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Sach bata dijiye please

राठौर फार्महाउस,

मृत्युंजय की गाड़ी राठौर फार्म हाउस के आगे आकर रुकी। वही धानी गाड़ी में पूरी तरह से छटपटा रही थी। इस वक्त उसे मृत्युंजय पर हद से ज्यादा गुस्सा आ रहा था, क्योंकि मृत्युंजय ने एयरपोर्ट से उसे कंधे पर लादकर गाड़ी में लाकर उसने एक झटके से पटक दिया था। वहां पर जितने भी लोग खड़े थे, वह मृत्युंजय और धानी को देख रहे थे। लेकिन किसी में भी हिम्मत नहीं थी कि मृत्युंजय और धानी को रोक सके। सारे रास्ते धानी पूरी तरह से चिल्लाते हुए आई थी। वह गुस्से से मृत्युंजय की तरफ देखते हुए बोली,

"यह आप ठीक नहीं कर रहे हैं, मिस्टर राठौर, आपने जिस तरह से मुझे वहां से लाए हो, दिस इस नॉट फेयर।" उसकी बात पर मृत्युंजय के चेहरे पर डेविल स्माइल आ चुकी थी। अब वह गहरी आवाज में बोला, "पॉसिबल तो मेरे लिए कुछ भी है, माय डिअर जानू.....।"

उसके मुंह से जानू सुनकर धानी की आंखें बड़ी हो गई, क्योंकि मृत्युंजय शुरू से ही उसे shygirl कहकर पुकारता था। लेकिन आज उसका यह जानू कहना उसे एक अलग ही वाइब दे रहा था। उसका दिल इस वक्त जोरों से धक-धक करने लगा। पूरे रास्ते वह मृत्युंजय से लड़ती आई थी। लेकिन अब जब उसकी नजर सामने फार्म हाउस पर पड़ी, तो उसकी सांसों ने गहरा होना शुरू कर दिया। वह मृत्युंजय को तरफ देखते हुए बोली, "आप मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते, मिस्टर राठौर।" मृत्युंजय भी अपने होठों पर जीभ घूमाते हुए बोला, "करूंगा तो आज मैं बहुत कुछ, और जो करूंगा ना, तुम्हारे होशो हवास उड़ने वाले है।"

इतना कहते हुए वह लगभग से धानी के ऊपर पूरी तरह से झुक चुका था। जिसे महसूस कर धानी के दिल की धड़कनें और भी ज्यादा बढ़ चुकी थी। वही मृत्युंजय अब गाड़ी से बाहर निकला और घूम कर धानी की तरफ आया। जैसे ही मृत्युंजय घूम कर उसकी तरफ आया, तो धानी जल्दी से पीछे सीट पर चली गई। क्योंकि वह मृत्युंजय की गोद में अब नहीं जाना चाहती थी। उसे पता था कि अगर मृत्युंजय ने उसे पकड़ लिया, तो उसे गोद में उठाकर सीधा फार्म हाउस में लेकर जाएगा। यह चीज वह होने नहीं देने वाली थी। इसलिए वह बैक सीट पर चली गई। उसको यू बैक सीट पर जाते हुए देख मृत्युंजय के चेहरे पर डेविल एक्सप्रेशन आ गए। वह से एक बार फिर से डेविल नजरों से देखते हुए बोला, "सोच लो shygirl, मुझे गाड़ी में बैकशीट पर आकर भी वह सब कुछ करने में कोई दिक्कत नहीं है। तुम कहो, तो मैं पूरा तुम्हें अंदर तक फाड़ कर भी रख दूंगा ना, तो भी मुझे गाड़ी में कोई दिक्कत नहीं होगी। मुझे तो प्लेजर ही फील होगा।"

