
Hotel Paradise,
अभय और सवारी का कमरा,
सांवरी पूरी तरह से नेक्ड इस वक्त शावर के नीचे खड़ी थी और उसकी आंखों से आंसू तेजी से बह रहे थे। इस वक्त उससे खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था। वही अभय अभी भी उसके पीछे खड़ा था और लगभग से उसने एक टांग उसकी अपने हाथ पर टांगी हुई थी और अपना dick सांवरी की pussy में डाल रखा था। वह लगभग से खुद को मूव किए जा रहा था। इस वक्त उन दोनों की स्किन slapping की आवाज पूरे बाथरुम में गूंज रही थी। अभय लगातार खुद को मूव करते हुए अपना हाथ उसकी पुसी पर चलाते हुए जोर-जोर से उस पर स्लैप कर रहा था। जिससे सांवरी की चीख उस बाथरूम में गूंज रही थी। पूरी रात अभय ने उसकी जान बड़े सलीके से निकाली थी।
जिस कदर वह सांवरी की pussy पर स्लैप कर रहा था, उसकी पुसी की स्किन पूरी तरह से रेड पड़ चुकी थी। दूसरा जिस तरह से खुद को वह मूव कर रहा था, वह बेहद ब्रूटल था। उसके वह हार्ड स्टॉक सांवरी के अंदर जाते ही जैसे हड़कंप मचा रहे थे। उसका पूरा बदन एक पल के लिए हिल जाता था। वही चीज अभय को सबसे ज्यादा पसंद आ रही थी। जैसे-जैसे वह हार्ड स्ट्रोक कर रहा था, वैसे-वैसे सांवरी के boobs ऊपर की तरफ उछल रहे थे। जब उसका डिक पूरी तरह से उसकी पूसी में जाता, तो जैसे ही उसकी ass पूरी तरह से स्किन के आसपास लगती, तो उसकी ass बाउंस हो जाती। अभी सांवरी सिर्फ 17 की थी, लेकिन फिर भी अब उसके शरीर में चेंज होने लग गए थे। पहले से उसकी ass और उसके boobs में काफी हद तक फर्क आया था।।
वही अभय लगातार उसकी pussy पर slap करते हुए बोला, "साली कुत्तिया, दिन ब दिन इतनी खूबसूरत होती जा रही है कि किसी की नजर पड़ गई ना तेरे पर, तो मैं बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगा। हर वक्त दिल करता है कि तेरे अंदर अपना lund डाल के रखूं। इस कदर तूने अपनी chutt के लिए मुझे दीवाना कर दिया है।"
इतना कहते हुए अभय का ध्यान बार-बार अपने dick पर जा रहा था, जोकि पीछे से सांवरी की पूसी में अंदर बाहर हो रहा था। उसके डिक पर अभी भी हल्का-हल्का ब्लड लगकर बाहर की तरफ आ रहा था, जोकि शावर के पानी के साथ साफ हुए जा रहा था। पूरी रात अभय ने सांवरी के साथ तीन राउंड लिए थे, अब यह उसका चौथा राउंड था। जिस वजह से सांवरी की टांगे पूरी तरह से कांप रही थी। इस वक्त सांवरी का जिस्म जिस हद तक दर्द कर रहा था, उसके दिमाग में बहुत सी बातें चल रही थी। अब वह क्या थी, यह तो अब बाद में ही पता चलने वाली थी। लेकिन इस वक्त उसका चेहरा काफी ज्यादा सीरियस था। वह इस वक्त अभय को घिन भरी निगाहों से देख रही थी।
तकरीबन ऐसे ही एक घंटा बीत गया और अभय किसी राक्षस की तरह सांवरी पर हावी हुआ पड़ा था। वह उसके अंदर खुद को स्टॉक किए जा रहा था। अब उसका शायद सीमन निकलने वाला था। सांवरी तो बहुत बार अपना सीमन हो चुकी थी, लेकिन अभय अब उसके अंदर और भी हार्डली स्टॉक करते हुए बोला, "साली कुत्तिया, इस पर सिर्फ मेरा हक है। तेरी chut सिर्फ मेरी है। अब तू देख, मैं तुझे कैसे कैसे पेलता हूं।" इतना कहते हुए लगभग से चिल्ला रहा था। "aaaaaahhhhhh madrchod, इस रंडी ने अपनी आदत लगा दी मुझे aaaaahhhhhh. साली कुत्तिया, अपने अंदर बर्दाश्त कर अब मुझे।" इतना कहते हुए अभय का सारा सीमन सांवरी को अपनी पूसी में भरता हुआ महसूस हो रहा था।
