
फ्लैशबैक कंटिन्यू,
अरमान इस वक्त अपनी बडी- बडी आंखों से अश्की की तरफ देख रहा था. इस वक्त उसका दिल इतनी तेजी से धडक रहा था कि उसका क्या हाल हो रहा था, यह वही जानता था. ऊपर से अश्की ने जो अभी- अभी हरकत की थी, अरमान का दिल कर रहा था कि सच में वह अश्की को अपना बना ले. लेकिन वह ऐसा कर नहीं सकता था. वह अब जल्दी से अश्की के बदन को ढकते हुए बेहद प्यार से उसके गाल पर हाथ रखते हुए बोला, बहुत जल्द तुम्हें अपना बनाऊंगा, लेकिन अभी नहीं. अभी तुम बडी हो जाओ, उसके बाद। तभी अश्की अपनी आंखों में नमी लिए बोली, तो क्या आप मुझसे नाराज नहीं है। उसकी बात पर अरमान ने ना में सिर हिलाया. अगले ही पल, अश्की दोबारा से उसके गले से लिपटते हुए बोली, थैंक्यू, थैंक्यू थैंक्यू सो मच.
आपको पता है, जब आप मुझसे नाराज होते हैं ना, तो मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लगता है. मेरा दिल करता है कि मैं इस दुनिया को ही छोड कर चली जाऊं। उसकी बात सुनकर अरमान की नजरे उस पर सर्द हो गई और जबडे पूरी तरह से कस गए. वह उसके गालों को अपने हाथों में भींचते हुए बोला, जरा सोच समझ कर बोला करो, दिलरुबा. कहीं ऐसा ना हो मैं तुम्हारा मूंह अपने तरीके से बंद करूं। उसकी बात सुनकर अश्की के चेहरे पर सवालिया एक्सप्रेशन आ गए. वह बोली, अपने तरीके से। उसकी बात पर अरमान ने उसे गहरी नजरों से देखते हुए हमें सिर हिला दिया.
दूसरी तरफ अश्की अब मुस्कुराई और बडे प्यार से अपने होंठ उसके आगे करते हुए बोली लीजिए, कर दीजिए मेरा मुंह बंद, मैं भी देखूं अपने तरीके से कैसे आप मेरा मुंह बंद करते हैं। इतना कहते हुए उसने पाउट बना लिया. उसके पाउट को देखकर अरमान की नजरे उसके होठों पर ठहर गई. वह थोडा दूर होते हुए बोला, मुझसे थोडा दूर रहो और मुझे अब जाना होगा। उसकी इस बात पर अश्की एक बार फिर से बेचैन हो उठी.
वह रोते हुए बोली, देखा ना, देखा आप मुझसे नाराज हैं. मुझे पता है, आप मुझसे नाराज है. जैसी आप बातें कर रहे हैं ना. आपने अभी- अभी कहां कि आप मुझे अपने तरीके से चुप कराएंगे. जब मैंने कहा तो आपने फिर से कहा कि मुझसे दूर रहो, तो इसका क्या मतलब हुआ. बताइए ना, आप मुझसे नाराज है ना. हां, मैं जानती हूं कि आप मुझसे नाराज है. Sorry ना, मुझसे गलती हो गई. मैं नहीं दूर करूंगी आपको खुद से, आप जो चाहे कर सकते हैं. जैसा चाहे कर सकते हैं। वह कंटीन्यूअस बोले जा रही थी कि तभी अरमान ने उसके सिर के पीछे हाथ रखा और अगले ही पल अपने होंठ उसके होठों पर टिका दिए. अरमान के होंठ अपने होठों पर महसूस कर एक पल के लिए अश्की की आंखें बडी हो गई.
