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तवायफ

अस्पताल में,

इस वक्त असुर कनिका के पूरी तरह से ऊपर झुका हुआ था और दोनों के होंठ आपस में जुड़े हुए थे। हालांकि दोनों ही किस तो बिल्कुल भी नहीं कर रहे थे, लेकिन उनके होंठ इतनी पास थे कि दोनों को अपनी गर्म सांसे आपस में जलती हुई महसूस हो रही थी। लेकिन अभी-अभी जो असुर ने कनिका से पूछा था, उसे सुनकर कनिका का दिल धक से रह गया था। उसे ऐसा लग रहा था, जैसे एक पल के लिए उसने कुछ गलत सुन लिया हो। वही असुर उसे अपनी गहरी आवाज में बोला, "सुहानी ने तुम्हें क्या धमकी दी है?" उसकी इस बात पर कनिका की सांस गहरी होनी शुरू हो गई थी। अगले ही पल, उसने अपना चेहरा दूसरी तरफ फेरने की कोशिश की, लेकिन असुर ने उसे उसका चेहरा दूसरी तरफ फेरने नहीं दिया। वह उसके गाल पर हाथ रखते हुए लगभग से उसकी आंखों में देखकर बोला, "मुझे मेरी बात का जवाब आज चाहिए।

अगर तुमने मेरी बात का जवाब नहीं दिया, तो आई swear आज के बाद मैं तुम्हें छोड़कर चला जाऊंगा और कभी लौटकर तुम्हारी जिंदगी में वापस नहीं आऊंगा, यह बात याद रखना, कनिका...।"

असुर की बात सुनकर कनिका का दिल जैसे धड़कन ही छोड़ गया और उसकी आंखों में लगभग से आंसू आने लगे। वह शिकायती नजरों से असुर की तरफ देखते हुए बोली, "आप मुझे ऐसे फोर्स नहीं कर सकते, असुर बाबू, यह गलत बात होती है। किसी पर अपना प्रेशर बनाकर रखना बहुत गलत बात होती है और आप जो कर रहे हैं, यह जबरदस्ती है।" उसकी बात पर असुर का चेहरा पूरी तरह से सख्त पड़ चुका था। वह गुस्से में दांत पीसकर बोला, "अगर यह प्रेशर डालना होता है, तो I don't give a damn care of anyone. मुझे आज मेरे सवालों के जवाब चाहिए, सच-सच बताओ।

सुहानी ने तुम्हें किस चीज के लिए ब्लैकमेल किया था? मैं तुम्हारे मुंह से सुनना चाहता हूं।" उसकी बात पर कनिका ने अपनी आंखों में नमी लिए अपना चेहरा पूरी तरह से नीचे की तरफ झुका लिया था। इस वक्त वही जानती थी कि उसे कितनी तकलीफ हो रही है। चाहते हुए भी वह कुछ बोल नहीं पा रही थी। उसकी आंखों के सामने एक बार फिर से एक लड़की का चेहरा घूम रहा था। वह मासूम सी लड़की, जिसकी उम्र महज 15 साल की लग रही थी।

उसे याद करते हुए ही कनिका के आंखों से आंसू झर झर बहने लगे। वह अपना चेहरा दूसरी तरफ घूमाते हुए बोली, "मैं नहीं बता सकती हूं, असुर बाबू, आप क्यों नहीं समझने की कोशिश कर रही हो।" तभी असुर ने उसके बालों को मुट्ठी में भरा और उसका चेहरा अपनी तरफ घूमाते हुए दांत पीसकर उसके गालों को पूरी तरह से अपनी उंगलियों में भींचते हुए बोला, "तुम्हें बताना होगा, कनिका...।"