जैसे-जैसे अभय का सिमन सांवरी की पूसी के अंदर रिलीज हो रहा था, वैसे-वैसे सांवरी को अपने पेट में गरम-गरम महसूस हो रहा था। लेकिन जैसे ही उसका स्पर्म पूरी तरह से निकल गया, एकदम से अभय पीछे की तरफ हो गया। सांवरी से संभला नहीं गया, जिससे सांवरी जमीन पर जा गिरी। उसके घुटनों में पूरी तरह से चोट लग गई और उसकी आंखों से आंसू तेजी से बहने लगे। वह रोते हुए अभय की तरफ देख रही थी। लेकिन अभय को जैसे इस चीज से कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था।
लेकिन वह क्या ही कर सकती थी। अभय अब उसके चेहरे पर झुका और बेहद हसरत भरी निगाहों से देखते हुए उसने उसकी ठोडी पर हाथ रखा और उसका चेहरा ऊपर की तरफ उठाते हुए बोला, "तुझे क्या लगा, मैं तुझे गोद में उठाकर लेकर जाऊंगा। madrachod कुत्तियां, तेरी सिर्फ इतनी औकात है कि तू मेरी जूती तले रहे। बहुत शौक था ना अम्मा को तुझसे मेरी शादी करने का, कितनी देर झेलेगी मुझे, अभी तो शुरुआत हुई है। कहा था ना तुझे, शादी मत कर, लेकिन तूने तो मेरी एक बात नहीं सुनी। अब भुगत रोज, यही सब चलेगा तेरे साथ और रोज तेरा जिस्म नोचूंगा मैं। पर तुझे ना कहीं जाने दूंगा और ना कहीं की रहने दूंगा।" इतना कहते हुए उसने उसका चेहरा छोड़ दिया और बाहर की तरफ चला गया। वहीं सांवरी, जोकि शॉवर के नीचे बैठी हुई थी, इस वक्त उसके घुटनों में से इतना ज्यादा दर्द हो रहा था। लेकिन उन घुटनों से ज्यादा उसे अपने दिल में तकलीफ हो रही थी। वह रोते हुए अभय की तरफ देख रही थी, जो बाहर की तरफ चला गया।
अब उसने अपने आंसू पोंछे और खुद में ही बड़बड़ाई, "मां, मै और बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगी। मुझे यहां से जाना है। मुझे माफ कर देना, लेकिन मेरा यहां से भागना बहुत जरूरी है। यह इंसान इंसान तो है ही नहीं, यह तो जानवर है। अगर मैं इसके पास रही, तो यह मुझे यकीनन मार डालेगा। मैं और बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगी। मां, आपने मुझसे कहा कि इससे शादी करनी है। मैं चुपचाप इससे शादी कर ली, लेकिन यह इंसान तो मुझे जीने ही नहीं दे रहा। मेरा पूरा शरीर दुख रहा है। लेकिन इसने मुझे आज भी नहीं बक्शा। पर अब बस बहुत हो गया, मुझे किसी तरह यहां से निकलना होगा।" इतना कहकर उसने अपने आंसू साफ किए और 15-20 मिनट शावर के नीचे खड़ी रही। हालांकि उससे खड़े नहीं हुआ जा रहा था, फिर भी वह शावर के नीचे खड़ी थी। आधे घंटे बाद में, शॉवर लेकर बाहर की तरफ निकली, तो अभय बेड पर बेसुध होकर सो रहा था। उसे देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे वह बेहद गहरी नींद में चला गया हो, क्योंकि सारी रात तो वह सोया नहीं था।
सांवरी ने कुछ देर उसे देखा और अगले ही पल धीरे कदमों से उसके पास गई। उसके ऊपर आकर उसने हाथ को धीरे-धीरे कर हिलाया, ताकि अगर अभय उठ सके, तो अभी वह यह कदम ना उठाए। इसलिए कुछ देर वह अभय को देखते रही, लेकिन जब अभय की गहरी सांस उसके कानों में पड़ी, तो वह समझ गई कि वह सो रहा है।
अब जल्दी से वह वार्डरोब की तरफ बढ़ गई और कुछ कपड़े लिए। जिसमें एक पजामा, एक अभय की ही शर्ट थी, जो की काफी लंबी थी। वह इधर-उधर कुछ और सामान भी ढूंढने लगी। कुछ ही देर में उसके हाथ में एक mask था और एक हाथ में टोपी थी, जिससे वह खुद को पूरी तरह से छुपा सके। देखते ही देखते उसने पूरी तरह से कपड़े पहन लिए थे। कपड़े पहनते ही उसने अपने लड़खड़ाते हुए कदम दरवाजे की तरफ बढ़ा दिए। उसने एक बार भी पीछे पलट कर नहीं देखा, क्योंकि उसे अभय के उठने से पहले उस कमरे से बाहर निकलना था। हुआ भी ऐसा ही, वह दरवाजे तक पहुंची और अगले ही पल उसने देखा कि दरवाजा उससे खुल नहीं रहा है। जिससे उसका शरीर पूरी तरह से कांपने लगा। वह चाहती थी कि वह वहां से निकल जाए, लेकिन अब लग रहा था कि उसका निकलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होने वाला था। अगले ही पल, सांवरी की आंखों से आंसू तेजी से बहने लगे कि वह आखिर यहां से निकले तो निकले कैसे।
