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Gandu kahin ka

Hotel Paradise,

अभी और सांवरी का कमरा,

सांवरी अपनी आंखों में आंसू लिए सामने खड़े अभय को देख रही थी, जो अभी-अभी उसके साथ इंटिमेट होने के लिए बोल रहा था, क्योंकि उससे कंट्रोल नहीं हो रहा था। ऊपर से उसे यह भी फर्क नहीं पड़ रहा था कि सांवरी इस वक्त पीरियड में है। इस वक्त सांवरी ही जानती थी कि किस कदर उसके पेट में दर्द हो रहा था। वह अपनी नम आंखों से अभय की तरफ देखते हुए बोली, "हमें दर्द हो रहा है।" तभी अभय उसकी आंखों में आंखें डाल कर घूरते हुए बोला,

"तो इसमें मैं क्या कर सकता हूं, अगर दर्द होता है। सभी औरतों को आती है यह और यह तो होता नहीं है कि हर एक औरत तेरी तरह chudaai ना करने का बहाना करके बैठ जाती है। साली चल कपड़े उतार, मादरचोद, यहां पर मेरा land बाहर पैंट से निकलने को मरे जा रहा है। इसको अपनी भोसड़ी की पड़ी है। चल उतार कुत्तियां कपड़े, ऐसा ना हो कि मैं तेरे कपड़े उतारने पर आऊ और तेरी भोंसड़ी फाड़ के रख दूं।"

अभय की बातें सुनकर सांवरी की आंखों से आंसू तेजी से बहने लगे। वह रोते हुए ना में सिर हिलाकर बोली, "मुझे आज बहुत दर्द हो रहा है। प्लीज, बाबू साहब।" "तेरी बहन की चूत, अब तू मेरे को मना करेगी, अपने पति को मना करेगी तू....।" तभी सांवरी रोते हुए बोली, "मैं आपको मना नहीं कर रही हूं बाबू साहब, बस आज के दिन रुक जाइए।" तभी अभय उसके ऊपर झुकते हुए उसके बालों को मुट्ठी में पकड़ते हुए बोला, "साली मादरचोद, बता तो रहा हूं, उसको कितनी बार तो नीचे बैठा चुका हूं। साला पेंट से निकलने के लिए मरे जा रहा है। उसे तेरी भोंसड़ी नहीं मिलेगी ना तो उसको चैन नहीं आएगा। वो तेरे छोटे से छेद में घुसने के लिए मरे जा रहा है।"

इतना कहते हुए अब वह लगभग से अपने कपड़े पूरी तरह से उतारने लग गया था। उसे यूं कपड़े उतारता हुआ देखकर सांवरी को बहुत ज्यादा बुरा लग रहा था। अभय कोई भी बात ऐसी नहीं होती थी, जहां सावरी को नीचा नहीं दिखाता था। आज तो अभय हद ही कर रहा था। सांवरी को हद से ज्यादा दर्द हो रहा था। लेकिन अभय को जैसे इस चीज से कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था। अब वह पूरी तरह से कपड़े उतार कर उसके सामने खड़ा हुआ। इस वक्त उसका वो हार्ड dick पूरी तरह से रिएक्ट मोड पर था और उसे देखकर सांवरी की सांस सूखने लगी थी। वह इतना तो समझ चुकी थी कि आज अभय जो उसका हश्र करने वाला था,

शायद सांवरी उसे जिंदगी भर नहीं भूलने वाली थी। वह रोते हुए एक बार फिर से अभय की तरफ रिक्वेस्ट भरी नजरों से देखते हुए बोली, "प्लीज बाबू साहब, एक बार मेरी बात सुन लीजिए, मुझे सच में बहुत।" उसने इतना ही कहा था कि तभी अभय उसके बालों को मुट्ठी में भरकर दांत पीसते हो बोला, "तुझे सुनाई नहीं दिया।