वही कनिका रोते हुए ना में सिर हिला कर बोली, "प्लीज, प्लीज असुर बाबू, प्लीज, क्यों आप मुझे मजबूर कर रहे हैं। ना मैं आपको खोना चाहती हूं और ना मैं।" इतना कहते हुए वह चुप हो गई। लेकिन असुर की नजरे अब उस पर गहरी हो चुकी थी। वह उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोला, "इससे पहले की देर हो जाए और मैं तुम्हारे उस अपने को बचा ना पाऊं, तुम्हें बोलना होगा। अगर आज तुम मेरे आगे सच बोलती हो, तो क्या पता, मैं तुम्हारे उस अपने को बचा लूं।" असुर की बात सुनकर कनिका का दिल और भी तेजी से धड़कने लगा। उसके माथे पर पसीने की बूंदे उभरने लगी। अब उसके माथे पर पसीने की बूंदे उभरने लगी और देखते ही देखते वह ब्लैंकेट को पूरी तरह से मुट्ठी में भरने लगी। जिस तरह से उसके चेहरे पर पसीने की बूंदे आ रही थी और देखते ही देखते उसका पूरा चेहरा लाल पड़ने लगा था। उसे देखकर असुर की आंखें बड़ी हो चुकी थी, क्योंकि कनिका की सांस भी हद से ज्यादा गहरी चलने लगी थी। ऐसा लग रहा था, जैसे एक पल के लिए उसे सांस आना ही बंद हो गई हो।

कनिका का रिएक्शन देखकर असुर का दिल धक सा रह गया था। अब वह जल्दी से बाहर की तरफ दौड़ा और उसने डॉक्टर को आवाज़ लगाई। "डॉक्टर, डॉक्टर, प्लीज जल्दी आइए।" इतना कहते हुए वह खुद भी जैसे ठंडा पड़ने लगा था। आज पहली बार कनिका को इस तरह की हालत में देखकर असुर को कुछ-कुछ होने लगा था। असुर की आवाज सुनकर डॉक्टर जल्दी से अपने केबिन से दौड़ते हुए असुर की तरफ आए। वह उसकी तरफ देखते हुए बोले, "क्या हुआ, मिस्टर पठानी?" अभी उसने इतना ही कहा था कि तभी डॉक्टर की नजर अंदर बेड पर पैनिक कर रही कनिका पर गई। जिसकी हालत अब खराब होने लग गई थी। उसको यू पैनिक करता हुआ देख डॉक्टर हैरानी से असुर की तरफ देखने लगा। वही असुर जल्दी से उसके गिरेबान को पकड़ते हुए बोला, "जल्दी कर, देखे क्या जा रहा है मुंह मेरा, जल्दी देखो, उसे क्या हुआ है?" इतना कहते हुए लगभग से उसे खींचते हुए अंदर की तरफ लेकर आया।

अब असुर को खुद पर ही गुस्सा आ रहा था कि आखिर क्यों उसने कनिका से इतनी बात पूछी। क्योंकि वह जानता था कि कहीं ना कहीं कनिका उसे कुछ भी नहीं बताएगी। ऊपर से उसने यह शर्त रख दी कि वह असुर को खो देगी। जिस वजह से उसके दिमाग पर प्रेशर बन गया और अब उसकी यह हालत थी। कनिका की ऐसी हालत होते देखकर असुर का गुस्सा अब और भी ज्यादा बढ़ने लगा था। उसका दिल कर रहा था कि वह इस पूरी दुनिया को जला दे। लेकिन फिलहाल के लिए वैसा कुछ भी नहीं कर सकता था, क्योंकि उसे कनिका के ठीक होने का इंतजार था। अब उसने ठान लिया था कि जब तक कनिका ठीक नहीं हो जाती, वह अपनी तरफ से कोई भी मूव नहीं लेगा। सिर्फ चुपचाप रहकर उस शख्स को ढूंढेगा, जोकि कनिका की कमजोरी था।

लेकिन जो प्लान अब उसने बनाया था, उसे तो इन 2 दिन में उसे एग्जीक्यूट करना ही था। वह प्लान उसने अमानत के साथ मिलकर बनाया था और क्या था यह प्लान, यह तो आने वाला वक्त ही बताने वाला था। डॉक्टर जोकि कनिका को ट्रीटमेंट दे रहे थे, उन्होंने कुछ देर बाद कनिका को इंजेक्शन लगाया और असुर की तरफ देखते हुए बोले, "मिस्टर पठानी, मिस पठानी की हालत बहुत ज्यादा नाजुक है। सो प्लीज, उस पर ज्यादा प्रेशर मत डालिए और कोई भी बात उनके सामने ऐसी मत कीजिए, जिससे वह पैनिक करने लगे। इनको आज पैनिक अटैक आया है, जिससे इनकी हालात और भी ज्यादा खराब हो सकती है।"