अरमान की आंखें तो पहले ही अश्की के चेहरे पर थी. उसको इस तरह से हैरान होते देख अरमान के होठों के एक बार फिर से कोने मुड गए. अब अरमान उसके होठों को अपने होठों में लेकर लगातार चूमे जा रहा था. उसको चूमते हुए देख कर अश्की का दिल रोलर कोस्टर की स्पीड से दौडने लगा. इस वक्त उसके दिल की धडकनों ने इतना बवाल मचा रखा था कि उसका शोर अरमान को भी साफ सुनाई दे रहा था. जिस तरह से अरमान उसे चूम रहा था, धीरे- धीरे कर अश्की की आंखें पूरी तरह से बंद हो चुकी थी. अरमान लगातार उसे चूमे जा रहा था. पर चूमते हुए ही उसने उसके बालों पर अपना हाथ ढीला किया और उसके दोनों गालों को अपने हाथों में भरते हुए उसे बिस्तर पर लेटाते हुए उसको चूमने लगा और खुद उसके ऊपर पूरी तरह से लीन हो चुका था. अब उसने अपने पैरों को पूरी तरह से अश्की के इर्द गिर्द रखा हुआ था और लगभग से उसके ऊपर था और उसके होठों को चूमे जा रहा था. वही अश्की ने भी अपने हाथ उसकी गर्दन में फंसा लिए थे. लेकिन अब अरमान की हालत खराब होने लग गई थी, क्योंकि अब वह खुद पर कंट्रोल नहीं कर पा रहा था. इसीलिए उसने जल्दी से खुद को अश्की से दूर किया और अपनी सांसों को संभालते हुए लगभग से जल्दी से बेड पर खडा हुआ और वहां से बालकनी की तरफ निकल गया.
क्योंकि अब वह और खुद को कंट्रोल नहीं कर पा रहा था. अश्की, जो कि बिस्तर पर लेटी हुई थी, अरमान के यूं जाने से अब उसकी आंखों से आंसू तेजी से बहने लगे. वह रोते हुए बोली, मैं जानती हूं, आप मुझसे नाराज है. इसीलिए आप मुझे छोड कर चले गए ना। इतना कहते हुए वह रोने लगी और बोली, आपको तो इतना भी याद नहीं कि मेरा जन्मदिन था आज। इतना कहते हुए वह और भी तेजी से रोने लगी. वही अरमान, जो कि बाहर की तरफ आया था, इस वक्त उसकी सांसे हद से ज्यादा गहरी होने लगी थी. उसके माथे पर से पसीना बहते हुए उसके गालों पर आ चुका था, क्योंकि अश्की की करीबी से उसका दिल कर रहा था कि वह अश्की के पूरी तरह अंदर तक समा जाए.
उसे अपनी बॉडी में अकडन सी महसूस होने लगी थी, जो उसकी पैंट के उभार से पता चल रही थी. लेकिन अश्की ने यह चीज महसूस नहीं की थी. पर अरमान को अब इस चीज का कुछ करना था और अब वह जल्दी से त्रेहान फार्महाउस के लिए निकल गया था. तकरीबन आधे घंटे में वह फार्महाउस के बाथरूम में था. और अपने नीचे के अंग को सहला रहा था. इस वक्त वह शॉवर के नीचे था. शॉवर के नीचे भी उसकी सांसे कंट्रोल नहीं कर पा रहा था और लगभग से अपने अंग को सहलाते हुए ही उसकी आंखों के सामने अश्की का चेहरा घूम रहा था. जिस तरह से अश्की को आज उसने देखा था, उसके लिए अश्की किसी जन्नत से कम नहीं लग रही थी.