मृत्युंजय की बात सुनकर धानी के रोंगटे खड़े होने लगे थे। अब उसे अपने बैक सीट पर जाने पर पछतावा होने लगा था। इसीलिए वह बाहर निकलने को हुई। लेकिन इससे पहले कि वह दरवाजा खोलकर बाहर निकलती, मृत्युंजय ने गाड़ी को पूरी तरह से लॉक कर दिया। जैसे ही गाड़ी लॉक हुई, धानी के होश पूरी तरह से उड़ गए। वह मृत्युंजय की तरफ देखते हुए बोली, जो कि अब गाड़ी में आकर बैठ चुका था, "यह आप क्या कर रहे हैं, मिस्टर राठौर? दिस इस नॉट फेयर, मुझे गाड़ी से बाहर निकलना है।" तभी मृत्युंजय बोला, "च... च....च.... च....

अब बहुत देर हो चुकी है shygirl, now it's time to a fucking hot sex session in the car." मृत्युंजय की बात सुनकर उसके होश पूरी तरह से उड़ चुके थे। वह अब जल्दी से कोने में लगते हुए बोली, "आप मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते, मिस्टर राठौर, यह गलत बात है। यहां गाड़ी में हमें कोई देख लेगा।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी मृत्युंजय भी बैक सीट पर पहुंच चुका था। मृत्युंजय को यूं बैक सीट पर आता देख धानी की हालत और भी ज्यादा खराब होने लगी। वह लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली, "प्लीज, ऐसा मत कीजिएगा मिस्टर राठौर, यहां पर कोई हमें देख लेगा।" तभी मृत्युंजय उसके होठों पर अपनी उंगली रखते हुए बोला, "तुम्हें लगता है कि मेरे होते हुए यहां पर कोई नजरे भी तुम पर उठा सकता है? आर यू सीरियस, shygirl?"

मृत्युंजय की उंगली अपने होठों पर पाकर धानी के होंठ और भी ज्यादा फड़फड़ाने लगे थे। अब जिस तरह से मृत्युंजय उसके चेहरे पर झुका हुआ था, एक पल के लिए धानी भी अपने होश खोने लगी थी। अनजाने में ही मृत्युंजय की आंखों में देखते हुए उसने ना में सिर हिला दिया। जैसे कह रही हो कि आपके होते हुए तो मुझे कोई देख ही नहीं सकता। उसका यू ना में सिर हिलता देखकर मृत्युंजय की devil स्माइल और भी लंबी हो गई।

एग धानी की आंखों में देखते हुए बोला, "टेक ऑफ योर क्लॉथस, shygirl।" मृत्युंजय की आंखों में खोए हुए ही उसके हाथ अनजाने में ही जैसे अपने कपड़ों पर आ गए। अगले ही पल वह अपनी साड़ी को नीचे की तरफ सरकाने को हुई कि तभी उसकी आंखें बड़ी हो गई कि अभी-अभी वह क्या करने जा रही थी। अब उसने मृत्युंजय को जोरों से धक्का दिया और उसकी तरफ देखकर दांत पीसकर बोली, "बस बहुत हो गया।" धानी का ऐसा रिएक्शन देखकर एक पल के लिए मृत्युंजय भी हैरानी से धानी को देखने लगा।

वही धानी अब लगभग से उसके चेहरे के ऊपर झुकी और गहरी आवाज में बोली, "आप मुझे ऐसे मजबूर नहीं कर सकते। मुझे यहां से जाना है।" उसकी बात पर मृत्युंजय ने अब उसकी कमर पर हाथ रखा और लगभग से उसे गाड़ी की सीट पर लेटाते हुए बोला, "और तुम्हें ऐसा क्यों लगता है कि मैं तुम्हें यहां से जाने दूंगा, shygirl"

उसकी बात सुनकर धानी अपना चेहरा दूसरी तरफ घूमाते हुए बोली, "क्योंकि मैं जाना चाहती हूं।" उसकी बात पर मृत्युंजय भी व्यंग्य से हंसा और बोला, "जैसे कि तुम बोलोगी और मैं तुम्हारी बात मान जाऊंगा। बहुत तड़प लिया मैंने और बहुत तड़पा लिया तुमने, अब बारी है तुम्हें पनिशमेंट देने की।" उसकी बात सुनकर धानी की आंखें बड़ी हो गई।

