
Flashback continue,
अश्की इस वक्त तपस्या जी और हरीश जी के कमरे के बाहर खडी थी और अपना कान लगाकर अंदर की गतिविधि को महसूस कर रही थी कि आखिर अंदर चल क्या रहा है. अभी- अभी जिस तरह से तपस्या जी के चीखने की आवाज बाहर तक आई थी, उसे सुनकर अश्की का दिल जैसे एक पल के लिए धडकना छोड गया था. अश्की का रंग पूरी तरह से उड गया था. उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर उसके पापा कर क्या रहे है. इसीलिए अब उसने अंदर जाने का फैसला लिया. लेकिन जैसे ही उसने दरवाजा खोलना चाहा, दरवाजा खुला ही नहीं. क्योंकि दरवाजा अंदर से पूरी तरह से बंद था. अब अश्की का हाल और भी ज्यादा बेहाल होने लगा.
वह रोते हुए खुद में पैनिक करते हुए बोली, मै, मैं आंटी को कैसे बताऊं? पर पापा को हुआ क्या है? इतना कहते हुए लगभग से अपने चेहरे को अपने हाथों में थामे सोचे जा रही थी. लेकिन उसका दिमाग तो जैसे बंद ही पड गया था. उसने इधर- उधर देखा, तो उसे कुछ भी नजर नहीं आ रहा था. तभी उसकी नजर उस कमरे की खिडकी पर गई.
वहीं दूसरी तरफ,
हरीश इस वक्त पूरी तरह से बेलीबास तपस्या जी के सामने खडा था. जिसे देखकर तपस्या जी, जो कि अब पूरी तरह से नशे में धुत्त हो चुकी थी, उनकी तो जैसे आंखें भी नहीं खुल रही थी. वह बार- बार अपने सिर पर हाथ रखकर बस एक ही बात बोल रही थी. प्लीज, मुझे छोड दो. मुझे जाने दो, सब कुछ बिखर जाएगा. उसे नफरत हो जाएगी, उसे नफरत हो जाएगी. बस करो, मत करो। इतना कहते हुए लगभग से तपस्या जी जैसे खुद को होश में रखने की कोशिश कर रही थी. लेकिन जिस तरह का नशा उन्हें दिया गया था, वह जैसे बिल्कुल ही नामुमकिन था.
हरीश अब तपस्या जी के पास आया और अगले ही पल उसने तपस्या जी के सीने पर से उसके आंचल को पूरी तरह से गिरा दिया. धीरे- धीरे कर तपस्या जी के कपडे भी जमीन पर गिरे हुए थे. अब हरीश पूरी तरह से उसके ऊपर आकर उसे चूम रहा था. जैसे- जैसे हरीश उसके बदन को चूम रहा था, तपस्या को खुद से घिन महसूस हो रही थी. वह किसी तरह हरीश को खुद से दूर करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन हरीश जैसा हट्टा कट्टा इंसान कहां तपस्या से दूर होने वाला था. वह तो लगातार राक्षसों की तरह उसके बदन को नोचने में लगा हुआ था.
वही तपस्या की आंखों से आंसू बहने लगे थे. अभी हरीश पूरी तरह से उसके भीतर सामने के लिए तैयार हुआ ही था कि तभी उसका फोन बजने लगा. यह चीज देखकर हरीश के चेहरे पर इरिटेशन साफ दिखाई देने लगी थी. वह गुस्से में गालियां बकते हुए अपनी जगह से उठा. जैसे ही हरीश उसके ऊपर से उठा, एक पल के लिए तपस्या जी ने राहत की सांस ली. लेकिन फिर भी उनके अंदर इतनी जान नहीं थी कि वह खुद को बचा सके. पर वह खुद को बचाने के लिए अपनी जगह से खडी हुई और लडखडाते हुए कदमों से नीचे की तरफ गिरी. हालांकि वह खडे होने की पूरी कोशिश कर रही थी, पर उनसे खडा हुआ नहीं जा रहा था.
दूसरी तरफ हरीश ने फोन उठाया और आगे से एक औरत की आवाज आई. उस औरत की आवाज सुनकर हरीश का चेहरा गुस्से से कांपने लगा और बोला, तुम खुद पर ध्यान दो, हम पर नहीं. तुम्हारा काम हो रहा है ना। तभी उस औरत ने आगे से कुछ कहा, जिसे सुनकर हरीश के चेहरे के हवाइयां उड गई. अब वह आगे दांत पीसकर बोला, उसे किसी भी हालत में रोको. अगर वह नहीं रुका, तो हमारा बना बनाया प्लान वहीं पर चौपट हो जाएगा.