चल कपड़े उतार, साली, जब देखो ड्रामा करती रहती है।" इतना कहकर उसने लगभग से जो शर्ट सांवरी ने पहनी हुई थी, वह झटके से फाड़ दी। जिससे सांवरी की अप्पर बॉडी अब अभय के सामने थी। इस वक्त उसने अपनी अप्पर बॉडी के नीचे से कुछ नहीं पहना हुआ था, ब्रा तक नहीं पहनी हुई थी। इस वक्त उसके बूब्स पूरी तरह से अभय के सामने थे। उन्हें देखकर अभय को अपना गला सूखता हुआ महसूस हो रहा था

वह जल्दी से सांवरी के पास आया और अगले ही पल उसने सांवरी को धक्का देकर बेड पर गिराया और पूरी तरह से झुक कर उसकी गर्दन को चूमने लगा साथ ही साथ उसके हाथ सांवरी के boobs पर चल रहे थे। जिस तरह से उसके बूब्स को wildly प्रेस कर रहा था, सांवरी की जान उसके बदन से निकल रही थी। ऐसे ही उसके बूब्स को प्रेस करते हुए अभय अपना चेहरा भी उसके बूब्स की तरफ लेकर आया। अगले ही पल, उसने उसके बूब्स पर अपना चेहरा रख कर दांत उसके बूब्स पर गड़ा दिए। जिससे सांवरी की दर्दनाक चीख उस कमरे में गूंज गई। इस वक्त वह बहुत ज्यादा रो रही थी। लेकिन अभय को तो जैसे इस चीज से लेना देना ही नहीं था। वह लगभग उस पर जैसे हैवानों की तरह टूट पड़ा था।

वहीं दूसरी तरफ,

ध्वनि और आदर्श का कमरा,

आदर्श इस वक्त हैरानी से ध्वनि की तरफ देख रहा था। इस वक्त आदर्श की धड़कने ज्यादा तेज चल रही थी। उसका दिल मानो धड़कने से इनकार कर रहा था। जो अभी-अभी ध्वनि ने कहा था, उसे सुनकर आदर्श की सांस सूखने लगी थी। दूसरी तरफ ध्वनि अब उसकी तरफ उंगली पॉइंट करते हुए बोली, "तुम मुझसे दूर रहो, समझे गांडू कहीं के। जब से तुम मुझे मिले हो, शिवाय तुमने तकलीफ के मुझे दिया ही क्या है?" इतना कहते हुए लगभग से उसकी आंखें बंद होने लगी थी। उसके सिर पर जो नशा चढ़ा हुआ था, अब उस पर हद से ज्यादा हावी हो रहा था।

लगभग से अब वह बेड पर लेटते हुए बोली, "जाओ यहां से यूं गंदा लड़का।" वही आदर्श को तो जैसे ध्वनि की बात ही सुनना बंद हो गई थी। सिर्फ एक ही बात उसके कानों में गूंज रही थी कि ध्वनि एक टाइम पर प्रेग्नेंट हो चुकी थी। मतलब साफ था कि ध्वनि उसके बच्चे की मां भी बनी होगी। वह अपनी जगह पर बैठा बैठा फ्रिज हो चुका था। सोचने समझने की ताकत जैसे खत्म हो चुकी थी।

ध्वनि अब लेटते हुए बोली, "पता नहीं, मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है। जब देखो, मुझे अपनी शक्ल दिखाने आ जाते हैं। बड़ी मुश्किल से तुमसे अपना पीछा छुड़ाया था, आज फिर तुम मेरे ऊपर चढ़ने को आ गए। क्या चाहते हो, दफा हो जाओ।" इतना कहते हुए ध्वनि की आवाज धीमी होने लगी थी। जिससे साफ पता चल रहा था कि ध्वनि गहरी नींद में जाने वाली है। वही आदर्श, जो की साइड पर बैठा हुआ था, वह अभी भी जैसे उस बात में खोया हुआ था। तभी उसे होश आया कि ध्वनि सोने लगी है। इसीलिए वह जल्दी से अपनी जगह से खड़ा हुआ और हड़बड़ा कर ध्वनि के ऊपर आया। वह उसके गालों को थपथपाते हुए बोला, "क्या कहा तुमने, दोबारा बोलो, तुम सिर्फ प्रेगनेंसी, क्या मेरा बेबी अभी भी तुम्हारे पास है?"