अगले ही पल मृत्युंजय ने उसकी साड़ी का पल्लू पकड़ा और एक झटके में उसकी साड़ी का पल्लू नीचे की तरफ जमीन पर लुढ़क गया। वहीं धानी अपने सीने पर हाथ रखते हुए बोली, "this is ridiculous Mr Rathore, क्या आप पर यह चीज शोभा देती है, जो आप कर रहे हैं। आपको अच्छा लग रहा है, जो आप कर रहे हैं।" तभी मृत्युंजय उसकी आंखों में देखते हुए बोला, "सुकून मिल रहा है मुझे, क्योंकि आज मैं तुम्हारी एक भी नहीं सुनूंगा। तुमने जो गलती आज की है ना, उसकी सजा तुम्हें मिलनी बनती है और today I gonna so wild and harsh to you and you can't stop me."

मृत्युंजय की बात सुनकर धानी के रोंगटे खड़े हो गए। एक पल के लिए उसे ऐसा लगा, जैसे उसकी जान ही मृत्युंजय ने अपने हाथों में भींच ली हो। अगले ही पल, मृत्युंजय ने अपने होंठ उसकी गर्दन पर रख दिए और उसकी गर्दन को चूमने लगा।

जिससे धानी की सांस और भी गहरी होती चली जा रही थी। उसे ऐसा लग रहा था, जैसे मृत्युंजय उसके बदन पर कहर ढा रहा था। अब उसकी आंखों में नमी उतर आई थी। वह अपनी धीमी, लेकिन लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली, "प्लीज मिस्टर राठौर, बंद कर दीजिए यह सब कुछ, क्या मिल जाएगा आपको ऐसा करके।" धानी की रोती हुई आवाज सुनकर मृत्युंजय जो उसके गले पर किस कर रहा था, उसके होंठ वहीं पर रुक गए। अब उसने उसकी गर्दन में से चेहरा निकाल कर उसके चेहरे को देखा, तो इस वक्त धानी की आंखों से आंसू तेजी से बह रहे थे और उसके आंसू गाड़ी की सीट पर गिर रहे थे।

उसके वह आंसू देखकर मृत्युंजय को अपना दिल जलता हुआ महसूस हो रहा था। अब वह उसके चेहरे के पास आया और उसकी आंखों में देखते हुए बोला, "अगर मैं तुम्हारे पास आया, तो क्या तुम्हें हर्ट होगा?" उसकी बात पर धानी ने अपना चेहरा दूसरी तरफ ही घुमाते हुए कहा, "हां, बहुत होगा।" उसकी बात पर मृत्युंजय अब व्यंग्य भरी मुस्कराहट के साथ बोला, "यही बात तुम मेरी आंखों में देखकर कहो, तो मैं अभी के अभी तुम्हारे ऊपर से उठ जाऊंगा। आई swear, मैं कभी तुम्हारे पास नहीं आऊंगा।"

मृत्युंजय की बात सुनकर धानी का दिल जोरो से धक-धक करने लगा। एक पल के लिए उसे ऐसा लगा, जैसे मृत्युंजय ने उसकी धड़कन अपने हाथों में पकड़ कर रोक दी हो। दूसरे ही पल उसकी सांस रुकती हुई महसूस होने लगी थी। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर वह करें क्या। अगर वह मृत्युंजय की आंखों में देखती, तो वह कभी भी झूठ नहीं बोल पाती। अगर ऐसे ही चेहरा दूसरी तरफ घुमाए रखती, तो मृत्युंजय को पूरा यकीन हो जाता कि धानी इस वक्त झूठ बोल रही है।