अब जिस जायदाद पर तुम अपना हक जताने की सोच रही हो ना, वह सब हमारे हाथ से निकल जाएगा। इतना कहते हुए हरीश का चेहरा गुस्से से कांप रहा था. देखते ही देखते दूसरी तरफ से फोन cut गया. अब हरीश ने तपस्या जी की तरफ देखा, जोकि पूरी तरह से जमीन पर गिरी हुई थी. उसे ऐसे गिरा हुआ देखकर हरीश के चेहरे पर डेविल स्माइल आ गई. उसने अब तपस्या जी को बालों से पकडकर ऊपर की तरफ उठाया और लगभग से बेड पर पटक दिया. अब उसकी हैवानियत का सिलसिला शुरू हो चुका था. धीरे- धीरे कर अब वह तपस्या की जान उसके शरीर में से निकाल रहा था. उसने अब खुद को तपस्या के हवाले कर दिया था और तपस्या की चीखे उसे कमरे में गूंजने लगी. उन चीखों को सुनकर बाहर खडी अश्की का कलेजा उसके मुंह को आ गया था. अब उसने जल्दी से उस खिडकी को खोलना चाहा, लेकिन खिडकी भी खुल नहीं रही थी. दूसरी तरफ लगातार हरीश तपस्या को नोच रहा था.
हाल में,
नियति जी और वास्तव जी एक तरफ खडे थे और इस वक्त उनके चेहरे पर पसीने झलक रहे थे. वह अपने ख्यालों में डूबे ही हुए थे कि तभी उनकी नजर रोहिणी जी की तरफ गई, जोकि सीढियां चढते हुए ऊपर की तरफ जा रही थी. रोहिणी जी को ऊपर की तरफ जाता हुआ देखकर नियति जी का रंग पूरी तरह से उड गया. वह जल्दी से रोहिणी जी के पास आई और उनका हाथ पकडते हुए बोली, आप कहां पर जा रही है? तभी रोहिणी जी उनकी तरफ देखती हुई बोली, माफ कीजिएगा, मैंने आपको पहचाना नहीं।
रोहिणी जी की बात पर नियति जी फीका सा मुस्कुराई और बोली, मैं तपस्या की सास हूं। जैसे ही उसने तपस्या की सास का नाम सुना, तो वह मुस्कुराई और बोली, हां, मैंने आपके बारे में सुना था दीदी के मुंह से, लेकिन आज मुलाकात पहली बार हुई है। उसकी बात पर नियति की फीका सा मुस्कुराई और मन ही मन बोली, यह कहां फंस गई मैं, अब पता नहीं कितनी देर यह दिमाग चाटेगी मेरा। रोहिणी जी अब कुछ देर उनके साथ बातें करने को खडी हो गई. फिर कुछ याद आते हुए बोली, मैं आपसे बाद में बात करती हूं. मुझे अभी ऊपर जाना है। अभी वह बोल ही रही थी कि तभी नियति जी उसे रोकते हुए बोली, नहीं, वह मुझे आपसे कुछ काम था। इतना कहते हुए उन्होंने लगभग से रोहिणी का हाथ पकड लिया. रोहिणी उनको हैरानी से देखने लगी.
उन्हें पता नहीं क्यों, नियति जी कुछ अजीब सी लग रही थी.
वहीं दूसरी तरफ अंदर तपस्या जी, जोकि बेड पर गिरी हुई थी, इस वक्त हरीश उसके साथ इंटिमेट हो रहा था और लगभग से ब्रूटली खुद को मूव कर रहा था. जिससे तपस्या बुरी तरह से तिलमिला रही थी. उनकी भयानक चीखे बाहर तक अब सुनाई देने लगी थी. लेकिन हरीश ने उसके मुंह पर हाथ रखकर पूरी तरह से उसका मुंह दबा दिया और खुद को और भी ब्रूटली उसकी तरफ मूव करने लगा. दूसरी तरफ अश्की दरवाजे पर खडी थी.