उसकी बात पर अब असुर डॉक्टर की तरफ देखते हुए बोला, "यह कितनी देर में होश में आएगी?' डॉक्टर अब उसकी तरफ देखकर गहरी सांस लेते हुए बोले, "कुछ कहा नहीं जा सकता है कि अब इन्हें कब होश आएगा। बिकॉज, जिस तरह से यह पैनिक कर रही थी, इट्स नॉट नॉरमल। उनकी पूरी बॉडी शिवर कर रही थी और पूरी बॉडी पसीने से भर चुकी थी। उन्हें देखकर ही ऐसा लग रहा था कि किस कदर इन्होंने अपने दिमाग पर डिप्रेशन ले लिया था। सो प्लीज, आपसे दोबारा कहना चाहूंगा कि इन्हें कोई भी बात ऐसी मत कीजिए। नहीं तो यह दोबारा से उस पैनिक अटैक का शिकार हो सकती है। उस पैनिक अटैक से उनकी जान भी चली जा सकती है। सो, प्लीज बे केयरफुल।" उसने इतना ही कहा था कि तभी असुर ने उसके गर्दन पकड़ते हुए दांत पीसकर कहा, "अपनी बकवास अपने पास रख, समझा। अगर इसे कुछ भी हुआ, छोटी सी भी खरोंच आई, तो मैं तुझे यहीं पर जिंदा जला कर राख कर दूंगा। तेरा यह हॉस्पिटल कहीं नजर नहीं आएगा अगले दिन।"

इतना कहते हुए असुर ने पूरी तरह से दांत पीस लिए थे। दूसरी तरफ असुर की बात सुनकर डॉक्टर पूरी तरह से कांप उठा था। उसकी पूरी बॉडी शिवर करने लगी थी। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर वह असुर से कहे क्या और ऊपर से जिस तरह से असुर ने उसकी गर्दन को पकड़ रखा था, वह इस वक्त किसी साइको से कम नहीं लग रहा था। असुर के इस तरह से उसकी गर्दन पकड़ने की वजह से डॉक्टर को सांस बिल्कुल भी नहीं आ रही थी। उसे अपनी गर्दन में हद से ज्यादा दर्द हो रहा था। जिस वजह से डॉक्टर का चेहरा भी लाल पड़ने लगा था। वह कुछ बोलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन असुर था कि उसकी गर्दन को छोड़ ही नहीं रहा था। लेकिन अब असुर ने एकदम से उसकी गर्दन को छोड़ा, तो डॉक्टर की खांस-खांसकर बुरी हालत हो गई थी। वह लड़खड़ाती हुई आवाज में बोले, "आई एम सो सॉरी मिस्टर पठानी, बट आज के बाद मैं ऐसा कुछ भी नहीं कहूंगा।" इतना कहकर वह लगभग से वहां से भागते हुए बाहर की तरफ चला गया। क्योंकि बहुत मुश्किल से डॉक्टर ने खुद को संभाला था। दूसरी तरफ असुर अब गुस्से से कांपते हुए पास में ही लेटी हुई कनिका को देख रहा था। क्योंकि कनिका ने उसकी बातों का जवाब तो दिया ही नहीं था। जिससे अब असुर का दिमाग पूरी तरह से घूम चुका था।

उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर कनिका के मुंह से सच्चाई कैसे उगलवाए। अब वह अपने सिर पर हाथ रखते हुए वहीं कनिका के पास बैठ चुका था। उसे अपने प्लान को अंजाम देना था, जिसके लिए कनिका का होश में आना बहुत ज्यादा जरूरी था।