लेकिन अब तक ध्वनि पूरी तरह से अपने होशो हवास को चुकी थी। अब उसकी आंखें पूरी तरह से बंद हो चुकी थी, लेकिन आदर्श उसे पूरी तरह से जगाने की कोशिश कर रहा था। पर अब ध्वनि तो जैसे गहरी नींद में जाने लगी थी। लेकिन वह नशा जो उसके सिर पर चढ़ रहा था, वह उसकी बॉडी की डिजायर मांग रहा था। वह अपनी बॉडी को सहलाते हुए बोली, "बताऊंगी, पहले मुझे इरीटेशन हो रही है, इसे ठीक करो।" इतना कहते हुए उसने आदर्श का हाथ पकड़ा और अपनी pussy पर रख लिया। लेकिन आदर्श को तो जैसे इस चीज से कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था। उसे तो बस ध्वनि के मुंह से यह सुनना था कि क्या सच में ध्वनि उसके बच्चे की मां बनी है कि नहीं बनी या फिर उसने उस बच्चे को अबॉट करवा लिया।

वह उसके ऊपर झुकते हुए बोला, "मैं तुम्हारी डिजायर कंप्लीट करुंगा, बट मुझे इस बात का जवाब दो। क्या तुमने बच्चे को जन्म दिया है?" उसकी बात पर ध्वनि, जिसकी आंखें ऊपर की तरफ रोल हो रही थी, वह हां में सिर हिलाते हुए बोली, "हां, मेरा बेबी घर पर है।" जैसे ही उसने यह बात कही, आदर्श की आंखें बड़ी हो गई। पर अब तो उसका दिमाग पूरी तरह से घूम चुका था। हाथ पैर अपनी जगह पर सुन्न हो चुके थे। लेकिन ध्वनि कहां ही रुकने वाली थी। वह अपनी जगह पर खड़ी हुई और उसके कॉलर को पकड़ते हुए बोली, "बस करो ना सवाल करने, प्लीज मुझे सेटिस्फाइड करो।" लेकिन आदर्श एक बार और उससे सवाल पूछते हुए बोला,

"क्या सच में तुमने मेरे बेबी को जन्म दिया है।" उसकी बात पर ध्वनि व्यंग्य से हंसी और बोली, "वह तुम्हारा बच्चा नहीं है, वह सिर्फ मेरा बच्चा है। क्योंकि तुमने शिवाय मुझे दर्द के कुछ नहीं दिया और वह बच्चा, उसने शिवाय सुकून के मुझे कुछ भी नहीं दिया। तुम मेरे बच्चे का नाम अपने होठों से मत लो, गंदे daddy.

जब मेरा बेबी बड़ा होगा ना, मैं साफ बताऊंगी कि तुम्हारा डैडी गांडू था।" उसकी बात सुनकर आदर्श का चेहरा पूरी तरह से काला पड़ गया। अब उसने उसकी गर्दन पर अपने हाथ रखे, जिससे ध्वनि का चेहरा पूरी तरह से कांप उठा। क्योंकि आदर्श ने बहुत जोर से ध्वनि की गर्दन को पकड़ा था। जिससे ध्वनि का चेहरा एक पल के लिए पूरी तरह से ऊपर की तरफ उठ गया था। भले ही वह होश में नहीं थी, लेकिन आदर्श तो होश में था। जिस तरह से उसने उसकी गर्दन पकड़ी हुई थी, साफ पता चल रहा था कि इस वक्त वह कितना ज्यादा गुस्से में है।

वह ध्वनि की तरफ देखते हुए दांत पीसकर बोला, "वह तुम्हारा खून नहीं है, वह सिर्फ मेरा खून है, मेरा बच्चा है। अब तुम देखती जाओ कि मैं उसे तुमसे कैसे छिनता हूं।" इतना कहते हुए आदर्श के चेहरे पर डेविल एक्सप्रेशन आ चुके थे और उसकी आंखें जैसे आग बदल रही थी।

To be continue....

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