अश्की, जो कि कुछ बोल भी नहीं पा रही थी, वह अपने मुंह को अपने हाथों में दबाकर फूट- फूट कर रोने लगी थी. उसकी हालत ऐसी हो गई थी कि ना वह अंदर जा ही पा रही थी और ना ही वह कुछ कर पा रही थी. तभी साक्षी जी, जो कि अपने Room से बाहर जा ही रही थी कि तभी उसकी नजर सामने खडी अश्की पर गई. अश्की को इस तरह से रोता हुआ देखकर उनका दिल एक पल के लिए धक सा रह गया. वह तो पहले ही बहुत ज्यादा रोकर अंदर से आई थी और अब अश्की को इस तरह से रोता हुआ देखकर उनका तो कलेजा ही जैसे उनके मुंह को आ गया था. उन्हें अभी तक तपस्या जी के चीखने की आवाज नहीं आई थी, क्योंकि अरोडा मेंशन के Room लगभग से साउंड प्रूफ थे, सिर्फ गेस्ट Room को छोडकर. जिस वजह से अश्की अंदर की चीखे साफ सुन सकती थी. जिस वजह से अपने Room के अंदर होने की वजह से अभी तक उन्हें तपस्या जी की कोई भी आवाज वहां तक नहीं पहुंची थी.
जैसे ही साक्षी जी Room से बाहर आई और उन्होंने अश्की को इस हालत में देखा, वह जल्दी से अश्की के पास आई और उसके चेहरे को अपने हाथों में थामते हुए बोली, क्या हुआ मेरी बच्ची, तुम ऐसे क्यों रो रही हो? अश्की, जोकि साक्षी जी को देखकर अपनी जगह पर सुन्न हो चुकी थी. अब उसका दिमाग पूरी तरह से ब्लैक हो चुका था कि आखिर वह अपनी मां को क्या बताएं. पर साक्षी जी को बताना तो था ही. वह रोते हुए बोली, मां पापा तपस्या आंटी को लेकर अंदर.
जैसे ही उसने यह बात कही, साक्षी जी का रंग पूरी तरह से उड गया. अब तो जैसे उनकी जान निकलनी बाकी रह गई थी. अब वह और बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी, क्योंकि हरीश ने अब हद कर दी थी. जिसका लांछन अब उनके पति पर दागा जा रहा था. अश्की को तो यही लग रहा था कि उसके पापा ही अंदर है. तपस्या जैसे चिल्ला रही थी, उन्हें देखकर वह अपनी मां से बोली, मां, तपस्या आंटी क्यों इतना चीख रही है? वह ठीक तो है? उसकी वह मासूमियत भरी बात सुनकर साक्षी ने जल्दी से अपनी आंखों को पोंछा और उसकी तरफ देखते हुए बडे प्यार से बोली, वह ठीक है बेटा, बस कोई प्रॉब्लम होगी. इसीलिए उनकी आवाज आ रही होगी. तुम ऐसा करो, तुम अपने Room में जाओ। इतना कहकर साक्षी उसे Room में भेजने लगी. लेकिन पता नहीं क्यों, अश्की का दिल हद से ज्यादा बेचैन था. वह जा नहीं पा रही थी वहां से. लेकिन वह अपनी मम्मा की बात भी टाल नहीं सकती थी. इसीलिए वह थोडा सा आगे बढी. जैसे ही साक्षी जी ने उसकी तरफ से करवट ली, तो वह एक दीवार के पीछे छुप गई. इस बार सिर से पानी ऊपर जा चुका था. इसीलिए साक्षी जी अब चिल्ला पडी. उन्होंने जल्दी से दरवाजा खटखटाया और लगभग से चिल्लाते हुए बोली, अबे ओ राक्षस! बाहर निकल, तूने जो हरकत की है ना इस वक्त, जो तुझे सजा मिलेगी ना, वह मौत से भी बदतर होगी, बाहर निकल। जैसे ही हरीश, जो कि खुद को तपस्या की तरफ मूव कर रहा था, तपस्या उसके नीचे बेजान सी लेटी हुई थी. अब तो तपस्या में जैसे जान ही नहीं बची थी.
अब हरीश के चेहरे पर परेशानी झलकने लगी, क्योंकि साक्षी का यह जानना कि हरीश अंदर है, मतलब अब हरीश का भांडा फूटने वाला था. इसीलिए वह जल्दी से ऊपर की तरफ उठा और अपनी पैंट पहनी और अपने शर्ट को पहनने लगा. अभी वह अपनी शर्ट पहन ही रहा था कि तभी दरवाजे पर कुछ जोर से लगने की आवाज हुई. उसने पलट कर देखा, तो दरवाजा खुल चुका था.
