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Mera bachha kaha hai

अगली सुबह,,

Hotel Paradise,

ध्वनि इस वक्त रूम में उल्टी लेटी हुई थी और उसके बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था। अभी तक उसकी आंख नहीं खुली थी। दूसरी तरफ आदर्श वही बिस्तर पर साथ में लेटा हुआ था। वह अपने हाथ पर अपना सिर टिकाकर ध्वनि को ही देख रहा था, जिसका चेहरा उसी की तरफ था। लेकिन वह अभी भी गहरी नींद में थी। उसके चेहरे पर हल्की-हल्की पर्दों से छीनकर रोशनी पड़ रही थी। जिस वजह से उसकी आंखें हल्की-हल्की फड़फड़ा रही थी। उसकी आंखों को फड़फड़ाता हुआ देख आदर्श के चेहरे पर एक अलग ही चमक थी। लेकिन अगले ही पल, उसने अपने हाथ को ऊपर की तरफ उठाया और ध्वनि के चेहरे पर छाव करते हुए उसके चेहरे को गौर से देखने लगा।

उसका वह खूबसूरत सा चेहरा और ठोड़ी के पास वह काला सा तिल, वह तिल किसी का भी दिल ले जाए। लेकिन आदर्श का दिल पता नहीं क्यों ध्वनि पर ठहर रहा था। वह इस वक्त उसे इतनी गहरी नजरों से देख रहा था, जैसे वेट कर रहा हो कि कब ध्वनि होश में आए और उसके ऊपर बम फोड़े। वही ध्वनि, जोकि गहरी नींद में सोई थी, अब उसकी आंखें हल्की-हल्की खुलने लगी। आंखे खुलते ही एक पल के लिए उसकी आंखों के आगे धुंधलापन छा गया।

जैसे-जैसे उसे होश आ रहा था, वैसे-वैसे वह सीधी होकर लेटी और अगले ही पल उसकी नज़रें सीलिंग पर जा टकराई। सीलिंग पर जाते ही उसे इतना तो समझ आ गया था कि वह अपने कमरे में तो बिल्कुल भी नहीं है। अब उसने अपने सिर पर हाथ रखा, क्योंकि उसके सिर में हद से ज्यादा दर्द हो रहा था। सिर दर्द होते ही अब उसने इधर-उधर देखा, तो उसकी नजर पास ही में लेटे हुए आदर्श पर गई। जैसे ही उसकी नजर आदर्श पर गई, एक पल के लिए ध्वनि का दिल धक सा रह गया और हाथ पैर पूरी तरह से ठंडे पड़ गए।

ध्वनि का पूरा शरीर जैसे कांप उठा था। आदर्श को वहां पर देखकर अब उसका कलेजा जैसे उसके हलक में आ गया था। वह तो हैरानी से आदर्श की तरफ ही देखे जा रही थी। अब वह एकदम से हड़बड़ी में अपनी जगह से उठी। इतनी ज्यादा तेजी से उठी थी कि वह एकदम से पीछे की तरफ फिसल गई। जिससे वह संभाल नहीं पाई और सीधा बेड पर से नीचे धड़ाम से गिरी और अगले ही पल उस की कमर में चोट लग गई।

लेकिन आदर्श को तो इस चीज से कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था। वह तो अपनी डेविल स्माइल के साथ उसे देखे जा रहा था। लेकिन ध्वनि को अब बहुत सा फर्क पड़ने वाला था। इस वक्त उसका गला पूरी तरह से सूख चुका था। ऐसा लग रहा था, जैसे किसी ने उसके बदन में से जान निकाल ली हो। उसके दिमाग में इतना ज्यादा बोझ पड़ गया था कि उसकी आंखों के सामने अपने बेटे का चेहरा घूमने लगा। अगले ही पल, उसकी आंखों में आंसू आ गए। उसे तो हैरानगी इस बात की आ रही थी कि जब आदर्श को गोली लगी थी, तो आदर्श जिंदा कैसे हैं। उसने तो गोली सीधा उसके सीने पर मारी थी। वही आदर्श अब अपनी जगह पर खड़ा हुआ और बेहद सेडक्टिव वे में उसके पास चलते हुए आया। आदर्श के बदन पर भी इस वक्त कोई कपड़ा नहीं था।