वही अरमान, जो कि इस वक्त अश्की के सामने खडा था, वह कल रात की बातें याद कर अब दोबारा से होश में आया. वह अश्की की तरफ देखते हुए बोला, अगर मैं यहां से ना गया तो. अनर्थ हो जाएगा। तभी अश्की उसके हाथ को कसकर पकडते हुए बोली, तो हो जाने दीजिए अनर्थ, मै जानती हूं कि Kiss अनर्थ के बारे में आप बात कर रहे हैं. आप अभी भी मुझसे नाराज है ना कि मैंने कल रात आपको रोका. तो नहीं रोकूंगी मैं, आज कर लीजिए अपनी मनमानी. बना लीजिए मुझे अपना, पर प्लीज, मुझे छोड कर मत जाइए।
अश्की की बात पर अरमान को इस वक्त उस पर इतना ज्यादा प्यार आ रहा था कि वह बता नहीं सकता था. अब वह उसे गले से लगाते हुए बोला, मैं तुमसे नाराज कभी हो ही नहीं सकता. अभी के लिए मुझे कनाडा जाना होगा और इसीलिए मैं तुमसे मिलने आया था. ताकि मैं तुम्हें बता सकूं और अगर मैं कनाडा ना गया, तो मेरा बहुत नुकसान होगा. क्या तुम चाहती हो कि मेरा नुकसान हो? उसकी बात सुनकर एक पल के लिए अश्की चुप हो गई अब उसने अपना चेहरा उसके सीने में से निकाल कर उसकी आंखों में देखा, तो अरमान ने उसे उम्मीद भरी नजरों से देखा. अश्की तडप कर बोली, तो मैं इतनी देर आपके बिना कैसे रहूंगी? आप कितनी देर के लिए जा रहे है, एक दिन या दो दिन?
उसका वह मासूम सा सवाल सुनकर एक पल के लिए अरमान उसकी तरफ देखता ही रह गया. अब वह क्या ही बताएं कि वह उससे दूर पूरे पाँच सालों के लिए जा रहा है. अगर अश्की को वह बताता, तो शायद अश्की का दिल टूट जाता. लेकिन अश्की को बताना भी जरूरी था. ऊपर से उसका दिल भी उसे दगा दे रहा था कि अगर अश्की को पता चला, तो वह उसे शायद जाने नहीं देगी. अब उसने उसका हाथ पकडा और बडे प्यार से चूमते हुए बोला, बताता हूं, पहले मेरे साथ चलो।
वहीं दूसरी तरफ,
अरोडा मेंशन के हाल में,
इस वक्त वहां पर एक आलीशान पार्टी चल रही थी, जिसमें अरोडा खानदान और त्रेहान खानदान के सभी सदस्य आए हुए थे. यहां पर रोहिणी अग्रवाल यानी की अम्मा जी उर्फ अरमान की बडी मां, वह भी आई हुई थी. रोहिणी जी और साक्षी जी इस वक्त आपस में बात कर रही थी. वह दोनों एक टेबल पर बैठी हुई थी. उनके आगे खाने- पीने की चीज रखी हुई थी, लेकिन रोहिणी जी कुछ खा नहीं रही थी. साक्षी जी उन्हें खाने के लिए बोल रही थी. तभी वहां पर अरमान की मॉम तपस्या जी आई और उनके साथ ही अश्की के डैड, जो कि पीछे ही बार काउंटर पर खडे ड्रिंक कर रहे थे. उनकी नजरें इस वक्त तपस्या जी पर थी. तपस्या जी को अपनी बीवी के पास जाता हुआ देखकर उनके चेहरे पर डेविल स्माइल उत्तर आई. इस वक्त उनके दिमाग में बहुत सी बातें चल रही थी. तपस्या जी को अपनी पत्नी के पास जाता हुआ देखकर उनके इरादों को जैसे हवा मिलने वाली थी.