साक्षी जी अंदर की तरफ आई और उनकी नजर सीधा तपस्या जी पर गई. तपस्या जी को देखकर ही साक्षी का दिल मुंह को आने को हो गया, क्योंकि तपस्या जी बिल्कुल ही बेलिबास लेटी हुई थी. अब जो उनकी हालत थी, कोई भी देखे, उसका दिल दहल जाए. क्योंकि हरीश ने उसके पूरे बदन पर नीले निशान दे डाले थे. वह इतने गहरे थे कि शायद ही तपस्या सारी उम्र उन्हें भर पाती. जिस के निशान तो शायद भर जाते, पर क्या दिल के निशान भर पाते. ऊपर से क्या उनके पति अब उनको स्वीकार कर पाते और बात यहां पर आकर खत्म हो जाती. ऊपर से सबसे बडी बात यह थी कि अरमान और अश्की का रिश्ता?
साक्षी जी का तो दिमाग ही सुन्न पड चुका था. उन्हें कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि आखिर वह क्या करें. उन्होंने हरीश की तरफ देखा और तेज कदमों से उनके पास आकर खडी हुई. अगले ही पल हरीश के चेहरे पर एक जोरदार थप्पड जड दिया और दांत पीसकर बोली, तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है. तुम जैसे लोग जीने के लायक नहीं हो. मैं अभी पुलिस को फोन करूंगी. तुम्हें क्या लगा, मुझे तुम्हारी सच्चाई पता नहीं चलेगी. मैं जानती हूं, तुम कौन हो. तुम मेरे पति नहीं हो। अभी वह बोल ही रही थी कि तभी हरीश ने उसका बालों से पकडा और खींचते हुए उसका सिर दीवार पर दे मारा. दूसरी तरफ दरवाजे पर खडी अश्की की रूह कांप उठी.
वह भी अब यह सब कुछ देख रही थी. सामने लेटी हुई तपस्या जी को जिस तरह से उसने देखा था, उसका कलेजा पूरी तरह से कांप उठा था. डर के मारे अश्की के हाथ पैर ठंडे पड चुके थे. वही हरीश अब दांत पीसते हुए बोला, अगर तुझे मेरी सच्चाई पता चल ही गई है, तो तुझे जीने का भी कोई हक नहीं। जैसे ही हरीश ने यह बात कही, अश्की के कदम पीछे की तरफ लडखडा गए. पीछे टेबल पडा था, उस पर हल्का सा धक्का लगा और उस पर पडा हुआ वास नीचे जमीन पर जा गिरा. जैसे ही वास जमीन पर गिरा, हरीश की नजर दरवाजे पर खडी अश्की पर गई. अब उसकी नजर अश्की पर गहरी हो गई. दूसरी तरफ इस वक्त उसके हाथ में साक्षी के बाल थे. अब वह साक्षी के बालों को पकडते हुए एक बार फिर से जोर- जोर से तीन- चार बार अश्की की तरफ देखते हुए ही उसका सिर दीवार पर दे मारा. जिससे साक्षी अधमरी हो गई. लेकिन अभी भी उनमें जान बाकी थी. पर जिस तरह से हरीश ने उसका सिर दीवार में दे मारा था, वह कुछ ही देर की मेहमान थी. इतना तो उसकी हालत देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता था. ऊपर से उसकी नाक से भी खून बहने लगा था.
अश्की अपनी मां को देखकर इतना ज्यादा डर गई थी. ऊपर से हरीश की नजरे उस पर थी. अब वह वहां से भागने को हुई. इससे पहले कि वह वहां से भाग पाती, हरीश इतने तेज कदमों से उसके पास आया कि वह संभाल ही नहीं पाई, भागना तो दूर की बात थी. अश्की के कदम अपनी जगह पर जैसे freez हो चुके थे. हरीश ने अब अश्की को भी उसके बालों से पकडा और खींचते हुए लगभग से अंदर की तरफ ले आया. जैसे ही हरीश ने अश्की को खींचा, रोहिणी जी, जो की सीढियां चढते हुए ऊपर की तरफ आ रही थी, उसने अश्की को देखा. उसकी आंखें बडी हो गई.