वहीं दूसरी तरफ,

अमानत इस वक्त रूम में बैठा न्यूजपेपर पढ़ रहा था और उसकी गहरी नजरे इस वक्त बेड पर बैठी हुई अफसाना पर थी, जोकि सामने टीवी की तरफ देख रही थी। न जाने क्यों अमानत इस तरह से अफसाना को देख रहा था। अफसाना को भी अमानत की गहरी नजरे खुद पर महसूस हो रही थी, जो कि वह खुद बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। हार कर वह अपनी जगह से उठी और अपने हाथों में पकड़ा हुआ रिमोट साइड पर रखते हुए जल्दी से आकर अमानत की गोद में बैठ गई। वह उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोली, "आखिर ऐसे क्यों देख रहे हैं आप, कब से मैं देख रही हूं कि आप मुझे ही देख रहे है। अब ना मुझे आपकी यह गहरी नजर खुद पर बर्दाश्त नहीं हो रही है। अब सच-सच बताइए कि आपके दिमाग में क्या चल रहा है।"

तभी अमानत, जो कि उसे कब से गहरी नजरों से देख रहा था, उसकी नजर अब अफसाना के सीने पर गई। जहां पर से उसके क्लीवेज साफ दिखाई दे रहे थे। उन्हें देखते हुए अमानत का दिल तेजी से धड़कने लगा। वह अब अपने होठों को अंदर की तरफ दबाते हुए बोला, "मेरा कुछ करने का मन कर रहा है। इसलिए मैं तुम्हें ऐसे देख रहा हूं।" उसकी बात पर अफसाना का चेहरा पूरी तरह से लाल पड़ गया। वह अपना चेहरा दूसरी तरफ घूमाते हुए बोली, "आप भी ना, बस छोटी-छोटी बात पर।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी अमानत ने उसे गोद में उठाया और लगभग से उसे बेड पर पटकते हुए बोला, "जब दिल है, तो है। अब क्या ही कह सकता हूं।" इतना कहकर वह अपनी कुर्ते को अपने बदन से अलग करने लगा। अब अफसाना पर उसकी नज़रें और भी गहरी होनी शुरू हो गई थी।

उसको यूं देखकर अफसाना का दिल और भी तेजी से धक-धक करने लगा। वह अपने कदम पीछे की तरफ लेते हुए अपने होठों को अंदर की तरफ दबाते हुए बोली, "आज मेरा मूड नहीं है ऐसा कुछ करने का।" उसकी बात पर अमानत भी अपने लोअर लिप को अंदर की तरफ दबाते हुए बोला, "अगर मैं कहूं कि तुम्हारा मूड मेरे लिए मैटर नहीं करता, तो।" उसकी बात पर अफसाना इंटेंस नजरों से देखते हुए बोली, "ऐसा हो ही नहीं सकता, बिकॉज मुझे आप पर बहुत भरोसा है कि अगर मेरा मूड ना हो, तो आप मुझे टच भी नहीं करेंगे।" उसकी बात पर अमानत की नजरे उस पर और भी गहरी हो गई। वह बेहद गहरी आवाज में बोला, "इतना भरोसा है मुझ पर।" उसकी बात पर अफसाना इतराते हुए बोली, "खुद से भी ज्यादा।"

उसकी बात सुनकर अमानत अब गहरी आवाज में बोला, "तो एक बात सच-सच बताओ।" उसकी बात पर अफसाना ने अपनी दोनों कलाइयां उसकी गर्दन में डाली और बोली, "बताइए ना, सब कुछ तो बता दिया मैंने आपको और अब तो आपके लिए जान देनी बाकी रह गई है।" उसकी बात पर अमानत ने उसे गोद में बिठाया। इस वक्त उसके दोनों पैर अमानत की कमर से लिपट चुके थे। वही अमानत ने अब उसकी गर्दन पर होंठ रखते हुए बड़े प्यार से उसकी गर्दन को चूमते हुए जो कहा, उसे सुनकर अफसाना के होश पूरी तरह से उड़ चुके थे। क्योंकि अमानत ने अभी-अभी उससे पूछा था, "क्या तुम पहले कोठी में तवायफ थी।"

और तवायफ का जिक्र सुनते ही अफसाना का रंग पूरी तरह से उड़ गया और उसका दिल धक से रह गया।

To be continue...

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