जयवंत जी, जो की ड्रिंक पर ड्रिंक कर रहे थे, अब अपनी जगह से खडे हुए और उन्होंने अपने कदम साक्षी जी की तरफ बढा दिए, जो कि वहां पर बैठी खाना खा रही थी. खाना खाते हुए पास में खडी हुई तपस्या जी की तरफ देखा और उन्हें बैठने का इशारा किया और बोली, आई नो, तपस्या जी, आप खडी क्यों है? तपस्या जी हल्का सा मुस्कुराई और बोली, वह बस यह मिल नहीं रहे थे, तो आपको देखा, तो आपकी तरफ आ गई। तपस्या जी की बात पर साक्षी जी मुस्कुराए और साथ में रोहिणी जी भी. वह उनकी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोली,
* नेकी और puch puch आइए ना, बैठे इंजॉय कीजिए डिनर को।
वह आपस में बातें कर ही रही थी कि दूसरी तरफ खडे जयवंत जी ने एक वेटर को बुलाया और उनके हाथों में पकडे हुए जूस की तरफ देखते हुए एक जूस के गिलास में एक मेडिसिन मिक्स कर दी. उस मेडिसिन को मिक्स होता हुआ देखकर उस वेटर की आंखें बडी हो गई. उन्होंने जयवंत की तरफ देखा. वह वेटर को गहरी नजरों से देखते हुए बोले, अगर किसी को बताया, तो तुम्हारी जान मैं खुद अपने हाथों से ले लूंगा, समझे। उसकी बात पर वेटर पूरी तरह से घबरा गया और हां में सिर हिला दिया. तभी जयवंत जी तपस्या जी की तरफ उंगली करते हुए बोले, यह ड्रिंक उसे पिलानी है। उसकी बात पर वेटर का चेहरा पूरी तरह से पीला पड गया, क्योंकि तपस्या जी को वहां पर हर कोई जानता था. तपस्या जी वहां की जानी- मानी हस्ती थी, जिन्हें हर कोई जानता था.
दूसरी तरफ साक्षी जी, जो कि खाना खा रही थी, वह तपस्या जी की तरफ देखकर बोली, आपके Husband से याद आया, मेरे Husband कहां पर है? इतना कहते हुए वह इधर- उधर देखने लगी कि तभी उनकी नजर बार काउंटर पर गई, जहां पर जयवंत जी ड्रिंक कर रहे थे. जयवंत जी को ड्रिंक करते हुए देखकर उनके चेहरे पर हैरानी भरे एक्सप्रेशन आ गए. वह हैरान होते हुए मन में बोली, इन्होंने शराब पीनी कब से शुरू कर दी. अभी कल ही तो यह रशिया से आए हैं. पहले तो कभी उन्होंने शराब नहीं पी और ना ही कभी फोन पर जिक्र किया कि मैंने ड्रिंक की हुई है. अब यह ड्रिंक करने लगे। इतना कहते हुए साक्षी जी लगभग सोच में पड चुकी थी. इस वक्त साक्षी जी का दिमाग पूरी तरह से घूम चुका था.
वहीं दूसरी तरफ जयवंत जी, जोकि इस वक्त तपस्या जी को अपनी सेडक्टिव नजरों से देख रहे थे, तभी उनका फोन बजा और फोन की तरफ देखकर उनके चेहरे पर फ्रस्ट्रेशन भरे एक्सप्रेशन आ गए. उन्होंने जल्दी से अपना फोन उठाया और कान से लगाते हुए बोले, क्या बात है, जब देखो, कुत्तों की तरह भौंकते रहते हो. तुम उसका ख्याल नहीं रख सकते. जब देखो, उठकर फोन मुझे कर देते हो. कभी तो कुछ खुद कर लिया करो। इतना कहते हुए जयवंत जी लगभग से फ्रस्ट्रेटेड हो चुके थे. लेकिन अगले ही पल जो दूसरी तरफ से कहा गया, उसे सुनकर जयवंत जी का चेहरा पीला पड गया. अब उन्होंने जल्दी से सामने वाले शख्स को कहा, मैं आ रहा हूं, अभी। इतना कहते हुए उन्होंने लगभग से फोन काट दिया था.