अश्की की हालत देखकर रोहणी जी जल्दी से आगे की तरफ आई. वह दरवाजे पर खडी होने ही वाली थी कि तभी वह जल्दी से पीछे की तरफ हो गई, क्योंकि हरीश ने अब अश्की के सिर को भी जोर से पास में पडे हुए टेबल पर दे मारा. यह चीज देखकर रोहिणी ने अपने मुंह पर हाथ रख लिया. वह उसकी तरफ देखते हुए बोली, यह भाई साहब ने क्या किया? अभी वह खुद में बडबडा ही रही थी कि तभी हरीश चिल्ला कर बोला, नहीं हूं मैं तुम्हारा बाप, और हां, तुम्हारी मां सही कह रही है. मैं हूं हरीश तोमर हूं, त्रेहान फैमिली का सबसे बडा दुश्मन. मैं त्रेहान फैमिली को कभी खुश नहीं रहने दूंगा, कभी नहीं और शुरुआत होगी तुमसे, क्योंकि तुम इस फैमिली की नींव रखने जा रही हो. यह तो मैं होने ही नहीं दूंगा। इतना कहते हुए उसने एक बार फिर से अश्की को ऊपर की तरफ उठाया और अपनी बैक में से गन निकाली. उसने वह अगले ही पल अश्की के सिर पर दे मारी. जिससे अश्की संभाल नहीं पाई और पीछे की तरफ जा गिरी. अब हरीश उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोला, एक और चीज दिखाऊं। इतना कहते हुए उसने अपनी गन तपस्या जी की तरफ की और अगले ही पल तपस्या के माथे के बीचो- बीच शूट कर दिया. यह चीज अश्की ने साफ देखी थी, हालांकि अश्की अब होश खोने लगी थी. लेकिन तपस्या जी को इस तरह से गोली लगता हुआ देखकर अश्की की आंखें अगले ही पल बंद हो गई. लेकिन अभी वह मरी नहीं थी, जिंदा थी. दूसरी तरफ साक्षी जी की भी हालत बहुत ज्यादा गंभीर हो चुकी थी.
वहीं दूसरी तरफ रोहिणी जी तो अपने कदम आगे बढा ही नहीं पा रही थी. उन्होंने जैसे ही सुना कि यह सामने खडा इंसान जयवंत नहीं, बल्कि हरीश है. उन्होंने अपने कदम वहीं पर रोक लिए थे. लेकिन अगले ही पल वह दोबारा से अश्की के सिर पर कुछ करने को हुआ, इस बार रोहिणी जी ने जो किया, उसका ध्यान खुद- ब- खुद दरवाजे की तरफ चला गया. क्योंकि रोहिणी जी को हरीश का ध्यान अश्की पर से भटकाना था. अगर वह अश्की पर से उसका ध्यान नहीं भटकाती, तो हो सकता था कि हरीश उसकी भी जान ले लेता. उसे किसी भी हाल में अश्की को वहां से लेकर जाना था.
रोहिणी जी ने वहां पर पडा हुआ एक वास उठाया और उसे अपनी डायरेक्शन के अपोजिट फेंक दिया. जिससे हरीश की नजर वहां पर चली गई. अगले ही पल वह बाहर की तरफ निकलने को हुआ कि तभी रोहिणी जी उसकी पीठ के पीछे से होकर दरवाजे के पीछे छुप गई. लेकिन अभी भी उन्होंने अपनी सांसों को पूरी तरह से रोक रखा था. इस वक्त रोहिणी जी की आंखों से आंसू तेजी से बह रहे थे. अपने मुंह पर हाथ रखकर उन्होंने अपनी सांसों तक को रोक कर रखा हुआ था. वही हरीश ने जब अंदर का नजारा देखा, तो वह तो यह समझ गया था कि जो जो यहां पर था, वह अब जिंदा तो नहीं बचेगा. यह सोचकर अब वह वहां से निकल गया और धीरे- धीरे कर सीढियां उतरते हुए नीचे की तरफ आया. उसकी नजर सामने नियति जी पर पडी. उन्हें देखकर हरीश की नजरे उस पर गहरी हो गई. वह नियति जी को पूरी तरह से इग्नोर करके अब वहां से निकल चुका था.