ना चाहते हुए भी धानी ने अपना चेहरा उसकी तरफ घुमाया और धीरे-धीरे कर उसने अपनी आंखें मृत्युंजय की आंखों से मिलाई। जैसे ही उसकी नज़रें मृत्युंजय से मिली, एक पल के लिए धानी का दिल धक सा रह गया। क्योंकि मृत्युंजय की आंखों में नमी ने विकराल रूप ले लिया था। आज पहली बार धानी ने उसकी आंखों को यू नम होते देखा था। इससे पहले भी उसने सिर्फ एक बार यह चीज महसूस की थी, जब धानी ने कुछ नहीं खाया था। तब उसकी आंखों से आंसू उसके गाल पर गिरा था। आज उसकी आंखों में नमी देखकर धानी का दिल तड़प उठा था। वह रोते हुए बोली, "अगर इतनी ही तकलीफ होती है मेरे दूर जाने से, तो सच क्यों नहीं बता देते। सच तो मैं भी जानती हूं कि आपका उस लड़की के साथ कोई संबंध नहीं।

तो बता दीजिए ना, आखिर क्यों है उसके साथ संबंध में और वह वीडियो, उस वीडियो पर भी मुझे यकीन नहीं है। बट मुझे उसके पीछे की रियलिटी नहीं पता। आप अपने मुंह से भी तो नहीं बता रहे हैं।" धानी के लिए अपना विश्वास देखकर एक पल के लिए मृत्युंजय पूरी तरह से हैरान रह गया था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर वह धानी को कहे क्या।

लेकिन अब वह उसके चेहरे पर झुका और बिना कोई सवाल का जवाब दिए अब उसके होंठों में अपने होंठ फसाते हुए लगभग से उसे चूमने लगा था। वही धानी भी उसकी इस हरकत से हैरान रह गई थी। जहां वो सवाल कर रही थी, वहां मृत्युंजय उसे पागलों की तरह चूमने लगा था। जबकि वह चाहती थी कि मृत्युंजय उसके सवालों का जवाब दे। लेकिन अभी वह भी पीछे नहीं हुई। उसने भी मृत्युंजय के गालों को अपने हाथों में थामा और पागलों की तरह चूमने लगी। अब अपनी जगह से उठते हुए ही उसने मृत्युंजय को पीछे की तरफ धकेलना शुरू किया। जिससे मृत्युंजय पूरी तरह से कार की सीट पर लेट चुका था। अब धानी पूरी तरह से उसकी कमर पर बैठी हुई थी। वह उसे पागलों की तरह चूम रही थी। उसके हाथ अब मृत्युंजय की शर्ट पर आ चुके थे। लगभग से उसके शर्ट के बटन को खींचते हुए उसने पूरी तरह से तोड़ दिया और उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोली, "आज आपको मेरी सवालों का जवाब देना होगा " इतनी बात वह मन में सोचते हुए उसकी चेस्ट पर झुकी। अब वह अपने तपते हुए होठों से उसकी चेस्ट को चूमने लगी, जिससे मृत्युंजय की बेचैनियां दूर होने लगी। लेकिन उसकी आंखों के सामने इस वक्त

कुछ और ही चल रहा था। वह था रूपाली का चेहरा। लेकिन वह उन चीजों को दरकिनार कर धानी के प्यार को महसूस करने लगा। वही धानी लगातार अपने होठों को उसकी चेस्ट पर घुमाते हुए लगभग से उसके पेट पर आ चुकी थी।

जैसे-जैसे वह उसके एप्स पर बढ़ रही थी, वैसे-वैसे मृत्युंजय की सांस गहरी होने लगी थी। अब अगले ही पल उसने उसकी पेंट का बटन खोला, तो एक पल के लिए मृत्युंजय की सांस जैसे रुक सी गई। उसकी नज़रें अब धानी पर गहरी हो गई।

वही धानी ने अपना लोअर लिप अंदर की तरफ दबाया और अगले ही पल उसने उसकी पैंट की जीप खोली, तो उसका लॉन्ग thick dick धानी के होठों पर आकर लगा।

To be continue....

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