वह हडबडी से वहां से जाने को हुए, तभी उनकी नजर एक बार फिर से तपस्या पर गई, जो कि वह जूस पी रही थी. उनको जूस पीता हुआ देखकर जयवंत जी के चेहरे पर अजीब से एक्सप्रेशन आ गए. उन्होंने वहां पर खडी सर्वेंट को अपनी तरफ बुलाया और उससे कुछ कहा. जैसे- जैसे जयवंत जी बोल रहे थे, वैसे- वैसे उस सर्वेंट का चेहरा पूरी तरह से सफेद पडता जा रहा था. दूसरी तरफ रोहिणी और तपस्या जी के बीच में बैठी हुई साक्षी भी यह सब कुछ देख रही थी. उनके चेहरे पर इस वक्त अजीब से एक्सप्रेशन थे. आखिर जयवंत जी कर क्या रहे हैं.
यह सोचते हुए साक्षी जी भी हैरान थी. जयवंत जी ने अब उस मेड को पैसे दिए और बोले, काम हो जाना चाहिए. अगर नहीं हुआ, तो अपना सोच लेना। उस मेड का चेहरा पूरी तरह से सफेद पड चुका था. उसे तो यकीन ही नहीं आ रहा था कि उसके सामने खडा शख्स, जो हद से ज्यादा शरीफ था, वह इस तरह से कोई हरकत कर रहा है. वह हैरानी से जयवंत जी की तरफ देखने लगी. वह लडखडाती हुई आवाज में बोली, लेकिन सर। इससे आगे वह कुछ बोलती, तभी जयवंत जी ने अपनी कोट, जो कि उन्होंने पहनी हुई थी, वह साइट पर की. अगले ही पल, उस मेड ने उनकी पैंट में टंकी हुई बंदूक देखी और उस बंदूक को देखकर मेड की सांस उसके गले में ही अटक गई.
अभी हो जाएगा sir आपका काम। इतना कहकर मेड वहां से चली गई. दूसरी तरफ जयवंत जी अब सीढियां चढते हुए ऊपर की तरफ जाने लगे. जयवंत जी को ऊपर की तरफ जाता हुआ देखकर साक्षी जी रोहिणी जी और तपस्या जी की तरफ देखकर बोली, एक्सक्यूज me, मैं अभी आती हूं। इतना कहते हुए लगभग से रोहिणी जी और तपस्या जी के बीच में से उठकर जा चुकी थी. तपस्या जी अब रोहिणी जी की तरफ देखकर बोली, इन्हें क्या हुआ? इनके चेहरे से देखकर लग रहा है, जैसे। वह अभी बोल ही रही थी कि तभी रोहिणी जी बोली, पता नहीं क्या हुआ है? लगता है, कोई बात हुई होगी शायद, इसलिए. कोई बात नहीं, आप इंजॉय कीजिए. हम है ना आपके लिए। इतना कहते हुए रोहिणी जी के चेहरे पर गहरी मुस्कुराहट आ गई.