वहीं दूसरी तरफ,
हरीश अभी अरोडा मेंशन से निकला ही था कि तभी एक गाडी तेजी से अरोडा मेंशन के आगे आकर रुकी. अरमान तेज कदमों से भागते हुए अंदर की तरफ आने को हुआ कि तभी उसकी नजर Garden एरिया की तरफ गई. जहां पर एक पंद्रह साल की लडकी, जिसने अश्की जैसे कपडे पहने हुए थे, खडी थी. इस वक्त उस लडकी की पीठ अरमान की तरफ थी. अरमान का दिल उस लडकी को देखकर धक सा रह गया, क्योंकि उस लडकी के ऊपर एक लडका पूरी तरह से झुका हुआ था. उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे उनके बीच Kiss चल रही हो.
यह चीज देखकर अरमान की आंखें खून की तरह लाल हो चुकी थी. वहीं दूसरी तरफ खडी नियति जी ने जब यह चीज देखी, तो उनके चेहरे पर डेविल स्माइल आ गई. क्योंकि नियति जी भी बाहर की तरफ ही आ रही थी और वह क्या करने आ रही थी, यह तो अब वही जाने. अरमान के हाथों की मुट्ठियां कश गई. पहले तो वह अश्की की तरफ जाने को हुआ, लेकिन कुछ सोचते हुए वह उसकी तरफ नहीं गया. अब वह तेज कदमों से अरोडा मेंशन के अंदर जा चुका था.
अरोडा मेंशन के अंदर आते ही उसने अपने कदम सीढियों से सीधा ऊपर की तरफ ले लिए, क्योंकि उसे यहां के सर्वेंट का Call आया था. जिसने उसे सारी इनफार्मेशन उसकी मॉम को लेकर दी थी. अरमान को अंदर आता हुआ देखकर, सिद्धांत जी, जो कि वही बार एरिया पर बैठे ड्रिंक पर ड्रिंक कर रहे थे, इस वक्त वह बहुत ज्यादा नशे में थे. लेकिन जैसे ही उन्होंने अरमान को देखा, उनका नशा जैसे हवा हो गया. उन्हें तो यह भी होश नहीं थी कि तपस्या जी आखिर है कहां पर? ऐसा लग रहा था, जैसे उनके बीच कुछ ठीक ही ना हो. सिद्धांत जी जैसे ही अरमान के पीछे चलने को हुए कि तभी अरमान ने उनका कॉलर पकडा और दांत पीसते हुए बोला, पीछे रहो मुझसे और जितना हो सके ना, दूर रहने की कोशिश करना. अगर उन्हें कुछ हो गया ना, तो मैं तुम्हें जिंदा गाढ दूंगा, यह बात याद रखना। इतना कहते हुए लगभग से उसने सिद्धांत जी को पीछे की तरफ धकेल दिया. वही सिद्धांत जी तो हैरानी से अरमान की तरफ ही देखे जा रहे थे. आखिर अरमान उनके साथ ऐसा बिहेव क्यों कर रहा है, उन्हें खुद नहीं पता था.
अरमान अब तेजी से ऊपर की तरफ बढ गया. जैसे ही वह ऊपर आया, उनकी नजर सामने की तरफ गई. जहां पर सिर्फ अब Room में तपस्या जी की डेड बॉडी थी और साइड में ही नीचे जमीन पर साक्षी जी पूरी तरह से बेसुध अधमरी पडी थी. क्योंकि रोहिणी जी अश्की को तो किसी तरह से ले गई थी. इतने लोगों को उसको अपने साथ ले जाना शायद उसके लिए मुसीबत हो सकती थी. इसीलिए उसने अश्की को ही अपने साथ ले जाना बेहतर समझा. उसने एक सर्वेंट से कहकर साक्षी को और तपस्या जी को अस्पताल ले जाने को कहा था, ताकि वह अश्की को बचा सके. क्योंकि इस वक्त अश्की की हालत तो फिर भी बचाने लायक थी, लेकिन साक्षी, उनके चेहरे से देखकर ही पता लगाया जा सकता था कि वह अब ज्यादा देर बच नहीं पाएगी. लेकिन फिर भी वह साक्षी को उठाने को हुई, तो साक्षी जी ने उनका हाथ पकड लिया और धीमे से अश्की की तरफ इशारा करते हुए उसे बचाने को कहने लगी. इशारों में बातें करते हुए उसने अपना हाथ लगभग से रोहिणी जी के आगे जोड लिया था. उसको इस तरह से हाथ जोडता देख रोहिणी जी की आंखों से आंसू और भी तेजी से बहने लगे. वह खुद को संभाल ही नहीं पा रही थी. एक ही दिन में इतना सब कुछ बदल गया था कि रोहिणी का दिमाग पूरी तरह से खराब हो चुका था.
