तरह से झटपटा उठी थी।

सांवरी को यूं झटपटाता हुआ देख अभय को बहुत ज्यादा मजा आ रहा था। वह अब उसकी तरफ देखते हुए बोला, "तू तो पूरा सील पैक डब्बा है रे..

अब तो अपना लंद डालते हुए तुझमें बहुत मजा आएगा। तुझमें तो सीधा मैं अपना लौड़ा दूंगा, उंगली नहीं।" इतना कहकर वह अपनी जगह से खड़ा हुआ और अगले ही पल उसने अपने डिक की तरफ देखकर अपने डिक पर थूकना शुरू किया।

देखते ही देखे उसका डिक पूरी तरह से उसके हाथों में फिसलने लगा। अब उसकी स्किन बड़ी स्मूथली ऊपर नीचे होने लगी। उसे यूं देखकर सांवरी को बहुत गंदा महसूस हो रहा था। शक्ल से क्या लेना देना था, जब अभय का दिल ही इतना गंदा था। जिसमें सांवरी के लिए कोई जगह ही नहीं थी। अभय ने अब अपने डिक को पूरी तरह से उसकी पूसी पर सेट किया और उसे खींचते हुए लगभग से बेड के किनारे पर ले आया। अब उसने उसकी टांगों को पूरी तरह से फैलाया और ऊपर की तरफ खड़े कर दिया। उसको यह चीज करते हुए देख सांवरी का शरीर पूरी तरह से कांपने लगा। उसे एक अलग ही डर लग रहा था। वही अभय की तरफ देखते हुए, जब उसने डिक को सेट किया,

तो उसके होश पूरी तरह से उड़ गए। क्योंकि पहले ही जब अभय ने अपनी उंगली उसके अंदर डाली थी, तो उसकी इतनी बुरी हालत थी। अब तो अभय अपनी dick को अंदर डालने जा रहा था। अब सांवरी का क्या हाल होने वाला था, यह सोच सोच कर उस की जान निकलने लगी थी। अभी वह अपनी सोच में ही थी कि तभी अभय ने बेहद ब्रूटली अपने dick को पूरी तरह से उसकी पूसी में डाल दिया, जिससे सांवरी पूरी तरह से तड़प उठी। दर्द के मारे उसकी चीख इतनी ब्रूटल थी कि कोई भी सुने, तो वह एक पल के लिए उसका दिल बैठ जाए। लेकिन अभय के चेहरे पर उतना ही ज्यादा प्लेजर नजर आ रहा था। उसका चेहरा पूरी तरह से ऊपर की तरफ उठ रहा था। वह सांवरी की टाइटनेस को अपने dick पर साफ महसूस कर रहा था।

उसकी टाइटनेस थी, जिस वजह से उसकी dick की स्किन ऊपर नीचे हो रही थी। अभय अब उसकी तरफ देखते हुए बोला, "maadarchod, अगर किसी और की लेता ना, तब भी इतना मजा नहीं आता। तेरी भोंसड़ी बड़ी टाइट है और ऊपर से यह जो पिंकी इतनी खूबसूरत है ना, दिल कर रहा है इसको चाटू।" उसकी बात सुनकर सांवरी, जो कि अब दर्द से तड़प रही थी, वह रोते हुए बोली, "प्लीज, मुझे छोड़ दीजिए। मुझे बहुत दर्द हो रहा है।" लेकिन अभय अब और भी ज्यादा तेजी से झटका देते हुए बोला, "तो मैं क्या करूं, बर्दाश्त कर।" इतना कहते हुए लगभग से उसके अंदर खुद को स्टॉक करने लगा। जिससे सांवरी और भी ज्यादा तड़पती रही। अब साथ ही साथ वह उसकी pussy पर जोर-जोर से स्पंक करने लगा। जिससे सांवरी की और भी ज्यादा बुरी हालत होने लगी।

सांवरी अभी अतीत की यादों में खोई हुई थी कि तभी किसी ने उसके कंधे पर अपना हाथ रखा। अगले ही पल, सांवरी बुरी तरह से कांप उठी। सांवरी ने जब साइड पर देखा, तो एक बॉडीगार्ड उसके सामने खड़ा था। उस बॉडीगार्ड को देखकर सांवरी का रंग पूरी तरह से उड़ गया, क्योंकि वह अभय का बॉडीगार्ड था। लेकिन अभय के बॉडीगार्ड ने अभी उसे पहचाना नहीं था। क्योंकि सांवरी के मुंह पर मास्क लगा हुआ था। दूसरी तरफ आधा घंटा बीत चुका था और अभय की नींद अब टूटने लगी। अब उसने अपने इर्द गिर्द देखा, तो सांवरी को ना पाकर उसकी नज़रें बेड पर सर्द हो गई। अब वह अपनी जगह से उठा और उसने बाथरूम की तरफ अपने कदम बढ़ा दिया। वह गुस्से में बोला, "maadarchod रंडियां, अगर पेशाब भी आया था, तो ऊपर मूत देती। मुझे छोड़कर बिस्तर पर अकेली जाती है, आज मैं तेरी गांड ना मार ली, तो मेरा नाम भी अभय ठाकुर नहीं।" अभय बोल ही रहा था कि तभी उसने दरवाजा खोला और सामने जब किसी को नहीं पाया, तो अभय की आंखें बड़ी हो गई। अभी तक अभय पूरी तरह से नेक्ड था। अब उसने पूरे कमरे में ढूंढा, लेकिन सांवरी उसे कहीं पर नहीं मिली। जिससे अब उसका चेहरा गुस्से से कांपने लगा। वह दांत पीसकर बोला, "साली कुत्तिया,

कहां गई तू? अगर तू भागी ना, तो कसम से नंगा करके अपने सामने नचाया नहीं ना। ऐसा चोदूंगा तुझे कि तेरी सात पुस्ते याद रखेंगी और तेरी भोंसड़ी फाड़ कर ना रख दी, तो मेरा नाम भी अभय ठाकुर नहीं।" इतना कहकर उसने अपने कदम दरवाजे की तरफ बढ़ाए। जब दरवाजे का लॉक टूटा हुआ पाया, तो अब जाकर उसे सारी बात समझ आ गई कि सांवरी अब वहां से भाग चुकी थी। जिससे अब उसका चेहरा पूरी तरह से काला पड़ गया। वह गुस्से में चिल्लाते हुए बोला, "सांवरी.....।"

To be continue....

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