तपस्या जी अब रोहिणी जी की तरफ देखकर बोली, वैसे आप बहुत अच्छी हैं. मुझे लगा नहीं था कि आपका स्वभाव इतना अच्छा होगा। उसकी बात पर रोहिणी जी मुस्कुराई और बोली, मुझे भी नहीं लगा था कि आप इतने बडे खानदान की होकर मुझसे इस तरह से नम्रता से बात करेंगी। तभी तपस्या जी उनको जवाब देते हुए बोली, हर अमीर खानदान के लोग एक जैसे नहीं होते। उसकी बात पर रोहिणी जी मुस्कुराई और बोली, सही कहा आपने, इसीलिए तो आपने मुझे पहचानने के बाद भी मुझसे ठीक से बात नहीं की थी, dee. उसकी बात पर तपस्या जी मुस्कुराई और बोली, अगर इतना ही Miss कर रही थी, तो कहां थी अब तक तुम? यहां पर बैठकर साक्षी जी के साथ बात कर रही थी, तो क्या वहां पर मेरे पास नहीं आ सकती थी।
तपस्या जी की बात पर रोहिणी ने मुंह बनाया और बोली, चाहे कुछ भी मर्जी कह लीजिए दीदी, इन दो सालों में आप बहुत बदल गई हैं। इतना कहते हुए रोहिणी ने लगभग से अपना मुंह दूसरी तरफ घूमा लिया. उसको इस तरह से मुंह घूमाता हुआ देखकर तपस्या को उस पर बहुत ज्यादा प्यार आ रहा था. वह अब अपनी जगह से खडी हुई और रोहिणी जी के साथ वाली चेयर पर जाकर बैठ गई और उसके गाल पर हाथ रखते हुए बोली, बडी हो मुझसे, लेकिन हरकतें तुम्हारी छोटी जैसी है। उसकी बात पर रोहिणी मुस्कुराई और उसके गले से लगते हुए बोली, तो आप क्यों मुझसे इतनी देर से अनजान बनने का दिखावा कर रही हैं और कैसे आपने साक्षी जी के सामने मुझसे अनजान बनने की एक्टिंग की। उसकी बात पर अब तपस्या जी भी मुंह बनाते हुए बोली, तुम कौन सा कम हो। इतना कहते हुए लगभग से खिलखिला कर हंसने लगी. लेकिन तभी तपस्या जी का सिर घूमने लगा. वह एक पल के लिए अपने सिर पर हाथ रखने को ही हुई, तभी रोहिणी जी ने उससे कहा, क्या हुआ, दी? भले तपस्या जी उनसे छोटी थी, लेकिन फिर भी रोहिणी उन्हें बडा मानती थी और इसीलिए उन्हें दी कह कर बुलाती थी.
रोहिणी के ऐसे बुलाने से तपस्या जी फीका सा मुस्कुराई और बोली, कुछ नहीं हुआ, बस वैसे ही चक्कर आ गया होगा। इतना कहते हुए वह लगभग से अपना सिर पकड कर एक साइड पर बैठने को हुई. तभी रोहिणी बोली, आप ऐसा कीजिए, आप थोडा आराम कर लीजिए. मैं आपको Room दिखा देती हूं. वैसे भी साक्षी जी मेरी बहुत अच्छी दोस्त हैं. हम Collage में इकट्ठे पढती आई हैं। उसकी बात सुनकर तपस्या जी ने कुछ सोचते हुए कहा, नहीं, बस मै ठीक हूं। इतना कहते हुए वो आराम से बैठ गई. तभी रोहिणी जी बोली, आर You स्योर दी। उसकी बात पर तपस्या जी ने हां में सिर हिला दिया और सिर पकडकर वहीं पर बैठ गई.
वहीं दूसरी तरफ,
साक्षी जी जयवंत जी का पीछा करते हुए अपने Room तक पहुंच गई थी. Room में पहुंचते ही उन्होंने जो देखा, उनकी आंखें हैरत से फैल गई. क्योंकि जयवंत जी ने अपने Room की बुक्शेल्फ में से एक बुक निकाली. जैसे ही उन्होंने बुक्शेल्फ में से बुक निकाली, वह दरवाजा बन गया. अगले ही पल वह दरवाजा पूरी तरह से खुल गया. दरवाजे के खुलते ही जयवंत जी ने वह बुक दोबारा से लगाई और अंदर की तरफ चले गए. जिससे वह दरवाजा दोबारा से बंद हो गया. वहीं साक्षी जी तो हैरानी से उस दरवाजे की तरफ ही देखते ही रह गई.