अब उसने अश्की को उठाया और वहां से किसी तरह ले गई. अश्की को ले जाते हुए उसने एक बार पीछे मुडकर अरोडा मेंशन की तरफ देखा और खुद में ही बडबडाई, यह काली रात मैं कभी जिंदगी में भूल नहीं सकती। इतना कहते हुए लगभग से अम्मा की आंखों में आंसू उतर आए थे. दूसरी तरफ अरमान, जिसने अपनी मां की लाश को देखा, वह तो जैसे टूट कर बिखर गया. क्योंकि उसकी मां के अलावा उसका कोई सहारा नहीं था. वह अगले ही पल भागकर अपनी मां के पास आया और जोर से चिल्लाया, मॉम.
इतना कहते हुए लगभग से उसने तपस्या जी को अपनी बाहों में भर लिया और गले से लगाकर फूट- फूट कर रोने लगा. यह पहली बार था कि जब अरमान जिंदगी में रोया था. वह जोरों से चिल्लाया, जयवंत. तुझे अब मुझे कोई नहीं बचा सकता. तेरा पूरा परिवार मेरी आग में झुलसेगा। उसके बाद तो अरमान जैसे पत्थर ही बन गया था, जो कभी भी नहीं टूट पाया. इस वक्त अरमान की आंखें हद से ज्यादा लाल हो चुकी थी. अब उसकी नजर साक्षी पर गई, जो की अधमरी हालत में नीचे जमीन पर पडी हुई थी. लेकिन अभी उनकी आंखें हल्की- हल्की खुली थी. वह अरमान की तरफ अपना हाथ बढा रही थी, जैसे कुछ कहना चाहती हो. जिस हालत में उसने अश्की को देखा था और अब उसे अश्की से भी नफरत हो गई थी.
दूसरी तरफ दरवाजे पर खडी नियति जी और वास्तव जी के चेहरे पर अब डेविल स्माइल आ चुकी थी. यही तो वह चाहते थे कि त्रेहान फैमिली और अरोडा फैमिली अलग हो जाए और वह सफल हो चुके थे.
वहीं दूसरी तरफ,
रोहिणी जी अश्की को लेकर अस्पताल पहुंची और डॉक्टर ने उसकी ट्रीटमेंट वगैरा किया. ट्रीटमेंट करने के बाद तकरीबन पंद्रह दिन अश्की को होश नहीं आया, क्योंकि अश्की कोमा में चली गई थी. हरीश ने जिस तरह से अश्की का बुरा हाल किया था, उसका बचना नामुमकिन था. लेकिन यह चमत्कार फिर भी पॉसिबल हो चुका था. अश्की की जान किसी तरह से बचाई जा चुकी थी, लेकिन अफसोस कि वह कोमा में जा चुकी थी.
ऐसे ही देखते देखते पंद्रह दिन बीत गए. पंद्रह दिनों में अरमान ने जयवंत और अश्की को कहां ढूंढने की कोशिश नहीं की, लेकिन उन दोनों में से कोई नहीं मिला. जब जयवंत उसे कहीं नहीं मिला, तो पाँच सालों के लिए कनाडा जाने का डिसाइड कर लिया. क्योंकि वापस आकर उसे फिर से अपनी मॉम का बदला लेना था. साक्षी जी तो उस एक घंटे में पूरी हो गई थी. अरमान की तरफ हाथ उन्होंने बढाया तो था, लेकिन अरमान एक पल के लिए भी अपनी जगह से हिलकर उनके पास नहीं गया था. अरमान ने अपनी मॉम का अंतिम संस्कार किया और उसके बाद अरमान अपने पापा सिद्धांत जी से नफरत करने लगा.
दूसरी तरफ,
अश्की को पंद्रह दिन बाद होश आया, तो अम्मा जी उसके पास थी. अम्मा जी को देखकर अश्की के चेहरे पर सवालिया एक्सप्रेशन आ गए.
To be continue.








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