"मां, मेरी मदद करो। मैं कैसे निकलू यहां से, अगर मैं निकल नहीं पाई, तो अनर्थ हो जाएगा।" इतना कहते हुए उसने पीछे पलट कर अभय की तरफ देखा, जो अभी भी गहरी नींद में सोया हुआ था। लेकिन अभी भी उसने दरवाजा खोलना जारी रखा। तभी एकदम से दरवाजे का लॉक टूट गया और लॉक टूटने की वजह से सांवरी के चेहरा का रंग पूरी तरह से फीका पड़ गया। अब उसने पलट कर अभय की तरफ देखा, जो पूरी तरह से नेक्ड बिस्तर पर लेटा हुआ था और उसका dick अभी भी हार्ड पोजीशन में था।
लेकिन फिलहाल सांवरी ने इस चीज को पूरी तरह से इग्नोर किया और जल्दी से अभय की तरफ आई। उसने देखा कि ब्लैंकेट अभय के पैरों के नीचे पड़ी थी, तो अब उसका दिमाग और भी ज्यादा खराब होने लगा। अगर वह अभय के पैरों के नीचे से ब्लैंकेट निकालती, तो हो सकता था कि अभय की आंख खुल जाती। लेकिन फिर भी उसने अब अभय के पैरों के नीचे से ब्लैंकेट धीरे-धीरे सरकानी शुरू की, जिससे अभय के चेहरे के भाव बदलने लगे थे। हालांकि वह था तो गहरी नींद में, पर जैसे-जैसे सांवरी उसके पैरों के नीचे से ब्लैंकेट खींच रही थी, वैसे-वैसे उसके चेहरे के भाव भी बदल रहे थे।
लेकिन अगले ही पल अभय की आंखें खुली और सांवरी पूरी तरह से अपनी जगह पर सुन्न खड़ी रह गई।
वहीं दूसरी तरफ,
ध्वनि का दिल धक सा रह गया। वह अपनी दर्द भरी नजरों से सामने आदर्श की तरफ देख रही थी, जो उससे अपने बच्चे का पता पूछ रहा था। इस वक्त ध्वनि का दिमाग पूरी तरह से घूम चुका था कि आखिर आदर्श को बच्चे के बारे में कैसे पता चला। वह अब उसकी तरफ देखते हुए बोली, "कौन से बच्चे की बात कर रहे हैं आप, हमारा कोई भी बच्चा नहीं है।" अभी वह बोल ही रही थी कि आदर्श ने उसके बालों को मुट्ठी में जकड़ा और दांत पीसते हुए बोला,
"Just open your mouth and fucking damn inform being there is my child got dammit...."
आदर्श की बात सुनकर ध्वनि हैरानी से आदर्श की तरफ देख रही थी। लेकिन अगले ही पल वह अपना चेहरा घूमाते हुए बोली, "मैं नहीं जानती, आप क्या बोल रहे हैं और ना ही मुझे इस चीज को जानने में इंटरेस्ट है कि आप जिंदा है। आपको मुबारक हो, लेकिन मेरा अब आपसे कुछ भी लेना देना नहीं। तो प्लीज, मुझे जाने दीजिए।" इतना कहकर लगभग से उसने आदर्श के सीने पर हाथ रखा और उसे धकेलने को हुई कि तभी आदर्श ने उसके दोनों हाथों को अपने हाथों में दबाकर ऊपर की तरफ लगा दिया। अगले ही पल, उसके गालों को अपनी उंगलियों में भींचते हुए दांत पीसकर बोला, "मुझे मेरा बच्चा चाहिए, मिसेज ध्वनि आदर्श चौहान।"
आदर्श के मुंह से यह बात सुनकर ध्वनि हैरानी से आदर्श के चेहरे की तरफ देखने लगी, जो उसे अपनी लाल आंखों से देख रहा था। इस वक्त आदर्श का दिमाग पूरी तरह से घूम चुका था। जिस तरह से ध्वनि उसकी बातों को पूरी तरह से इनकार कर रही थी, आदर्श का दिल कर रहा था कि ध्वनि का गला घोट दे। लेकिन फिलहाल वह ऐसा कुछ नहीं कर रहा था।