उन्हें तो समझ में ही नहीं आ रहा था कि एक पल के लिए हुआ क्या और यहां पर एक दरवाजा भी है. वह भी उनके Room में, उन्होंने कभी सोचा नहीं था. पर अब वह अंदर की तरफ आई और जल्दी से उन्होंने उस बुक्शेल्फ में से वही बुक उठाई, तो दरवाजा फिर से खुल गया. दरवाजा खुलते ही उन्होंने वह बुक्शेल्फ में बुक रखी और अंदर की तरफ चली गई. अंदर जाते ही वहां पर एक साइड पर नीचे जाते हुए सीढियां थी. लेकिन वहां पर हल्का- हल्का अंधेरा था, जिसे देखकर साक्षी जी को बहुत ज्यादा डर लग रहा था. लेकिन फिर भी उन्होंने खुद को संभाला और धीरे- धीरे कर सीढियां उतरते हुए नीचे की तरफ जाने लगी. जैसे- जैसे वह सीढियां नीचे की तरफ उतर रही थी, उनका दिल तेजी से धडक रहा था. उन्हें एक अजीब सी वाइब उस बेसमेंट में से आ रही थी. उसने तो कभी सोचा भी नहीं था कि अरोडा मेंशन में कोई सीक्रेट Room भी होगा.
जैसे- जैसे साक्षी जी नीचे उतर रही थी, वैसे- वैसे उनके दिल की धडकन मध्यम पडती जा रही थी. उनका दिल हद से ज्यादा घबरा रहा था. तभी उस बेसमेंट में से तेजी से चीखने की आवाज सुनाई देने लगी. इस आवाज को सुनकर साक्षी जी के दिल की धडकन एक पल के लिए रुकने को हो गई.
अब वह अगले ही पल बेसमेंट में बने हुए दरवाजे के पास पहुंच चुकी थी. दरवाजे के पास पहुंचते ही उन्होंने पास में एक खिडकी थी और वह खिडकी से ही आवाज और भी तेजी से आ रही थी. उन्होंने अब उस खिडकी को हल्का सा खोला और बीच की दरार में से देखने लगी. जहां पर जयवंत जी एक इंसान को, जो की कुर्सी पर बंधा हुआ था, उन्हें बुरी तरह से मार रहे थे और गुस्से में कांपते हुए बोले, तेरी हिम्मत कैसे हुई यहां से निकलने की. तेरी बीवी है, जो मुझ पर हद से ज्यादा नजर रखती है। इतना कहते हुए उन्होंने लगभग से सामने बैठे हुए शख्स, जोकि कोई और नहीं, रियल जयवंत जी थे. यानी कि जो शख्स अब उन सबके बीच में था, वह जयवंत था ही नहीं. वह तो कोई और ही बहरूपिया था, जो कि यहां पर किसी और ही मकसद से आया हुआ था.
वह शख्स लगातार जयवंत जी को अपनी हाथों में पकडी हुई छडी के साथ वार कर रहा था. जिससे जयवंत जी लगभग से जोर- जोर से चिल्ला रहे थे. वह शख्स गुस्से से कांपते हुए बोला, चिल्ला, और चिल्ला, जितना चिल्ला सकता है, उतना चिल्ला. यहां पर तेरी चीखे सुनने वाला कोई नहीं है। दूसरी तरफ बाहर खडी साक्षी जी, यह चीज देखकर बुरी तरह से कांप उठी थी. उनका कलेजा तो जैसे मुंह को आ गया था. दिमाग पूरी तरह से काम करना बंद हो चुका था. समझ नहीं आ रहा था कि आखिर करें तो कर क्या. सामने बैठे जयवंत जी की हालत इतनी खराब थी कि उनके हाथ पैर से छडी से मार मार के लहू निकली हुई थी. अब तो उनके मुंह में कपडा ठूंस दिया गया था. अब वह नकली जयवंत ने एक बिजली का एक सिर पर लगाने वाली एक वायर ली और उस वायर को जयवंत जी के सिर पर पूरी तरह से लपेट दिया. जैसे ही वह वायर जयवंत जी के सिर पर लपेटी, उस वायर को लपेटते हुए जयवंत जी, जो की कुर्सी पर बैठे हुए थे, वह ना में लगभग से सिर हिला रहे थे. जैसे उनको पता था कि अब उनके साथ क्या होने वाला था. उनकी आंखों से लगभग से आंसू बहने लगे थे और बाहर खडी साक्षी जी का कलेजा पूरी तरह से कांप रहा था. वह जयवंत जी की ऐसी हालत होते हुए देखकर घुट घुट कर अंदर ही अंदर रो रही थी. लेकिन कर कुछ भी नहीं पा रही थी. उन्हें यहां से किसी तरीके से निकलना था. तभी वह जयवंत जी की मदद कर पाती.