जैसे-जैसे वह ध्वनि के पास चलते हुए आ रहा था, ध्वनि अपने कदम पूरी तरह से पीछे की तरफ ले रही थी। इस वक्त उसका दिल जोरो जोरो से धड़क रहा था। जैसे-जैसे आदर्श उसके पास आ रहा था, वैसे-वैसे उसकी सांसे सूखने लगी थी। वह रोते हुए ना में सिर हिलाते हुए बोली, "यह मेरा जरूर एक ख्वाब है। तुम, तुम जिंदा नहीं हो सकते। मैंने खुद तुम्हें मारा है।"

इतना कहते हुए लगभग से ध्वनि की सांस फूल रही थी। वही आदर्श पूरी तरह से उसके पास आया और पंजों के बल उसके पास बैठते हुए बड़ी ही अदा से उसने उसके गाल पर अपनी उंगलियां चलाई और अपने होठों को अपने दांतों तले दबाते हुए बोला, "किसने कहा बच्चे, मै मर गया था। वैसे शॉर्ट तो काफी मजेदार लगाया था, सीधा दिल पर आकर लगा।" इतना कहते हुए उसने अपने सीने पर हाथ रख लिया, जहां पर अभी भी गोली का निशान बना हुआ था। उसे यूं देखकर ध्वनि के बदन में कंपकंपी सी छूट गई।

तभी ध्वनि बोली, "लेकिन लेकिन तुम जिंदा कैसे बचे?" उसकी बात पर अब आदर्श उसके पास से उठा और उसके बिल्कुल पास ही सोफा पड़ा हुआ था, उस पर जाकर बैठ गया और फिर उस सोफे पर से उसके चेहरे पर झुकते हुए बोला, "that was the shocking na!

मैं आखिर बच कैसे गया? ohhh बेबी को शौक लगा?" इतना कहते हुए लगभग से उसके चेहरे पर पूरी तरह से झुक चुका था और उसके होठों को चूमने लगा। तभी ध्वनि अपना चेहरा दूसरी तरफ करते हुए बोली, "दूर रहो मुझसे।" उसकी बात पर आदर्श ने अब उसके बालों को मुट्ठी में झकड़ा और एकदम से ऊपर की तरफ उठाया जिससे ध्वनि की जोरदार चीख उस कमरे में गूंज गई, क्योंकि आदर्श ने बड़ी बेरहमी से उसके बालों को पकड़ा हुआ था।

ध्वनि की आंखों से आंसू बह रहे थे। वह तड़प रही थी कि आदर्श उसके बालों को छोड़ दे। लेकिन आदर्श ने जिस बेरहमी से उसके बाल पकड़े हुए थे, उसे ऐसा लग रहा था, जैसे उसकी स्कैल्प में से उसके बाल ही निकल जाएंगे।

वह तड़पते हुए बोली, "मुझे दर्द हो रहा है। छोड़ो मुझे।" लेकिन आदर्श बिना किसी एक्सप्रेशन के बोला, "अभी तो कुछ भी नहीं बेबी, अभी तो स्टार्टिंग है। अभी तो जो जो रात को हुआ ना, अब वह दिन में होगा। लेकिन उसे तरीके से नहीं, इस बार जो होगा, बेहद फ्रूटली होगा। पिछली बार तो फिर भी मैंने तुम पर तरस खाया था। और हां, एक बात और जरा बता देना।"

उसकी बात सुनकर ध्वनि के चेहरे पर सवालिया एक्सप्रेशन आ गए। "पहले स्टार्टिंग कहां से करूं, आगे से या पीछे से?" उसकी बात पर ध्वनि पीछे की तरफ होते हुए बोली, "नहीं, प्लीज दोबारा मत वह सब दोहराना। मुझे बहुत दर्द होता है। प्लीज, कैसे इंसान हो तुम? एक्चुअल तुम इंसान तो हो ही नहीं, तुम तो हो ही हैवान।"

"और एक बात और पूछनी थी मुझे तुमसे।" इस बार ध्वनि ने उसकी बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और अपना चेहरा दूसरी तरफ घूमाते हुए वहां से उठने को हुई। तभी आदर्श ने उसके बालों को मुट्ठी में इस तरह फिर से बेरहमी से झंकड़ते हुए उसे अपनी तरफ खींचते हुए बोला, "मेरा बच्चा कहां पर है?" जैसे ही आदर्श ने यह बात कही, ध्वनि अपनी जगह पर सुन्न पड़ चुकी थी। आदर्श के मुंह से बच्चे का जिक्र सुनकर उसका दिमाग पूरी तरह से घूम चुका था और सांस पूरी तरह से फूलने लगी।

To be continue...

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