तभी ध्वनि उसकी तरफ देखते हुए बोली, "किस बच्चे की बात कर रहे हैं आप, बताएंगे मुझे जरा? उस बच्चे की बात कर रहे हैं, जो आपकी मुझ पर की हुई कुर्नलिटी की निशानी है। वैसे तो वह बच्चा मेरे लिए सबसे ज्यादा अनमोल है, लेकिन मैं उसे आपको कभी नहीं दूंगी, मिस्टर आदर्श चौहान।" उसकी बात सुनकर आदर्श की आंखें हैरत से फैल गई। लेकिन अगले ही पल उसके चेहरे पर तिरछी मुस्कुराहट आ गई। वह बेहद सेडक्टिव वॉइस में उसके गालों पर हाथ फेरते हुए बोला, "चलो, तुम मानी तो कि वह बच्चा मेरा ही है। वैसे ज्यादा मुश्किल नहीं है मेरे लिए इस बच्चे के लिए पता लगाना, पर अब तो मैं उस बच्चे को हासिल करके रहूंगा, क्योंकि वह मेरी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा है।
जो हसीन पल मैंने तुम्हारे साथ बिताए।" इतना कहते हुए वह ध्वनि के होठों पर अपनी उंगली चलाने लगा। तभी ध्वनि उसका हाथ झटकते हुए बोली, "खबरदार! अगर मेरे बच्चे को।" अभी उसने इतना ही कहा था कि आदर्श उसकी गर्दन पकड़ते हुए दांत पीसकर बोला, "वह मेरा बच्चा है, समझी तुम और अब मैं उसे पाकर रहूंगा। कोई भी मुझे रोक नहीं सकता। ना तुम, ना तुम्हारी मां, कोई भी नहीं।" जैसे ही आदर्श ने यह बात कही, ध्वनि का दिल कांप उठा।
लेकिन अगले ही पल आदर्श फिर से चिल्लाया, "कहां है मेरा बच्चा?" इतना कहते ही ध्वनि होश में आई। अब उसे एहसास हुआ कि वह इतनी देर से ख्वाब देख रही थी कि आदर्श को उसने अपने बच्चे के बारे में बता दिया था। अब उसकी बॉडी पूरी तरह से सुन्न पड़ चुकी थी। वही आदर्श उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोला, "अगर तुम नहीं बताओगी, तो मैं खुद पता लगा लूंगा। लेकिन उस बच्चे को मैं हासिल करके रहूंगा।" तभी ध्वनि उसकी तरफ देखते हुए बोली, "जब कोई बच्चा है ही नहीं, तो मैं आपको क्या बताऊं। और छोड़िए मुझे, मुझे अब यहां से जाना है।"
इतना कहकर उसने आदर्श को लगभग से धक्का देते हुए साइड पर किया और वहां से उठने को हुई कि तभी आदर्श ने उसका हाथ पकड़ते हुए दोबारा से इसे बेड पर लेटाया और उसके ऊपर चढ़ते हुए बोला, "तुम्हें किसने कहा कि अब तुम यहां से जा सकती हो। पत्नी हो आखिर मेरी, और हक बनता है मेरा तुम पर। यह गलतफहमी कैसी हो गई तुम्हें कि मैं तुम्हें ऐसे ही जाने दूंगा। अभी तो एक राउंड भी सही तरह से कंप्लीट नहीं हुआ है, सारा दिन पड़ा है। मेरा दिल सेक्स के लिए कर रहा है। वह मैंने तुम्हारे सिवा किसी से किया नहीं।"
आदर्श की बात सुनकर एक पल के लिए ध्वनि का दिल धड़कना ही छोड़ गया।
लेकिन अगले ही पल उसकी आंखों में नमी उत्तर आई। वह व्यंग्य से मुस्कुराई और दिल ही दिल बोली, "काश! मुझे इस बात पर खुशी होती। कहीं ना कहीं मैं भी आपको भूल नहीं पाई थी और किसी को देखना तो दूर, शायद मैं आपसे।" इतना कहते हुए ध्वनि चुप हो चुकी थी।
वही आदर्श के दिमाग में भी इस वक्त बहुत कुछ चल रहा था। वह उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोला, "तुम अब कहीं नहीं जा सकती, क्योंकि तुम मेरे बच्चे की मां हो। अब तुम्हें मुझसे प्यार करना होगा। पिछली बार तो तुमने मुझे शूट कर दिया, लेकिन अगर इस बार तुमने मुझसे दूर जाने की खता की, तो इस बार मैं तुम्हें खुद अपने हाथों से मौत दूंगा।" इतना कहते हुए आदर्श की आंखें बेहद लाल थी। अब वह उसकी गर्दन को फिर से चूमने लगा। जिससे ध्वनि की आंखों में आंसू उतर आए। कितनी ही देर बाद वह आदर्श को एक बार फिर से महसूस कर रही थी, लेकिन फिर भी उसे तकलीफ हो रही थी।
To be continue...








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