उन्होंने अपने मुंह पर हाथ रखा हुआ था और बुरी तरह से रो रही थी. दूसरी तरफ जयवंत जी, जोकि कुर्सी पर बैठे हुए झटपटा रहे थे, तभी उनकी सांसे गहरी होने लगी. क्योंकि उस शख्स ने उन वायरस को ऑन कर दिया था. जिससे जयवंत जी के दिमाग में एक प्रेशर पडा और उनका दिमाग पूरी तरह से सुन्न पड चुका था. उनकी बॉडी पूरी तरह से सिवर करने लगी. देखते ही देखते उनकी बॉडी में करंट आने लगा और आंखें पूरी तरह से पलटने को हो गई.
वह शख्स, जो जयवंत बनकर आया हुआ था, वह राक्षसों की तरह हंसते हुए बोला, अब भागने की कोशिश करेगा. कर, कर ना भागने की कोशिश अब, आया हरीश तोमर को पहचानने, हरीश तोमर एक ऐसी चीज है ना कि जिसके गले पड जाए ना, वह निकलता नहीं है जल्दी और तू क्या सोच रहा था कि तू मुझे अपने गले से निकाल देगा. तू यहां से भाग जाएगा और लोगों को मेरी सच्चाई बताएगा. ऐसा कभी नहीं होगा. तेरे लिए इतनी मखमली डील छोड कर आया हूं ना। इतना कहते हुए उसने लगभग से अपने होठों पर जीभ घुमाई और उसकी आंखों के सामने तपस्या जी का चेहरा घूम गया. अब वहां पर खडे बॉडीगार्ड की तरफ देखकर हरीश तोमर गुस्से से घूरते हुए बोला, अब अगर यह भागा ना, तो तुम लोगों की जान मैं अपने हाथों से लूंगा। इतना कहते हुए हरीश ने उनको देखा, तो वह पूरी तरह से कांप उठे. अब हरीश जल्दी से बाहर की तरफ निकल गया. जैसे ही हरीश बाहर निकलने को हुआ,
साक्षी जी जल्दी से पीछे की तरफ हट गई और वहीं पर एक साइड बनी हुई थी, उसके पीछे छुप गई. हरीश जी जल्दी से वहां से निकल गए और निकलते निकलते वह ऊपर की तरफ आए. साक्षी जी भी उनके पीछे की तरफ आ रही थी. उन्हें देखना था कि बाहर कैसे जाया जाए. जैसे ही हरीश जी ने वहां पर जाकर एक बटन, जोकि दीवार में फिट था, उसे दबाया, तो दरवाजा पूरी तरह से अपने आप खुल गया और दरवाजा खुलते ही हरीश बाहर निकल गए.
हरीश के बाहर निकलते ही साक्षी ने कुछ देर वेट किया और अब उन्होंने भी दरवाजा खोला और बाहर की तरफ आ गई. इस वक्त वही जानती थी कि उनकी सांसे कितनी गहरी चल रही थी. दो दिनों से यह शख्स उनके साथ रह रहा था और उन्हें यही नहीं पता चल रहा था कि यह शख्स है कौन?
अब उनका चेहरा पूरी तरह से पीला पड चुका था.
दूसरी तरफ,
अश्की के Room में,
अरमान और अश्की इस
वक्त टेरेस पर बैठे हुए थे और उनके सामने एक केक पडा हुआ था.
To be continue.








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